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बंगाल में सियासी टकराव तेज़, टीएमसी का चुनाव आयोग पर 'एकतरफ़ा फ़ैसले' का आरोप, बीजेपी ने कहा 'ड्रामेबाज़ी'
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की गिनती से पहले सियासी दलों का घमासान रुक नहीं रहा है.
ईवीएम को लेकर गुरुवार शाम को शुरू हुआ तनाव शुक्रवार को भी जारी है और अब तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर एकतरफा फ़ैसला करने का आरोप लगाया है.
श्यामपुकुर विधानसभा सीट से टीएमसी की उम्मीदवार शशि पांजा ने कहा, "पहले जहाँ जाकर हर पॉलिटिकल पार्टी या प्रेस भी कैमरे के वीडियो देख सकते थे, अब उसपर चुनाव आयोग ने पाबंदी लगा दी है. अब केवल हम जिन एजेंट का नाम देंगे, वो दस एजेंट ही शिफ़्ट के हिसाब से वीडियो देख पाएंगे. यह एकतरफा फ़ैसला है, हर समय नियम बदलते रहते हैं."
दूसरी तरफ बीजेपी ने कहा है कि टीएमसी चुनाव हार रही है. बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर टीएमसी के आरोपों और ममता बनर्जी पर निशाना साधा है.
पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को दूसरे चरण में विधानसभा की 142 सीटों पर वोटिंग हुई थी. नतीजे 4 मई को आएंगे.
शुभेंदु अधिकारी ने कहा, "ये ड्रामेबाज़ी है. यह ज़मीनी हक़ीकत नहीं है. यह मीडिया में 'तू खींच मेरी फ़ोटो' के लिए हो रहा है. टीएमसी की सत्ता जा रही है. ये हारने वाले हैं. इन्होंने पॉलिटिक्स को प्रोफ़ेशन बना दिया है."
उन्होंने आगे कहा, "दूसरी पार्टी के लोग हार गए तो उन्हें कुछ नहीं होगा. टीएमसी हार गई तो उसके नेता बर्बाद हो जाएंगे. घर-द्वार चला जाएगा. अवैध निर्माण, रुपये सब चले जाएंगे. दादागिरी ख़त्म हो जाएगी. हमने अच्छी तरह से चुनावी लड़ाई लड़ी है. अच्छा ही होगा."
चुनाव आयोग और टीएमसी में खींचतान
पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को दूसरे चरण की वोटिंग ख़त्म होने के एक दिन बाद ईवीएम और पोस्टल बैलट बॉक्स को रखने के लिए इस्तेमाल होने वाले स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर विवाद हो गया.
तृणमूल कांग्रेस के लोग स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर पुलिस-प्रशासन पर 'धांधली' करने के आरोप लगाते दिखे. वहीं बीजेपी ने कहा कि ममता बनर्जी की पार्टी हार रही है, इसलिए 'धांधली' के आरोप लगाए जा रहे हैं.
गुरुवार को कई जगहों पर बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का आमना-सामना हुआ. कहीं तो ये पुलिस और प्रशासन के लोगों से बहस करते दिखे, तो कुछ लोग स्ट्रॉन्ग रूम में मशीनों को रखने को लेकर अव्यवस्था का आरोप लगाते हुए धरने पर बैठ गए.
यहां तक कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी कोलकाता की भवानीपुर सीट पर स्ट्रॉन्ग रूम तक पहुंच गईं.
इससे पहले उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के काउंटिंग एजेंटों को हालात पर नज़र रखने और 'निडर' होकर काम करने का 'हाई अलर्ट' जारी किया.
इस बीच मतगणना में केवल केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती के राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी के फ़ैसले के ख़िलाफ़ तृणमूल कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख़ किया है.
इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने टीएमसी की उस याचिका को ख़ारिज कर दिया था, जिसमें उसने चुनाव आयोग के इस फ़ैसले को चुनौती दी थी.
बार एंड बेंच के मुताबिक़ कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के लिए वोटों की गिनती के सुपरवाइज़र के तौर पर केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों को तैनात करने के मुख्य चुनाव अधिकारी के फ़ैसले के ख़िलाफ़ उनकी याचिका को खारिज कर दिया था."
बीजेपी का आरोप
वहीं बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद समिक भट्टाचार्य ने कहा, मुख्यमंत्री ने मतगणना केंद्र पर पहुंचकर एक नया ड्रामा खड़ा कर दिया है. वे अपनी हार स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं. जनता भी इस तरह के ड्रामे को स्वीकार करने के मूड में नहीं है."
"जो कुछ होना था, वह हो चुका है लेकिन वे फिर भी इसे मानने को तैयार नहीं हैं. उनका राजनीतिक सफ़र अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है, और अब उन्हें राजनीति से दूर चले जाना चाहिए."
"हमने मुख्यमंत्री को मजबूर कर दिया कि वे लोगों के घरों तक जाएं, सब्ज़ियां खरीदने के लिए बाहर निकलें, और तो और सड़कों पर भी बैठें."
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ ईवीएम से छेड़छाड़ के विवाद के बीच शुक्रवार शाम को टीएमसी उम्मीदवार गौतम देब ने सिलीगुड़ी में स्ट्रॉन्ग रूम का निरीक्षण किया. उन्होंने कहा, "मैं यहाँ निगरानी करने आया हूँ."
इस सियासी जंग में पश्चिम बंगाल में लंबे समय तक सत्ता में रही सीपीआईएम भी शामिल हो गई है. सीपीआईएम नेता सुजन चक्रवर्ती ने आरोप लगाया है कि वोटों की लड़ाई अब गंदी हो चुकी है.
उनका आरोप है कि बीजेपी और टीएमसी दोनों ही पार्टियाँ चुनावों में ग़लत तरीके से लाभ उठाती हैं.
बीजेपी-टीएमसी झगड़े पर अन्य दल क्या कह रहे हैं
इस सियासी ज़ुबानी जंग में कांग्रेस भी पीछे नहीं दिख रही है.
बहरामपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार अधीर रंजन चौधरी ने कहा, "चुनावों के बाद हमने कुछ जगहों पर सत्ताधारी पार्टी की हिंसा देखी. कुछ जगहों पर तो विपक्षी पार्टी के कार्यकर्ताओं को भी उत्पीड़न का सामना करना पड़ा."
"यहाँ तक कि हमारे बहरामपुर शहर में भी टीएमसी नेताओं ने सालों पहले लगाई गई पीने के पानी की सुविधाएँ हटा दीं. इस शक में कि झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों ने चुनाव में उन्हें वोट नहीं दिया."
अधीर रंजन चौधरी ममता बनर्जी के पुराने विरोधी रहे हैं और राज्य में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं.
इस बीच शुक्रवार को फ़ैसला लिया गया है कि शनिवार यानी दो मई को पश्चिम बंगाल के 15 बूथों पर फिर से मतदान कराया जाएगा.
इनमें मगराहाट पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के 11 बूथ और दक्षिण 24 परगना के डायमंड हार्बर विधानसभा क्षेत्र के 4 बूथ शामिल हैं.
इन बूथों पर सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक मतदान होगा.
चुनाव आयोग को इन बूथों से गड़बड़ी की शिकायत मिली थी, जिसके बाद यहां दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया गया है.
पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय ने प्रेस रिलीज़ जारी कर इसकी जानकारी दी है.
चौरंगी सीट से टीएमसी की उम्मीदवार नैना बंदोपाध्याय ने मतगणना को लेकर भारी सुरक्षा पर टिप्पणी की है.
उन्होंने कहा, "ये जो गाड़ियाँ (सशस्त्र बलों की) यहां आई हैं, यह देखने में अच्छा लग रहा है. हम फ़िल्मों में देखते हैं. लेकिन आप हमें बताओ कि क्या ज़रूरत थी इसकी. किसे डरा रहे हैं. आप लोग सोचते हैं कि हम डर जाएंगे, हमलोग डरते नहीं है. हम लोग फिर आएंगे."
उन्होंने मगराहाट पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के 11 बूथ और दक्षिण 24 परगना के डायमंड हार्बर विधानसभा क्षेत्र के 4 बूथों पर रिपोलिंग के बारे में कहा, "इलेक्शन कमीशन तो कह रहा था कि बहुत अच्छा वोट हुआ. ऐसा कभी नहीं हुआ था. ये तो उनकी नाकामी है. फिर जनता निकलेगी, फिर दीदी को वोट देगी."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.