क्या आपके मोबाइल फ़ोन पर भी आया था अलर्ट, जानिए यह कैसे काम करता है

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शनिवार को दोपहर 12 बजे से ठीक पहले भारत में कई लोगों के फ़ोन में एक अलर्ट के साथ सायरन बजने लगा. इस दौरान लोगों के फ़ोन में वाइब्रेशन भी होने लगा.

कुछ लोगों के लिए फ़ोन में अचानक हुई यह हलचल डराने वाली थी. लेकिन इसके ठीक बाद एक सूचना आई कि ये सरकारी स्तर पर किया गया एक टेस्ट (ट्रायल) था और फ़िलहाल ऐसे अलर्ट के बाद लोगों को कुछ नहीं करना है.

इसका मक़सद भी यह जानना था कि जिन लोगों तक इस तरह के मैसेज भेजने हैं, उनके पास सफलता के साथ ये मैसेज पहुंचते हैं या नहीं.

दरअसल भारत में नेशनल डिज़ास्टर मैनेजमैंट अथॉरिटी और टेलीकम्युनिकेशन विभाग ने मिलकर एक नई सेवा शुरू की है. इसका मक़सद लोगों को मोबाइल फ़ोन के ज़रिए फ़ौरन ही किसी इमरजेंसी की सूचना देना है.

केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया, "एनडीएमए के साथ मिलकर दूरसंचार विभाग ने सी-डॉट के ज़रिए एक सेल ब्रॉडकास्टिंग सॉल्युशन की शुरुआत की है. जब कभी देश में कहीं भी कोई आपदा आए तो लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई यह स्वदेशी तकनीक है जो 21 भाषाओं में लोगों तक मैसेज भेज सकती है."

उन्होंने कहा, "इससे हिमालय की पहाड़ियों से लेकर समुद्र के तट और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों तक हर जगह, हर गांव और क़स्बे तक लोगों की जान और माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह सुविधा बहुत ही उपयोगी रहेगी."

इस तरह के अलर्ट मिलने के बाद लोगों को किसी भी इमरजेंसी की सूचना फ़ौरन ही मिल जाएगी और वो इसके मुताबिक़ अगला क़दम उठा सकते हैं, या इससे जुड़े संबंधित निर्देशों का पालन कर सकते हैं.

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया, "यह सिस्टम 2जी से लेकर 5जी तक सभी टावर का इस्तेमाल करता है और सभी टेलीकॉम ऑपरेटर इसका इस्तेमाल कर सकेंगे. हमें यकीन है कि यह हर आम लोगों और एनडीआरएफ़ की टीम जो इमरजेंसी के हालात में लोगों की जान बचाने का काम करती है, उनके लिए उपयोगी रहेगा."

सरकार ने क्या बताया है

29 अप्रैल को केंद्र सरकार ने बताया कि लोगों तक फ़ौरन ही आपदा से जुड़े संदेश भेजने के लिए स्वदेशी सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम की टेस्टिंग चल रही है.

यह टेस्ट मैसेज मोबाइल फ़ोन पर इंग्लिश, हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में मिल सकते हैं. इस तरह के मैसेज रिसीव करने वालों से आग्रह किया गया कि वे टेस्टिंग के दौरान मिलने वाले अलर्ट को लेकर कोई एक्शन न लें, यानी कोई कदम न उठाएं.

पीआईबी के मुताबिक़, डिपार्टमेंट ऑफ़ टेलीकम्युनिकेशंस, दूरसंचार मंत्रालय और नेशनल डिज़ास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी, भारत सरकार के साथ मिलकर देश भर में मोबाइल आधारित डिज़ास्टर कम्युनिकेशन सिस्टम को बेहतर बना रहा है.

इसका मक़सद आम लोगों तक समय पर ज़रूरी जानकारी पहुँचाना है.

एनडीएमए ने सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ़ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) के साथ मिलकर इस सिस्टम को डेवलप किया है.

सी-डॉट दूरसंचार विभाग का सबसे बड़ा रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर है.

सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम क्या है?

पीआईबी के मुताबिक़ इंटीग्रेटेड अलर्ट सिस्टम (एसएसीएचईटी) को सफलतापूर्वक शुरू कर दिया गया है.

यह भारत के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में काम कर रहा है और भौगोलिक आधार पर अलग-अलग इलाक़ों में मोबाइल यूज़र्स को एसएमएस के ज़रिए आपदा और इमरजेंसी से जुड़े अलर्ट भेज सकता है.

अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू के मुताबिक़ शनिवार 2 मई को दिल्ली-एनसीआर, हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानी में यह टेस्ट मैसेज भेजा गया. हालाँकि सीमावर्ती राज्यों और चुनावी राज्यों को इससे बाहर रखा गया.

फ़ोन पर मिलने वाले सामान्य टेस्ट मैसेज से अलग सेल ब्रॉडकास्ट मैसेज को किसी ख़ास भौगोलिक इलाक़े में हर मोबाइल फ़ोन तक एक साथ भेजा जा सकता है.

इस तरह के मैसेज का इस्तेमाल सरकारी एजेंसियों की तरफ से लोगों को चेतावनी वाले मैसेज भेजने के लिए किया जाता है. इसके साथ ही सेल ब्रॉडकास्ट के ज़रिए लोगों तक फ़ौरन ही कोई अहम सूचना भी पहुँचाई जाती है.

यह कैसे काम करता है?

इमरजेंसी मैसेज भेजने का यह सिस्टम सीएपी (कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल) के आधार पर काम करता है. केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया है कि इसका सुझाव इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेश यूनियन की तरफ से दिया गया है.

यह सिस्टम अब भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू हो चुका है.

इसके ज़रिए ख़ास जगहों पर लोगों को किसी भी आपातकालीन स्थिति की सूचना भेजी जा सकती है.

मसलन भूकंप, बाढ़, आंधी-तूफ़ान या युद्ध जैसे हालात में लोगों को इमरजेंसी की सूचना भेजकर उन्हें सतर्क किया जा सकता है.

सरकार के मुताबिक़ लोगों को इमरजेंसी की सूचना मैसेज के ज़रिए पहले से ही भेजी जाती रही है, लेकिन इसे बेहतर करने के लिए अब मोबाइल पर मैसेज भेजने के साथ ही यह (अलर्ट) नई शुरुआत की गई है.

इसका उपयोग अत्यधिक अहम और फ़ौरी आपातकालीन ख़तरे की सूचना के लिए किया जाता है. इनमें भूकंप, सुनामी, बिजली गिरना, गैस लीक होना, केमिकल हेज़ार्ड्स वगैरह का ख़तरा शामिल है.

इस तरह के इमरजेंसी मैसेज केवल उन्हीं मोबाइल सेट को रिसीव होते हैं, जिनमें सेल ब्रॉडकास्ट टेस्ट चैनल को ऑन या इनेबल रखा जाता है. इसलिए अगर आपको यह मैसेज नहीं मिला है तो अपने फ़ोन की सेटिंग्स को बदलकर इसे एक्टिव कर सकते हैं.

इसके लिए फ़ोन की सेटिंग्स में जाएं- फिर सेफ़्टी एंड इमरजेंसी ऑप्शन को खोलें- इसके बाद वायरलेस इमरजेंसी अलर्ट्स में जाएं और फिर टेस्ट अलर्ट्स में जाकर इसकी सेटिंग्स को बदलें.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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