पश्चिम बंगाल के नतीजे पर ममता बनर्जी से लेकर राहुल गांधी और ओवैसी क्या कह रहे हैं?

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार और बीजेपी की बंपर जीत सुर्ख़ियों में है.
चुनाव आयोग के मुताबिक़, विधानसभा की 293 सीटों पर आए परिणामों में बीजेपी ने 207 सीटों पर जीत दर्ज की है. विधानसभा में कुल 294 सीटें हैं और फाल्टा सीट पर 21 मई को दोबारा मतदान होने वाला है.
वहीं 2021 के विधानसभा चुनावों में 200 से ज़्यादा सीटें जीतने वाली टीएमसी इस चुनाव में 80 सीटों पर सिमट गई है.
पश्चिम बंगाल के नतीजों पर एक ओर बीजेपी जश्न मना रही है तो दूसरी ओर टीएमसी और विपक्षी दलों के लिए इसे एक बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है.
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के चुनाव हारने के बाद अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीजेपी पर बेईमानी से चुनाव जीतने का आरोप लगाया.
ममता ने और क्या-क्या कहा?
ममता बनर्जी ने इस्तीफ़े के सवाल पर कहा, ''क्यों मैं क्यों जाऊंगी. हम तो हारे नहीं हैं कि जाएंगे. हार का सुबूत देते तो इस्तीफ़ा देते. ज़ोर-ज़बरदस्ती करके कोई बोले कि इस्तीफ़ा देना होगा तो नहीं.अभी इस्तीफ़ा नहीं दूंगी. मैं ये कहना चाहती हूं कि हम चुनाव नहीं हारे हैं.''
उन्होंने पश्चिम बंगाल में अपनी पार्टी की हार के लिए चुनाव आयोग को ज़िम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग मुख्य विलेन है.
ममता बनर्जी ने कहा, ''पार्टी सदस्यों के साथ आगे की स्ट्रैटजी पर चर्चा की जाएगी. मैं अब बीजेपी के अत्याचारों को और बर्दाश्त नहीं करूंगी. मैं सड़कों पर लौटूंगी.''
ममता बनर्जी ने कहा, ''इस तरह का चुनाव पहले कभी नहीं देखा. टीएमसी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने हराया. चुनाव जीतने के लिए बीजेपी ने हर हथकंडा अपनाया. चुनाव आयोग बीजेपी का एजेंट बन गया है और सीआरपीएफ़ केंद्र की गुंडा वाहिनी है. बीजेपी ने काउंटिंग सेंटर को हैक कर लिया. ये बंगाल के लिए काला दिन है.''
नतीजे के दिन बनर्जी ने बीजेपी की इस जीत को वोटों की लूट बताया था. उन्होंने पत्रकारों से कहा था, "बीजेपी ने 100 से ज़्यादा सीटों की लूट की है. बीजेपी ने धोखाधड़ी की है. चुनाव आयोग अब बीजेपी आयोग बन गया है. हमने समय-समय पर इसकी शिकायत की है. लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था.''
राहुल गांधी भी बोले

संसद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ममता बनर्जी की इस बात से सहमति जताते हुए बीजेपी पर आरोप लगाए कि इन्हीं तरीक़ों का इस्तेमाल लोकसभा चुनाव 2024 में मध्य प्रदेश, हरियाणा और महाराष्ट्र में किया गया था.
हालांकि राहुल गांधी काफ़ी पहले राज्य में बीजेपी की बढ़ती लोकप्रियता के लिए बनर्जी की सरकार को ज़िम्मेदार ठहरा चुके हैं. साथ ही टीएमसी पर भ्रष्टाचार, हिंसा का आरोप लगाया था.
वहीं टीएमसी ने अपना बचाव करते हुए कहा था कि कांग्रेस अपनी ग़ैरमौजूदगी का ठीकरा टीएमसी पर फोड़ रही है.
राहुल गांधी ने अब एक्स पर पोस्ट किया है, "टीएमसी को हुए नुक़सान पर कांग्रेस और बाहर के कुछ लोग भीतर ही भीतर ख़ुश होते दिख रहे हैं. उन्हें ये साफ़तौर पर समझ लेना चाहिए कि असम और बंगाल में जनादेश की लूट, बीजेपी के भारतीय लोकतंत्र को ख़त्म करने के मिशन की ओर एक बड़ा क़दम है."
"छोटी-मोटी राजनीति को अलग रखिए. ये किसी एक या दूसरी पार्टी के बारे में नहीं है. ये भारत के बारे में है."

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वहीं आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर पोस्ट करके पीएम मोदी की लोकप्रियता पर सवाल उठाए.
उन्होंने लिखा, "जिस दिल्ली और बंगाल को भाजपा 'मोदी वेव' की चरम सीमा पर नहीं जीत पाई. 2015 में दिल्ली में और 2016 में बंगाल में इनकी 3-3 सीट आई. उस दिल्ली और बंगाल को भाजपा ने तब जीत लिया जब मोदी जी की लोकप्रियता पूरे देश में पाताल में जा रही है. कैसे?"
केजरीवाल ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के लिए कैंपेनिंग भी की थी और भारतीय राजनीति में उन्हें 'ढर्रे को तोड़ने वाली' नेता बताया था. हालांकि गोवा जैसे क्षेत्रीय चुनाव में ये आमने-सामने भी थीं.
पश्चिम बंगाल के नतीजों पर समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव ने बीजेपी पर तंज़ कसते हुए कहा, "पश्चिम बंगाल में जब परिणाम मनमर्ज़ी से निकाला गया है तो भाजपाई परंपरा के अनुसार मुख्यमंत्री भी मनमर्ज़ी से ही बनेगा."
"इसीलिए ये विशेष माँग है कि इस बार 'पर्ची' उनके नाम की निकलनी चाहिए जो पौराणिक काल से नारी के प्रति पुरुषवादी नकारात्मक सोच और शोषण की प्रतीक-भूमिका निभा चुकी हैं जिन्हें भारतीय नारी का आदर्श मानने की सलाह लोहिया जी तक ने दी थी. आशा है 'महिला आरक्षण' के संदर्भ में इस पर अमल होगा."
अखिलेश यादव और ममता बनर्जी ने एक-दूसरे की पार्टी को विधानसभा चुनावों में समर्थन दिया है.
वहीं दोनों ही पार्टियां बीजेपी को लोकतंत्र के लिए एक ख़तरे की तरह देखती हैं. 2026 के पश्चिम बंगाल चुनावों में अखिलेश यादव ने केंद्रीय सैन्य बलों पर सत्ता के बेजा इस्तेमाल का आरोप लगाया था.
असदुद्दीन ओवैसी ने की ममता बनर्जी की आलोचना

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दूसरी ओर विपक्षी नेता और एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि "मुसलमानों को तथाकथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियों की जगह ख़ुद का स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व बनाना चाहिए."
असदुद्दीन ओवैसी ने पश्चिम बंगाल चुनाव को जनता का फ़ैसला बताते हुए कहा, "मेरी राय है कि ये तथाकथित सेक्युलर पार्टियां बीजेपी को रोकने में असमर्थ हैं. हमने पहले भी देखा है कि दिल्ली में केजरीवाल, महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे और एनसीपी और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने सॉफ़्ट हिंदुत्व की राजनीति की. इसका परिणाम क्या हुआ. दिल्ली में आम आदमी पार्टी, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सत्ता से चले गए."
"ममता बनर्जी के ख़िलाफ़ एंटी इनकंबेंसी थी. मुसलमानों को ख़ुद का स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व बनाना चाहिए. आपका वोट बेकार हो रहा है क्योंकि आप इन तथाकथित सेक्युलर पार्टियों को वोट दे रहे हैं जो कि सेक्युलर नहीं हैं और बीजेपी को रोकने में नाकाम रही हैं."
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ओवैसी की एआईएमआईएम ने सात सीटों पर चुनाव लड़ा था जिसमें उसे सभी सीटों पर हार का सामना करना पड़ा है.

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टीएमसी की सांसद महुआ मोइत्रा ने एक्स पर पोस्ट किया, "लोगों की इच्छा ही सर्वोच्च है. अगर बंगाल को बीजेपी चाहिए थी तो बंगाल को बीजेपी मिली. हम इसका सम्मान करते हैं."
"हमने एक असमान पिच पर अकल्पनीय बाधाओं के खिलाफ अच्छी लड़ाई लड़ी और इसके लिए मुझे अपने नेता और अपनी पार्टी पर गर्व है. हम एक ऐसे धर्मनिरपेक्ष देश के लिए खड़े रहना और लड़ना जारी रखेंगे जहां क्रूर बहुसंख्यकवाद की नहीं, संविधान की चलेगी."
साल 2024 के लोकसभा चुनावों में केंद्र की मोदी सरकार और बीजेपी के ख़िलाफ़ बने 'इंडिया ब्लॉक' के बड़े चेहरे के तौर पर भी ममता बनर्जी को देखा जा रहा था.
ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने ही लालू प्रसाद यादव और उस समय विपक्षी गुट में रहे नीतीश कुमार को विपक्षी गठबंधन की पहली बैठक पटना में करने की सलाह दी थी.
यह ऐसी सलाह थी, जो मानी भी गई और इंडिया ब्लॉक की पहली बैठक पटना में हुई थी. विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव में हार से ममता बनर्जी के सियासी क़द को लगे झटके का असर राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों की सियासत पर पड़ सकता है.
बीते कुछ साल में कई राज्यों में सत्ता गँवाने के बाद विपक्षी दल केंद्र के स्तर पर कमज़ोर हुए हैं.
हाल के वर्षों में बीजेपी ने क़रीब तीन दशक बाद दिल्ली में सत्ता में वापसी की है. जबकि कुछ ही दिन पहले बिहार में पहली बार सम्राट चौधरी के तौर पर बीजेपी को अपना पहला मुख्यमंत्री मिला है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.



































