डोनाल्ड ट्रंप से मिलने पहुंचे बिन्यामिन नेतन्याहू, व्हाइट हाउस के बाहर हो रहा विरोध प्रदर्शन
इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाक़ात के लिए व्हाइट हाउस पहुंचे हैं. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के व्हाइट हाउस से रवाना होने के कुछ ही देर बाद नेतन्याहू पहुंचे हैं.
डोनाल्ड ट्रंप से मिलने पहुंचे बिन्यामिन नेतन्याहू, व्हाइट हाउस के बाहर हो रहा विरोध प्रदर्शन
इमेज स्रोत, EPA/Shutterstock/Reuters
इमेज कैप्शन, नेतन्याहू के व्हाइट हाउस दौरे के दौरान बाहर विरोध प्रदर्शन देखने को मिला
इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाक़ात के लिए व्हाइट हाउस पहुंचे हैं. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के व्हाइट हाउस से रवाना होने के कुछ ही देर बाद नेतन्याहू पहुंचे हैं.
ज़ेलेंस्की ने ओवल ऑफ़िस के अंदर की कुछ तस्वीरें साझा कीं. उन्होंने बताया कि बैठक के दौरान यूक्रेन के लिए पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों सहित कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई.
नेतन्याहू और जेलेंस्की, दोनों ने व्हाइट हाउस में औपचारिक स्वागत समारोह से बचते हुए साइड डोर से एंट्री की.
नेतन्याहू के व्हाइट हाउस दौरे के दौरान बाहर विरोध प्रदर्शन देखने को मिला. कुछ दर्जन भर प्रदर्शनकारी सड़कों पर मार्च करते और नारे लगाते नज़र आए.
प्रदर्शनकारियों ने हाथों में संदेश लिखे पोस्टर और बैनर लिए हुए थे. कुछ लोगों के हाथों में फ़लस्तीनी झंडे भी दिखाई दिए, जबकि कई प्रदर्शनकारियों ने ड्रम बजाकर विरोध दर्ज कराया.
हालांकि, नेतन्याहू के पिछले दौरों के दौरान हुए प्रदर्शनों की तुलना में इस बार का प्रदर्शन अपेक्षाकृत शांत और सीमित रहा.
नेतन्याहू और ज़ेलेंस्की वॉशिंगटन में सीनेटर लिंडसे ग्राहम के अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे हैं.
गौरतलब है कि ग्राहम का इसी महीने निधन हुआ था. वह यूक्रेन और इसराइल, दोनों के संघर्षों में अपने समर्थन के लिए जाने जाते थे.
सीजेपी का दावा- पत्थरों से भरा ट्रक चार दिनों तक पुलिस कस्टडी में था
इमेज स्रोत, Vipin Kumar/Hindustan Times via Getty Images
इमेज कैप्शन, सीजेपी ने कहा कि ट्रक 20 जुलाई से पहले चार दिनों तक दिल्ली पुलिस की जब्त गाड़ियों में शामिल था (फ़ाइल फ़ोटो)
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दावा किया है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल के पास मिला पत्थरों से भरा ट्रक चार दिनों तक दिल्ली पुलिस की कस्टडी में था.
सीजेपी ने यह दावा न्यूज़लॉन्ड्री की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए किया है. सीजेपी ने कहा कि यह ट्रक 20 जुलाई से पहले चार दिनों तक दिल्ली पुलिस की जब्त गाड़ियों में शामिल था.
सीजेपी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "हमारे जंतर-मंतर प्रदर्शन स्थल के पास पत्थरों से भरा जो 'रहस्यमयी' ट्रक मिला था, वह 20 जुलाई से पहले चार दिनों तक दिल्ली पुलिस की जब्त गाड़ियों में शामिल था."
सीजेपी ने लिखा "इस चौंकाने वाली इन्वेस्टिगेशन ने हमारे सबसे बड़े डर को सही साबित किया है. ऐसा लगता है कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रदर्शन को बिगाड़ने, हिंसा भड़काने और बेगुनाह लोगों को फंसाने की सोची-समझी कोशिश की गई."
पोस्ट में सीजेपी ने सवाल उठाया कि जब्त किए गए पत्थरों से भरे वाहन को शांतिपूर्ण प्रदर्शन स्थल के पास लाने का आदेश किसने दिया.
सीजेपी ने लिखा, "दिल्ली पुलिस को इसका जवाब तुरंत देना चाहिए और उन अधिकारियों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई करनी चाहिए जिन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की बड़ी भीड़ के बीच पत्थर रखने का फ़ैसला लिया."
गौरतलब है कि सीजेपी के 'संसद मार्च' वाले दिन (20 जुलाई) भी अभिजीत दीपके ने दावा किया था कि पुलिस ने जानबूझकर यह ट्रक प्रदर्शनस्थल पर पार्क करवाया है.
कंगना रनौत की जेन-ज़ी को लेकर की गई टिप्पणी पर कॉकरोच जनता पार्टी ने ये कहा
इमेज स्रोत, ANI
इमेज कैप्शन, कंगना रनौत ने हाल ही में जेन-ज़ी को लेकर टिप्पणी की थी (फ़ाइल फ़ोटो)
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने हाल ही में जेन-ज़ी को लेकर एक टिप्पणी की थी, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है. अब इस पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की ओर से प्रतिक्रिया आई है.
सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने मंगलवार को समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, "कंगना रनौत को उनकी पार्टी के लोग ही सीरियस नहीं लेते तो हम क्यों सीरियसली लें. मुझे नहीं लगता कि उन्हें जेन-ज़ी, जेन-अल्फ़ा या नई पीढ़ी में कोई भी सीरियसली लेता है."
सौरव ने कहा, "उनके वीडियो भी वायरल हुए थे, जिसमें वो कह रही थीं कि मैंने सोचा था कि थोड़ा-बहुत ही काम करना पड़ेगा, लेकिन यहां तो एमपी बनने के बाद बहुत ज़्यादा काम करना पड़ता है. ऐसे बयान उनकी सीरियसनेस दिखाते हैं."
उन्होंने आगे कहा, "ये शब्दावली सही नहीं है, नेताओं को अपनी भाषा संभाल लेनी चाहिए. जेन-ज़ी ने इस देश के लोकतंत्र में फिर से भरोसा जगाने का काम किया है."
भोपाल पहुंचे किसान सीएम आवास को घेरने की कर रहे हैं तैयारी, क्या है मामला?, शुरैह नियाज़ी भोपाल से बीबीसी हिन्दी के लिए
इमेज स्रोत, ANI Video Grab
इमेज कैप्शन, 19 किसान संगठनों के बैनर तले एकजुट हुए किसान मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने की तैयारी में हैं
मध्यप्रदेश में मूंग की शत-प्रतिशत ख़रीद और खाद वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर प्रदेशभर से क़रीब दो हज़ार किसान मंगलवार को राजधानी भोपाल पहुंच गए हैं.
19 किसान संगठनों के बैनर तले एकजुट हुए किसान मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने की तैयारी में हैं. किसानों ने लंबे आंदोलन की संभावना को देखते हुए अपने साथ सात दिनों के राशन-पानी की भी व्यवस्था कर ली है. उनका कहना है कि मांगें पूरी नहीं होने तक वे भोपाल से वापस नहीं लौटेंगे.
किसानों के भोपाल कूच को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा के इंतज़ाम किए गए हैं. कई जगहों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और बैरिकेडिंग की जा रही है. हालांकि, कुछ स्थानों पर किसानों ने बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया, जिस दौरान पुलिस और किसानों के बीच धक्का-मुक्की की घटनाएं भी सामने आई हैं.
किसान संगठनों के नेताओं का आरोप है कि आंदोलन को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने कई नेताओं को हिरासत में लिया है. किसानों ने साफ़ किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष संतोष पटवारे ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों को परेशान कर रही है और उनकी मूंग की पूरी ख़रीद नहीं की जा रही है. उन्होंने कहा कि कृषि मंत्री के साथ हुई बातचीत भी बेनतीजा रही, जिससे किसानों में नाराज़गी और बढ़ गई है.
उधर, किसानों के बड़ी संख्या में राजधानी पहुंचने से शहर के कई प्रमुख मार्गों पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया है. बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां भी आंदोलन में शामिल हैं, जिसके कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई है.
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश पर सीजेपी ने सरकार को फिर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी
इमेज स्रोत, Arun SANKAR / AFP via Getty Images
इमेज कैप्शन, सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने आधिकारिक बयान साझा किया, जिसमें सरकार को फिर से प्रदर्शन करने की चेतावनी दी गई है (फ़ाइल फ़ोटो)
कॉकरेच जनता पार्टी (सीजेपी) ने सुप्रीम कोर्ट के उस अंतरिम आदेश पर चिंता जताई है, जो सीजेपी के विरोध प्रदर्शन से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर सुनाया गया है.
सीजेपी ने कहा कि आदेश में सरकार को मौजूदा एफ़आईआर पर कार्रवाई जारी रखने और जांच करने की अनुमति दी गई है, जो चिंता का विषय है.
सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने आधिकारिक बयान साझा किया, जिसमें सरकार को फिर से प्रदर्शन करने की चेतावनी दी गई है.
सीजेपी ने अपने बयान में कहा, "यह निर्देश केंद्र सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन के विपरीत है. सरकार ने भरोसा दिलाया था कि प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दर्ज एफ़आईआर वापस ली जाएंगी और शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल किसी भी व्यक्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निशाना नहीं बनाया जाएगा."
"इसी आश्वासन पर भरोसा करते हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शन वापस लिया था. हालाँकि, केंद्र सरकार और बीजेपी शासित राज्य सरकारें सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इस्तेमाल कर प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दर्ज मामलों को जारी रख सकती हैं और उन्हें परेशान किया जा सकता है."
सीजेपी ने यह भी सवाल उठाया कि केंद्र सरकार के वकीलों ने अंतरिम आदेश का विरोध क्यों नहीं किया, जबकि सरकार और सीजेपी के बीच एक सहमति बन चुकी थी.
सीजेपी ने कहा, "केंद्र सरकार और संबंधित राज्य सरकारें सुप्रीम कोर्ट के समक्ष 25 जुलाई के आश्वासन की पूरी जानकारी रखें, ताकि अदालत के सामने सभी तथ्य स्पष्ट हो सकें और भविष्य में कोई आदेश पूरी जानकारी के आधार पर दिया जा सके."
सीजेपी ने चेतावनी दी कि अगर सरकार अपने वादों को पूरा नहीं करती है तो वह देशव्यापी आंदोलन दोबारा शुरू करने के लिए मजबूर होगी.
सीजेपी ने कहा कि यह आंदोलन केवल छात्रों या प्रदर्शनकारियों के लिए नहीं, बल्कि देश के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर होगा.
भारत में स्टूडेंट्स के प्रदर्शन पर पाकिस्तानी जेन-ज़ी के समर्थन पर विदेश मंत्रालय ने ये कहा?
इमेज स्रोत, Sajjad HUSSAIN / AFP via Getty Images
इमेज कैप्शन, जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान 22 जुलाई 2026 को स्टूडेंट्स और प्रदर्शनकारी (फ़ाइल फ़ोटो)
पाकिस्तान के जेन-ज़ी की ओर से भारत में स्टूडेंट्स प्रदर्शन का समर्थन किए जाने की ख़बरों पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार कोप्रतिक्रिया दी.
रणधीर जायसवाल ने कहा, “हम सभी जानते हैं कि पाकिस्तान कई दशकों से भारत के ख़िलाफ़ सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है. भारत की जेन-ज़ी समेत सभी लोग लगातार मांग कर रहे हैं कि पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को समाप्त करे.”
सिंधु जल संधि को लेकर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पाकिस्तान पर निशाना साधा है.
उन्होंने कहा, "जो देश दशकों से सीमा पार आतंकवाद, धार्मिक कट्टरपंथ और हिंसा को बढ़ावा देता रहा है, वह विविध संस्कृतियों और परंपराओं की साझा विरासत का दावा नहीं कर सकता."
रणधीर जायसवाल ने कहा, “अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को संरक्षित करने के मामले में पाकिस्तान का रिकॉर्ड बेहद ख़राब रहा है. ऐसे में इस तरह के हताश प्रयास और भी अधिक बेतुके लगते हैं.”
उन्होंने कहा, "पाकिस्तान का यह रवैया उसकी वास्तविक स्थिति को उजागर करता है और सांस्कृतिक विरासत को लेकर किए जा रहे उसके दावों पर सवाल खड़े करता है."
कार्टून: बताना तो पड़ेगा
इमेज कैप्शन, ई20 पेट्रोल को लेकर नितिन गडकरी के बयान पर आज का कार्टून
राहुल गांधी ने नए शिक्षा मंत्री पर उठाए सवाल, क्या कहा?
इमेज स्रोत, Arvind Yadav/Hindustan Times via Getty Images
इमेज कैप्शन, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पर सवाल उठाए
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है.
राहुल गांधी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने ऐसे व्यक्ति को देश का शिक्षा मंत्री बनाया है, जो 'रेपिस्टों का बचाव करते हैं.'
राहुल गांधी ने सदन के बाहर मीडिया से कहा, "भारत के शिक्षा मंत्री के पद पर ऐसे व्यक्ति को बैठाया गया है, जो रेपिस्टों का बचाव करते हैं. इससे ज़्यादा घिनौना कुछ नहीं हो सकता. कोई भी व्यक्ति जो रेपिस्टों को संरक्षण देने की बात करता है, उससे ज़्यादा घिनौना आदमी नहीं हो सकता."
उन्होंने आगे कहा, "पीएम के मंत्रिमंडल में कई लोग हैं, लेकिन उन्होंने ऐसे व्यक्ति को चुना जो रेपिस्टों का बचाव करते हैं. यह हैरान करता है."
इससे पहले कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी सदन में शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी पर टिप्पणी की थी, जिसके बाद बीजेपी सांसदों ने उनसे माफ़ी की मांग की.
संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने प्रियंका की टिप्पणी को कार्यवाही से हटाने की भी मांग की.
प्रियंका गांधी ने लोकसभा में किस बात पर कहा- पूरा देश ये सवाल पूछ रहा है
इमेज स्रोत, Sansad TV
इमेज कैप्शन, प्रियंका गांधी ने सदन में पूछा कि पैलेट गन चलाने का ऑर्डर किसने दिया
लोकसभा में मंगलवार को 'पब्लिक एग्ज़ामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सरकार पर युवाओं की आवाज़ दबाने का आरोप लगाया.
उन्होंने लोकसभा में पूछा, "क्या ज़रूरत थी छात्रों पर आँसू गैस के गोले छोड़ने की, उनपर लाठियां बरसाने की? क्या ज़रूरत थी नौजवान लड़कियों को जलील करते हुए उनके कपड़े फाड़ने की, उनको बेरहमी से पिटवाने की? क्या ज़रूरत थी देश के युवाओं पर पैलेट गन, एके-47 चलवाने की, क्या वे आतंकवादी हैं?"
प्रियंका गांधी ने कहा, "पैलेट गन चलाने का ऑर्डर किसने दिया, प्रधानमंत्री ने दिया या गृह मंत्री ने? आज ये सवाल सिर्फ़ कांग्रेस पार्टी नहीं, बल्कि पूरा देश पूछ रहा है और इसका जवाब देने की ज़िम्मेदारी सरकार की है."
उन्होंने कहा, "देश के एजुकेशन सिस्टम में कई सारी खामियां भर गई हैं. कई बच्चे दबाव में आकर जान दे देते हैं तो कई डिप्रेशन में चले जाते हैं. परिवारों पर भी भारी दबाव है और उन्हें कर्ज़ लेना पड़ता है. उसके बावजूद बच्चों के अच्छे भविष्य की कोई गारंटी नहीं रह गई है."
गौरतलब है कि इससे पहले चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा था कि पब्लिक एग्ज़ामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक भारतीय संसद के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने वाला क़ानून है.
(आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुज़र रहे हैं तो भारत सरकार की 'जीवन आस्था' हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.)
फ़ेसबुक से कुछ देर के लिए पीएम मोदी के अकाउंट से पोस्ट हटने पर आईटी मंत्रालय ने क्या कहा
इमेज स्रोत, Ajay Aggarwal/Hindustan Times via Getty Images
इमेज कैप्शन, आईटी मंत्रालय के सचिव ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि भारत में प्रमुख हस्तियों के सोशल मीडिया अकाउंट सुरक्षित रहें (फ़ाइल फ़ोटो: नरेंद्र मोदी)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक पोस्ट को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म फ़ेसबुक (मेटा) ने भारत में कुछ समय के लिए हटा दिया था. इस मामले को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने 'बेहद परेशान करने वाला' बताया है.
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में एस कृष्णन ने कहा, "प्रधानमंत्री के आधिकारिक हैंडल से ऑथराइज़्ड कंटेंट को हटाना गंभीर मामला है. ऐसा कभी नहीं होना चाहिए था."
उन्होंने कहा कि मेटा की ओर से इस मामले में बिना शर्त माफ़ी मांगना एक अच्छा क़दम है. हालांकि, उन्होंने कहा, "मेटा ने इसके पीछे तकनीकी गड़बड़ी का हवाला दिया है, लेकिन यह स्पष्टीकरण अपने आप में स्वीकार्य नहीं है. हमने उनसे इस मामले में और जानकारी मांगी है. तकनीकी स्तर पर एक बड़ी बैठक की जाएगी, ताकि यह समझा जा सके कि ऐसी स्थिति कैसे पैदा हुई."
आईटी मंत्रालय के सचिव ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि भारत में प्रमुख हस्तियों के सोशल मीडिया अकाउंट सुरक्षित रहें.
उन्होंने कहा, "एक बार कोई अकाउंट वेरिफ़ाइड हो जाए, तो ये सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वहाँ पोस्ट किया गया कंटेंट ऐसे कमज़ोर आधारों या इस तरह की ग़लतियों की वजह से न हटाया जाए. मुझे लगता है कि ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. हम इस मामले को आगे भी उठाते रहेंगे ताकि ऐसे सुधार किए जाएं, जिससे भविष्य में इस तरह के मामले न दोहराएं."
यह जानकारी आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आई है कि पीएम मोदी का कौनसा फ़ेसबुक पोस्ट हटाया गया. हालांकि, समाचार एजेंसी पीटीआई ने बताया कि 23 जुलाई को पोस्ट किया गया वीडियो हटा था, जिसमें पीएम मोदी ने युवाओं और स्टूडेंट्स को संबोधित किया था.
भारत और चीन के बीच इस अहम रास्ते से फिर शुरू होगा व्यापार, विदेश मंत्रालय ने बताया
इमेज स्रोत, MEA India
इमेज कैप्शन, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल
भारत और चीन के बीच एक अगस्त से 'नाथू ला पास' के जरिए सीमा व्यापार दोबारा शुरू होगा.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच पहले से हुए समझौते के तहत इस फैसले को लागू किया जा रहा है.
रणधीर जायसवाल ने प्रेस वार्ता में कहा, "19 अगस्त 2025 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में दोनों पक्षों ने तीन निर्धारित व्यापारिक मार्गों लिपुलेख, शिपकी ला और नाथू ला पास के जरिए सीमा व्यापार फिर से शुरू करने पर सहमति जताई थी."
विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों देशों के बीच हुए फ़ैसलों को अब लागू किया जा रहा है. इसके तहत एक अगस्त से नाथू ला पास के रास्ते भारत-चीन के बीच सीमा व्यापार फिर शुरू होगा.
प्रदर्शनकारी छात्रों की रिहाई पर तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार को दिया अल्टीमेटम, सीटू तिवारी, बीबीसी संवाददाता
इमेज स्रोत, Santosh Kumar/Hindustan Times via Getty Images
इमेज कैप्शन, तेजस्वी यादव ने तय समय सीमा तक छात्रों की रिहाई और दर्ज मुकदमों की वापसी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी (फ़ाइल फ़ोटो)
बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार को 29 जुलाई की शाम 7 बजे तक छात्र आंदोलन के दौरान गिरफ़्तार सभी छात्रों को रिहा करने का अल्टीमेटम दिया है.
उन्होंने चेतावनी दी है कि तय समय सीमा तक छात्रों की रिहाई और दर्ज मुकदमों की वापसी नहीं होने पर 30 जुलाई की सुबह 7 बजे से पूरे बिहार में आंदोलन शुरू किया जाएगा.
पटना डीएम कुंदन कुमार ने छात्रों की रिहाई के संबंध में हो रही कार्यवाही के सवाल पर बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, "पब्लिक प्रॉसिक्यूटर को सूचना दे दी गई है और अब वो आगे की कार्यवाही करेंगे."
दरअसल, 27 जुलाई की देर शाम बिहार सरकार ने छात्र आंदोलन के दौरान गिरफ़्तार सभी आंदोलनकारियों को रिहा करने की घोषणा की थी. हालांकि, इसके बावजूद छात्रों की रिहाई नहीं होने की ख़बरें लगातार सामने आ रही हैं.
बांकीपुर उपचुनाव के प्रचार के दौरान रोड शो में पत्रकारों से बातचीत करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा, "यदि सरकार बुधवार शाम 7 बजे तक छात्रों को रिहा नहीं करती और उन पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं लेती है, तो 30 जुलाई की सुबह 7 बजे से पूरे बिहार में आंदोलन होगा."
इस बीच, छात्र आंदोलन के दौरान दर्ज एफ़आईआर के मामले में तेजस्वी यादव के बड़े भाई तेज प्रताप यादव भी पटना के बेऊर जेल में बंद हैं.
वहीं, सीपीआई (एमएल) के राज्य सचिव कुणाल ने भी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, "पार्टी मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया में किसी भी तरह की टालमटोल या नौकरशाही बाधा स्वीकार नहीं करेगी."
छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों में सीपीआई (एमएल) के पालीगंज विधायक संदीप सौरभ समेत कई आइसा नेता भी बेऊर जेल में बंद हैं.
राज्यभर में छात्र आंदोलन के दौरान कुल 407 प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार किया गया है, जबकि 999 लोगों को नामज़द अभियुक्त बनाया गया है.
दक्षिण जापान में 7.1 तीव्रता का भूकंप, शॉपिंग मॉल में फंसे लोग
इमेज स्रोत, Reuters
इमेज कैप्शन, जापान में भूकंप के बाद कुमामोटो के एयॉन मॉल में विस्फ़ोट होने की भी सूचना मिली है
दक्षिण जापान में मंगलवार को 7.1 तीव्रता का भूकंप आने से दहशत फैल गई. अधिकारियों के अनुसार, भूकंप के बाद कुमामोटो स्थित एक शॉपिंग मॉल में कई लोग फंस गए हैं, जबकि हादसे में कई लोगों के घायल होने की ख़बर है.
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, भूकंप के बाद कुमामोटो के एयॉन मॉल में विस्फ़ोट होने की भी सूचना मिली है. हालांकि, विस्फ़ोट के कारणों और नुकसान की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है.
भूकंप स्थानीय समयानुसार शाम 4:27 बजे जापान के क्यूशू द्वीप के अंदरूनी हिस्से में आया. झटकों के बाद सुनामी की चेतावनी जारी की गई थी, जिसे क़रीब एक घंटे के भीतर वापस ले लिया गया.
इमेज स्रोत, JIJI Press / AFP via Getty Images
इमेज कैप्शन, कुमामोटो शहर में 28 जुलाई 2026 को आए भूकंप के बाद एक दुकान की बाहरी दीवार ढह गई
एहतियात के तौर पर प्रशासन ने 1.5 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में जाने के निर्देश दिए हैं. राहत एवं बचाव दल प्रभावित इलाक़ों में अभियान चला रहे हैं.
गौरतलब है कि जापान दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में शामिल है. यहां हर वर्ष औसतन क़रीब 1,500 भूकंप दर्ज किए जाते हैं.
अखिलेश यादव ने लोकसभा में कहा- प्रधान को हटाकर प्रधानमंत्री को बचा लिया
इमेज स्रोत, Sansad Tv
इमेज कैप्शन, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार को घेरा है
लोकसभा में मंगलवार को 'पब्लिक एग्ज़ामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार की निंदा की.
उन्होंने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को मंत्रिमंडल से हटाए जाने का ज़िक्र करते हुए कहा कि सरकार ने 'प्रधान को हटाकर प्रधानमंत्री' को बचा लिया.'
अखिलेश यादव ने कहा, "मज़ाक-मज़ाक में बनी कॉकरोच जनता पार्टी आज कितनी बड़ी पार्टी बन गई. मज़ाक में शुरू हुई पार्टी अब कितनी गंभीर हो गई है. सरकार युवाओं को झुकाना जानती है. करोड़ों युवाओं की मांग थी कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफ़ा दें. अब धर्मेंद्र प्रधान मंत्री नहीं हैं."
उन्होंने कहा कि जब पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री संसद पहुंचे तो सदन के बाहर उनका स्वागत किया गया. इस पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इससे सदस्यों को बड़ी राहत मिली होगी. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "एक प्रधान को हटाकर आपने प्रधानमंत्री को बचा लिया."
पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि यह पहला ऐसा आंदोलन था, जिसमें अभिभावकों ने ख़ुद अपने बच्चों से आंदोलन में शामिल होने के लिए कहा. उन्होंने कहा, "अगर यह गलत बात है, तो गृह मंत्री को लाइए, वे सब साफ़ कर देते."
अपने संबोधन के दौरान अखिलेश यादव ने राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले का भी ज़िक्र किया. उन्होंने कहा, "जो लोग चढ़ावा नहीं बचा सके, वो लोग पेपर लीक कैसे बचा पाएंगे. भगवान के दरबार से दान ग़ायब हो गया."
गौरव गोगोई ने कहा- प्रधान का स्वागत ऐसे हुआ, जैसे पाकिस्तान से जंग लड़कर लौटे हों
इमेज स्रोत, Sansad TV
इमेज कैप्शन, लोकसभा में उप नेता और कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई
लोकसभा में 'पब्लिक एग्ज़ामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा करते हुए मंगलवार कोलोकसभा में उप नेता और कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि सरकार शिक्षा को लेकर गंभीर नहीं है.
उन्होंने परीक्षा से जुड़े बिल पर कहा, "ये बिल सिर्फ़ दिखावे का बिल है. सरकार शिक्षा को लेकर गंभीर नहीं है और सुधार नहीं लाना चाहती है."
गौरव गोगोई ने पूछा कि छात्रों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन का आदेश किसने दिया, सरकार को जवाब देना चाहिए.
गोगोई ने कहा, "लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बार-बार कहा कि प्रधान तो सिर्फ़ एक मुखौटा हैं. हमें और बच्चों को इसका भरोसा नहीं है कि उनके हटने से शिक्षा में सुधार आएगा. बच्चे क्या करें. उनके पास पैसे नहीं है कि 30-30 लाख में पैसे खरीद सकें. वे नाराज़ हैं. जब वे लड़ नहीं पाते तो आत्महत्या कर लेते हैं."
उन्होंने आरोप लगाया, "धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री रहते 21 बच्चों ने अपनी जान दे दी, उन्होंने आत्महत्या की. लेकिन जब वे इस्तीफ़ा देने के बाद संसद परिसर में आए तो बीजेपी सांसदों ने उनका ऐसे स्वागत किया, जैसे वो पाकिस्तान से जंग लड़कर आए हों."
गौरतलब है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफ़ा देने के बाद सोमवार को जब धर्मेंद्र प्रधान संसद पहुंचे, तो भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसदों ने उनका ज़ोरदार स्वागत किया था.
(आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुज़र रहे हैं तो भारत सरकार की 'जीवन आस्था' हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.)
धर्मेंद्र प्रधान के संसद में हुए स्वागत पर कॉकरोच जनता पार्टी ने क्या कहा
इमेज स्रोत, ANI
इमेज कैप्शन, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास (फ़ाइल फ़ोटो)
केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद सोमवार को जब धर्मेंद्र प्रधान संसद पहुंचे, तो भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसदों ने उनका जोरदार स्वागत किया. इसे लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि आखिर यह स्वागत किस बात के लिए किया गया.
सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने एक मीडिया चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा, "जब धर्मेंद्र प्रधान संसद पहुंचे तो बीजेपी सांसद उनके जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे. किस बात का जिंदाबाद? वे किस बात का जश्न मना रहे हैं? 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई, अभी तक पीड़ितों को मुआवजा भी नहीं मिला है, हालांकि सरकार ने आश्वासन जरूर दिया है."
दरअसल, इससे पहले सौरव दास और सीजेपी से जुड़े आशुतोष रांका का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. वीडियो में दोनों धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन समाप्त होने के बाद जश्न मनाते हुए दिखाई दे रहे थे.
इस वीडियो को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में सौरव दास ने कहा कि बीजेपी सांसदों का जश्न मनाना जायज नहीं था, लेकिन हमारे वॉलंटियर्स ने इतना अच्छा काम किया था, इसलिए उन्हें अच्छे से बाय-बाय तो बोलना चाहिए.
लोकसभा में पेपर लीक से जुड़े बिल पर चर्चा शुरू, रिजिजू बोले- 10 घंटे की चर्चा के लिए भी तैयार
इमेज स्रोत, Sansad TV
इमेज कैप्शन, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू
लोकसभा में मंगलवार दोपहर 2 बजे से पेपर लीक से जुड़े 'पब्लिक एग्ज़ामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा शुरू हो गई है. इस विधेयक में 2024 में बने क़ानून में बदलाव का प्रस्ताव है.
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सभी दल इस बात पर सहमत हुए हैं कि 6 घंटे की चर्चा को 2 घंटे और बढ़ाकर 8 घंटे कर दिया जाए.
उन्होंने कहा, "स्पीकर ने अभी कहा है कि इसे एक घंटा और बढ़ाने में हमें कोई आपत्ति नहीं है. अगर 8 घंटे से भी ज़्यादा समय की ज़रूरत पड़ी, तो हम 10 घंटे की चर्चा के लिए भी तैयार हैं."
चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह संशोधन विधेयक भारतीय संसद के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने वाला क़ानून है.
उन्होंने कहा कि यह विधेयक साल 2024 में लाए गए अधिनियम में संशोधन के लिए पेश किया गया है. उन्होंने कहा कि 2024 का क़ानून स्वतंत्र भारत के इतिहास में अपनी तरह का पहला क़ानून था, जिसे केंद्र सरकार लेकर आई थी.
डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि वर्ष 2024 का क़ानून और अब लाया गया संशोधन, दोनों ही छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हैं.
उन्होंने कहा, "संशोधन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संकल्प को भी मज़बूत करता है, जिसके तहत देश के बच्चों के भविष्य से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होने दिया जाएगा."
केंद्रीय मंत्री ने कहा, "यह विधेयक भारतीय संसद के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने वाला क़ानून है, जो सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा."
असम: बाढ़ में डूबे कई गांव, ऊपरी असम में हालात गंभीर - तस्वीरों में देखें, दिलीप कुमार शर्मा, जोरहाट से बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लिए
इमेज स्रोत, Joyjyoti Gogoi
इमेज कैप्शन, असम की बाढ़ की स्थिति थोड़ी सुधरी है लेकिन हालात सामान्य होने में अभी काफी समय लग सकता है
असम के छह जिलों में बाढ़ के कारण अब भी 631 गांव पानी में डूबे हुए हैं.
असम राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने सोमवार देर शाम बाढ़ की स्थिति को लेकर जो रिपोर्ट जारी की है उसमें मामूली सुधार के दावे किए गए है. लेकिन ऊपरी असम के तीन जिलों में हालात सामान्य होने में कई महीने लग जाएंगे.
इमेज स्रोत, Joyjyoti Gogoi
इमेज कैप्शन, राज्य में अब भी 4 लाख 45 हजार से ज्यादा लोग बाढ़ प्रभावित हैं
इमेज स्रोत, Joyjyoti Gogoi
इमेज कैप्शन, लोगों का कहना है कि बीते 50 सालों में खासकर ऊपरी असम में इतनी भयंकर बाढ़ किसी ने नहीं देखी थी
इमेज स्रोत, Joyjyoti Gogoi
इमेज कैप्शन, बाढ़ में मरने वालों की संख्या 66 हो गई है जबकि 100 से ज्यादा लोग लापता है
इमेज स्रोत, Joyjyoti Gogoi
इमेज कैप्शन, शिवसागर,जोरहाट और चराईदेव जिले में बाढ़ के कारण भारी नुकसान हुआ है
इमेज स्रोत, Joyjyoti Gogoi
इमेज कैप्शन, बाढ़ के पानी में धंसी गाड़ी
इमेज स्रोत, Joyjyoti Gogoi
इमेज कैप्शन, केवल शिवसागर जिले में करीब 25 हजार बेघर लोग सड़क किनारे या फिर स्कूलों में बने राहत शिविरों में रह रहे है
इमेज स्रोत, Joyjyoti Gogoi
इमेज कैप्शन, सोशल मीडिया में सामने आ रहे कुछ वीडियो में कई बाढ़ पीड़ित लोग राहत के नाम पर मदद नहीं मिलने से अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं
इमेज स्रोत, Joyjyoti Gogoi
इमेज कैप्शन, बारिश के रुकने से भले ही कुछ इलाकों में बाढ़ की स्थिति में मामूली सुधार देखा जा रहा है
अभी तक बीबीसी संवाददाता दीपक मंडल आप तक ख़बरें पहुंचा रहे थे. अब बीबीसी संवाददाता रौनक भैड़ा रात दस बजे तक आप तक ताज़ा ख़बरें पहुंचाएंगे.
बीबीसी न्यूज़ हिन्दी पर मौजूद अहम ख़बरों को पढ़ने के लिए उनके साथ दिए गए लिंक पर क्लिक कर विस्तार से बढ़ सकते हैं.