ट्रंप ने कहा, पाकिस्तान के अनुरोध पर लिया एक और फ़ैसला, क्या अमेरिका अब पीछे हट रहा है?

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- Author, व्हाइट हाउस रिपोर्टर बर्न्ड डेबुसमन जूनियर के साथ जेम्स चैटर और कैथरिन आर्म
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट से फंसे हुए जहाज़ों को निकालने के लिए शुरू किए गए अमेरिकी अभियान को "कुछ समय के लिए" रोका जाएगा.
ट्रंप ने कहा कि एक दिन पहले शुरू किया गया "प्रोजेक्ट फ्रीडम" आपसी सहमति से रोका जा रहा है क्योंकि ईरान के साथ समझौते की दिशा में काफ़ी प्रगति हुई है.
ईरान के सरकारी मीडिया ने इसे अपनी जीत बताया और कहा कि वैश्विक शिपिंग के लिए अहम इस जलमार्ग को दोबारा खोलने में लगातार नाकामियों के बाद ट्रंप पीछे हट गए.
अमेरिकी राष्ट्रपति की यह घोषणा ऐसे समय आई, जब विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि ईरान के ख़िलाफ़ शुरुआती अमेरिका-इसराइल अभियान "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी" अपने मक़सद को हासिल करने के बाद ख़त्म हो गया है.
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने यह फ़ैसला पाकिस्तान के अनुरोध पर लिया, जिसने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई है. उन्होंने यह भी कहा कि ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रहेगी.
ट्रंप की यह घोषणा कई लोगों को चौंका सकती है. यह विदेश मंत्री रूबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और जॉइंट चीफ्स के चेयरमैन जनरल डैन केन के उन बयानों के उलट है, जिनमें कहा गया था कि यह अभियान होर्मुज़ स्ट्रेट और फारस की खाड़ी में शिपिंग और व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित करेगा.

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रूबियो ने कहा- हम शांति चाहते हैं

रूबियो ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा, "हम शांति का रास्ता पसंद करेंगे. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी एक समझौता चाहते हैं. आगे क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है. प्रशासन लगातार कहता रहा है कि प्रोजेक्ट फ्रीडम ईरान पर आर्थिक दबाव बनाने के लिए लागू की गई नाकेबंदी से अलग और स्वतंत्र अभियान है.''
प्रोजेक्ट फ्रीडम का मक़सद इस इलाक़े से तेल की आपूर्ति को फिर से सामान्य बनाना और वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिरता की ओर लौटाने में मदद करना था.
इसके तहत फँसे हुए जहाज़ों को खाड़ी से निकालकर काफ़ी हद तक बंद पड़े जलमार्ग के ज़रिए उन्हें सुरक्षित रास्ता दिखाया जा रहा था. लेकिन अगर इस विराम के दौरान वैश्विक शिपिंग कंपनियां और उनके साथ काम करने वाली बीमा कंपनियां ईरानी हस्तक्षेप के कारण बाधित होती हैं, तो ट्रंप के लिए यह दावा करना मुश्किल होगा कि यह मक़सद हासिल हो गया है.
दूसरी ओर ट्रंप प्रशासन को उम्मीद हो सकती है कि प्रोजेक्ट फ्रीडम को रोकने से, जिसका ईरान ने कड़ा विरोध किया था, ईरानी नेतृत्व फिर से बातचीत की मेज पर लौट आए.
रूबियो की टिप्पणियां ऐसे समय आईं, जब होर्मुज़ में कई हमलों ने अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम पर ख़तरे की आशंका बढ़ा दी थी.
ईरान ने रूबियो के बयान पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद ग़ालिबाफ ने पहले कहा था, "हम अच्छी तरह जानते हैं कि मौजूदा स्थिति का जारी रहना अमेरिका के लिए असहनीय है, जबकि हमने तो अभी शुरुआत ही की है."
पिछले महीने अमेरिका के साथ हुई वार्ता में ईरान के मुख्य वार्ताकार रहे ग़ालिबाफ ने कहा, "युद्धविराम उल्लंघन और नाकेबंदी के जरिए अमेरिका और उसके सहयोगियों ने समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को ख़तरे में डाल दिया है. हालांकि उनकी बुरी कोशिशें नाकाम होंगी."
मंगलवार देर रात ब्रिटेन की यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने कहा कि उसे एक विश्वसनीय स्रोत से जानकारी मिली है कि होर्मुज़ में एक मालवाहक जहाज़ को किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल से निशाना बनाया गया है. हालांकि, तुरंत अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी.
यूएई के ख़िलाफ़ हमला

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मंगलवार को पहले यूएई ने कहा था कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली लगातार दूसरे दिन ईरान से आए मिसाइलों और ड्रोन को रोक रही है. सोमवार को यूएई ने ईरान पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का आरोप लगाया था, जिसमें फुजैरा अमीरात के एक तेल बंदरगाह पर हमला भी शामिल था. यह बंदरगाह होर्मुज़ के बाहर स्थित है. यूएई ने इसे ख़तरनाक उकसावे वाली कार्रवाई बताया था.
ईरान ने मंगलवार को यूएई पर किसी भी हमले से इनकार किया था. एक सैन्य प्रवक्ता ने कहा था, "अगर ऐसा कोई क़दम उठाया गया होता, तो हम इसकी घोषणा मज़बूती और स्पष्टता के साथ करते."
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की शुरुआत 28 फ़रवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हवाई हमलों का एक सिलसिला शुरू किया था. इसके जवाब में ईरान ने उस अहम जलमार्ग को बंद कर दिया, जिसके ज़रिए दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और लिक्विड प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति होती है.
अप्रैल की शुरुआत में अमेरिका और ईरान ने युद्धविराम की घोषणा की, जिसके तहत ईरान ने यूएई समेत खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले रोक दिए. हालांकि, तब से बहुत कम जहाज़ इस रास्ते से गुज़र पाए हैं. अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर अपनी अलग नाकेबंदी भी लागू कर दी.
सोमवार को अमेरिका ने कहा कि उसने होर्मुज़ में ईरान की सात तेज़ रफ़्तार पोतों पर हमला किया, जबकि ईरान ने दावा किया कि उसने एक अमेरिकी जहाज़ पर चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाईं.
दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के दावों को ख़ारिज कर दिया. दो व्यावसायिक जहाज़ों ने हमले की सूचना दी और उनमें से एक ने कहा कि वह अमेरिकी सैन्य सुरक्षा के बीच सुरक्षित रूप से होर्मुज़ पार करने में सफल रहा. यह डोनाल्ड ट्रंप की उस योजना का हिस्सा था, जिसका मक़सद जलमार्ग को फिर से खोलना था.
व्हाइट हाउस में बोलते हुए रूबियो ने कहा कि ट्रंप समझौता चाहते हैं, "लेकिन अब तक ईरान ने वह रास्ता नहीं चुना है." उन्होंने यह भी कहा, "भविष्य में इसका क्या परिणाम होगा, इस पर अभी केवल अटकलें लगाई जा सकती हैं."
उन्होंने कहा कि अमेरिका और इसराइल के हमलों ने ईरान की अर्थव्यवस्था को "कई पीढ़ियों तक असर डालने वाला नुक़सान" पहुँचाया है और ईरान के नेताओं को "ख़ुद को संभाल लेना चाहिए, इससे पहले कि वे ख़ुद को पूरी तरह बर्बाद कर लें."
बातचीत की कोशिश

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इस बीच, अमेरिकी रक्षा मंत्री हेगसेथ ने कहा कि ईरान के साथ युद्धविराम "ख़त्म नहीं हुआ है."
मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में हेगसेथ ने कहा, "फ़िलहाल युद्धविराम कायम है लेकिन हम इस पर बहुत क़रीबी नज़र रखेंगे." वहीं, जनरल केन ने कहा कि युद्धविराम शुरू होने के बाद से ईरान ने अमेरिकी बलों पर 10 बार हमले किए हैं, लेकिन ये हमले "उस सीमा से नीचे" हैं, जहाँ इस समय फिर से लड़ाई शुरू की जाए.
बाद में पत्रकारों ने ट्रंप से पूछा कि ईरान की ओर से युद्धविराम का उल्लंघन किसे माना जाएगा. इस पर उन्होंने जवाब दिया, "आपको पता चल जाएगा. मैं आपको बता दूंगा."
हेगसेथ ने यह भी कहा कि उन्हें अब भी विश्वास है कि बातचीत के ज़रिए ईरान के साथ संघर्ष समाप्त करने का समझौता संभव है.
कुछ विश्लेषकों के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों की अलग-अलग टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि अमेरिका युद्ध में लौटने के लिए अनिच्छुक है. ऐसा क़दम बाज़ारों को और अस्थिर कर सकता है, क़ीमतों को आसमान तक पहुंचा सकता है. साथ ही राष्ट्रपति ट्रंप को बड़ी संख्या में अमेरिकियों के विरोध का सामना कर सकता है.
ट्रंप ने यह भी कहा कि वह जापान के साथ होर्मुज़ को फिर से खोलने पर चर्चा कर रहे हैं और अगले सप्ताह चीन यात्रा के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ इस मुद्दे पर सकारात्मक बातचीत की उम्मीद कर रहे हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
































