इससे पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का विरोध प्रदर्शन जंतर-मंतर पर जारी है और इसी दौरान कांग्रेस के सांसदों ने राहुल गांधी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री आवास '7 लोक कल्याण मार्ग' के बाहर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है.
कांग्रेस सांसदों की मांग है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफ़ा दें.
अब से थोड़ी देर पहले पीएम आवास के पास धरना दे रहे राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेताओं से मिलने केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह पहुँचे हैं.
सोमवार को संसद चलो मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया था जिसमें कई युवा घायल हुए थे.
एनसीपी नेता शरद पवार पहुंचे जंतर-मंतर, सीजेपी ने ये बताया
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इमेज कैप्शन, जंतर-मंतर पर शरद पवार और अभिजीत दीपके
एनसीपी-एससीपी नेता शरद पवार मंगलवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे. यहां उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग कर रहे अभिजीत दीपके और अन्य स्टूडेंट्स से मुलाक़ात की.
कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके ने एक्स पर एक पोस्ट में बताया, "एनसीपी (एससीपी गुट) के प्रमुख और वरिष्ठ सांसद शरद पवार जंतर-मंतर पहुंचे. उन्होंने सोमवार को दिल्ली पुलिस की बर्बर हिंसा के बाद प्रदर्शनकारियों का हाल-चाल जाना."
उन्होंने लिखा, "मुश्किल समय में स्टूडेंट्स का साथ देने के लिए मैं पवार सर का शुक्रिया अदा करता हूँ."
कॉकरोच जनता पार्टी ने अपने प्रदर्शन के दौरान सोमवार को संसद मार्च की घोषणा की थी. इस सिलसिले में जब स्टूडेंट्स संसद की ओर बढ़े तो उनकी पुलिस के साथ झड़प भी हुई. इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े.
इसमें कई स्टूडेंट घायल भी हुए हैं. इस कार्रवाई के बाद विपक्षी दल भी सरकार पर हमलावर हैं और उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने की मांग में अपना दबाव बढ़ा दिया है.
विजेता दहिया को कॉकरोच जनता पार्टी ने प्रवक्ता पद से हटाया
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इमेज कैप्शन, विजेता दहिया को एक वीडियो जारी होने के बाद सीजेपी के प्रवक्ता पद से हटा दिया गया है
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने एक्स पर एक पोस्ट में बताया है कि विजेता दहिया को प्रवक्ता के पद से हटा दिया गया है.
सीजेपी ने लिखा, ''हम अपने प्रवक्ता विजेता दहिया के बेहद असंवेदनशील व्यवहार की कड़ी निंदा करते हैं. जब शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी और हमारी टीम पुलिस की बर्बर हिंसा का सामना कर रही थी, उस वक़्त उन्होंने वीडियो जारी किया."
"ऐसा व्यवहार स्वीकार्य नहीं है, यह समझदारी की पूरी कमी को दर्शाता है और हमारे आंदोलन के मूल्यों और सिद्धांतों के पूरी तरह ख़िलाफ़ है.''
सीजेपी ने बताया है कि विजेता दहिया को प्रवक्ता के साथ ही अन्य सभी आधिकारिक ज़िम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया है.
इससे पहले विजेता दहिया का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर कई लोगों ने साझा किया है, जिसमें वो बर्गर खाते हुए कई तरह की टिप्पणी की.
वह वीडियो में कह रहे हैं, "यह प्रोटेस्ट कोई नौकरी नहीं है, मुझे वोट देकर नहीं चुना गया है. मेरी किसी के प्रति ज़िम्मेदारी नहीं है. मैं बर्गर खाउंगा."
हालांकि बीबीसी इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सकता.
कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने 'क़ानूनी कार्रवाई का सामना' कर रहे युवाओं के बारे में ये कहा
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इमेज कैप्शन, सोमवार को युवाओं के संसद मार्च को रोकने के लिए पुलिस ने बलप्रयोग भी किया
कांग्रेस पार्टी ने अपनी लीगल टीम को निर्देश दिया है कि वे जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन और संसद मार्च के दौरान क़ानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे युवाओं की हर संभव मदद करे.
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा है कि इस दौरान, "गिरफ़्तार, हिरासत में लिए गए और हमले का शिकार युवाओं को हर संभव मदद के लिए निर्देश दिए गए हैं."
जयराम रमेश ने इस पोस्ट में कई ई-मेल आईडी और साथ ही एक गूगल लिंक भी शेयर किया है, जिसके ज़रिए कांग्रेस पार्टी की लीगल टीम से मदद मांगी जा सकती है.
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इमेज कैप्शन, युवाओं को रोकने के लिए लाठीचार्ज करती पुलिस
इससे पहले आम आदमी पार्टी ने भी ऐसी पहल की और प्रदर्शन के दौरान घायल या क़ानूनी कार्रवाई का शिकार हुए युवाओं को हर संभव मदद देने का वादा किया.
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर लिखा, ''कल बच्चों के साथ जो बर्बरता हुई, वह बेहद शर्मनाक है. अगर किसी बच्चे को क़ानूनी या मेडिकल मदद की ज़रूरत हो, तो इस नंबर पर मैसेज करें.''
केजरीवाल ने लिखा, "हम आपको बेहतरीन क़ानूनी टीम उपलब्ध कराएंगे. हम सब एक हैं. आप सभी हमारे बच्चे हैं. आपको बिल्कुल भी घबराने की ज़रूरत नहीं है, हम आपके साथ हैं. हम मिलकर यह लड़ाई लड़ेंगे."
असदुद्दीन ओवैसी ने स्टूडेंट्स के प्रदर्शन पर कार्रवाई की तुलना इन आंदोलनों से की
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इमेज कैप्शन, असदुद्दीन ओवैसी का कहना है कि सरकार को पहले ही प्रदर्शकारियों से बात करनी थी
एआईएमआईएम के प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि सोमवार को जो कुछ भी हुआ है, वह सरकार का लगातार चला आ रहा व्यवहार है.
उन्होंने कहा, "जब वकीलों का प्रदर्शन हुआ तब भी इस तरह कुप्रबंधन किया गया, जब किसानों का प्रदर्शन हुआ तो लाल क़िले में इसे तरह का कुप्रबंधन किया गया.''
ओवैसी ने कहा, ''आप लोग भूल रहे हैं सीएए के प्रदर्शन के वीडियो को चलाइए, जब जामिया मिल्लिया इस्लामिया में लाइब्रेरी और कैंटीन में घुसकर स्टूडेंट्स को मारा गया, उसमें एक लड़के की आंख चली गई.''
असदुद्दीन ओवैसी का कहना है कि कई हफ़्तों से प्रदर्शन के बावजूद भी सरकार ने सोमवार को प्रदर्शकारियों से बात की, जबकि ऐसा पहले ही होना चाहिए था.
ओवैसी ने कहा, ''जिसके पास दिल होगा और थोड़ा सा दिमाग़ होगा, वो देखेगा कि छात्रों के साथ किस तरह की मारपीट की गई है...''
नरेंद्र मोदी सरकार के ख़िलाफ़ सोमवार को बड़े पैमाने पर युवाओं का ग़ुस्सा सड़कों पर दिखा.
हज़ारों की संख्या में सड़कों पर उतरे युवा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर संसद की तरफ़ मार्च कर रहे थे.
इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें भी हुईं. इसमें दर्जनों की संख्या में प्रदर्शनकारी ज़ख़्मी भी हुए हैं.
सीजेपी प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर बोले दिलजीत दोसांझ- मुझे एंटी नेशनल कहा जाएगा
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इमेज कैप्शन, दिलजीत दोसांझ ने कहा है कि स्टूडेंट्स के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए था, प्रशासन को उनकी मांगें सुननी चाहिए (फ़ाइल फ़ोटो)
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनकारियों पर सोमवार को हुई पुलिस कार्रवाई पर पंजाबी गायक दिलजीत दोसांझ ने प्रतिक्रिया दी है.
दिलजीत दोसांझ ने कहा कि स्टूडेंट्स के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए था, प्रशासन को उनकी मांगें सुननी चाहिए.
उन्होंने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा, "आज (सोमवार) जो हुआ, वह बहुत ग़लत था. स्टूडेंट्स के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए था. मैं प्रशासन से अपील करता हूँ कि वे स्टूडेंट्स की मांगें सुनें. लोगों की आवाज़ ही रब की आवाज़ होती है."
उन्होंने आगे लिखा, "मुझे पहले भी कई बार एंटी नेशनल कहा जा चुका है. अब भी मुझे एंटी नेशनल कहा जाएगा. किसान आंदोलन के बाद मुझे काफ़ी विरोध और क़ानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ा. मैं उस बारे में बात भी नहीं करना चाहता."
स्टूडेंट्स के पक्ष में अब तक अभिनेता सोनू सूद, रितेश देशमुख, रणवीर शौरी, अभिनेत्री जेनेलिया और भूमि पेडनेकर समेत कई सेलेब्स ने बयान जारी किया है.
सोनम वांगचुक को मेदांता शिफ्ट करने का दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश
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इमेज कैप्शन, सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देकर अनशन स्थल से उठाकर सफ़दरजंग हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया था (फ़ाइल फ़ोटो)
दिल्ली हाई कोर्ट ने सोनम वांगचुक को मेदांता हॉस्पिटल में शिफ़्ट करने की अनुमति दे दी है.
वांगचुक की ओर से उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो ने रविवार को दिल्ली हाई कोर्ट में इसके लिए याचिका दायर की थी.
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, "माननीय दिल्ली हाई कोर्ट का मेरा दिल से आभार कि उसने सोनम वांगचुक को हमारी पसंद के अस्पताल मेदांता में भर्ती करने के पक्ष में आदेश दिया."
"मैं अखिल सिब्बल, बहुली शर्मा और उनकी पूरी टीम को भी दिल से धन्यवाद देती हूं, जिन्होंने बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद रिकॉर्ड समय में यह कानूनी जीत हासिल की."
इससे पहले गीतांजलि जे अंगमो की ओर से रविवार को एक याचिका दाखिल की गई थी, जिसे रविवार होने के बावजूद हाई कोर्ट ने तुरंत सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया था. लेकिन उस दिन हाई कोर्ट ने इस मामले पर कोई अंतरिम आदेश देने से मना कर दिया था.
हाई कोर्ट ने तीन दिन में स्टेटस रिपोर्ट दाख़िल करने को कहा था.
नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के ख़िलाफ़ शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे थे. लेकिन शनिवार की सुबह उन्हें पुलिस ने वहाँ से हटा दिया था.
अभी तक बीबीसी संवाददाता रौनक भैड़ा आप तक ख़बरें पहुंचा रहे थे. अब बीबीसी संवाददाता चंदन कुमार जजवाड़े रात दस बजे तक आप तक ताज़ा ख़बरें पहुंचाएंगी.
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राहुल गांधी बोले- पीएम मोदी माफ़ी मांगें और इस्तीफ़ा दें
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इमेज कैप्शन, राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के मुद्दों पर संसद में चर्चा कराने से बच रही है
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सीजेपी प्रदर्शन में शामिल छात्रों के साथ हुई मारपीट के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफ़ी की मांग की है.
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के मुद्दों पर संसद में चर्चा कराने से बच रही है.
संसद परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने कहा, "हमने लोकसभा स्पीकर से मुलाक़ात कर संसद में छात्रों के मुद्दों पर चर्चा करने की मांग की. लेकिन लोकसभा स्पीकर ने कहा है कि चर्चा करवाने के लिए उन्हें सरकार से 'परमिशन' लेनी होगी."
उन्होंने कहा, "ये छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है, जिन्हें मारा-पीटा जा रहा है, जो ठीक नहीं है. नरेंद्र मोदी ने इसके लिए माफ़ी तक नहीं मांगी है. ये युवा देश की ध्वस्त हो चुकी शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं."
राहुल गांधी ने कहा, "प्रधानमंत्री चुप क्यों हैं? उन्हें छात्रों से माफ़ी मांगनी चाहिए और छात्रों की पिटाई का यह सिलसिला बंद करना चाहिए."
उन्होंने कहा, "धर्मेंद्र प्रधान ने इन छात्रों की पिटाई नहीं की है, गृह मंत्री ने की है. उन्हें इस्तीफ़ा देना चाहिए. गृह मंत्री प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करते हैं, उन्हें इस्तीफ़ा देना चाहिए."
इसके बाद राहुल गांधी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध मार्च के दौरान घायल हुए लोगों से मुलाक़ात करने के लिए राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल भी पहुंचे.
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सीजेपी के घायल प्रदर्शनकारियों का इलाज कर रहे डॉक्टरों के साथ जेपी नड्डा ने की बैठक
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इमेज कैप्शन, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने घायल सीजेपी प्रदर्शनकारियों का इलाज कर रहे डॉक्टरों के साथ बैठक की (फ़ाइल फ़ोटो)
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मंगलवार को दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल का दौरा किया.
इस दौरान उन्होंने अस्पताल में भर्ती कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध मार्च के दौरान घायल हुए लोगों का इलाज कर रहे डॉक्टरों के साथ बैठक की.
दरअसल, सोमवार को सीजेपी के 'संसद मार्च' के दौरान पुलिस कार्रवाई में घायल हुए कई लोगों को इलाज के लिए आरएमएल अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और दीपेंद्र हुड्डा भी आरएमएल अस्पताल पहुंचे हैं.
वहीं, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने समर्थकों से माफ़ी मांगी है. उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से प्रदर्शनकारियों को बचाने के लिए वह और बेहतर प्रयास कर सकते थे.
सीजेपी प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर एमनेस्टी इंटरनेशनल ने ये कहा
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इमेज कैप्शन, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इन आरोपों की जांच करने की अपील की है (फ़ोटो: प्रदर्शनकारी और पुलिस)
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनकारियों पर सोमवार को हुए लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल को लेकर एमनेस्टी इंटरनेशनल ने चिंता जताई है.
मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि भारत में शांतिपूर्ण विरोध की आवाज़ को दबाया जा रहा है और प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ बल का अनुचित इस्तेमाल किया गया है.
एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के बोर्ड चेयरपर्सन आकार पटेल ने कहा, “जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से सामने आई तस्वीरें और रिपोर्ट दिखाती हैं कि भारत में शांतिपूर्ण विरोध की आवाज़ को दबाया जा रहा है."
"ख़बरों के अनुसार, पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ बल का अनुचित इस्तेमाल किया और उन्हें संसद तक पहुँचने से रोकने के लिए बैरिकेड लगाए. अधिकारियों ने मेट्रो सेवाएँ और मोबाइल इंटरनेट भी बंद कर दिए, जिससे शांतिपूर्ण तरीक़े से इकट्ठा होने के अधिकार पर और रोक लगी.”
उन्होंने आगे कहा, “अधिकारियों की भूमिका शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की सुरक्षा करना और उन्हें आसान बनाना है, न कि उन्हें दबाना. शांतिपूर्ण तरीक़े से इकट्ठा होने की आज़ादी का अधिकार अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानून और भारतीय संविधान में मान्यता प्राप्त है.”
एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार नियमों के हिसाब से सही, ज़रूरी और सीमित कार्रवाई की.
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा, "हम दिल्ली पुलिस से अपील करते हैं कि वह धैर्य रखें और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के ख़िलाफ़ ग़लत तरीक़े से बल का इस्तेमाल तुरंत बंद करें. अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पुलिसकर्मियों पर डंडे चलाने, आंसू गैस छोड़ने और पत्थर फेंकने जैसे आरोपों की जल्द, निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की जाए.”
इससे पहले ह्यूमन राइट्स वॉच ने भी चिंता इस पर जताई थी. संगठन ने भारतीय अधिकारियों से पुलिस कार्रवाई की जांच कराने और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों की रक्षा करने की अपील की है.
मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी ने सीजेपी प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर क्या कहा
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इमेज कैप्शन, मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी ने पुलिस कार्रवाई की निंदा की (फ़ाइल फ़ोटो)
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सीजेपी प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा संसद में उठाया है.
मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में कहा कि जो छात्र पेपर लीक के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहे हैं, उन्हें पीटना निंदनीय घटना है.
उन्होंने कहा, "हमारे देश के हज़ारों छात्र पेपर लीक के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहे हैं. लेकिन इस सरकार ने उनके ऊपर लाठीचार्ज करवाया. उन्हें मारा-पीटा गया और उनके ऊपर आंसू गैस के गोले दागे गए. ये बहुत ही निंदनीय घटना है."
प्रियंका गांधी ने सदन के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि पीएम मोदी 'एंटी यूथ' हैं.
उन्होंने कहा, "ये सदन उन्हीं युवाओं का है, जिन्हें आप बाहर रोक रहे हैं, जिन पर लाठीचार्ज कर रहे हैं और आंसू गैस छोड़ रहे हैं. हमें उन्होंने ही सदन पहुंचाया है."
प्रियंका गांधी ने कहा, "मोदी जी एंटी यूथ हैं, एंटी ग़रीब हैं और एंटी किसान हैं. 12 साल हो गए हैं आप सब देख रहे हैं. बच्चों की आवाज़ आप सुन लीजिए और मंत्री से इस्तीफ़ा दिलवाइए. एक ज़माना था जब मंत्री ज़िम्मेदारी लेते थे. आप भी ज़िम्मेदारी लीजिए और सिस्टम को दुरुस्त करिए."
भारत ने रूस के राजनयिक को किया तलब, हमले में चार भारतीयों की मौत पर ये कहा
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इमेज कैप्शन, ओडेसा बंदरगाह से रवाना होते समय एमवी गोल्डन लियो पर हमला हुआ था (सांकेतिक तस्वीर)
कार्गो शिपएमवी गोल्डन लियो पर हुए हमले में चार भारतीयों की मौत के मामले में भारत सरकार ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित रूसी दूतावास के प्रभारी को तलब किया है.
मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के हमले अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा, स्थिरता और विश्वसनीयता को कमजोर करते हैं.
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में बताया, "आज रूसी दूतावास के प्रभारी (चार्ज द’अफ़ेयर्स) व्लादिमीर लादानोव को विदेश मंत्रालय में समन किया गया. मंत्रालय ने 19 जुलाई 2026 को वाणिज्यिक जहाज़ एमवी गोल्डन लियो पर हुए हमले पर भारत की गंभीर चिंता जताई और सख़्त निंदा की. इस हमले में चार भारतीयों की दुखद मौत हुई."
मंत्रालय ने ज़ोर देकर कहा कि ऐसे हमले अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा, स्थिरता और भरोसे को कमजोर करते हैं."
मंत्रालय ने बताया, "रूसी दूतावास के प्रभारी से कहा गया कि वे अपनी सरकार तक भारत की गंभीर चिंता पहुंचाएं. वाणिज्यिक जहाज़ों को निशाना बनाना और निर्दोष नागरिकों की जान जाना अस्वीकार्य है और इसे रोका जाना चाहिए."
इससे पहले सोमवार को विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी थी कि 19 जुलाई को ओडेसा बंदरगाह से रवाना होते समय एमवी गोल्डन लियो पर हमला हुआ था.
इस हमले में चार भारतीयों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य भारतीय नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गया. भारत सरकार ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए हमले की कड़ी निंदा की थी.
पीएम मोदी ने नीट पेपर लीक पर क्या कहा, किरेन रिजिजू ने बताया
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इमेज कैप्शन, एनडीए सांसदों की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार का पक्ष रखा (फ़ाइल फ़ोटो)
मॉनसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को एनडीए सांसदों के 'मंगल मिलन' में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार का पक्ष रखा.
बैठक के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मीडिया को प्रधानमंत्री के संबोधन की जानकारी दी.
किरेन रिजिजू ने कहा, "नीट परीक्षा के बारे में प्रधानमंत्री ने बताया कि गड़बड़ी की ख़बरें मिलने पर सरकार ने तुरंत कार्रवाई की, तेरह लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया."
रिजिजू ने बताया, "इसके अलावा, पीएम मोदी ने कहा कि छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए, बिना किसी देरी के दोबारा परीक्षा कराई गई और नतीजे घोषित किए गए. उन्होंने पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए जा रहे कड़े कदमों के बारे में भी बताया."
पीएम मोदी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब कॉकरोच जनता पार्टी पेपर लीक के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर रही है.
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सिक्किम सुरंग हादसा: आठ शव बरामद, 25 श्रमिकों के फंसे होने की आशंका, दिलीप कुमार शर्मा, गुवाहाटी से बीबीसी हिन्दी के लिए
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इमेज कैप्शन, हादसा सोमवार को हुए भूस्खलन के बाद हुआ, जब सुरंग का एक हिस्सा ढह गया और अंदर जाने वाला रास्ता मलबे से बंद हो गया
सिक्किम के नामची ज़िले के समरडुंग में निर्माणाधीन सुरंग में हुए हादसे के बाद अब तक 8 शव बरामद किए गए हैं.
यह सुरंग एनएचपीसी की तीस्ता जल विद्युत परियोजना (छठे चरण) का हिस्सा है.
नामची की जिला उपायुक्त अनुपा तामलिंग ने हादसे में लोगों की मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि सुरंग के अंदर फंसे श्रमिकों को निकालने के लिए एनडीआरएफ और अग्निशमन विभाग की टीमें अभियान चला रही हैं.
दरअसल, यह हादसा सोमवार को हुए भूस्खलन के बाद हुआ, जब सुरंग का एक हिस्सा ढह गया और अंदर जाने वाला रास्ता मलबे से बंद हो गया. प्रशासन के मुताबिक, सुरंग में गैस रिसाव के कारण बचाव अभियान में कई चुनौतियां आ रही हैं.
ज़िला उपायुक्त ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताया, "संबंधित विभागों से मिली जानकारी के अनुसार, सुरंग के अंदर कम से कम 25 लोगों के फंसे होने की आशंका है. बचाव दल लगातार अंदर फंसे श्रमिकों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं."
अनुपा तामलिंग ने बताया कि सुरंग के अंदर फंसे श्रमिक काफी गहराई में हैं और वहां ऑक्सीजन की कमी के साथ-साथ गैस रिसाव की समस्या भी बनी हुई है. उन्होंने कहा कि बचाव दल पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियां बेहद कठिन हैं.
बचाव अभियान में एनडीआरएफ के अलावा एसडीआरएफ, सिक्किम पुलिस, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं, स्वास्थ्य विभाग और अन्य विभागों की टीमें भी जुटी हुई हैं.
किसान महापंचायत से पहले शंभू बॉर्डर पर सख्ती, सरवन सिंह पंढेर ने क्या कहा
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इमेज कैप्शन, शंभू बॉर्डर पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात
पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू बॉर्डर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. यहां भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है.
इसके अलावा बैरिकेड लगाए गए हैं और घग्गर नदी पर बने पुल पर सीमेंट के ब्लॉक रखे गए हैं.
पंजाब के किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने मंगलवार सुबह शंभू बॉर्डर पर किसानों को रोके जाने को लेकर हरियाणा सरकार पर निशाना साधा.
उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के ख़िलाफ़ होने वाली किसान महापंचायत में शामिल होने जा रहे किसानों को रोकने के लिए शंभू बॉर्डर पर बैरिकेड लगाए गए हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, दिल्ली के किसान घाट पर "देश बचाओ मोर्चा" के बैनर तले प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के ख़िलाफ़ एक दिन की किसान महापंचायत आयोजित की गई है. किसान नेताओं ने कहा था कि पंजाब, हरियाणा समेत कई राज्यों से किसान इस महापंचायत में शामिल होंगे.
पंजाब के कई इलाकों के किसानों ने बसों के जरिए दिल्ली जाने की तैयारी की है. सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि किसान शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली जाना चाहते हैं, लेकिन हरियाणा सरकार उन्हें शंभू बॉर्डर पर रोक रही है.
फ़तेहगढ़ साहिब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए पंढेर ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर भी निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि शंभू बॉर्डर पर किसानों को रोकने से मुख्यमंत्री का 'असली चेहरा' सामने आ गया है, जबकि वह अक्सर पंजाब आकर लोगों से बड़े-बड़े वादे करते हैं.
पंढेर ने कहा, "किसान चाहते हैं कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को पूरी तरह रद्द किया जाए. शंभू बॉर्डर पहुंचने के बाद अन्य किसान नेताओं से बातचीत कर आगे की रणनीति तय की जाएगी."
वहीं, सोमवार को भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के प्रमुख गुरनाम सिंह चढूनी को पुलिस ने कुरुक्षेत्र में हिरासत में ले लिया था. वह किसान महापंचायत में शामिल होने के लिए दिल्ली जा रहे थे.
संगठन के प्रवक्ता प्रिंस वड़ैच ने दावा किया था कि हरियाणा पुलिस बड़ी संख्या में उनके कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले रही है, ताकि वे प्रदर्शन में शामिल न हो सकें.
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सीजेपी के प्रदर्शन के बाद अभिजीत दीपके ने समर्थकों से माफ़ी क्यों मांगी?
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इमेज कैप्शन, अभिजीत दीपके ने कहा कि दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से प्रदर्शनकारियों को बचाने के लिए वह और बेहतर प्रयास कर सकते थे (फ़ाइल फ़ोटो)
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने समर्थकों से माफ़ी मांगी है. उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से प्रदर्शनकारियों को बचाने के लिए वह और बेहतर प्रयास कर सकते थे.
अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा, "मैं अपने सभी समर्थकों, ख़ासकर उन लड़कियों से माफ़ी मांगता हूं, जिन्हें पुरुष पुलिस अधिकारियों ने बेरहमी से पीटा. हम इससे बेहतर कर सकते थे. दिल्ली पुलिस की अमानवीय कार्रवाई से आपको बचाने के लिए मैं और बेहतर कर सकता था."
उन्होंने आगे लिखा, "एक धर्मेन्द्र प्रधान को बचाने के लिए, जो 20 से ज़्यादा छात्रों की मौत के ज़िम्मेदार हैं, सरकार कई और युवा छात्रों का ख़ून बहाने के लिए तैयार थी. अगर आप घायल हुए हैं और इसे देख रहे हैं, तो मुझे डीएम करें. मैं आपसे व्यक्तिगत रूप से बात करना चाहता हूं और माफ़ी मांगना चाहता हूं."
दीपके ने कहा कि उनकी पार्टी आगे भी समर्थकों के लिए लड़ाई जारी रखेगी.
गौरतलब है कि सोमवार को सीजेपी की ओर से आयोजित 'संसद मार्च' के दौरान कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए थे. अभिजीत दीपके ने इनमें से कई घायलों से मुलाक़ात भी की है.
प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के कई वीडियो और तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के दृश्य दिखाई दे रहे हैं. हालांकि, पुलिस कार्रवाई को लेकर दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए गए हैं.
सीजेपी के प्रदर्शन के बाद सोनू सूद, भूमि पेडनेकर और रितेश देशमुख ने क्या कहा
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इमेज कैप्शन, अभिनेता सोनू सूद, रितेश देशमुख, रणवीर शौरी और अभिनेत्री भूमि पेडनेकर समेत कई सेलेब्स ने प्रतिक्रिया जारी की है (फ़ाइल फ़ोटो)
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनकारियों की ओर से सोमवार को हुए 'संसद मार्च' के बाद सिनेमा जगत से जुड़ी कई हस्तियां इनके समर्थन में आ गई हैं.
अभिनेता सोनू सूद, रितेश देशमुख, रणवीर शौरी और अभिनेत्री जेनेलिया समेत कई सेलेब्स ने प्रतिक्रिया दी है.
अभिनेता सोनू सूद ने एक्स पर लिखा, "हमारे छात्रों को लाठियां नहीं, गले लगाने वाले हाथ चाहिए."
अभिनेता रितेश देशमुख और उनकी पत्नी अभिनेत्री जेनेलिया ने कहा, "हम अपने देश के युवाओं के साथ मजबूती से खड़े हैं. उनकी आवाज़ सुनी जानी चाहिए. वे हमारे लोकतंत्र की ताक़त हैं और हमारे देश के भविष्य को बनाने वाले असली लोग हैं. आइए हम उनकी बात सुनें, उनका साथ दें और उन्हें आगे बढ़ने का मौक़ा दें. हमारे युवाओं की ऊर्जा, हिम्मत और सपने उस भारत को बनाने में मदद करेंगे, जिसे हम बनाना चाहते हैं."
अभिनेता रणवीर शौरी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, "मंत्री को बहुत पहले ही इस्तीफ़ा दे देना चाहिए था! इस तरह सरकार अपनी इज़्ज़त बचा सकती थी और शायद उसे जवाबदेह और ज़िम्मेदार भी माना जाता. अब मुझे नहीं लगता कि वह विपक्ष को फ़ायदा पहुँचाए बिना या अपने लिए मुश्किलें बढ़ाए बिना इस मामले से बाहर निकल पाएगी."
अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट में लिखा, “हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है. आज हमने हिंसा की तस्वीरें देखीं. यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम यह सुनिश्चित करें कि हमारे देश के युवा इस आंदोलन में हिंसा का सहारा न लें और यह आंदोलन अपने रास्ते से न भटके. लोकतंत्र बातचीत और संवाद पर आधारित होते हैं. कमज़ोर और पिछड़े बैकग्राउंड वाले छात्रों के पास मुश्किल हालात से बाहर निकलने का एकमात्र ज़रिया शिक्षा है और हम उनका यह भरोसा टूटने नहीं दे सकते.”
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सीजेपी प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल पर ह्यूमन राइट्स वॉच ने ये कहा
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इमेज कैप्शन, ह्यूमन राइट्स वॉच ने भारतीय अधिकारियों से पुलिस कार्रवाई की जांच कराने और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों की रक्षा करने की अपील की है (फ़ाइल फ़ोटो)
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनकारियों के सोमवार को निकाले गए ‘संसद मार्च’ के दौरान हुए लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल को लेकर अब अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने भी चिंता जताई है.
संगठन ने भारतीय अधिकारियों से पुलिस कार्रवाई की जांच कराने और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों की रक्षा करने की अपील की है.
ह्यूमन राइट्स वॉच की डिप्टी एशिया डायरेक्टर मीनाक्षी गांगुली ने कहा, “भारतीय अधिकारियों को दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे हज़ारों छात्रों को हटाने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा लाठियों और आँसू गैस के इस्तेमाल के आरोपों की तुरंत जाँच करनी चाहिए.”
उन्होंने कहा कि अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पुलिस बल संयम बरतें और लोगों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार मिले.
इससे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी समेत कई विपक्षी नेताओं ने भी पुलिस कार्रवाई की आलोचना की थी.
नेतन्याहू की गिरफ़्तारी के ममदानी के बयान के बाद क्या बोले डोनाल्ड ट्रंप?
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इमेज कैप्शन, डोनाल्ड ट्रंप इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के समर्थन में उतरे (फ़ाइल फ़ोटो)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू को अमेरिका में किसी भी तरह से गिरफ़्तार नहीं किया जाएगा.
ट्रंप का यह बयान न्यूयॉर्क सिटी के मेयर ज़ोहरान ममदानी की उस टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर नेतन्याहू सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठक में हिस्सा लेने के लिए न्यूयॉर्क आते हैं, तो उनकी गिरफ़्तारी की संभावना पर उनका कार्यालय अब भी विचार कर रहा है.
इसके बाद ट्रंप ने सोमवार रात सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, "बिन्यामिन नेतन्याहू को अमेरिका में रहते हुए किसी भी तरह से गिरफ़्तार नहीं किया जाएगा. वह उस ईरान के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं, जिसने हाल ही में 52,000 बेगुनाह प्रदर्शनकारियों की जान ली और पिछले 47 वर्षों से अमेरिकी सैनिकों समेत कई अन्य लोगों की हत्या करता रहा है."
उन्होंने आगे लिखा, "गिरफ़्तार तो उन लोगों को किया जाना चाहिए, जिन्होंने ईरान को मौत और तबाही के ऐसे दौर में पहुँचाया. यह मामला पहले के राष्ट्रपतियों को कई साल पहले ही संभाल लेना चाहिए था."
गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय ने 2024 में प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू और इसराइल के कुछ अन्य नेताओं के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वारंट जारी किया था. उन पर 7 अक्तूबर 2023 को हमास के हमले के बाद ग़ज़ा में युद्ध अपराध के आरोप लगाए गए हैं.