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लाइव, ईरानी अधिकारी का दावा, 'अमेरिका के साथ फिर टकराव हो सकता है'

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के ख़ातम अल अनबिया सेंट्रल सेंट्रल हेडक्वार्टर से जुड़े एक अधिकारी ने कहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच फिर से टकराव हो सकता है.

सारांश

लाइव कवरेज

रौनक भैड़ा

  1. ईरानी अधिकारी का दावा, 'अमेरिका के साथ फिर टकराव हो सकता है'

    ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के ख़ातम अल अनबिया सेंट्रल सेंट्रल हेडक्वार्टर से जुड़े एक अधिकारी ने कहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच फिर से टकराव हो सकता है.

    डिप्टी इंस्पेक्टर मोहम्मद जाफ़र ने कहा, "सबूत यह भी दिखाते हैं कि अमेरिका किसी वादे या समझौते का पालन नहीं करता."

    जाफ़र ने कहा, "अमेरिका के ज़्यादातर काम और बयान मीडिया से जुड़े होते हैं. उनका पहला मक़सद तेल की कीमतों को गिरने से रोकना है. दूसरा मक़सद उन मुश्किलों से निकलना है जो उन्होंने ख़ुद बनाई है."

    जाफ़र ने आगे कहा कि ईरान की सेना किसी भी संभावित हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है.

    गौरतलब है कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम को लगभग तीन हफ़्ते हो चुके हैं. भले फ़िलहाल युद्ध रुका हुआ हो, लेकिन होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर हालात अब भी तनावपूर्ण हैं.

  2. मोबाइल पर आए इमरजेंसी अलर्ट का क्या मतलब, सरकार ने बताया

    भारत में आज सुबह कई लोगों के स्मार्टफ़ोन पर अचानक तेज़ आवाज़ के साथ इमरजेंसी अलर्ट आया. इसमें भारत सरकार की ओर से भेजा गया एक आधिकारिक टेस्ट मैसेज था.

    सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य परीक्षण करना है, ताकि लोगों के फ़ोन पर सीधे और लगभग रियल टाइम में इमरजेंसी अलर्ट पहुंचाना है.

    दूरसंचार विभाग ने एक्स पोस्ट में बताया, "अगर आपके फ़ोन पर अलर्ट मैसेज आए, घबराएं नहीं. यह इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम की टेस्टिंग का हिस्सा है, ताकि आपदा के समय सही जानकारी समय पर मिल सके. टेस्टिंग के दौरान यह संदेश बार-बार आ सकता है. इसे अनदेखा करें, आपको कुछ करने की ज़रूरत नहीं है."

    भारत सरकार की ओर से मोबाइल पर मिले अलर्ट में लिखा था, "भारत ने स्वदेशी तकनीक का उपयोग करते हुए सेल ब्रॉडकास्ट सेवा शुरू की है, जिससे नागरिकों को आपदा की तत्काल सूचना मिल सकेगी. सतर्क नागरिक, सुरक्षित राष्ट्र."

    मैसेज में लिखा था, "इस संदेश को प्राप्त करने पर जनता को कोई कार्रवाई करने की आवश्यकता नहीं है. यह एक परीक्षण संदेश है."

    इससे पहले शुक्रवार को नेशनल डिज़ास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी की ओर से भी एक एसएमएस भेजा गया था. इसमें बताया गया था कि 2 मई को 'सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट' का परीक्षण होगा.

    संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक्स पर लिखा, "भविष्य में इसी सिस्टम के जरिए किसी आपदा या इमरजेंसी की स्थिति में लोकेशन और स्थानीय भाषा के अनुसार तुरंत अलर्ट भेजे जा सकेंगे. यह पहल नागरिकों की सुरक्षा को और मजबूत करने और आपदा के समय तेजी से जानकारी पहुंचाने की दिशा में एक अहम कदम है."

  3. पश्चिम बंगाल में मतगणना को लेकर टीएमसी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का आया फ़ैसला

    भारत के निर्वाचन आयोग ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में मतगणना के पर्यवेक्षकों की नियुक्ति से जुड़ी सर्कुलर का पालन करेगा.

    बार एंड बेंच के मुताबिक़, निर्वाचन आयोग की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट दामा शेषाद्रि नायडू ने कहा कि 4 मई को वोटों की गिनती राज्य सरकार के प्रतिनिधि की मौजूदगी में होगी.

    दरअसल जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जॉयमाल्या बाग़ची की बेंच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मुख्य निर्वाचन अधिकारी के फ़ैसले को चुनौती दी गई थी.

    इस फ़ैसले में केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों को वोट गिनती पर्यवेक्षक बनाने का आदेश दिया गया था.

    निर्वाचन आयोग का पक्ष जानने के बाद कोर्ट ने टीएमसी की अपील पर कोई आदेश देने से इनकार कर दिया, जो कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ दायर की गई थी.

    कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, "एसएलपी में और आदेश की ज़रूरत नहीं है. हम नायडू की बात दर्ज करते हैं कि निर्वाचन आयोग का सर्कुलर पूरी तरह पालन किया जाएगा."

    गौरतलब है कि यह मामला तुरंत सुना गया क्योंकि वोटों की गिनती 4 मई को होनी है.

    यह याचिका कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ दायर की गई थी, जिसने गुरुवार को टीएमसी की याचिका ख़ारिज कर दी थी.

  4. कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ने पर क्या बोले केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी

    कॉमर्शियल सिलेंडर की क़ीमतों में बढ़ोतरी होने पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा है कि यह 'अंतरराष्ट्रीय समस्या' है.

    दरअसल, शुक्रवार को 19 किलो के कॉमर्शियल सिलेंडर की क़ीमत में 993 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. हालांकि, घरेलू सिलिंडर की क़ीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है.

    क़ीमतों में बढ़ोतरी के बाद प्रह्लाद जोशी ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से कहा, "हमारी एलपीजी की 50% से ज़्यादा ज़रूरत आयात पर निर्भर है. मुश्किलों के बावजूद मोदी सरकार ने पेट्रोल, डीज़ल, घरेलू एलपीजी और एलएनजी की क़ीमतें संभालकर रखी हैं."

    उन्होंने आगे कहा, "लेकिन यह होना ही था क्योंकि कंपनियां बहुत नुकसान झेल रही हैं. इसी वजह से ऐसा (क़ीमतों में वृद्धि) हुआ."

    विपक्ष ने साधा निशाना

    कॉमर्शियल सिलेंडर क़ीमत बढ़ने के बाद राहुल गांधी ने तंज कसते हुए एक्स पोस्ट लिखा में, "पहला वार गैस पर और अगला वार पेट्रोल-डीज़ल पर."

    डीएमके प्रवक्ता टीकेएस एलानगोवन ने कहा, "यह सरकार चुनाव ख़त्म होने का इंतज़ार कर रही थी. उन्होंने एलपीजी सिलेंडर की क़ीमतें बढ़ा दी हैं. इसका मतलब है कि ज़्यादातर होटल बंद करने पड़ेंगे, क्योंकि वे कॉमर्शियल एलपीजी पर चल रहे हैं और उनके पास बंद करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है."

    उन्होंने कहा, "सरकार रूस से कच्चे तेल की खरीद क्यों रोक रही है?यही वजह है कि ऐसी स्थिति पैदा हो रही है. डीज़ल और पेट्रोल की क़ीमतों में भी बढ़ोतरी होगी."

  5. ईरान युद्ध की वजह से सऊदी अरब में शराब की कमी

    ईरान युद्ध की वजह से सऊदी अरब में शराब की सप्लाई प्रभावित हुई है. सऊदी अरब में ग्राहकों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि जंग की वजह से माल की सप्लाई देर से हो रही है.

    बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक़, सऊदी अरब में शराब की एक सरकारी दुकान है, जो रियाद के डिप्लोमैटिक क्वार्टर वाले इलाक़े में है.

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, हाल के दिनों में दुकान पर गए पांच लोगों ने बताया कि अब शेल्फ़ ज़्यादातर खाली हैं और वहां सिर्फ़ महंगे या कम मशहूर ब्रांड ही मिल रहे हैं.

    इस दुकान का कोई नाम या बोर्ड नहीं है. यह 2024 में खुली थी ताकि ग़ैर-मुस्लिम राजनयिकों को सेवा दी जा सके. पिछले साल से यह अमीर ग़ैर-मुस्लिम विदेशी लोगों को भी सामान देने लगी.

    सऊदी अरब में 1952 से शराब पर पूरी तरह से प्रतिबंधित है. हालांकि, विदेशी कामगारों को आकर्षित करने के लिए सरकार ने लाइसेंस वाली शराब की दुकान खोलने की सीमित इजाज़त दे रखी है.

  6. अमेरिका ने इसराइल और खाड़ी के इन देशों को 8.6 अरब डॉलर के हथियार बेचने की दी मंज़ूरी

    अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपने सहयोगियों के लिए 8.6 अरब डॉलर के हथियार सौदों को मंजूरी दी है.

    यह फ़ैसला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच लड़ाई चल रही है और अब युद्धविराम लागू हुए तीन हफ़्ते से ज़्यादा का समय हो चुका है.

    अमेरिका जिन देशों को हथियार देगा, उनमें इसराइल, क़तर, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) शामिल हैं.

    इस फ़ैसले के तहत क़तर को पैट्रियट एयर एंड मिसाइल डिफ़ेंस सिस्टम की सप्लाई और सपोर्ट सर्विसेज़ दी जाएंगी, जिसकी क़ीमत 4 अरब डॉलर से ज़्यादा है.

    इसके अलावा एडवांस्ड प्रिसिजन किल वेपन सिस्टम भी बेचे जाएंगे, जिनकी क़ीमत 992.4 मिलियन डॉलर है.

    कुवैत को 2.5 अरब डॉलर का इंटीग्रेटेड बैटल कमांड सिस्टम और इसराइल को 992 मिलियन डॉलर से ज़्यादा क़ीमत के एडवांस्ड प्रिसिज़न किल वेपन सिस्टम बेचने की मंज़ूरी दी गई है.

    अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने यूएई को भी यही सिस्टम बेचने की मंजूरी दी है, जिसकी क़ीमत 147 मिलियन डॉलर से ज़्यादा है.

  7. ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा ख़ामेनेई का आया बयान, सैन्य टकराव पर ये कहा

    ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा ख़ामेनेई की ओर से एक और लिखित बयान जारी हुआ है. इसमें उन्होंने ईरान आवाम से 'आर्थिक मुक़ाबला' करने की अपील की है.

    बयान में मोजतबा ख़ामेनेई ने कहा, "ईरान ने सैन्य टकराव में दुनिया को अपनी ख़ास ताक़त दिखाई, अब उसे आर्थिक और सांस्कृतिक मोर्चे पर भी दुश्मनों को हराना होगा."

    उन्होंने कहा, "कामगारों का समर्थन करना चाहिए और स्थानीय उत्पादों के इस्तेमाल को प्राथमिकता देनी चाहिए."

    ख़ामेनेई ने कारोबारियों से अपील की, "कारोबार करने वाले लोग, ख़ासकर जो मुश्किल में हैं, कोशिश करें कि अपने कर्मचारियों को नौकरी से न निकालें."

    सुप्रीम लीडर बनने के बाद मोजतबा ख़ामेनेई कभी कैमरे के सामने नहीं आए हैं और न ही उन्होंने ईरान को संबोधित किया है.

    हालांकि, कई मौक़ों पर उनके लिखित बयान ज़रूर जारी होते हैं, जो ईरानी सरकारी मीडिया पर चलाए जाते हैं.

  8. जर्मन चांसलर से ट्रंप की तकरार के बाद जर्मनी से 5000 अमेरिकी सैनिक हटाने का आदेश

    अमेरिकी रक्षा विभाग ने जर्मनी से 5,000 सैनिकों को हटाने का फ़ैसला किया है. यह निर्णय ऐसे समय में हुआ है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जर्मन चांसलर फ़्रिड्रिख़ मर्त्ज़ के बीच ईरान युद्ध को लेकर विवाद सामने आया.

    दरअसल, जर्मन चांसलर फ़्रिड्रिख़ मर्त्ज़ ने कहा था कि ईरानी वार्ताकारों ने अमेरिका की "बेइज़्ज़ती" की है.

    इसके बाद गुरुवार को सोशल मीडिया पर ट्रंप ने लिखा, "मर्त्ज़ बहुत ख़राब काम कर रहे हैं और उनके पास हर तरह की समस्याएं हैं, जिनमें इमिग्रेशन और ऊर्जा भी शामिल हैं."

    ट्रंप ने इटली और स्पेन से भी अमरीकी सैनिकों को हटाने का सुझाव दिया है.

    जर्मनी में अमेरिकी सेना की बड़ी मौजूदगी है. पिछले दिसंबर तक वहां 36,000 से ज़्यादा सक्रिय सैनिक तैनात थे.

    पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने बताया कि सेना हटाने का आदेश रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की ओर से आया है.

    उन्होंने कहा, "यह फ़ैसला यूरोप में सेना की स्थिति की पूरी समीक्षा के बाद लिया गया है और यह वहां की ज़रूरतों और हालात को देखते हुए किया गया है. सैनिकों की अमेरिका वापसी अगले 6 से 12 महीनों में पूरी हो जाएगी."

    ग़ौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यूरोप के कई देशों से नाराज़ हैं. ट्रंप ने इनसे होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलने के अभियान में मदद मांगी थी, लेकिन इस अभियान के लिए उन्हें समर्थन नहीं मिला.

  9. पश्चिम बंगाल के इन बूथों पर आज फिर हो रहा मतदान, क्या है वजह?

    पश्चिम बंगाल में 15 मतदान केंद्रों पर आज यानी 2 मई को फिर से मतदान हो रहा है. इन पर बूथों 29 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में वोटिंग हुई थी.

    लेकिन चुनाव आयोग ने इन बूथों पर ईवीएम से छेड़छाड़ और झड़प की शिकायत के बाद फिर से वोटिंग कराने का फ़ैसला लिया था.

    मतदान सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगा. इनमें से 11 मतदान केंद्र मगराहाट पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में हैं, जबकि 4 डायमंड हार्बर में हैं.

    डायमंड हार्बर के हरिदेवपुर प्राइमरी स्कूल के बूथ नंबर 194 पर सुबह 7 बजे से पहले ही वोटर्स कतार में नज़र आ रहे थे.

    पीटीआई के मुताबिक़, चुनाव आयोग ने बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी को लिखे पत्र में कहा था कि राज्य की चुनाव व्यवस्था से मिली जानकारी के आधार पर फिर से मतदान कराने का फ़ैसला लिया गया है.

    बाकी राज्यों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजे भी 4 मई को आएंगे.

  10. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा- 'ईरान के साथ जंग रुकी, लेकिन...'

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार की इजाज़त नहीं दी जा सकती.

    ट्रंप ने शुक्रवार को कहा, 'सनकी लोगों' को परमाणु हथियार रखने की इजाज़त नहीं दी जा सकती.

    दरअसल, अमेरिका के 1973 के वॉर पावर्स एक्ट के अनुसार, राष्ट्रपति बिना कांग्रेस की अनुमति के सिर्फ़ 60 दिन तक सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं.

    इसके बाद उन्हें या तो कार्रवाई रोकनी होती है या कांग्रेस से अनुमति लेनी होती है. अगर सैनिकों की सुरक्षा से जुड़ी ज़रूरी स्थिति हो तो फिर 30 दिन का अतिरिक्त समय मांगना होता है.

    लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इस जंग को जारी रखने के लिए उन्हें अमेरिकी सांसदों की अनुमति की ज़रूरत नहीं है.

    डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "28 फ़रवरी, 2026 को शुरू हुई लड़ाई अब रुक गई है. लेकिन अमेरिका ईरान के साथ टकराव जल्दी ख़त्म नहीं करेगा, क्योंकि ऐसा करने पर कुछ सालों बाद हमें फिर वही समस्या झेलनी पड़ सकती है."

    ट्रंप ने कहा कि अमेरिका दुनिया के लिए ख़तरा पैदा करने वाले हर हथियार को ख़त्म करने की कोशिश करेगा, सबसे पहले परमाणु हथियारों को.

    उन्होंने आगे कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाना 'ज़रूरी क़दम' था. उनका तर्क था कि अगर ऐसा न किया जाता तो 'ईरान इसराइल और बाक़ी मध्य पूर्व के देशों को तबाह कर सकता था.'

    गौरतलब है कि फ़िलहाल अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच युद्धविराम का दौर चल रहा है, लेकिन बातचीत में कोई ख़ास प्रगति अभी तक सामने नहीं आई है.

  11. नमस्कार!

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