शी जिनपिंग की भारत यात्रा और ब्रिक्स 2026 को चीन का मीडिया कैसे देख रहा है

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

इमेज स्रोत, DD News/ANI Video Grab

इमेज कैप्शन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रकाशित
पढ़ने का समय: 6 मिनट

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग दिल्ली पहुंच गए हैं. शी के अलावा इस बैठक में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और अन्य कई देशों के नेता दिल्ली में मौजूद हैं.

यह शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को हो रहा है.

भारत चौथी बार ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी कर रहा है. लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में ब्रिक्स की यह बैठक काफ़ी अहम है.

एक तरफ ईरान युद्ध की वजह से मध्य-पूर्व में हालात काफ़ी जटिल हो गए हैं. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ़ और वैश्विक व्यापार को लेकर रुख़ ने कई देशों के सामने मुश्किलें खड़ी की हैं.

ऐसी स्थिति में चीन ने ख़ुद को अमेरिका के सामने न केवल सैन्य और आर्थिक ताक़त बल्कि बड़े उत्पादक और आपूर्तिकर्ता के तौर पर स्थापित किया है.

जिनपिंग की यह यात्रा गलवान में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई भिड़ंत के बाद पहली भारत यात्रा है.

इसलिए न केवल वैश्विक हालात बल्कि भारत-चीन संबंधों के लिहाज से भी जिनपिंग की यह यात्रा काफ़ी अहम है. ऐसे में भारत ही नहीं कई देशों की नज़र ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर है.

यही नहीं चीन ख़ुद जिनपिंग की भारत यात्रा पर नज़र बनाए हुए है.

'दुनिया चीन के विज़न को सुनने के लिए उत्सुक'

शी जिनपिंग भारत में विमान से उतरते हुए

इमेज स्रोत, ANI Video Grab

इमेज कैप्शन, मौजूदा वैश्विक हालात में शी जिनपिंग दिल्ली में क्या बयान देते हैं, इस पर चीन में भी कई लोगों की नज़र है
छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
Dinbhar: आवाज़ वही, अंदाज़ नया

देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां.

एपिसोड

समाप्त

ग्लोबल टाइम्स ने 'ब्रिक्स के 20 साल: दुनिया चीन के विज़न को सुनने के लिए उत्सुक है' शीर्षक से संपादकीय प्रकाशित की है.

इसमें टिप्पणी की गई है कि दुनिया जितनी अधिक उथल-पुथल और बदलाव से गुजरती है, ब्रिक्स सहयोग की अनूठी अहमियत उतनी ही स्पष्ट होती जाती है.

इसमें कहा गया है कि जैसे-जैसे ब्रिक्स में ज़रूरी सुधार हो रहा है और इसकी क्षमता बढ़ रही है "यह भरोसा बढ़ रहा है कि ब्रिक्स सहयोग में बहुत बड़ी संभावनाएं हैं और इसके देशों का भविष्य उज्ज्वल है."

चाइन डेली ने अपनी एक ख़बर में लिखा, शनिवार से रविवार तक, शी भारत के नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में शामिल होंगे. इस दौरान वह व्यापक ब्रिक्स सहयोग के उच्च गुणवत्ता वाले विकास की दिशा तय करने के लिए प्रमुख चीनी प्रस्ताव और पहल पेश करेंगे.

चाइना डेली ने चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग के एक बयान का ज़िक्र किया है जिसमें उन्होंने कहा कि चीन सभी ब्रिक्स पक्षों के साथ काम करने के लिए तैयार है, ताकि व्यापक सहयोग लगातार आगे बढ़ता रहे और मानवता के साझा भविष्य वाले समुदाय के निर्माण में योगदान दिया जा सके.

वहीं ग्लोबल टाइम्स लिखता है, "शी जिनपिंग मौजूदा हालात में ब्रिक्स के लिए चीन की महत्वपूर्ण पहल और प्रस्ताव पेश करेंगे. इससे व्यापक ब्रिक्स सहयोग के बेहतर विकास की दिशा तय होगी. ऐसे समय में जब ब्रिक्स सहयोग तंत्र अपनी 20वीं वर्षगांठ मना रहा है, दुनिया चीन के विज़न को सुनने के लिए उत्सुक है."

ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक़, "ब्रिक्स देश अलग-अलग क्षेत्रों में हैं. उनका इतिहास, संस्कृति और विकास के रास्ते अलग हैं, फिर भी वे विकास, रणनीतिक स्वायत्तता और वैश्विक शासन में सुधार की साझा आकांक्षाओं को लेकर एक साथ आए हैं."

ग्रेटर ब्रिक्स तक का सफ़र

ब्रिक्स देशों के झंडे

इमेज स्रोत, Sanjeev Verma/Hindustan Times via Getty Images

इमेज कैप्शन, चीनी अख़बारों ने ज़िक्र किया है कि कई देश ब्रिक्स के साथ जुड़ने की इच्छा रखते हैं

चाइना डेली के मुताबिक़ पिछले एक दशक में ब्रिक्स ने सदस्यता और सहयोग के क्षेत्रों विस्तार किया है और आर्थिक स्तर पर तालमेल को आगे बढ़ाकर स्वास्थ्य, व्यापार, तकनीक, इन्नोवेशन और अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग किया है.

चाइना डेली ने लिखा है कि ब्रिक्स देश अब दुनिया की लगभग आधी आबादी, वैश्विक आर्थिक उत्पादन (ग्लोबल इकोनॉमिक आउटपुट) के क़रीब 30 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के एक-चौथाई से अधिक हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं.

वहीं ग्लोबल टाइम्स ने लिखा, "पिछले 20 साल में ब्रिक्स चार देशों से लेकर 'ग्रेटर ब्रिक्स' तक पहुंचा, इसने बांटने और बाधित करने की बाहरी कोशिशों का सामना किया और ग्लोबल साउथ के अग्रणी हिस्से में एक वास्तविक ताक़त के रूप में खड़ा हुआ."

इसमें लिखा है कि आज के पास बड़े प्राकृतिक संसाधन, बड़े कारखाने और विशाल बाज़ार हैं. यह उभरते बाज़ारों और विकासशील देशों के बीच एकजुटता और सहयोग का प्रमुख और सबसे महत्वपूर्ण मंच बन गया है.

ग्लोबल टाइम्स लिखता है, "मौजूदा समय में ऐसे कई बदलाव हुए हैं जो सौ साल में भी नहीं देखे गए. जबकि वर्चस्ववाद और एकतरफावाद को बढ़ावा मिल रहा है. लेकिन दुनिया जितनी अधिक उथल-पुथल और बदलाव से गुजरती है, ब्रिक्स सहयोग की अनूठी अहमियत उतनी ही स्पष्ट होती जाती है. ग्लोबल साउथ के देश सक्रिय रूप से ब्रिक्स के क़रीब आ रहे हैं और यह रुझान लगातार स्पष्ट होता जा रहा है."

अन्य देशों की ब्रिक्स में दिलचस्पी

भारत में ब्रिक्स 2026 के लिए बड़े स्तर पर तैयारी की गई है, यह तस्वीर रेल भवन की है

इमेज स्रोत, Sanjeev Verma/Hindustan Times via Getty Images

इमेज कैप्शन, भारत में ब्रिक्स 2026 के लिए बड़े स्तर पर तैयारी की गई है

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा, "ब्रिक्स के साझेदार देश के रूप में मलेशिया लंबे समय से पूर्ण सदस्य बनने की इच्छा जता रहा है. इराक़, मेडागास्कर और अन्य देशों इसमें शामिल होने या साझेदार देश बनने की इच्छा जताई है. जून में उज्बेकिस्तान आधिकारिक रूप से न्यू डेवलपमेंट बैंक का सदस्य बन गया, जबकि ईरान ने भी घोषणा की है कि वह जल्द ही बैंक में शामिल होगा."

ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक़ बढ़ता "ब्रिक्स फ़ीवर" ग्लोबल साउथ के देशों की उस सामूहिक आकांक्षा को दिखाता है, जिसमें वे समान विकास के अधिकार और अधिक निष्पक्ष व न्यायपूर्ण वैश्विक व्यवस्था की मांग कर रहे हैं.

2027 में ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालने की बारी चीन की होगी.

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, "जैसे-जैसे दुनिया अधिक उथल-पुथल वाली होती जा रही है, शांति, विकास, सहयोग और सभी देशों के लिए फ़ायदे का झंडा थामे रखना, ब्रिक्स के मक़सद को बेहतर करना और उसकी ताक़त दिखाना ज़्यादा महत्वपूर्ण हो गया है."

अख़बार के मुताबिक़ एक ऐसा 'ग्रेटर ब्रिक्स', जो अधिक एकजुट, कुशल, व्यावहारिक हो और अपनी जिम्मेदारियां निभाने के लिए प्रतिबद्ध हो, ग्लोबल साउथ के साझा विकास के लिए निश्चित रूप से नई संभावनाएं खोलेगा.

शिन्हुआ विश्वविद्यालय के बेल्ट एंड रोड इंस्टीट्यूट की वरिष्ठ शोधकर्ता हे यून के एक बयान को चाइन डेली ने जगह दी है, जिसमें उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में ब्रिक्स सहयोग में महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं.

हे यून ने कहा, "चीन का योगदान केवल ग्लोबल साउथ के देशों के बीच सहयोग के लिए विचार और दृष्टिकोण पेश करने तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इन विचारों को संस्थानों, मंचों और परियोजनाओं में बदलने में भी रहा है."

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने लिखा, " चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत के नई दिल्ली पहुंचे हैं."

शिन्हुआ के मुताबिक़ जिनपिंग अन्य नेताओं के साथ व्यापक ब्रिक्स सहयोग के उच्च गुणवत्ता वाले (हाई क्वालिटी) विकास के लिए नई दिशा तय करने, ग्लोबल साउथ की सामूहिक ताक़त को एकजुट करने और गहरे बदलाव से गुज़र रही दुनिया में स्थिरता और सकारात्मक गति देने के लिए काम करेंगे.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें

BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह

कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.