स्मार्ट ग्लास यूज़र्स की सेक्स रिकॉर्डिंग को लेकर घिरी फ़ेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा, अब सफ़ाई देने का दबाव बढ़ा

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- Author, क्रिस वैलांस
- पदनाम, सीनियर टेक्नॉलाजी रिपोर्टर
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
एआई को ट्रेन करने वाली कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने के बाद फ़ेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा विवादों के घेरे में आ गई है.
मेटा ने कॉटन्ट्रैक्ट रद्द करने का फैसला तब लिया जब कीनिया में काम कर रहे कुछ कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें मेटा के स्मार्ट ग्लासेज़ से रिकॉर्ड किए गए आपत्तिजनक और बेहद निजी वीडियो देखने पर मजबूर होना पड़ा.
बीते फ़रवरी में कंपनी 'समा' के कर्मचारियों ने दो स्वीडिश अख़बारों को बताया था कि उन्होंने स्मार्ट ग्लासेज़ इस्तेमाल करने वाले लोगों को टॉयलेट जाते और सेक्स करते हुए हुई रिकॉर्डिंग को देखा.
करीब दो महीने से भी कम समय बाद मेटा ने समा के साथ अपना कॉन्ट्रैक्ट ख़त्म कर दिया. समा ने कहा कि इसके चलते 1,108 कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है.
उधर, मेटा का कहना है कि समा उसके मानकों पर खरी नहीं उतरी, लेकिन कंपनी ने इस आरोप को ख़ारिज किया है. कीनिया के एक ट्रेड यूनियन ने आरोप लगाया है कि कर्मचारियों के खुलकर सामने आने के कारण मेटा ने ये फ़ैसला लिया.
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मेटा ने इस आरोप पर सीधे जवाब नहीं दिया, लेकिन बीबीसी न्यूज़ को दिए बयान में कहा, "हमने समा के साथ कॉन्ट्रैक्ट ख़त्म करने का फ़ैसला किया क्योंकि वह हमारे मानकों पर खरी नहीं उतरी."
सामा ने अपने काम का बचाव किया है.
कंपनी ने बयान में कहा, "समा ने मेटा समेत अपने सभी क्लाइंट्स के साथ लगातार संचालन, सुरक्षा और गुणवत्ता से जुड़े ज़रूरी मानकों को पूरा किया है."
"हमें कभी यह नहीं बताया गया कि हम इन मानकों को पूरा करने में विफल रहे हैं और हम अपने काम की गुणवत्ता और ईमानदारी के साथ मज़बूती से खड़े हैं."
क्या हैं आरोप

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फ़रवरी के आख़िर में स्वीडिश अख़बार स्वेन्स्का डागब्लाडेट और गोटेबोर्ग्स-पोस्टेन ने एक जांच रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें उन कर्मचारियों के बयान शामिल थे जिन्हें मेटा के ग्लासेज़ से रिकॉर्ड किए गए वीडियो देखने के लिए कहा गया था.
एक कर्मचारी ने कथित तौर पर कहा, "हम सब कुछ देखते हैं. लिविंग रूम से लेकर नग्न शरीर तक."
रिपोर्ट प्रकाशित होने के समय मेटा ने माना था कि जब लोग मेटा एआई के साथ कंटेंट साझा करते हैं, तब कभी-कभी उसके सबकॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारी स्मार्ट ग्लासेज़ से रिकॉर्ड किया गया कंटेंट देख सकते हैं.
कंपनी ने कहा था कि ऐसा ग्राहकों का एक्सपीरियंस बेहतर बनाने के लिए किया जाता है और दूसरी कंपनियां भी ऐसा करती हैं.
हालांकि इन जानकारियों के सामने आने के बाद नियामक संस्थाओं ने कार्रवाई शुरू कर दी.
स्वीडिश जांच रिपोर्ट के तुरंत बाद, ब्रिटेन की डेटा निगरानी संस्था इंफ़ॉर्मेशन कमिश्नर्स ऑफ़िस (आईसीओ) ने मेटा को पत्र लिखा और रिपोर्ट को 'चिंताजनक' बताया.
कीनिया के डेटा प्रोटेक्शन कमिश्नर के दफ़्तर ने भी एलान किया कि वह स्मार्ट ग्लासेज़ को लेकर उठी निजता संबंधी चिंताओं की जांच शुरू कर रहा है.
नौकरी जाने की ख़बरों पर प्रतिक्रिया देते हुए मेटा के प्रवक्ता ने बीबीसी से कहा, "पिछले महीने हमने इन आरोपों की जांच के दौरान समा के साथ अपना कॉन्ट्रैक्ट रोक दिया था."
"हम इन मामलों को गंभीरता से लेते हैं. फ़ोटो और वीडियो, यूज़र्स के निजी होते हैं. इंसान एआई कंटेंट की समीक्षा इसलिए करते हैं ताकि प्रोडक्ट का प्रदर्शन बेहतर हो सके, जिसके लिए हम यूज़र्स की स्पष्ट सहमति लेते हैं."
'गोपनीयता के मानक'

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सितंबर में मेटा ने रे-बैन और ओकली ब्रांड्स के साथ साझेदारी में एआई आधारित स्मार्ट ग्लासेज़ की नई रेंज पेश की थी.
इन फ़ीचर्स में टेक्स्ट का अनुवाद करना या यूज़र जो देख रहा है उससे जुड़े सवालों का जवाब देना शामिल है. यह ख़ासतौर पर दृष्टिबाधित या आंख की कम रोशनी वाले लोगों के लिए उपयोगी माना जाता है.
हालांकि जैसे-जैसे इन उपकरणों की लोकप्रियता बढ़ी, वैसे-वैसे इनके ग़लत इस्तेमाल को लेकर चिंताएं भी बढ़ीं.
स्वीडिश अख़बारों से बात करने वाले कर्मचारी डेटा एनोटेटर थे, जो कंटेंट को मैन्युअली लेबल करके मेटा के एआई को तस्वीरों को समझना सिखाते थे.
कर्मचारियों ने कहा कि वे एआई के साथ हुई बातचीत के ट्रांसक्रिप्ट भी देखते थे ताकि यह जांच सकें कि एआई ने सवालों के सही जवाब दिए या नहीं.
एक मामले में एक कर्मचारी ने अख़बारों को बताया कि एक आदमी के ग्लासेज़ बेडरूम में रिकॉर्डिंग मोड में छूट गए थे, और कथित तौर पर उनकी पत्नी का कपड़ा बदलना रिकॉर्ड हो गया.
मेटा के ग्लासेज़ के फ़्रेम के कोने में एक लाइट जलती है, जो यह दिखाती है कि कैमरा रिकॉर्डिंग कर रहा है.
लेकिन इन ग्लासेज़ के ग़लत इस्तेमाल को कीनिया में महिलाओं की बिना सहमति रिकॉर्डिंग से भी जोड़ा गया है.
पहले भी विवाद

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अमेरिका स्थित आउटसोर्सिंग कंपनी समा की शुरुआत एक गैर-लाभकारी संगठन के तौर पर हुई थी. इसका मक़सद टेक जॉब्स के ज़रिए रोज़गार बढ़ाना था. अब यह खुद को एक "एथिकल" बी-कॉर्प (बी कॉरपोरेशन का सर्टिफ़िकेट) बताती है.
हालांकि मेटा के साथ किसी कॉन्ट्रैक्ट को लेकर विवाद का यह पहला मामला नहीं है.
इससे पहले फ़ेसबुक पोस्ट मॉडरेशन से जुड़ा एक समझौता भी विवादों में रहा था.
उस मामले में पूर्व कर्मचारियों ने क़ानूनी कार्रवाई की थी और कुछ ने कहा था कि उन्हें बेहद हिंसक और मानसिक रूप से परेशान करने वाला कंटेंट देखना पड़ा.
बाद में समा ने कहा था कि उसे यह काम लेने का 'अफ़सोस' है.
उस मामले में चल रही क़ानूनी कार्रवाई में याचिकाकर्ता अफ़्रीका टेक वर्कर्स मूवमेंट के नफ़्ताली वाम्बालो ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने स्मार्ट ग्लासेज़ कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े कर्मचारियों से भी बात की है.
वाम्बालो का मानना है कि मेटा ने कॉन्ट्रैक्ट इसलिए ख़त्म किया क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि कर्मचारी यह बात सार्वजनिक कर दें कि स्मार्ट ग्लासेज़ से रिकॉर्ड किए गए कंटेंट की समीक्षा, कभी कभी इंसान भी कर सकते हैं.
उन्होंने बीबीसी न्यूज़ से कहा, "मुझे लगता है कि जिन मानकों की यहां बात हो रही है, वे दरअसल गोपनीयता के मानक हैं."
बीबीसी ने इस मुद्दे पर जवाब के लिए मेटा से संपर्क किया है.
टेक कंपनी पहले कह चुकी है कि उसकी सेवा शर्तों में यूज़र्स को इंसानी समीक्षा की संभावना के बारे में बताया गया था.
याचिकाकर्ताओं की वकील और अभियान समूह ओवरसाइट लैब की एग्ज़िक्यूटिव डायरेक्टर मर्सी मुतेमी ने कहा कि मेटा का बयान केन्या सरकार के लिए ख़तरे की घंटी होनी चाहिए.
उन्होंने बीबीसी से कहा, "हमें बताया गया था कि यही एआई इकोसिस्टम में प्रवेश का रास्ता है. लेकिन पूरे उद्योग की नींव रखने के लिए यह बेहद कमज़ोर आधार है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित































