फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप फ़ाइनल: स्पेन की वो ताक़त जो अर्जेंटीना पर पड़ सकती है भारी

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- Author, सेज़ार असपिलीक्यूएटा
- पदनाम, बीबीसी के स्पोर्ट्स कॉलमिस्ट
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 10 मिनट
फ़ाइनल का पल आ गया है. स्पेन अब अपने दूसरे वर्ल्ड कप के ख़िताब से सिर्फ एक क़दम दूर है.
वर्ल्ड कप जीतने के लिए हमें कोई असाधारण काम करने की ज़रूरत नहीं है.
हमें सिर्फ़ शांत रहना है और अब तक जिस तरह से खेला है, वैसा ही खेलते रहना है.
मैं बीबीसी के लिए पूरे टूर्नामेंट की कवरेज करने के बाद अब मैड्रिड लौट आया हूँ.
मुझे लगता है कि पूरे स्पेन को भरोसा है कि रविवार को हम अर्जेंटीना को हराकर 2010 की तरह एक बार फिर विश्व कप ट्रॉफ़ी अपने नाम करेंगे.
यह भरोसा कई वजहों से है. यूरो 2024 का ख़िताब, लगातार 37 मैचों से अजेय रहने का सिलसिला और सबसे बढ़कर सेमीफ़ाइनल में फ़्रांस पर मिली जीत.
इस स्पेनिश टीम की सबसे बड़ी ताक़त उसका सामूहिक खेल और उसकी मानसिक मज़बूती है.
खिलाड़ी एक टीम की तरह खेलते हैं. उनकी अपनी एक स्पष्ट पहचान है और उन्हें उस पर पूरा भरोसा है. इसलिए वे हर मैच में अपने तरीक़े से ही खेलते हैं.
स्पेन की सबसे बड़ी ताक़त

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वर्ल्ड कप में हमारा पहला मैच केप वर्डे के ख़िलाफ़ ड्रॉ रहा था.
यह नतीज़ा हमारी उम्मीद के मुताबिक़ नहीं था. लेकिन टीम घबराई नहीं और उसने अपना तरीक़ा नहीं बदला.
नॉकआउट राउंड में पुर्तगाल और बेल्जियम के ख़िलाफ़ भी यही देखने को मिला.
जीत का गोल करने के लिए आख़िरी मिनट तक संघर्ष करना पड़ा, लेकिन टीम ने धैर्य नहीं खोया.
सेमीफ़ाइनल में फ़्रांस के ख़िलाफ़ शुरुआती बढ़त मिलने के बाद भी टीम का रवैया वही रहा.
फ़्रांस इस टूर्नामेंट को जीतने का बड़ा दावेदार था और उसने पहले के मैचों में काफ़ी गोल किए थे.
इसके बावजूद स्पेन ने सिर्फ़ बढ़त बचाने के लिए अपना खेल नहीं बदला. टीम सकारात्मक रही और अपने अंदाज़ में खेलती रही.
अपनी पहचान बनाए रखना और उसी पर कायम रहना ही इस टीम की सबसे बड़ी ताक़त है, ख़ासकर अब जब फ़ाइनल सामने है.
स्पेन टीम में कुछ खिलाड़ियों को बदल सकता है, लेकिन उसकी रणनीति और सोच नहीं बदलती.
टीम का लक्ष्य हमेशा गेंद अपने पास रखना और जितना हो सके मैच पर नियंत्रण बनाए रखना होता है.
बेशक, हर मैच अलग परिस्थितियां लेकर आता है. लेकिन इस विश्व कप में अब तक खेले गए सातों मैचों में स्पेन कभी भी पिछड़ा नहीं है. यह अपने आप में बेहद ख़ास बात है.
अगर फ़ाइनल में अर्जेंटीना के ख़िलाफ़ हम पीछे भी हो जाएं, तब भी हमारी सोच नहीं बदलेगी.
हम शुरुआत से आख़िर तक वही धैर्य और वही भरोसा बनाए रखेंगे, जो इस पूरी प्रतियोगिता में हमारी पहचान रहा है.
अल्वारेज़: मेसी की तरह मैच का रुख़ बदलने में माहिर

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स्पेन में हर कोई फ़ाइनल को लेकर आत्मविश्वास से भरा है, लेकिन अर्जेंटीना भी बिल्कुल ऐसा ही महसूस कर रहा होगा.
आख़िर वह मौजूदा विश्व चैंपियन है और उसने भी इस टूर्नामेंट में दोबारा इसे जीतने लायक प्रदर्शन किया है.
यह मुक़ाबला बेहद कठिन होने वाला है, ख़ासकर इसलिए क्योंकि लियोनेल मेसी शानदार फॉर्म में हैं.
उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में अपना जज़्बा और जीतने की भूख साफ़ दिखाई है.
स्पेन अच्छी तरह जानता है कि मेसी मैच के किसी भी पल खेल का रुख़ बदल सकते हैं.
इंग्लैंड के ख़िलाफ़ उन्होंने अपनी पोजिशन थोड़ी बदली, दाईं ओर जाकर ज़्यादा जगह बनाई और वहीं से मैच पर असर डाला.
लेकिन स्पेन सिर्फ़ मेसी को ही नहीं, अर्जेंटीना की बाक़ी टीम को भी अच्छी तरह जानता है.
यह टीम कितनी ख़तरनाक है और ट्रॉफ़ी जीतने के लिए किस हद तक लड़ सकती है, इसका भी हमें पूरा अंदाज़ा है.
मैं 2023 से 2025 तक एटलेटिको मैड्रिड में था. उस दौरान अर्जेंटीना के कुछ खिलाड़ियों के साथ खेला.
इसलिए उनकी मानसिकता और उनकी गुणवत्ता, दोनों को क़रीब से जानता हूं.
उनमें से एक जूलियन अल्वारेज़ हैं. मेरे हिसाब से वह संपूर्ण खिलाड़ी हैं.
वह सिर्फ़ पारंपरिक नंबर-9 स्ट्राइकर नहीं हैं और न ही ऐसे नंबर-10 हैं जो पीछे आकर खेल बनाते हों.
वह विंग पर भी खेल सकते हैं और मैदान के हर हिस्से में सक्रिय रहना पसंद करते हैं
कई बार वह पीछे आकर पूरे खेल को लिंक करते हैं. लेकिन गोल करने का मौक़ा आने पर वो सटीक फ़िनिशर साबित होते हैं.
मैदान में चाहे कहीं भी हों, उनकी कोशिश हमेशा पेनल्टी बॉक्स में पहुँचकर टीम के लिए गोल करने की रहती है.

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अल्वारेज़ बॉक्स के बाहर से भी दाएं और बाएं, दोनों पैरों से शानदार शॉट लगा सकते हैं. क्लब और देश, दोनों के लिए उन्होंने कई बेहतरीन गोल किए हैं.
मैं उनके साथ भी खेला हूँ और उनके ख़िलाफ़ भी. उन्हें एक जगह रोककर रखना बहुत मुश्किल होता है, क्योंकि वह लगातार दौड़ते रहते हैं, ख़ाली जगह तलाशते रहते हैं और टीम के लिए लगातार मेहनत करते हैं.
उन्हें पता होता है कि कब गेंद अपने पास रखनी है, कब तेज़ी से पास दे देना है और कब साथी खिलाड़ी के साथ वन-टू खेलकर हमला आगे बढ़ाना है.
जब मैं उनके ख़िलाफ़ खेला, तब उनकी क्षमता का अंदाज़ा लगा.
लेकिन एटलेटिको मैड्रिड में जब हम एक ही ड्रेसिंग रूम में थे तो हमने साथ प्रैक्टिस की थी. तब समझ आया कि वह वास्तव में कितने बेहतरीन खिलाड़ी हैं.
मेसी की तरह अल्वारेज़ भी ऐसे खिलाड़ी हैं जो किसी भी पल मैच का नतीजा बदल सकते हैं.
उनके पास प्रतिभा, तकनीक और खेल को समझने की बेहतरीन क्षमता है.
इसलिए फ़ाइनल में स्पेन को उन पर ख़ास नज़र रखनी होगी.
लामिन यमाल समेत हर खिलाड़ी के लिए टीम सबसे ऊपर

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अर्जेंटीना को गोल करने से रोकना आसान नहीं होगा. लेकिन स्पेन की सबसे बड़ी ताक़त उसकी टीम की संरचना और मज़बूत डिफ़ेंसिव फॉरमेशन है.
यही वजह है कि इस पूरे विश्व कप में टीम ने अब तक सिर्फ़ एक गोल खाया है.
स्पेन आमतौर पर विरोधी टीम के आधे हिस्से में खेलना पसंद करता है और आगे बढ़कर दबाव बनाता है.
लेकिन इस विश्व कप में जब भी मुश्किल हालात आए और टीम को पीछे हटकर अधिक सघन डिफेंसिव लाइन (मिड या लो ब्लॉक) में खेलना पड़ा. तब भी उसने यह काम प्रभावी ढंग से किया.
यह भी पूरी टीम के सामूहिक प्रयास का ही नतीजा है.
इस डिफेंसिव ज़िम्मेदारी को सभी खिलाड़ियों ने मिलकर शानदार तरीक़े से निभाया है.
रोड्री और फाबियान रूइज़ पूरे अनुशासन के साथ बैक-फोर के सामने सुरक्षा कवच की तरह खेलते हैं और विरोधी हमलों को रोकते हैं.
लेकिन सिर्फ़ मिडफील्डर ही नहीं, फ़्रांस के ख़िलाफ़ लामिन यामाल ने भी डिफेंस लाइन में शानदार योगदान दिया.
उनकी मेहनत की वजह से फ़्रांस कोई साफ़ गोल करने का मौक़ा नहीं बना सका.
दूसरी ओर, बाएं विंग पर एलेक्स बाएना ने भी इसी तरह पूरी प्रतिबद्धता के साथ रक्षात्मक ज़िम्मेदारी निभाई.
लगातार निखरते गए हैं लामिन यमाल

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लामिन यमाल का खेल लगातार निखरता गया है. गेंद उनके पास न होने पर भी जिस तरह वह मेहनत करते हैं, उससे उनकी सोच और मानसिकता का पता चलता है. यही इस स्पेनिश टीम की सबसे बड़ी ताक़तों में से एक है.
हो सकता है कि उनके प्रदर्शन का असर अभी तक गोल के रूप में ज़्यादा न दिखा हो. अब तक उन्होंने सिर्फ़ एक गोल किया है, जो ग्रुप चरण में सऊदी अरब पर 4-0 की जीत के दौरान किया गया था.
उन्होंने बहुत ज़्यादा गोल भी नहीं बनवाए हैं. लेकिन यह साफ़ दिखता है कि वह टीम की मदद करने के लिए हर संभव तरीके से मैच को प्रभावित करना चाहते हैं.
कई बार ऐसा भी होता है कि गेंद उनके पास नहीं होती, लेकिन वह अपने साथ डिफेंडरों को खींच ले जाते हैं.

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इससे उनके साथी खिलाड़ियों के लिए मैदान में जगह बन जाती है और टीम को हमला करने का बेहतर मौक़ा मिलता है.
यही वजह है कि यह स्पेनिश टीम सही मायनों में एक टीम की तरह खेलती है.
हर खिलाड़ी ज़रूरत पड़ने पर अपने व्यक्तिगत प्रदर्शन से ज़्यादा टीम के हित को महत्व देता है और उसके लिए त्याग करने को तैयार रहता है.
इसलिए, चाहे किसी भी विंग पर कोई भी खिलाड़ी खेल रहा हो, हमारे विंगर स्वाभाविक रूप से आक्रामक हैं, लेकिन गेंद खोने पर वे फुल-बैक की मदद के लिए तुरंत पीछे भी आते हैं.
वहीं टीम के नंबर-9 मिकेल ओयारज़ाबाल भी ज़रूरत पड़ने पर पीछे आकर विरोधी मिडफील्डर पर दबाव बनाते हैं और रक्षात्मक ज़िम्मेदारी निभाते हैं.
दो शानदार फुल-बैक की भूमिका

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इसी तरह हमारे फुल-बैक पेड्रो पोरो और मार्क कुकुरेला सिर्फ डिफेंस में ही मज़बूत नहीं हैं, बल्कि आक्रमण में भी उनकी अहम भूमिका रहती है.
उन्होंने गोल कराने, ख़ुद गोल करने और पीछे से खेल बनाने यानी बिल्ड-अप प्ले में भी अहम योगदान दिया है.
स्पेन जैसी आक्रामक टीम में फुल-बैक अक्सर काफ़ी आगे तक खेलते हैं. ऐसे में उनके पीछे की जगह खुल जाती है और डिफेंस की चुनौती बढ़ जाती है.
लेकिन पोरो और कुकुरेला ने दिखाया है कि वे मैदान के दोनों हिस्सों में अपनी ज़िम्मेदारी बखूबी निभा सकते हैं, चाहे सामने कितना भी ख़तरनाक विंगर क्यों न हो.
सबसे अच्छी बात यह है कि टीम का हर खिलाड़ी अतिरिक्त मेहनत करने के लिए तैयार रहता है.
अब फ़ाइनल में भी हम इसी सामूहिक भावना और उसी खेल को दोहराना चाहेंगे.
टूर्नामेंट की शुरुआत में हमें पता था कि टीम के कुछ खिलाड़ी पूरी तरह फिट नहीं थे.
लेकिन विश्व कप लंबा टूर्नामेंट होता है और मुझे लगता है कि कोच लुइस दे ला फुएंते ने शुरुआत से ही इसे ध्यान में रखकर अपनी योजना बनाई थी.
इसके बाद जैसे-जैसे टूर्नामेंट आगे बढ़ा, टीम का आत्मविश्वास बढ़ता गया.
खिलाड़ियों की फिटनेस बेहतर होती गई और जीत का सिलसिला भी उनके पक्ष में माहौल बनाता गया.
अब इन खिलाड़ियों के पास पूरे स्पेन को खुश करने का मौका है. अर्जेंटीना के ख़िलाफ़ फ़ाइनल आसान नहीं होगा, लेकिन स्पेन इस मुकाबले में शायद पूरे विश्व कप के दौरान अपनी सबसे बेहतरीन स्थिति में उतर रहा है.
और किसी भी टीम के लिए इससे बेहतर समय नहीं हो सकता.
(सेज़ार असपिलीक्यूएटा की बीबीसी स्पोर्ट के क्रिस बेवन से बातचीत पर आधारित)
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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