फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप 2026: आठ हज़ार करोड़ रुपए से भी ज़्यादा की इनामी राशि, विनर को मिलेंगे इतने करोड़

लियोनेल मेसी

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इमेज कैप्शन, फ़ीफ़ा ने 87 करोड़ डॉलर यानी क़रीब 8,218 करोड़ रुपए की इनामी राशि तय की है, जो अब तक की सबसे बड़ी रकम है (फ़ाइल फ़ोटो: लियोनेल मेसी)
    • Author, कैथरीन शॉर्प
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 4 मिनट

फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप 2026 ज़ोरों पर है, जिसमें दुनिया भर से 48 देश हिस्सा ले रहे हैं. इस बार टूर्नामेंट सिर्फ़ खेल के लिए ही नहीं, बल्कि प्राइज़ मनी के मामले में भी इतिहास बना रहा है.

फ़ीफ़ा ने कुल 871 मिलियन डॉलर (87 करोड़ डॉलर) यानी क़रीब 8,218 करोड़ रुपए की प्राइज़ मनी तय की है, जो अब तक की सबसे बड़ी रकम है.

शुरुआत में फ़ीफ़ा ने 727 मिलियन डॉलर की प्राइज़ मनी का एलान किया था जो 2022 क़तर टूर्नामेंट से 50% ज़्यादा था. लेकिन अप्रैल में फ़ीफ़ा ने हिस्सा लेने का इनाम और तैयारी का पैसा बढ़ा दिया. इसी वजह से कुल इनामी राशि बढ़कर 871 मिलियन डॉलर हो गई.

प्रदर्शन के आधार पर मिलेगा इतना इनाम

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इमेज कैप्शन, फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप 2026 में विजेता से लेकर 48वें स्थान पर रहने वाली टीम को भी इनाम राशि मिलेगी

इनामी राशि दो हिस्सों में बांटी जाएगी, प्रदर्शन पर आधारित इनाम और प्रदर्शन से अलग आर्थिक मदद.

प्रदर्शन पर आधारित इनाम कुछ यूं है-

  • विजेता: 51 मिलियन डॉलर (481 करोड़ रुपए)
  • रनर-अप: 34 मिलियन डॉलर (321 करोड़ रुपए)
  • तीसरा स्थान: 30 मिलियन डॉलर (283 करोड़ रुपए)
  • चौथा स्थान: 28 मिलियन डॉलर (264 करोड़ रुपए)
  • 5वें-8वें स्थान: 20 मिलियन डॉलर (189 करोड़ रुपए)
  • 9वें-16वें स्थान: 16 मिलियन डॉलर (151करोड़ रुपए)
  • 17वें-32वें स्थान: 12 मिलियन डॉलर (114 करोड़ रुपए)
  • 33वें-48वें स्थान: 10 मिलियन डॉलर (95 करोड़ रुपए)

जो टीम जितना बेहतरीन प्रदर्शन करेगी, उसका इनाम उतना ही ज़्यादा होगा.

हर टीम को इतने पैसे मिलना तय

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इमेज कैप्शन, प्रदर्शन के इतर भी टीमों को पैसा मिलेगा, जिसमें 'टीम कॉन्ट्रिब्यूशन' अमाउंट भी शामिल है

प्रदर्शन से अलग भी इनाम रहेगा, जो हर टीम को मिलना तय है-

  • तैयारी का पैसा: 2.5 मिलियन डॉलर (23 करोड़ रुपए) प्रति टीम
  • टीम कॉन्ट्रिब्यूशन: 16 मिलियन डॉलर (151 करोड़ रुपए)

इस तरह हर टीम को कम से कम 12.5 मिलियन डॉलर (114 करोड़ रुपए) मिलेंगे. इसमें 10 मिलियन डॉलर यानी 95 करोड़ रुपए की क्वालिफ़िकेशन फ़ीस भी शामिल है.

तैयारी का पैसा टीम के ट्रेनिंग कैंप और टूर्नामेंट से पहले की यात्रा पर ख़र्च करने के लिए दिया जाता है. फ़ीफ़ा के हिसाब से 'टीम कॉन्ट्रिब्यूशन' का मतलब है टीम के ख़र्चों में मदद करना और टिकटों की संख्या बढ़ाना.

इसका मक़सद यह है कि वर्ल्ड कप खेलने के ख़र्चों जैसे सफ़र, इंतज़ाम और दफ़्तर के काम में अमीर और कम अमीर देशों के बीच का फ़र्क कम किया जा सके.

पहली बार 48 टीमों के बीच मुक़ाबला

फ़ीफ़ा

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इमेज कैप्शन, 11 जून से 19 जुलाई तक होने वाले इस मुक़ाबले आयोजन अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा संयुक्त तौर पर कर रहे हैं

यह पहली बार है, जब वर्ल्ड कप फ़ुटबॉल की मेजबानी तीन देश मिल कर रहे हैं. 11 जून से 19 जुलाई तक होने वाले इस मुक़ाबले आयोजन अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा संयुक्त तौर पर कर रहे हैं.

तीन देशों के 16 शहरों में 104 मैच पूरे होने के बाद दुनिया को पता चलेगा कि वर्ल्ड कप का विजेता कौन बनेगा.

इस आयोजन के साथ मेक्सिको, वर्ल्ड कप की तीन बार मेज़बानी करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है. इससे पहले 1970 और 1986 के वर्ल्ड कप का आयोजन मेक्सिको कर चुका है.

फ़ुटबॉल की दुनिया में बादशाहत के लिए होने वाले घमासान में यह पहला मौक़ा है, जब दुनिया भर की 48 टीमों के बीच मुक़ाबला होगा. इससे पहले के सात वर्ल्ड कप आयोजनों के दौरान दुनिया की सर्वश्रेष्ठ 32 टीमों के बीच मुक़ाबला होता था.

फ़ीफ़ा का अनुमान- छह अरब दर्शक देखेंगे ये मैच

इस बार दुनिया भर से 16 और देशों को वर्ल्डकप में हिस्सा लेने का मौक़ा मिला है. पिछली वर्ल्ड कप के 64 मैचों की तुलना में ज़्यादा मुक़ाबले भी खेले जा रहे हैं.

ऐसे में फ़ीफ़ा का अनुमान है कि इस बार कम से कम छह अरब दर्शक इन मुक़ाबलों को देखेंगे. यानी चार साल पहले क़तर में खेले गए वर्ल्ड कप आयोजन से एक अरब ज़्यादा दर्शक इन मुक़ाबलों का आनंद लेंगे.

वर्ल्ड कप के 23वें आयोजन में दुनिया के चार देश, केप वर्डे, कुरासाओ, जॉर्डन और उज़्बेकिस्तान की फ़ुटबॉल टीमें अपना डेब्यू करने वाली हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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