'मुझे मरना पसंद, लेकिन डरपोक जज कहलाना पसंद नहीं ' मुज़फ़्फ़रनगर के जज ने अपने फ़ैसले में ऐसा क्यों कहा, अमित सैनी, मुज़फ़्फ़रनगर से बीबीसी हिन्दी के लिए

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''मैं मरना पसंद करूंगा, लेकिन डरपोक जज कहलाना पसंद नहीं करूंगा.''
यह टिप्पणी मुज़फ़्फ़रनगर के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने उस फैसले में की है, जिसमें उन्होंने आठ साल पुराने एक जघन्य हत्या मामले में दोषी को मृत्युदंड सुनाया है.
जज रवि कुमार दिवाकर ने शाहपुर शहजादी हत्याकांड में उनके पति को फांसी की सजा सुनाते हुए अपने फ़ैसले में ये बात लिखी है.
जज रवि कुमार दिवाकर ने अपने फ़ैसले में बेहद गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के माफ़िया और गैंगस्टर उनसे संपर्क करने की कोशिश कर चुके हैं.
उनके मुताबिक़, उन्हें संदेश भिजवाया गया कि यदि वह उनके मामलों के पीछे पड़े या उनके ख़िलाफ़ टिप्पणी करते रहे तो अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर उनका कोर्ट बदलवा दिया जाएगा या जिले से बाहर ट्रांसफ़र करा दिया जाएगा.
जज दिवाकर ने इस तरह के कथित दबाव की बात करते हुए साफ़ लिखा कि वह डरकर न्यायिक कर्तव्यों से पीछे हटने वाले नहीं हैं
उन्होंने कहा कि यदि कोई जज बाहुबलियों, माफिया या अपराधियों के दबाव और भय में काम करने लगे तो आम जनता का न्यायपालिका पर विश्वास कमजोर हो जाएगा.
जज रवि कुमार दिवाकर पिछले कुछ समय से अपने फ़ैसलों को लेकर लगातार चर्चा में रहे हैं.






