अब इस लाइव पेज को विराम देने का वक़्त आ गया है. मुझे यानी बीबीसी संवाददाता चंदन कुमार जजवाड़े को दीजिए इजाज़त.
कल सुबह एक नए लाइव पेज के साथ हम फिर हाज़िर होंगे. बीबीसी न्यूज़ हिन्दी की वेबसाइट पर मौजूद कुछ अहम ख़बरों को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें.
महुआ मोइत्रा ने कहा- यह सरकार के सामने 'आउट ऑफ़ सिलेबस' मामला
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इमेज कैप्शन, महुआ मोइत्रा ने कहा है कि प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर छोड़कर नहीं जाने वाले हैं
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा मंगलवार शाम जंतर-मंतर पर पहुंचीं और कहा कि सेंट्रल दिल्ली को पूरी तरह बंद कर दिया गया है.
महुआ मोइत्रा ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "मोदी जी और शाह जी को यह नहीं पता कि ऐसे लोगों से कैसे निपटा जाए जो उनसे डरते नहीं हैं. यह इस सरकार के लिए 'आउट ऑफ़ सिलेबस' (सिलेबस से बाहर) मामला है."
उन्होंने जंतर-मंतर से एक वीडियो जारी कर कहा, "मैं जंतर-मंतर पर हूं और मैं आपको बता दूं कि ये बच्चे कहीं नहीं जाने वाले. सेंट्रल दिल्ली को पूरी तरह बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया गया है. फिर भी आप यहां मौजूद भीड़ देख सकते हैं."
वहीं आरजेडी के सांसद मनोज झा ने एक्स पर पोस्ट कर पेपर लीक मामले पर टिप्पणी की है.
उन्होंने लिखा, "प्रधानमंत्री कहते हैं कि पेपर लीक रोकना 'राष्ट्रीय ज़िम्मेदारी' है. बिल्कुल सही हुज़ूर. लेकिन जब पेपर लीक की निरंतरता व्यवस्था का सामान्य चरित्र बन जाए, तब क्या संविधान में ऐसा कोई प्रावधान है कि राष्ट्र ख़ुद अपना इस्तीफ़ा दे सके?"
पहलवान बजरंग पुनिया ने कहा, 'सरकार को जवाबदेह होना ही पड़ेगा'
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इमेज कैप्शन, बजरंग पुनिया ने कहा है कि वो भी स्टूडेंट्स के प्रदर्शन में शामिल होंगे (फ़ाइल फ़ोटो)
ओलंपिक पदक विजेता बजरंग पुनिया ने कहा है कि सोमवार को जंतर- मंतर पर प्रदर्शन के दौरान घायल हुए स्टूडेंट्स की तस्वीरें लगातार परेशान कर रही हैं, बेचैन कर रही हैं.
उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "अब रहा नहीं जा रहा. छात्रों की इस लड़ाई में मुझे शामिल माना जाए. धरना स्थल पर भी ज़रूर पहुँचूँगा पढ़ाई, रोज़गार, खेल इन सब में तो सरकार को जवाबदेह होना ही पड़ेगा."
दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स और कॉकरोच जनता पार्टी प्रदर्शन कर रही है.
ये लोग शिक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ ही पेपर लीक की ज़िम्मेदारी तय करने के लिए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को उनके पद से हटाने की मांग कर रहे हैं.
सोमवार को संसद चलो मार्च के दौरान सीजेपी प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया था जिसमें कई युवा घायल हुए थे.
उत्तराखंड: नौकरी की मांग को लेकर युवाओं का प्रदर्शन, पुलिस से झड़प, आसिफ़ अली, बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लिए
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इमेज कैप्शन, देहरादून में बड़ी संख्या में बेरोज़गार युवा सड़कों पर उतरे
उत्तराखंड में सरकारी भर्तियों के विज्ञापन जारी करने और लंबित भर्ती परीक्षाओं के नतीजे घोषित करने की मांग को लेकर मंगलवार को बेरोज़गार युवाओं ने देहरादून में सचिवालय कूच किया.
उत्तराखंड बेरोज़गार संघ के बैनर तले आयोजित प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवा परेड ग्राउंड में एकत्र हुए और सरकार के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी करते हुए सचिवालय की ओर बढ़े.
पुलिस ने सचिवालय से पहले बैरिकेड लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया. इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की और झड़प भी हुई.
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उत्तराखंड लोक सेवा आयोग और उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में कई भर्तियों के विज्ञापन लंबे समय से जारी नहीं हुए हैं.
उनका आरोप है कि कुछ भर्ती परीक्षाओं के परिणाम भी लंबित हैं, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं में असमंजस के हालात बने हुए हैं.
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इमेज कैप्शन, युवाओं के प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षाबल तैनात किए गए
उत्तराखंड बेरोज़गार संघ के उपाध्यक्ष सूरज पंवार ने आरोप लगाया कि सरकार रोजगार देने के दावे कर रही है, लेकिन कई विभागों में यह महीनों से लंबित हैं और नई भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हो रही है.
उन्होंने कहा कि प्रदेश का युवा अब भर्ती प्रक्रिया में तेजी और लंबित परिणाम जल्द जारी करने की मांग को लेकर सड़क पर उतरने को मजबूर है.
यूपी में सोनम वांगचुक के समर्थन में मार्च निकालने वाले डॉक्टर को किया गया निलंबित, गौरव गुलमोहर, बीबीसी हिन्दी के लिए
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इमेज कैप्शन, डॉक्टर रूपक इखे मूल रूप से महाराष्ट्र के अमरावती के रहने वाले हैं
उत्तर प्रदेश के बहराइच ज़िले में सोनम वांगचुक के समर्थन में अकेले ही पैदल मार्च निकालने वाले एक जूनियर रेज़िडेंट डॉक्टर को महाराजा सुहेलदेव स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज ने निलंबित कर दिया है.
निलंबित डॉक्टर रूपक इखे महाराष्ट्र के अमरावती ज़िले के रहने वाले हैं और बहराइच मेडिकल कॉलेज में जूनियर रेज़िडेंट के तौर पर कार्यरत हैं.
स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक़, शुक्रवार की शाम डॉक्टर रूपक शहर के डिगिहा तिराहे से अकेले पैदल मार्च करते हुए ज़िलाधिकारी आवास पहुंचे थे.
इस दौरान उन्होंने सोनम वांगचुक के समर्थन में संदेश लिखा बैनर हाथ में लिया था. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में वह ख़ुद को सोनम वांगचुक के अभियान का समर्थक बताते हुए दिखाई दिए.
वीडियो सामने आने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए डॉक्टर रूपक इखे को निलंबित कर दिया.
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इमेज कैप्शन, इस मामले की जांच के लिए हॉस्पिटल में पांच सदस्यों की कमेटी बनाई गई है
कॉलेज के प्राचार्य संजय खत्री ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताया, "दिल्ली में सोनम वांगचुक के फे़वर में प्रदर्शन करते हुए रूपक इखे प्रदर्शन करते हुए अकेले ज़िलाधिकारी कार्यालय तक गए थे."
उन्होंने आगे कहा, "एंटी गवर्नमेंट चीज़ें करना संविधान के ख़िलाफ़ है इसलिए उनके ऊपर क़ानूनी कार्रवाई करते हुए सस्पेंड किया गया है."
संजय खत्री ने बीबीसी हिन्दी को बताया, "इस मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया है. उनकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. वो (डॉक्टर रूपक इखे) जब तक निलंबित हैं तब तक न मरीज़ देख सकेंगे और न ही अंदर जा सकेंगे."
डॉक्टर रूपक इखे ने बीबीसी हिन्दी से बातचीत में कहा कि मामला जांच के अधीन होने के कारण वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते.
सोनम वांगचुक सफ़दरजंग अस्पताल से मेदांता के लिए हुए रवाना
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इमेज कैप्शन, सोनम वांगचुक लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और मशहूर शिक्षाविद् हैं
सोनम वांगचुक को दिल्ली हाई कोर्ट से निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की इजाज़त मिलने के बाद उन्हें हरियाणा के गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल ले जाया जा रहा है.
नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के ख़िलाफ़ शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे थे.
शनिवार की सुबह उन्हें पुलिस ने जंतर-मंतर से उठाकर सफ़दरजंग हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया था.
इसके ख़िलाफ़ वांगचुक की ओर से उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो ने रविवार को दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. लेकिन उस दिन हाई कोर्ट ने इस मामले पर कोई अंतरिम आदेश देने से मना कर दिया था.
दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को सोनम वांगचुक को सफ़दरजंग हॉस्पिटल से ले जाने का आदेश दिया.
कार्टून: तकलीफ़, घुटन, बैचेनी
इमेज कैप्शन, शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर छात्रों के प्रदर्शन पर आज का कार्टून
फ़िल्म अभिनेत्री प्रीति ज़िंटा और सोनम बाजवा ने दिया युवाओं के आंदोलन को समर्थन
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इमेज कैप्शन, सोनम बाजवा
जंतर-मंतर पर युवाओं के प्रदर्शन और सोनम वांगचुक को लेकर बॉलिवुड अभिनेत्री प्रीति ज़िंटा ने प्रतिक्रिया दी है.
उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ''मुझे उम्मीद है कि हमारी सरकार सोनम वांगचुक और स्टूडेंट्स के साथ सार्थक बातचीत शुरू करेगी ताकि उनकी सेहत और न बिगड़े.''
प्रीति ज़िंटा ने लिखा, "सोनम (वांगचुक), कृपया अपना अनशन ख़त्म करें. आपकी सेहत भी उतनी ही ज़रूरी है जितनी कि यह लड़ाई. आप और स्टूडेंट्स भारत और हमारे युवाओं के भविष्य के लिए लड़ रहे हैं."
"हमारी शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने की इस लड़ाई में हर स्टूडेंट और सोनम को मेरा पूरा और अटूट समर्थन है. आप सभी को और हिम्मत मिले."
अभिनेत्री सोनम बाजवा ने इंस्टाग्राम पर लिखा, "ये हमारे देश के युवाओं की आवाज़ हैं, कोई ख़तरा नहीं. उनकी बात सुनने की जगह उन पर लाठियों का इस्तेमाल क्यों? वो इस बात के हक़दार हैं कि उनकी आवाज़ सुनी जाए, न कि उन्हें पीटा जाए."
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इमेज कैप्शन, प्रीति ज़िंटा ने कहा है कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर करने की लड़ाई में वो साथ हैं (फ़ाइल फ़ोटो)
वहीं रैपर और गायक रफ़्तार ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो में कहा, "दिल और दिमाग़ की लड़ाई में कई बार दिल जीतता है. बच्चों को पिटते देख मेरा भी दिल जीत गया. मेरे जैसे कई लोग हैं जो इस प्रदर्शन के साथ हैं, लेकिन किसी भी पॉलिटिकल पार्टी के साथ जुड़ना नहीं चाहते हैं."
उन्होंने आगे कहा, "मैं किसी पार्टी के साथ नहीं हूं. मैं 'संविधान बचाने' के साथ हूं. अगर बार-बार पेपर लीक हो रहे हैं तो क्यों हो रहे हैं. अगर किसी व्यक्ति की वजह से हो रहे हैं तो आप उनका इस्तीफ़ा मांगिए."
दरअसल दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स और कॉकरोच जनता पार्टी प्रदर्शन कर रही है. ये लोग शिक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ ही पेपर लीक के लिए ज़िम्मेदारी तय करने के लिए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को उनके पद से हटाने की मांग कर रहे हैं.
इसी मांग को लेकर शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे थे. लेकिन शनिवार की सुबह उन्हें पुलिस ने वहाँ से हटा दिया था.
सोनम वांगचुक को उनकी इच्छा के विपरीत दिल्ली के सफ़दरजंग हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया गया. इस बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने सोनम वांगचुक को मेदांता हॉस्पिटल में शिफ़्ट करने की अनुमति दे दी है.
सोमवार को संसद चलो मार्च के दौरान सीजेपी प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया था जिसमें कई युवा घायल हुए थे.
आप सांसद संजय सिंह का आरोप, राहुल गांधी सीजेपी के धरने को कर रहे हैं कमज़ोर
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इमेज कैप्शन, मानसून सत्र के दौरान संसद में मंगलवार को आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया है कि सीजेपी के आंदोलन को कमज़ोर करने के लिए राहुल गांधी प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठे हैं.
इससे पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का विरोध प्रदर्शन जंतर-मंतर पर जारी है और इसी दौरान कांग्रेस के सांसदों ने राहुल गांधी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री आवास '7 लोक कल्याण मार्ग' के बाहर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है.
कांग्रेस सांसदों की मांग है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफ़ा दें.
अब से थोड़ी देर पहले पीएम आवास के पास धरना दे रहे राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेताओं से मिलने केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह पहुँचे हैं.
सोमवार को संसद चलो मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया था जिसमें कई युवा घायल हुए थे.
एनसीपी नेता शरद पवार पहुंचे जंतर-मंतर, सीजेपी ने ये बताया
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इमेज कैप्शन, जंतर-मंतर पर शरद पवार और अभिजीत दीपके
एनसीपी-एससीपी नेता शरद पवार मंगलवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे. यहां उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग कर रहे अभिजीत दीपके और अन्य स्टूडेंट्स से मुलाक़ात की.
कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके ने एक्स पर एक पोस्ट में बताया, "एनसीपी (एससीपी गुट) के प्रमुख और वरिष्ठ सांसद शरद पवार जंतर-मंतर पहुंचे. उन्होंने सोमवार को दिल्ली पुलिस की बर्बर हिंसा के बाद प्रदर्शनकारियों का हाल-चाल जाना."
उन्होंने लिखा, "मुश्किल समय में स्टूडेंट्स का साथ देने के लिए मैं पवार सर का शुक्रिया अदा करता हूँ."
कॉकरोच जनता पार्टी ने अपने प्रदर्शन के दौरान सोमवार को संसद मार्च की घोषणा की थी. इस सिलसिले में जब स्टूडेंट्स संसद की ओर बढ़े तो उनकी पुलिस के साथ झड़प भी हुई. इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े.
इसमें कई स्टूडेंट घायल भी हुए हैं. इस कार्रवाई के बाद विपक्षी दल भी सरकार पर हमलावर हैं और उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने की मांग में अपना दबाव बढ़ा दिया है.
विजेता दहिया को कॉकरोच जनता पार्टी ने प्रवक्ता पद से हटाया
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इमेज कैप्शन, विजेता दहिया को एक वीडियो जारी होने के बाद सीजेपी के प्रवक्ता पद से हटा दिया गया है
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने एक्स पर एक पोस्ट में बताया है कि विजेता दहिया को प्रवक्ता के पद से हटा दिया गया है.
सीजेपी ने लिखा, ''हम अपने प्रवक्ता विजेता दहिया के बेहद असंवेदनशील व्यवहार की कड़ी निंदा करते हैं. जब शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी और हमारी टीम पुलिस की बर्बर हिंसा का सामना कर रही थी, उस वक़्त उन्होंने वीडियो जारी किया."
"ऐसा व्यवहार स्वीकार्य नहीं है, यह समझदारी की पूरी कमी को दर्शाता है और हमारे आंदोलन के मूल्यों और सिद्धांतों के पूरी तरह ख़िलाफ़ है.''
सीजेपी ने बताया है कि विजेता दहिया को प्रवक्ता के साथ ही अन्य सभी आधिकारिक ज़िम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया है.
इससे पहले विजेता दहिया का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर कई लोगों ने साझा किया है, जिसमें वो बर्गर खाते हुए कई तरह की टिप्पणी की.
वह वीडियो में कह रहे हैं, "यह प्रोटेस्ट कोई नौकरी नहीं है, मुझे वोट देकर नहीं चुना गया है. मेरी किसी के प्रति ज़िम्मेदारी नहीं है. मैं बर्गर खाउंगा."
हालांकि बीबीसी इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सकता.
कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने 'क़ानूनी कार्रवाई का सामना' कर रहे युवाओं के बारे में ये कहा
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इमेज कैप्शन, सोमवार को युवाओं के संसद मार्च को रोकने के लिए पुलिस ने बलप्रयोग भी किया
कांग्रेस पार्टी ने अपनी लीगल टीम को निर्देश दिया है कि वे जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन और संसद मार्च के दौरान क़ानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे युवाओं की हर संभव मदद करे.
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा है कि इस दौरान, "गिरफ़्तार, हिरासत में लिए गए और हमले का शिकार युवाओं को हर संभव मदद के लिए निर्देश दिए गए हैं."
जयराम रमेश ने इस पोस्ट में कई ई-मेल आईडी और साथ ही एक गूगल लिंक भी शेयर किया है, जिसके ज़रिए कांग्रेस पार्टी की लीगल टीम से मदद मांगी जा सकती है.
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इमेज कैप्शन, युवाओं को रोकने के लिए लाठीचार्ज करती पुलिस
इससे पहले आम आदमी पार्टी ने भी ऐसी पहल की और प्रदर्शन के दौरान घायल या क़ानूनी कार्रवाई का शिकार हुए युवाओं को हर संभव मदद देने का वादा किया.
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर लिखा, ''कल बच्चों के साथ जो बर्बरता हुई, वह बेहद शर्मनाक है. अगर किसी बच्चे को क़ानूनी या मेडिकल मदद की ज़रूरत हो, तो इस नंबर पर मैसेज करें.''
केजरीवाल ने लिखा, "हम आपको बेहतरीन क़ानूनी टीम उपलब्ध कराएंगे. हम सब एक हैं. आप सभी हमारे बच्चे हैं. आपको बिल्कुल भी घबराने की ज़रूरत नहीं है, हम आपके साथ हैं. हम मिलकर यह लड़ाई लड़ेंगे."
असदुद्दीन ओवैसी ने स्टूडेंट्स के प्रदर्शन पर कार्रवाई की तुलना इन आंदोलनों से की
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इमेज कैप्शन, असदुद्दीन ओवैसी का कहना है कि सरकार को पहले ही प्रदर्शकारियों से बात करनी थी
एआईएमआईएम के प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि सोमवार को जो कुछ भी हुआ है, वह सरकार का लगातार चला आ रहा व्यवहार है.
उन्होंने कहा, "जब वकीलों का प्रदर्शन हुआ तब भी इस तरह कुप्रबंधन किया गया, जब किसानों का प्रदर्शन हुआ तो लाल क़िले में इसे तरह का कुप्रबंधन किया गया.''
ओवैसी ने कहा, ''आप लोग भूल रहे हैं सीएए के प्रदर्शन के वीडियो को चलाइए, जब जामिया मिल्लिया इस्लामिया में लाइब्रेरी और कैंटीन में घुसकर स्टूडेंट्स को मारा गया, उसमें एक लड़के की आंख चली गई.''
असदुद्दीन ओवैसी का कहना है कि कई हफ़्तों से प्रदर्शन के बावजूद भी सरकार ने सोमवार को प्रदर्शकारियों से बात की, जबकि ऐसा पहले ही होना चाहिए था.
ओवैसी ने कहा, ''जिसके पास दिल होगा और थोड़ा सा दिमाग़ होगा, वो देखेगा कि छात्रों के साथ किस तरह की मारपीट की गई है...''
नरेंद्र मोदी सरकार के ख़िलाफ़ सोमवार को बड़े पैमाने पर युवाओं का ग़ुस्सा सड़कों पर दिखा.
हज़ारों की संख्या में सड़कों पर उतरे युवा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर संसद की तरफ़ मार्च कर रहे थे.
इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें भी हुईं. इसमें दर्जनों की संख्या में प्रदर्शनकारी ज़ख़्मी भी हुए हैं.
सीजेपी प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर बोले दिलजीत दोसांझ- मुझे एंटी नेशनल कहा जाएगा
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इमेज कैप्शन, दिलजीत दोसांझ ने कहा है कि स्टूडेंट्स के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए था, प्रशासन को उनकी मांगें सुननी चाहिए (फ़ाइल फ़ोटो)
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनकारियों पर सोमवार को हुई पुलिस कार्रवाई पर पंजाबी गायक दिलजीत दोसांझ ने प्रतिक्रिया दी है.
दिलजीत दोसांझ ने कहा कि स्टूडेंट्स के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए था, प्रशासन को उनकी मांगें सुननी चाहिए.
उन्होंने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा, "आज (सोमवार) जो हुआ, वह बहुत ग़लत था. स्टूडेंट्स के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए था. मैं प्रशासन से अपील करता हूँ कि वे स्टूडेंट्स की मांगें सुनें. लोगों की आवाज़ ही रब की आवाज़ होती है."
उन्होंने आगे लिखा, "मुझे पहले भी कई बार एंटी नेशनल कहा जा चुका है. अब भी मुझे एंटी नेशनल कहा जाएगा. किसान आंदोलन के बाद मुझे काफ़ी विरोध और क़ानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ा. मैं उस बारे में बात भी नहीं करना चाहता."
स्टूडेंट्स के पक्ष में अब तक अभिनेता सोनू सूद, रितेश देशमुख, रणवीर शौरी, अभिनेत्री जेनेलिया और भूमि पेडनेकर समेत कई सेलेब्स ने बयान जारी किया है.
सोनम वांगचुक को मेदांता शिफ्ट करने का दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश
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इमेज कैप्शन, सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देकर अनशन स्थल से उठाकर सफ़दरजंग हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया था (फ़ाइल फ़ोटो)
दिल्ली हाई कोर्ट ने सोनम वांगचुक को मेदांता हॉस्पिटल में शिफ़्ट करने की अनुमति दे दी है.
वांगचुक की ओर से उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो ने रविवार को दिल्ली हाई कोर्ट में इसके लिए याचिका दायर की थी.
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, "माननीय दिल्ली हाई कोर्ट का मेरा दिल से आभार कि उसने सोनम वांगचुक को हमारी पसंद के अस्पताल मेदांता में भर्ती करने के पक्ष में आदेश दिया."
"मैं अखिल सिब्बल, बहुली शर्मा और उनकी पूरी टीम को भी दिल से धन्यवाद देती हूं, जिन्होंने बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद रिकॉर्ड समय में यह कानूनी जीत हासिल की."
इससे पहले गीतांजलि जे अंगमो की ओर से रविवार को एक याचिका दाखिल की गई थी, जिसे रविवार होने के बावजूद हाई कोर्ट ने तुरंत सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया था. लेकिन उस दिन हाई कोर्ट ने इस मामले पर कोई अंतरिम आदेश देने से मना कर दिया था.
हाई कोर्ट ने तीन दिन में स्टेटस रिपोर्ट दाख़िल करने को कहा था.
नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के ख़िलाफ़ शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे थे. लेकिन शनिवार की सुबह उन्हें पुलिस ने वहाँ से हटा दिया था.
अभी तक बीबीसी संवाददाता रौनक भैड़ा आप तक ख़बरें पहुंचा रहे थे. अब बीबीसी संवाददाता चंदन कुमार जजवाड़े रात दस बजे तक आप तक ताज़ा ख़बरें पहुंचाएंगी.
बीबीसी हिन्दी के पेज पर मौजूद कुछ बड़ी ख़बरों को पढ़ने के लिए नीचे दिए हुए लिंक्स पर क्लिक करें.
राहुल गांधी बोले- पीएम मोदी माफ़ी मांगें और इस्तीफ़ा दें
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इमेज कैप्शन, राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के मुद्दों पर संसद में चर्चा कराने से बच रही है
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सीजेपी प्रदर्शन में शामिल छात्रों के साथ हुई मारपीट के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफ़ी की मांग की है.
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के मुद्दों पर संसद में चर्चा कराने से बच रही है.
संसद परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने कहा, "हमने लोकसभा स्पीकर से मुलाक़ात कर संसद में छात्रों के मुद्दों पर चर्चा करने की मांग की. लेकिन लोकसभा स्पीकर ने कहा है कि चर्चा करवाने के लिए उन्हें सरकार से 'परमिशन' लेनी होगी."
उन्होंने कहा, "ये छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है, जिन्हें मारा-पीटा जा रहा है, जो ठीक नहीं है. नरेंद्र मोदी ने इसके लिए माफ़ी तक नहीं मांगी है. ये युवा देश की ध्वस्त हो चुकी शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं."
राहुल गांधी ने कहा, "प्रधानमंत्री चुप क्यों हैं? उन्हें छात्रों से माफ़ी मांगनी चाहिए और छात्रों की पिटाई का यह सिलसिला बंद करना चाहिए."
उन्होंने कहा, "धर्मेंद्र प्रधान ने इन छात्रों की पिटाई नहीं की है, गृह मंत्री ने की है. उन्हें इस्तीफ़ा देना चाहिए. गृह मंत्री प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करते हैं, उन्हें इस्तीफ़ा देना चाहिए."
इसके बाद राहुल गांधी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध मार्च के दौरान घायल हुए लोगों से मुलाक़ात करने के लिए राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल भी पहुंचे.
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सीजेपी के घायल प्रदर्शनकारियों का इलाज कर रहे डॉक्टरों के साथ जेपी नड्डा ने की बैठक
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इमेज कैप्शन, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने घायल सीजेपी प्रदर्शनकारियों का इलाज कर रहे डॉक्टरों के साथ बैठक की (फ़ाइल फ़ोटो)
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मंगलवार को दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल का दौरा किया.
इस दौरान उन्होंने अस्पताल में भर्ती कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध मार्च के दौरान घायल हुए लोगों का इलाज कर रहे डॉक्टरों के साथ बैठक की.
दरअसल, सोमवार को सीजेपी के 'संसद मार्च' के दौरान पुलिस कार्रवाई में घायल हुए कई लोगों को इलाज के लिए आरएमएल अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और दीपेंद्र हुड्डा भी आरएमएल अस्पताल पहुंचे हैं.
वहीं, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने समर्थकों से माफ़ी मांगी है. उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से प्रदर्शनकारियों को बचाने के लिए वह और बेहतर प्रयास कर सकते थे.
सीजेपी प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर एमनेस्टी इंटरनेशनल ने ये कहा
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इमेज कैप्शन, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इन आरोपों की जांच करने की अपील की है (फ़ोटो: प्रदर्शनकारी और पुलिस)
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनकारियों पर सोमवार को हुए लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल को लेकर एमनेस्टी इंटरनेशनल ने चिंता जताई है.
मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि भारत में शांतिपूर्ण विरोध की आवाज़ को दबाया जा रहा है और प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ बल का अनुचित इस्तेमाल किया गया है.
एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के बोर्ड चेयरपर्सन आकार पटेल ने कहा, “जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से सामने आई तस्वीरें और रिपोर्ट दिखाती हैं कि भारत में शांतिपूर्ण विरोध की आवाज़ को दबाया जा रहा है."
"ख़बरों के अनुसार, पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ बल का अनुचित इस्तेमाल किया और उन्हें संसद तक पहुँचने से रोकने के लिए बैरिकेड लगाए. अधिकारियों ने मेट्रो सेवाएँ और मोबाइल इंटरनेट भी बंद कर दिए, जिससे शांतिपूर्ण तरीक़े से इकट्ठा होने के अधिकार पर और रोक लगी.”
उन्होंने आगे कहा, “अधिकारियों की भूमिका शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की सुरक्षा करना और उन्हें आसान बनाना है, न कि उन्हें दबाना. शांतिपूर्ण तरीक़े से इकट्ठा होने की आज़ादी का अधिकार अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानून और भारतीय संविधान में मान्यता प्राप्त है.”
एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार नियमों के हिसाब से सही, ज़रूरी और सीमित कार्रवाई की.
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा, "हम दिल्ली पुलिस से अपील करते हैं कि वह धैर्य रखें और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के ख़िलाफ़ ग़लत तरीक़े से बल का इस्तेमाल तुरंत बंद करें. अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पुलिसकर्मियों पर डंडे चलाने, आंसू गैस छोड़ने और पत्थर फेंकने जैसे आरोपों की जल्द, निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की जाए.”
इससे पहले ह्यूमन राइट्स वॉच ने भी चिंता इस पर जताई थी. संगठन ने भारतीय अधिकारियों से पुलिस कार्रवाई की जांच कराने और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों की रक्षा करने की अपील की है.
मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी ने सीजेपी प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर क्या कहा
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इमेज कैप्शन, मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी ने पुलिस कार्रवाई की निंदा की (फ़ाइल फ़ोटो)
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सीजेपी प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा संसद में उठाया है.
मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में कहा कि जो छात्र पेपर लीक के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहे हैं, उन्हें पीटना निंदनीय घटना है.
उन्होंने कहा, "हमारे देश के हज़ारों छात्र पेपर लीक के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहे हैं. लेकिन इस सरकार ने उनके ऊपर लाठीचार्ज करवाया. उन्हें मारा-पीटा गया और उनके ऊपर आंसू गैस के गोले दागे गए. ये बहुत ही निंदनीय घटना है."
प्रियंका गांधी ने सदन के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि पीएम मोदी 'एंटी यूथ' हैं.
उन्होंने कहा, "ये सदन उन्हीं युवाओं का है, जिन्हें आप बाहर रोक रहे हैं, जिन पर लाठीचार्ज कर रहे हैं और आंसू गैस छोड़ रहे हैं. हमें उन्होंने ही सदन पहुंचाया है."
प्रियंका गांधी ने कहा, "मोदी जी एंटी यूथ हैं, एंटी ग़रीब हैं और एंटी किसान हैं. 12 साल हो गए हैं आप सब देख रहे हैं. बच्चों की आवाज़ आप सुन लीजिए और मंत्री से इस्तीफ़ा दिलवाइए. एक ज़माना था जब मंत्री ज़िम्मेदारी लेते थे. आप भी ज़िम्मेदारी लीजिए और सिस्टम को दुरुस्त करिए."