ममता बनर्जी, शुभेंदु अधिकारी और विजय के साथ-साथ चर्चित चेहरों की सीट का हाल जानिए

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चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के विधानसभा चुनाव के परिणाम आए हैं. इन जगहों पर जो चर्चित चेहरे चुनावी मैदान में हैं, हम उनकी चर्चा यहां कर रहे हैं.

सबसे पहले बात पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के चर्चित चेहरों की.

साल 2011 से भवानीपुर सीट से जीतती आईं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री इस सीट पर हार गई हैं.

साल 2021 में ममता नंदीग्राम विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने गई थीं लेकिन उन्हें बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी से हार का सामना करना पड़ा था.

इसके बाद ममता फिर भवानीपुर आईं और उपचुनाव में उन्हें जीत मिली थी. हालांकि इस बार भवानीपुर में भी शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराया है.

ममता बनर्जी

इस बार बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी ममता बनर्जी को भवानीपुर में चुनौती देने गए थे. शुभेंदु अधिकारी भवानीपुर के अलावा नंदीग्राम से भी चुनाव लड़ रहे थे.

भवानीपुर में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15 हज़ार से अधिक वोटों से हराया है.

चुनाव आयोग के रात साढ़े नौ बजे के आंकड़ों के मुताबिक़, बीजेपी ने 182 सीटों पर जीत दर्ज कर ली है और पार्टी 25 सीटों पर आगे चल रही है. कुल मिलाकर बीजेपी 208 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है.

दूसरी ओर टीएमसी ने 62 सीटों पर जीत दर्ज की है और 18 सीटों पर आगे है.

2016 के विधानसभा चुनाव तक पश्चिम बंगाल में बीजेपी हाशिए की पार्टी रही है लेकिन 2021 के चुनाव में उसने 77 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया था.

शुभेंदु अधिकारी

नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी ने नौ हज़ार से अधिक वोटों से जीत दर्ज की है. पिछले चुनाव में शुभेंदु अधिकारी को नंदीग्राम में महज़ 1956 मतों से ही जीत मिली थी.

नंदीग्राम में 23 अप्रैल को पहले चरण में मतदान हुआ था और भवानीपुर में 29 अप्रैल को दूसरे चरण में मतदान हुआ था.

दिलीप घोष

खड़गपुर सदर से बीजेपी के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष चुनावी मैदान में थे और उन्होंने टीएमसी के प्रदीप सरकार के ख़िलाफ़ 30 हज़ार से ज़्यादा वोटों से जीत दर्ज की है.

2014 में दिलीप घोष आरएसएस से बीजेपी में लाए गए थे और बंगाल बीजेपी में महासचिव बनाए गए थे. 2015 में घोष को पश्चिम बंगाल बीजेपी की कमान सौंप दी गई थी.

दिलीप घोष ने चुनावी करियर की शुरुआत 2016 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से की. इन्होंने कांग्रेस नेता ज्ञान सिंह सोहनपाल को खड़गपुर सदर से हरा दिया. सोहनपाल 1982 से 2011 तक इस सीट से लगातार विधायक निर्वाचित होते आ रहे थे.

दिलीप घोष के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल बीजेपी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में इतिहास रचा था, जब 42 में से 18 सीटों पर जीत मिली थी. बीजेपी के खाते में 40 फ़ीसदी वोट आए थे.

इसी चुनाव में घोष भी मेदिनीपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए थे. एक समय में दिलीप घोष को पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में देखा जाता था.

स्वपन दासगुप्ता

कोलकाता की रासबिहारी सीट से बीजेपी से स्वपन दासगुप्ता चुनावी मैदान में थे और उन्होंने टीएमसी के देबाशीष कुमार के ख़िलाफ़ 20 हज़ार से ज़्यादा मतों से जीत दर्ज की है.

2021 के विधानसभा चुनाव में स्वपन दासगुप्ता तारकेश्वर विधानसभा सीट से बीजेपी के उम्मीदवार थे लेकिन टीएमसी के रामेंदू सिन्हाराय से 7484 मतों से हार गए थे.

हुमायूं कबीर

हुमायूं कबीर इस विधानसभा चुनाव में अहम चेहरा बनकर उभरे हैं. वो रेजीनगर और नौदा दो सीटों से चुनावी मैदान में उतरे थे. रेजीनगर पर उन्होंने 58 हज़ार वोटों से और नौदा से 20 हज़ार से अधिक वोटों से जीत दर्ज की है.

पिछले साल चार दिसंबर को हुमायूं कबीर को तृणमूल कांग्रेस से निलंबित किया गया था.

उस समय उनके निलंबन का कारण "सांप्रदायिक राजनीति" में शामिल होना बताया गया था. उन्होंने मुर्शिदाबाद ज़िले के बेलडांगा में नई "बाबरी मस्जिद" बनाने के लिए मुस्लिम समुदाय से अपील की थी.

इसके बाद हुमायूं कबीर ने आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) नाम से अपने दल की नींव रखी थी.

हिमंत बिस्वा सरमा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद अब बात असम विधानसभा चुनाव की.

असम की जलुकबारी विधानसभा सीट से मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा चुनाव लड़ रहे हैं. इस सीट पर हिमंत बिस्वा सरमा ने बीते पांच चुनाव से जीत दर्ज की है.

इनमें से तीन बार वो कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते हैं और दो बार बीजेपी के टिकट पर. कांग्रेस ने इस बार उन्हें टक्कर देने के लिए बिदिशा नियोग को टिकट दिया है.

चुनाव आयोग के मुताबिक हिमंत बिस्वा ने 89 हज़ार वोटों से जीत दर्ज की है. कांग्रेस की बिदिशा नियोग को 37 हज़ार वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहीं.

गौरव गोगोई

जोरहाट विधानसभा सीट से कांग्रेस के नेता गौरव गोगोई चुनाव हार गए हैं. उन्हें बीजेपी के हितेन्द्र नाथ गोस्वामी ने 23182 वोट के अंतर से हराया है.

2021 के विधानसभा चुनाव में हितेन्द्र नाथ गोस्वामी ने क़रीब 68 हजार वोट के अंतर से जीत हासिल की थी.

हालांकि गौरव गोगोई जोरहाट लोकसभा सीट से सांसद भी हैं.

अखिल गोगोई

शिवसागर विधानसभा सीट भी असम की उन सीटों में से एक है, जिस पर सभी की नज़रें थीं. रायजोर दल के अध्यक्ष अखिल गोगोई ने इस सीट पर 17 हज़ार से अधिक वोटों से जीत दर्ज की है.

बीजेपी के कुशल दोवारी इस सीट पर दूसरे पायदान पर रहे.

2021 में अखिल गोगोई ने इस सीट से जीत दर्ज की थी.

एमके स्टालिन

तमिलनाडु की कोलाथुर सीट से राज्य के सीएम एके स्टालिन चुनाव हार गए हैं. स्टालिन ने इस सीट पर 2011, 2016 और 2021 में जीत दर्ज की थी. लेकिन इस बार चुनाव नहीं जीत सके हैं.

चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक एमके स्टालिन को कुल 74202 वोट मिले. इस सीट पर टीवीके के वीएस बाबू ने 82997 वोट हासिल कर जीत दर्ज की है.

विजय

अभिनेता से नेता बने विजय की टीवीके पार्टी पहली बार चुनाव लड़ रही है. विजय पेरांबुर और तिरुचिरापल्ली ईस्ट सीट से चुनाव लड़ रहे थे.

उन्होंने पेरांबुर से 53 हज़ार से अधिक वोटों से जीत दर्ज की है जबकि तिरुचिरापल्ली ईस्ट सीट पर 27 हज़ार वोटों से आगे चल रहे हैं.

तमिलनाडु में विजय की टीवीके 107 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है.

पिनराई विजयन

केरल के सीएम पीनराई विजयन धर्मडम विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे थे. यहां उनका मुक़ाबला कांग्रेस के वीपी अब्दुल रशीद से थे. विजयन ने इस सीट पर 19 हज़ार से अधिक वोटों से जीत दर्ज की है.

राज्य में अहम मुक़ाबला लेफ्ट के नेतृत्व वाले एलडीएफ़ और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ़ के बीच था.

चुनाव नतीजों के रुझानों में यूडीएफ़ राज्य की सत्ता में वापसी कर रही है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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