ट्रंप ने अपने दूतों का इस्लामाबाद दौरा रद्द किया, ईरान से बातचीत न करने की क्या वजह बताई

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को पाकिस्तान में ईरान युद्ध पर होने वाली अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की बैठक रद्द कर दी. यह फ़ैसला उस समय लिया गया जब ईरान का प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद से निकल चुका था.

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ और जेरेड कुश्नर का इसमें 'बहुत ज़्यादा समय बर्बाद' होगा.

उन्होंने बताया कि अगर ईरान बातचीत करना चाहता है तो 'उन्हें बस फोन करना होगा.'

इससे पहले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने पाकिस्तान से बातचीत की थी. उन्होंने कहा कि युद्ध खत्म करने पर ईरान का पक्ष साझा किया है, लेकिन अभी देखना बाकी है कि अमेरिका 'वास्तव में कूटनीति को गंभीरता से लेता है या नहीं.'

फ़िलहाल कूटनीतिक कोशिशें ठप पड़ी हुई हैं. इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने 22 अप्रैल को ख़त्म होने वाली युद्धविराम अवधि को बढ़ा दिया था ताकि बातचीत जारी रह सके.

दोनों पक्ष होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर आमने-सामने हैं. फ़रवरी में अमेरिका और इसराइल के हमले शुरू होने के बाद ईरान ने इस अहम समुद्री रास्ते से गुजरने पर पाबंदी लगा दी है. साथ ही, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी तनाव बना हुआ है.

अराग़ची ने पाकिस्तान को समझाया ईरान का रुख़

शनिवार को ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने इस्लामाबाद में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ पाकिस्तान के सेना प्रमुख फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाक़ात की.

देर रात उन्होंने 'एक्स' पर पोस्ट किया, "पाकिस्तान की यात्रा बहुत ही सार्थक रही. हमारे क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए पाकिस्तान की सकारात्मक भूमिका और भाईचारे भरे प्रयासों को हम बहुत महत्व देते हैं. ईरान के ख़िलाफ़ चल रहे युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए एक कारगर ढांचे को लेकर ईरान का रुख़ साझा किया. अब तक यह साफ़ नहीं है कि अमेरिका कूटनीति को लेकर वाक़ई गंभीर है या नहीं."

इससे पहले इस्लामाबाद में हुई मुलाक़ात के बाद अराग़ची की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि उन्होंने ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम से जुड़े "ताज़ा घटनाक्रम" पर चर्चा की है.

इसमें कहा गया है कि अराग़ची ने युद्ध को ख़त्म करने को लेकर ईरान का 'रुख़ और पक्ष' साझा किया. बयान के मुताबिक़, "आसिम मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान अपने मध्यस्थता प्रयास जारी रखने के लिए तैयार है."

ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि उन्होंने पाकिस्तान के पीएम को, 'युद्धविराम से जुड़े ताज़ा घटनाक्रम' और युद्ध के 'पूरी तरह समाप्त होने' पर अपने देश का 'सैद्धांतिक रुख़' समझाया. इसमें यह भी कहा गया है कि शरीफ़ ने विश्वास जताया है कि बातचीत की प्रक्रिया जारी रहेगी.

इसके बाद अराग़ची इस्लामाबाद से ओमान की राजधानी मस्कट के लिए रवाना हो गए.

बीबीसी के अमेरिकी मीडिया साझेदार सीबीएस न्यूज़ के मुताबिक, पाकिस्तानी अधिकारियों को उम्मीद है कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची रविवार या सोमवार को फिर से इस्लामाबाद लौट सकते हैं.

बीबीसी उर्दू की एक रिपोर्ट के अनुसार इस्लामाबाद में शनिवार को भी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही. शाम तक कहा जा रहा था कि अमेरिका का प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान के लिए रवाना हो रहा है.

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अब भी सुरक्षा बल तैनात थे, ऐसा लग रहा था कि पाकिस्तान को उम्मीद है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत होगी.

ट्रंप ने कहा- बेकार की बातें करने नहीं जाओगे

इस घटनाक्रम के बाद शनिवार रात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने विशेष दूतों की इस्लामाबाद यात्रा रद्द कर दी. ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, "मैंने इस्लामाबाद, पाकिस्तान जाने वाले अपने प्रतिनिधियों की यात्रा अभी रद्द कर दी है, जो ईरानियों से मिलने जा रहे थे. यात्रा में बहुत ज़्यादा समय बर्बाद होता है, और काम बहुत ज़्यादा है."

"इसके अलावा, उनके 'नेतृत्व' के भीतर जबरदस्त आपसी खींचतान और भ्रम है. उन्हें खुद भी नहीं पता कि प्रभारी कौन है. और सारे पत्ते हमारे पास हैं, उनके पास एक भी नहीं! अगर उन्हें बात करनी है, तो बस उन्हें फ़ोन करना होगा."

फ़ॉक्स न्यूज़ के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति ने उसके व्हाइट हाउस संवाददाता से इससे पहले कहा था, "मैंने अपने लोगों से कहा, थोड़ी देर पहले वे रवाना होने की तैयारी कर रहे थे और मैंने कहा, 'नहीं, तुम 18 घंटे की उड़ान भरकर वहां नहीं जा रहे हो.' सारे पत्ते हमारे पास हैं, वे जब चाहें हमें फोन कर सकते हैं, लेकिन अब 18 घंटे की उड़ान भरकर वहां बैठकर बेकार की बातें करने नहीं जाओगे."

जब बीबीसी के अमेरिकी साझेदार सीबीएस न्यूज़ ने इस पर टिप्पणी मांगी, तो व्हाइट हाउस ने ट्रंप के फॉक्स न्यूज़ को दिए गए बयान का ही हवाला दिया.

बीबीसी के वर्ल्ड न्यूज़ कॉरेस्पॉन्डेंट जो इनवुड का विश्लेषण

इस सप्ताहांत किसी भी तरह की कूटनीतिक सफलता की उम्मीद पहले से ही बहुत कम थी. अब जो थोड़ी बहुत उम्मीद थी, वह भी पूरी तरह खत्म हो गई है.

जेरेड कुश्नर और स्टीव विटकॉफ़ के नेतृत्व में प्रस्तावित अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में पहले ही उप राष्ट्रपति जैसा राजनीतिक वज़न नहीं था. जेडी वेंस को 'स्टैंडबाय' पर रखा गया था, लेकिन उनकी शुरुआती तौर पर इसमें शामिल होने की योजना नहीं थी.

अब जब इस निचले स्तर के प्रतिनिधिमंडल ने भी अपनी यात्रा रद्द कर दी है, तो यह इस बात का संकेत है कि दोनों पक्ष एक दूसरे से कितने दूर हैं.

कल व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने कहा था, "हमें उम्मीद है कि इस बैठक से सकारात्मक नतीजे निकलेंगे".

जबकि हकीकत यह थी कि तेहरान ने किसी भी तरह की बैठक की योजना से साफ़-साफ़ इनकार कर दिया था.

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची, इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे, पाकिस्तान गए ज़रूर लेकिन वह वहां सिर्फ़ मेज़बान देश के साथ द्विपक्षीय बातचीत के लिए गए थे.

उस बैठक के बाद उनके बयानों से ज़्यादा कुछ साफ़ नहीं हुआ, लेकिन इससे यह ज़रूर महसूस हुआ कि ईरान ने अपने पहले के रुख़ से कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है.

पाकिस्तानी मेज़बानों का शुक्रिया अदा करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने ईरान के 'विचार और चिंताएं' सामने रखीं और ईरान 'बातचीत से कोई फैसला निकलने तक पाकिस्तान की मदद और दखल को जारी रखने को तैयार है'.

संक्षेप में कहें तो हम बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन आत्मसमर्पण की उम्मीद मत कीजिए.

होर्मुज़ स्ट्रेट है सबसे बड़ी अड़चन

मुख्य अड़चन अब भी होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर दिखाई देती है, उस बेहद अहम समुद्री रास्ते को लेकर, जिसे अब दोनों पक्ष ही ब्लॉक कर रहे हैं.

तथ्य यह है कि जो मुद्दा युद्ध शुरू होने से पहले एजेंडे में था ही नहीं, अब वह पूरी तरह केंद्र में आ गया है.

दोनों पक्ष होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर आमने-सामने हैं. ईरान ने इस अहम जहाज़ी रास्ते से गुजरने पर रोक लगाई है, क्योंकि अमेरिका और इसराइल ने फ़रवरी में हमले शुरू किए थे, साथ ही ईरान की परमाणु योजनाओं को लेकर भी तनाव है.

अमेरिका ने अब इस समुद्री रास्ते में अपनी नौसैनिक मौजूदगी बढ़ा दी है. इस रास्ते से दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल सप्लाई होता है.

अमेरिका का मक़सद ईरानी तेल निर्यात को रोकना है. इससे यह भी पता चलता है कि इस संघर्ष का कोई टिकाऊ समाधान अभी काफ़ी दूर है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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