पक्की सहेलियां निकलीं सगी बहनें, ऐसे लगा पता

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- Author, गीता पांडे
- पदनाम, महिला मामलों की संपादक, भारत
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
इन दोनों की कहानी बिल्कुल किसी बॉलीवुड फ़िल्म जैसी है. ये ऐसी दो सहेलियों की कहानी है, जो रहीं तो एक दूसरे के आसपास, मगर कुछ राज़ बड़ी देर से खुले.
भारत में जन्मीं ये दोनों महिलाएं अब 40 साल से ज़्यादा उम्र की हैं. बचपन में दो अलग-अलग परिवारों ने उन्हें गोद लिया था. दोनों नीदरलैंड्स में एक-दूसरे के आसपास ही पली-बढ़ीं. अब उन्हें पता चला है कि वे सगी बहनें हैं.
मीना गेल्टिंक और मीनल टाइसन का जन्म 1980 के दशक की शुरुआत में हुआ था. जन्म के कुछ महीने के भीतर ही दोनों को मुंबई के दो अलग-अलग अनाथालयों से गोद लिया गया था.
किशोरावस्था की शुरुआत में दोनों पहली बार एक कार्यक्रम में मिली थीं. यह कार्यक्रम उस संस्था ने रखा था, जिसके ज़रिए उनके माता-पिता ने उन्हें गोद लिया था. पहली मुलाक़ात में ही दोनों एक-दूसरे का चेहरा और तौर-तरीक़े देखकर हैरान रह गई थीं, क्योंकि उनमें बहुत समानताएं थीं.
एक कार्यक्रम के दौरान हुई मुलाक़ात
अब 43 साल की हो चुकीं मीना को वह दिन आज भी अच्छी तरह याद है.
मीना कहती हैं, "गोद लिए गए सभी बच्चों को एक जगह बुलाया गया था, ताकि वे साथ समय बिताएं, एक-दूसरे से घुलें-मिलें और साथ खाना खाएं."
मीना और मीनल दोनों अपने दोस्तों के साथ वहां आई थीं. उनके दोस्तों ने ध्यान दिया कि दोनों एक जैसी दिखती हैं.
कई दोस्तों ने हमसे कहा, 'ख़ुद को आईने में देखो'."
"मैंने कहा, 'हे भगवान, इसकी नाक बिल्कुल मेरी जैसी है. हमारी हंसी भी एक जैसी है'."
मीना ने नीदरलैंड्स में अपने घर से बीबीसी को बताया, "खाने के दौरान मेरी नज़र बार-बार उसी पर जा रही थी."
अगले दिन दोनों ने एक-दूसरे को अपने फ़ोन नंबर और पते दिए. उन्होंने संपर्क में रहने का वादा भी किया.

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एक वक़्त आया जब दोनों का संपर्क टूट गया
उस समय ऐसा कोई संकेत नहीं था कि दोनों के बीच ख़ून का रिश्ता है. इसके बावजूद पहली मुलाक़ात में ही दोनों के बीच गहरा जुड़ाव बन गया.
कई साल तक वे एक-दूसरे को चिट्ठियां लिखती रहीं. चिट्ठियों में वे अक्सर एक-दूसरे को 'सिस' यानी बहन कहती थीं, क्योंकि दोनों को एक-दूसरे के लिए ऐसा ही महसूस होता था.
वे स्कूल, दोस्तों, लड़कों, बाहर घूमने और डांस करने के बारे में एक-दूसरे को लिखती थीं. दोनों अपने खेल और संगीत की पसंद के बारे में भी बात करती थीं. इसी दौरान उन्हें पता चला कि दोनों को बैकस्ट्रीट बॉयज़ बहुत पसंद हैं.
फिर 15 साल पहले दोनों का संपर्क टूट गया. मीनल फ़्रांस चली गई थीं. मीना ने भी कुछ समय पहले अपने पहले बच्चे को जन्म दिया था और वह व्यस्त हो गई थीं.
साल 2017 में मीना ऐसे लोगों की एक बैठक में शामिल हुईं, जिन्हें बचपन में भारत से गोद लिया गया था.
वहीं उन्हें डीएनए टेस्ट के बारे में पता चला और उन्होंने भी अपना टेस्ट कराया. लेकिन उनका डीएनए किसी से मैच नहीं हुआ. इस साल की शुरुआत में फ़ोन की स्टोरेज भर जाने पर उन्होंने वह ऐप डिलीट कर दिया.
फिर जो हुआ वो चमत्कार ही था
फिर 20 मई को मीना को फ़ेसबुक पर मीनल का एक संदेश मिला.
उन्होंने पूछा, "मैं याद हूं?"
मीनल ने अप्रैल में नीदरलैंड्स में अपने माता-पिता से मिलने के दौरान डीएनए टेस्ट कराया था. उन्होंने अपने टेस्ट के नतीजे का स्क्रीनशॉट भी संदेश के साथ भेजा था.
मीना कहती हैं, "मैंने ऐप दोबारा इंस्टॉल किया. मैं इतनी घबराई हुई थी कि लॉग इन करने से पहले मैंने 10 बार ग़लत पासवर्ड डाल दिया."
नतीजा बिल्कुल साफ़ था. दोनों महिलाओं का डीएनए "100 प्रतिशत मैच" था.
मीना बताती हैं, "मेरी एक 'सगी बहन' थी. इसका मतलब था कि हमारी जैविक मां और पिता एक ही थे. मुझे ऐसा लगा, जैसे शरीर में अचानक एड्रेनलिन दौड़ गया हो. मैं रोने लगी. मीनल मेरी ज़िंदगी की वह खोई हुई कड़ी थी, जिसका मैं लंबे समय से इंतज़ार कर रही थी. हम पहले से ही एक-दूसरे को बहन कहते थे."
"इस डीएनए मैच ने साबित कर दिया कि हमारा मन जो कह रहा था, वह सही था."
फिर हुई दोनों की भावुक मुलाक़ात
अगस्त में दोनों पुरानी सहेलियां दोबारा मिलीं. बहनें होने की बात पता चलने के बाद यह उनकी पहली मुलाक़ात थी.
अब तीन बच्चों की मां मीना कहती हैं, "वह मुलाक़ात कमाल की थी. ऐसा लगा, जैसे मैं घर लौट आई हूं. कई साल से मीनल और मुझे अपने दिल में एक बड़ा ख़ालीपन महसूस होता था. अब हमें लगता है कि वह कमी पूरी हो गई है. अब सब कुछ वैसा लग रहा है, जैसा उसे होना चाहिए था."
उनकी "भावुक मुलाक़ात" के बारे में समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने लिखा कि इस दौरान आंसू, एक-दूसरे को गले लगाना और हंसी देखने को मिली. इसके बाद दोनों ने पहली बार साथ सेल्फ़ी ली.
44 साल की मीनल अपने साथी और दो बेटों के साथ फ़्रांस में रहती हैं. उन्होंने रॉयटर्स को बताया कि अप्रैल में डीएनए टेस्ट का नतीजा मिलने पर वह शुरू में यह नहीं समझ पाई थीं कि उनका मैच उसी लड़की से हुआ है, जो 30 साल पहले उनसे लिपट गई थी.
सोशल मीडिया पर मीना की तस्वीरें देखने के बाद ही उन्हें पूरी बात समझ आई.

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मुझे इस पर यक़ीन नहीं हो रहा था. बहनें होने की बात पता चलने से पहले हम दोस्त थीं."
मीनल ने कहा, "हम हमेशा से बहनें थीं, लेकिन हमें यह पता नहीं था."
मीना और मीनल को नीदरलैंड्स के दो अलग-अलग परिवारों ने अलग-अलग अनाथालयों से गोद लिया था.
मीना बताती हैं कि वह नीदरलैंड्स के एक छोटे से गांव में पली-बढ़ी थीं. उनके माता-पिता एक निजी स्कूल में पढ़ाते थे.
वह कहती हैं, "वे मेरे शिक्षक भी थे. वे बहुत प्यार करने वाले और भरोसा करने वाले लोग थे."
कुछ साल पहले उनके पिता की मौत हो गई. लेकिन उनकी मां आज भी उसी गांव में रहती हैं.
मीना कहती हैं, "हम हर दिन बात करते हैं. उनके साथ मैं आज भी सबसे ज़्यादा सुरक्षित महसूस करती हूं."
साल 2003 में 19 साल की उम्र में मीना अपने माता-पिता और भाई के साथ मुंबई के उस अनाथालय में गई थीं, जहां से उन्हें गोद लिया गया था. उनके भाई को गोवा से गोद लिया गया था.
उन्होंने दो सप्ताह तक पुराने रिकॉर्ड देखे और मीना के जैविक माता-पिता के बारे में जानने की कोशिश की.
मीना कहती हैं, "मेरे लिए यह जानना ज़रूरी था कि मैं कहां से आई हूं. लेकिन अनाथालय ने उनके बारे में कोई जानकारी नहीं दी."
मई से मीना और मीनल हर दूसरे दिन एक-दूसरे से बात कर रही हैं. वे एक-दूसरे के जीवनसाथी, बच्चों, भाइयों और माता-पिता से भी मिल चुकी हैं.

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मीना कहती हैं, "हर कोई ध्यान देता है कि हम कैसे एक-दूसरे की बात पूरी कर देती हैं. हमारे सिर हिलाने और चलने का तरीक़ा भी एक जैसा है."
मीना कहती हैं कि वे दोनों सगी बहनें हैं, यह बात उन्हें अब भी कई बार पूरी तरह महसूस नहीं होती.
मीना कहती हैं, "कभी-कभी हम दो घंटे तक बात करती रहती हैं और हमें समय का पता ही नहीं चलता. फिर अचानक याद आता है कि हमें घर का सामान लेने जाना है या बच्चों को स्कूल से लाना है."
मीना कहती हैं कि वह और उनकी बहन उस जगह पर लौटना चाहती हैं, जहां से इस कहानी की शुरुआत हुई थी.
"हम कभी साथ भारत जाना चाहती हैं और मुंबई की सड़कों पर साथ घूमना चाहती हैं."
वह कहती हैं, "हम दोनों की ज़िंदगी में ऐसे समय आए, जब हमने ख़ुद को बहुत अकेला महसूस किया. जैसे मेरे पिता की मौत के समय या जब मेरा दिल टूटा था."
"मुझे अफ़सोस है कि हम उस समय एक-दूसरे के साथ नहीं रह सकीं. हम अपनी ख़ुशियां बांट सकती थीं और मुश्किल समय में एक-दूसरे की मदद कर सकती थीं."
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