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ईरान के स्कूल पर हमले को लेकर पेंटागन की चुप्पी, पूर्व अमेरिकी अधिकारियों ने उठाए सवाल
- Author, टॉम बेटमैन
- पदनाम, विदेश मंत्रालय
- Author, काई पिगलियुची
- पढ़ने का समय: 9 मिनट
पूर्व शीर्ष सैन्य वकील समेत अमेरिका के पांच पूर्व अधिकारियों ने इस साल की शुरुआत में ईरान के एक स्कूल पर हुए घातक हमले में संभावित अमेरिकी भूमिका को स्वीकार न करने पर पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय) की आलोचना की है.
इनमें से कुछ अधिकारियों ने कहा कि इतने लंबे समय बाद भी हमले की बुनियादी जानकारी तक जारी न करना बेहद असामान्य है.
ईरानी अधिकारियों के मुताबिक़ 28 फ़रवरी को अमेरिका-इसराइल युद्ध की शुरुआती कार्रवाई के दौरान मिनाब में एक प्राइमरी स्कूल पर मिसाइल गिरी, जिसमें क़रीब 110 बच्चों समेत 168 लोगों की मौत हुई.
इसके बाद बीते दो महीनों में पेंटागन ने सिर्फ़ इतना कहा है कि इस घटना की जांच जारी है.
मार्च की शुरुआत में अमेरिकी मीडिया ने ख़बर दी थी कि अमेरिकी सैन्य जांचकर्ताओं का मानना है कि शायद अमेरिकी बल अनजाने में स्कूल पर हमले के लिए ज़िम्मेदार थे, लेकिन वे अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंचे थे.
बीबीसी ने इस हमले और पारदर्शिता की कमी के आरोपों पर कई सवाल पूछे, जिस पर पेंटागन के एक अधिकारी ने कहा, "इस घटना की जांच जारी है."
अधिकारियों ने कहा कि जैसे ही अधिक जानकारी उपलब्ध होगी, साझा की जाएगी.
पेंटागन अब तक देता रहा है जानकारियां
बीबीसी ने तीन पुराने मामलों की समीक्षा की, जिनमें अमेरिकी सैन्य अभियानों के दौरान नागरिकों की मौत हुई थी.
हर मामले में एक महीने से कम समय में पेंटागन ने इससे कहीं अधिक जानकारी जारी की थी.
लेफ्टिनेंट कर्नल रेचल ई वैनलैंडिंगम कहती हैं कि अमेरिका की मौजूदा स्थिति "सामान्य प्रतिक्रिया से साफ़ तौर पर अलग है."
वैनलैंडिंगम अमेरिकी वायुसेना में जज एडवोकेट जनरल रह चुकी हैं. वह इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान युद्धों के दौरान अमेरिकी सेंट्रल कमांड में वरिष्ठ क़ानूनी सलाहकार रह चुकी हैं.
उन्होंने बताया, "पिछली सरकारों ने कम से कम युद्ध क़ानून के प्रति निष्ठा और प्रतिबद्धता दिखाई थी."
उनका कहना था कि मौजूदा प्रशासन के बयानों में जवाबदेही की प्रतिबद्धता "ग़ायब" है और "सबसे अहम यह सुनिश्चित करना भी कि ऐसा दोबारा न हो."
राष्ट्रपति ट्रंप ने 7 मार्च को कहा था कि उनके 'विचार' में मिनाब हमले के लिए ईरान ज़िम्मेदार है, लेकिन उन्होंने कोई सबूत नहीं दिया.
कुछ दिन बाद जब उनसे स्कूल के पास सैन्य अड्डे पर अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइल गिरने का वीडियो दिखाए जाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "मैंने यह नहीं देखा."
साथ ही ट्रंप ने बिना सबूत दावा किया कि ईरान के पास टॉमहॉक मिसाइलें थीं.
11 मार्च को जब उनसे उन ख़बरों के बारे में पूछा गया जिनमें कहा गया था कि शुरुआती सैन्य जांच में पाया गया कि अमेरिका ने स्कूल पर हमला किया था, तो ट्रंप ने कहा, "मुझे इसके बारे में नहीं पता."
अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से 4 मार्च को बीबीसी ने इस हमले पर सवाल किया था. उन्होंने कहा, "मैं सिर्फ़ इतना कह सकता हूं कि हम इसकी जांच कर रहे हैं. हम निश्चित तौर पर नागरिक ठिकानों को निशाना नहीं बनाते."
पूर्व अधिकारी उठा रहे सवाल
अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस हमले पर कई सवालों के जवाब देने से इनकार किया है. उसने बार-बार यह बताने से भी इनकार किया है कि 28 फ़रवरी को स्कूल के पास स्थित ईरानी सैन्य अड्डा पहले से तय लक्ष्यों में शामिल था या नहीं.
युद्ध के दौरान कई अन्य मामलों में अमेरिका ने पहले से तय लक्ष्यों या अभियानों पर सार्वजनिक रूप से बात की है.
पिछले महीने बीबीसी ने स्वतंत्र रूप से उस वीडियो की पुष्टि की थी जिसमें स्कूल के पास ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के अड्डे पर अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइल गिरती दिख रही थी.
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में नाम न बताने वाले सैन्य अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि शुरुआती जांच में तय हुआ था कि अमेरिकी मिसाइल स्कूल पर गिरी.
पेंटागन के सिविलियन प्रोटेक्शन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में सटीक युद्ध और नागरिक क्षति कम करने के पूर्व वरिष्ठ सलाहकार वेस ब्रायंट ने बीबीसी से कहा कि शुरुआती सैन्य जांच आम तौर पर दो बातें तय करने के लिए होती है.
पहली, क्या नागरिक क्षति वास्तव में हुई. दूसरी, क्या उस समय अमेरिका उस इलाक़े में सक्रिय था.
उन्होंने कहा, "जब ये दोनों शर्तें पूरी हो जाती हैं, तभी औपचारिक जांच शुरू की जाती है. प्रक्रिया के लिहाज़ से यह और भी साफ़ संकेत देता है कि वे पहले से जानते हैं कि यह अमेरिका की वजह से हुआ, नहीं तो वे यह जांच नहीं कर रहे होते. वे बस इसे स्वीकार नहीं करना चाहते या इस पर बोलना नहीं चाहते."
ब्रायंट ने कहा, "इस पर कोई टिप्पणी तक न कर पाना पूरी तरह अस्वीकार्य है."
पिछले साल अमेरिका के रक्षा मंत्रालय में नौकरियों में कटौती हुई थी. उस दौरान ब्रायंट की भी नौकरी चली गई थी.
एक अन्य पूर्व रक्षा अधिकारी ने कहा कि हालात की जटिलता की वजह से कई बार आम लोगों को हुए नुक़सान की जांच लंबी खिंच जाती है.
उन्होंने बीबीसी से कहा, "लेकिन यह ऐसा मामला है जिसमें असामान्य रूप से अस्पष्टता है, जबकि स्थिति देखकर मैं कह सकता हूं कि यह इतना जटिल नहीं है."
एक अधिकारी ने नाम न बताने का अनुरोध करते हुए कहा, "आमतौर पर पेंटागन तुरंत ज़िम्मेदारी लेता है और फिर सभी विवरण देने में अधिक समय लेता है. इसलिए मुझे यह चिंताजनक लगता है."
डेमोक्रेट सांसदों ने मांगा जवाब
कांग्रेस में डेमोक्रेट सदस्यों ने हेगसेथ को कई बार पत्र लिखकर मिनाब हमले पर सवाल पूछे हैं. पहला सवाल यही था कि क्या हमला अमेरिका ने किया था.
बीबीसी ने पेंटागन के दो पत्र देखे हैं, जो हेगसेथ की ओर से भेजे गए थे. इनमें किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया गया.
दो अप्रैल को डेमोक्रेट सदस्यों को भेजे गए पत्र में कहा गया कि सेंटकॉम कमान से बाहर के एक जांच अधिकारी की नियुक्ति की गई है और जांच पूरी होने पर नतीजे साझा किए जाएंगे.
बीबीसी ने कांग्रेस के 15 रिपब्लिकन सदस्यों से प्रशासन के इस हमले से निपटने के तरीक़े पर सवाल किए, लेकिन सभी ने टिप्पणी से इनकार किया. इनमें सीनेट और प्रतिनिधि सभा की राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी समितियों के प्रमुख रिपब्लिकन सदस्य भी शामिल थे.
10 मार्च को लुइज़ियाना के रिपब्लिकन सीनेटर जॉन कैनेडी ने इस हमले की निंदा की थी. उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा, "मुझे लगता है हमने ग़लती की. यह बहुत भयानक ग़लती थी."
ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से पेंटागन के अधिकारियों ने कांग्रेस सदस्यों को सैन्य अभियानों को लेकर बंद कमरे में कई बार ब्रीफिंग दी हैं, जिनमें मिनाब हमले से जुड़े भी सवाल पूछे गए थे.
हाउस आर्म्ड सर्विसेज़ कमेटी के शीर्ष डेमोक्रेट एडम स्मिथ ने बीबीसी से कहा कि अधिकारियों ने जवाब दिया कि जारी जांच के कारण वे टिप्पणी नहीं कर सकते. उन्होंने इस जवाब को "दयनीय और पूरी तरह अपर्याप्त" बताया. उनका कहना था कि ब्रीफिंग में अमेरिकी ज़िम्मेदारी स्वीकार नहीं की गई.
बीबीसी ने मिनाब हमले पर ट्रंप प्रशासन की प्रतिक्रिया की तुलना के लिए नागरिक मौतों से जुड़े तीन पुराने मामलों की समीक्षा की.
- अगस्त 2021 में अफ़ग़ानिस्तान के काबुल हवाई अड्डे के पास ड्रोन हमला: पेंटागन ने शुरू में कहा था कि उसने इस्लामिक स्टेट समूह के ख़तरे वाले वाहन को निशाना बनाया. वास्तव में इसमें सात बच्चों समेत 10 लोगों के एक परिवार की मौत हुई थी, जो कुछ ही दिनों में मीडिया रिपोर्टों से स्पष्ट हो गया. बमबारी के तीन सप्ताह से कम समय बाद पेंटागन ने ज़िम्मेदारी स्वीकार की और माफ़ी मांगी.
- अक्तूबर 2015 में अफ़ग़ानिस्तान के कुंदुज़ में अस्पताल पर बमबारी: अमेरिकी एसी-130 हेलीकॉप्टर गनशिप के हमले में कम से कम 42 लोग मारे गए, जिनमें 24 मरीज़ और मेडिकल चैरिटी एमएसएफ के 14 स्वास्थ्यकर्मी शामिल थे. पांच दिन बाद अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी सैन्य बलों के कमांडर ने कांग्रेस में विस्तृत गवाही देते हुए कहा कि हमला "अमेरिकी कमान के भीतर लिया गया अमेरिकी फ़ैसला" था. उसी दिन व्हाइट हाउस ने ग़लती स्वीकार की और माफ़ी मांगी.
- फ़रवरी 1991 में इराक़ के बग़दाद में अल-अमीरियाह शेल्टर पर हमला: अमेरिकी वायुसेना की बमबारी में 408 नागरिक मारे गए. प्रशासन ने कहा था कि बंकर सैन्य कमान केंद्र था और इसलिए वैध लक्ष्य था. बमबारी के तुरंत बाद घटनास्थल पर पहुंचे बीबीसी समेत अन्य पत्रकारों को इसका कोई सबूत नहीं मिला. अमेरिकी प्रशासन ने शुरू से माना था कि नागरिक मारे गए और हमला अमेरिका ने किया था.
अमेरिका को बदलना पड़ा रुख़
इन सभी पुराने मामलों में, चाहे डेमोक्रेट सरकार रही हो या रिपब्लिकन, वरिष्ठ अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से मौजूदा मिनाब मामले की तुलना में कहीं अधिक विस्तृत टिप्पणियां की थीं.
अमेरिकी विदेश विभाग में नागरिक क्षति कम करने के काम से जुड़ी पूर्व अधिकारी एनी शील ने कहा कि पहले के मामलों में एक पैटर्न दिखा, जिसमें अमेरिका ने पहले कहा, "यह हमने नहीं किया," लेकिन बाद में मीडिया और गैर सरकारी संगठनों की रिपोर्टिंग से सामने आया कि हमला अमेरिका ने किया था, और फिर अमेरिका को अपना रुख़ बदलना पड़ा.
शील सेंटर फॉर सिविलियंस इन कॉन्फ्लिक्ट (सिविक) में अमेरिकी एडवोकेसी निदेशक हैं. उन्होंने कहा कि मिनाब मामले में सेंटकॉम से बाहर जांच अधिकारी की नियुक्ति "कम से कम काग़ज़ पर स्वतंत्रता की अच्छी शुरुआत" है.
लेकिन उन्होंने बीबीसी से कहा कि जांच जारी रहने के दौरान भी अगर अमेरिका की कोई भूमिका है तो उसे "निश्चित रूप से" स्वीकार किया जाना चाहिए.
घटना की पुष्टि करने वाले विवरण जुटाने में यह बात भी बाधा बनी कि ईरानी अधिकारियों ने स्वतंत्र पहुंच की अनुमति नहीं दी. ईरान पर संयुक्त राष्ट्र फ़ैक्ट फ़ाइडिंग मिशन ने 17 मार्च को कहा था कि वो मिनाब जाना चाहते थे लेकिन उन्हें वहां जाने की अनुमति नहीं दी गई.
अमेरिकी विदेश विभाग के सुरक्षा और मानवाधिकार कार्यालय के पूर्व निदेशक चार्ल्स ओ ब्लाहा ने कहा कि वॉशिंगटन में पारदर्शिता की कमी की वजह प्रशासन के भीतर राष्ट्रपति का विरोध करने में "हिचक" हो सकती है, क्योंकि राष्ट्रपति ने हमले के लिए ईरान को ज़िम्मेदार ठहराया था.
उन्होंने उस दावे को "बहुत अविश्वसनीय और साफ़ तौर पर ग़लत" बताया.
ब्लाहा ने अमेरिकी विदेश सेवा में 32 साल काम किया है और अब डेमोक्रेसी फ़ॉर द अरब वर्ल्ड नाउ (डॉन) में वरिष्ठ सलाहकार हैं.
उनका कहना था कि मिनाब मामले में अपेक्षाकृत चुप्पी की वजह प्रशासन का वह रवैया है जिसमें युद्ध से जुड़ी "किसी भी नकारात्मक ख़बर को देशभक्ति के ख़िलाफ़ माना जा रहा है.
अतिरिक्त रिपोर्टिंग: कैथरीन अलाइमो
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.