'अच्छे और तमीज़दार लोग...' 9/11 हमलावरों की मकान मालकिन ने कथित सऊदी जासूस से रिश्तों के बारे में क्या बताया?

हॉली रैचफ़ोर्ड अमेरिका के पश्चिमी हिस्से में किसी अज्ञात जगह पर रेगिस्तान में खड़ी हैं.
इमेज कैप्शन, हॉली रैचफ़र्ड ने पहली बार सार्वजनिक रूप से बोलने का फ़ैसला किया है.
    • Author, जेन मैक्मुलैन
    • पदनाम, बीबीसी पैनोरामा और बीबीसी रेडियो 4
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 16 मिनट

हॉली रैचफ़र्ड आज भी इस बात पर यकीन नहीं कर पाती हैं कि जिस व्यक्ति को उन्होंने घर दिलाया था उस पर अमेरिका के सबसे काले दिनों में से एक में शामिल होने का आरोप लगेगा.

रेचफ़र्ड बीबीसी को बताती हैं, "मेरे लिए यह समझ पाना लगभग नामुमकिन है कि वह खुद को क्या बताता था और असल में वह कौन था. आज भी मैं इस बात को लेकर संघर्ष करती हूं."

हम जिस शख़्स का जिक्र कर रहे हैं उसका नाम था - उमर अल-बयौमी. उमर सऊदी अरब का रहने वाला था. उसकी उम्र क़रीब 40 साल थी.

सितंबर 1999 में वह अपने परिवार के साथ कैलिफ़ोर्निया के सैन डिएगो स्थित उस हाउसिंग कॉम्प्लेक्स में रहने आया था जिसकी देखरेख रैचफ़र्ड करती थीं.

25 साल बाद भी परेशान करती यादें

पार्कवुड अपार्टमेंट्स के फ्लैट नंबर 152 में रहने आया यह नया किरायेदार जल्द ही रैचफ़र्ड की पूल पार्टियों का नियमित हिस्सा बन गया.

रैचफ़र्ड याद करते हुए कहती हैं, "वह हमेशा बेहद ख़ुशमिज़ाज रहता था, चेहरे पर मुस्कान रहती थी, और बहुत ही दोस्ताना स्वभाव का था."

कुछ महीनों बाद, बयौमी ने रैचफ़र्ड की मुलाकात दो ऐसे लोगों से कराई, जो देखने में बेहद साधारण लगते थे, और जो बाद में उनके पड़ोसी भी बन गए.

यह दोनों व्यक्ति 9/11 हमलों के दौरान अमेरिकन एयरलाइंस की फ्लाइट 77 का अपहरण कर उसे पेंटागन से टकराने के कारण कुख्यात हो गए.

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पिछले 25 वर्षों से रैचफ़र्ड इन तीनों लोगों से अपने संबंधों की यादों से परेशान रही हैं. उनका मानना है कि शुरुआत से ही बयौमी ने उन्हें धोखे में रखा.

वह याद करते हुए कहती हैं, "जब भी मैं कोई पार्टी रखती थी, वह आता था और गतिविधियों का हिस्सा बन जाता था."

वह कहती हैं कि बयौमी का परिवार उन्हें अक्सर खाने पर अपने घर भी बुलाता था.

उन्होंने कहा, "मुझे वहां जाना अच्छा लगता था."

लेकिन पार्कवुड के फ्लैट नंबर 152 का यह पूर्व निवासी बयौमी अब उस 1 ट्रिलियन डॉलर (733 अरब पाउंड) के मुकदमे के केंद्र में है, जिसे 9/11 के पीड़ितों के कई हज़ार परिवारों और जीवित बचे हुए लोगों ने सऊदी अरब के ख़िलाफ़ दायर किया है.

11 सितंबर 2001 को इस्लामी चरमपंथी नेटवर्क अल-क़ायदा के 19 सदस्यों ने चार यात्री विमानों का अपहरण कर लिया था.

हमलावरों ने इन विमानों को न्यूयॉर्क में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ट्विन टावर्स और वॉशिंगटन में पेंटागन की इमारत से टकरा दिया था. यात्रियों के प्रतिरोध करने के बाद एक अन्य विमान (जिसका अपहरण किया गया था) पेनसिल्वेनिया में क्रैश हो गया था.

इन हमलों में कुल मिलाकर लगभग 3,000 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर तैनात करीब 300 दमकलकर्मी और अन्य आपातकालीन सेवा कर्मी भी शामिल थे.

11 सितंबर 2001, पेंटागन के पश्चिमी हिस्से से धुआं निकल रहा है और फायर इंजन इमारतों में लगी आग को बुझाने में लगे हुए हैं.

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, 9/11 को पेंटागन पर हुए हमले के बाद के हालात

बयौमी पर आरोप है कि उन्होंने 9/11 की साज़िश को अंजाम देने में मदद की थी.

उन्होंने अमेरिका पहुंचने वाले पहले दो हाईजैकर्स, नवाफ अल-हाज़मी और ख़ालिद अल-मिहदार, को सहायता मुहैया कराई थी. ये दोनों हमलों से पहले कई महीनों तक पार्कवुड में रहे थे.

न्यूयॉर्क में 9/11 पीड़ित परिवारों के दायर मुकदमे की सुनवाई कर रहे फ़ेडरल जज ने एक वर्ष पहले पाया था कि उपलब्ध सबूतों से "यह उचित निष्कर्ष निकलता है" कि बयौमी और अमेरिका में तैनात एक सऊदी राजनयिक "अपहरणकर्ताओं की मदद करते समय सऊदी सरकार के साथ 'लगातार संपर्क' में था.'

जज के इस फैसले ने पीड़ित परिवारों के मुकदमे को आगे बढ़ाने की अनुमति दी है. सऊदी अरब इस फ़ैसले के खिलाफ अपील कर रहा है और बयौमी के साथ मिलकर हमेशा इन आरोपों से इनकार करता रहा है.

हमलों के बाद से ही बयौमी अटकलों का विषय बने हुए हैं.

रैचफ़र्ड ने उन्हें अपहरणकर्ताओं के साथ बातचीत करते और उनकी मदद करते देखा था. वह इस बारे में न्यूयॉर्क की अदालत में अपना बयान दे चुकी हैं, जो अभी सीलबंद है.

लेकिन उन्होंने आज तक सार्वजनिक रूप से इस बारे में नहीं बताया है कि उन्होंने क्या देखा था.

आसान नहीं था हॉली को ढूंढना

हॉली रैचफ़र्ड, 1990 के दशक के आखिर में एक ऑफ़िस में फ़ोटो के लिए पोज़ देती हुईं.

इमेज स्रोत, Holly Ratchford

इमेज कैप्शन, 1990 के दशक के आख़िर में पार्कवुड अपार्टमेंट्स के प्रॉपर्टी मैनेजर थीं रैचफ़र्ड

हॉली रैचफ़र्ड को खोजना आसान नहीं था. वह 9/11 के बाद इंसानी आबादी से उतनी दूर जाकर रहने लगीं.

मैंने उनका पता पश्चिमी अमेरिका के ऊंचे रेगिस्तानी इलाके में लगाया, जिसे रैटलस्नेक के इलाके के रूप में जाना जाता है.

उन्होंने मुझसे कहा कि वह न्यूज़ से दूर रहती हैं और पत्रकारों से बात नहीं करतीं. इसके बावजूद उन्होंने मुझसे बातचीत करने के लिए सहमति दे दी.

मुझे दिया गया उनका इंटरव्यू बयौमी द्वारा पुलिस, एफ़बीआई और न्यूयॉर्क की अदालत को बताई गई घटनाओं की कहानी पर सवाल खड़े करता है.

यह बीबीसी रेडियो 4 के पॉडकास्ट इंटरीग: ए 9/11 स्टोरी और बीबीसी पैनोरमा की आगामी डॉक्यूमेंट्री 9/11: द सऊदी कनेक्शन में शामिल है.

साल 1999 की शुरुआत में रैचफ़र्ड की ज़िंदगी पटरी पर आ गई थी. इससे पहले उनका जीवन अस्थिर रहा था. वह कई जगहों पर रह चुकी थीं, 21 साल की उम्र से पहले उनकी शादी हो चुकी थी, वह गर्भवती हुईं और फिर उनका तलाक भी हो गया था.

लेकिन अब उनके पास एक ऐसा काम था जिससे उन्हें प्यार था और एक घर भी था. सैन डिएगो के उपनगरीय इलाके में स्थित पार्कवुड अपार्टमेंट्स की वह नई प्रॉपर्टी मैनेजर बन गईं.

वह कहती हैं कि उन्होंने अपने काम को ठीक से अंजाम दिया. मकान कभी लंबे समय तक खाली नहीं रहते थे. दरअसल ये उनका ड्रीम जॉब था और इसके पीछे की वजह काग़ज़ी काम या अच्छी सैलरी नहीं थी बल्कि इसकी वजह वहां के लोग थे.

रैचफ़र्ड न केवल पार्कवुड में काम करती थीं, बल्कि वहीं रहती भी थीं. उनके ग्राहक ही उनके पड़ोसी थे. और उनमें से कई सिर्फ पड़ोसी नहीं थे. वह कहती हैं कि वे उनके दोस्त बन गए थे.

वह याद करते हुए कहती हैं, "मैं हमेशा अपने कर्मचारियों से कहती थी, 'उन्हें यह महसूस कराओ कि यह उनका घर है, और वे यहीं रहेंगे.'"

जब रैचफ़र्ड पार्कवुड में अपनी पहचान बना रही थीं, तब वह खुश थीं और अपने बनाए हुए संसार में सुरक्षित महसूस करती थीं, एक ऐसा संसार, जिसमें वह हर व्यक्ति और हर चीज़ को जानती थीं.

फिर, अचानक और नाटकीय तरीके से सब कुछ बिखर गया.

उमर अल-बयौमी

सैन डिएगो में पार्क व्यू अपार्टमेंट्स कॉम्प्लेक्स के बीच में एक स्विमिंग पूल दिखाई दे रहा है.
इमेज कैप्शन, सैन डिएगो में स्थित पार्कवुड अपार्टमेंट्स कॉम्प्लेक्स

उमर अल-बयौमी पार्कवुड में यह कहते हुए रहने आया था कि वह एक मैच्योर स्टूडेंट है.

रैचफोर्ड कहती हैं, "मुझे पता था कि वह पढ़ाई कर रहा था. इसके अलावा वह क्या करता था, मैं निश्चित रूप से नहीं कह सकती."

दो दशक से अधिक समय बाद सार्वजनिक किए गए एफबीआई दस्तावेज़ों और अदालत में दायर कागज़ात से पता चला कि बयौमी की पढ़ाई वास्तव में 1998 में ही लगभग रुक गई थी.

वह अपना अधिकतर समय मुस्लिम समुदाय में धार्मिक गतिविधियों के आयोजन में बिताता था, जिनकी वह अक्सर वीडियो रिकॉर्डिंग भी करता था.

उसकी लगातार वीडियो बनाने की आदत और लोगों से पूछे जाने वाले सवालों ने संदेह पैदा कर दिया था.

9/11 के बाद सैन डिएगो में एफबीआई कार्यालय की जांच का नेतृत्व करने वाले रिचर्ड लैम्बर्ट मुझसे कहते हैं, "सैन डिएगो के मुस्लिम समुदाय में आम तौर पर यह धारणा थी कि बयौमी सऊदी ख़ुफ़िया सेवा का एक ऑपरेटिव था."

लेकिन रैचफ़र्ड का काम किसी की निजी ज़िंदगी में दखल देना नहीं था. उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि क्या वह किराया दे सकता है? और इसका जवाब था - हाँ.

एफबीआई को बाद में पता चला कि उसे सालाना लगभग 90,000 डॉलर का भुगतान किया जा रहा था.

बयौमी खुद को एक साधारण पारिवारिक व्यक्ति के रूप में पेश करता था.

रैचफ़र्ड ने जिस बयौमी को देखा था, उसकी झलक उसके ऐसे घरेलू वीडियो में कैद है जिन्हें पहले कभी प्रसारित नहीं किया गया था. एक वीडियो में वह पार्कवुड के स्विमिंग पूल के पास अपने परिवार के साथ गेंद खेलता दिखाई देता है और गेंद के पानी में चली जाने पर हंसता है.

एक अन्य वीडियो में वह अपने परिवार के साथ लास वेगास की यात्रा पर दिखाई देता है. फूलों वाली शर्ट पहने हुए वह न्यूयॉर्क, न्यूयॉर्क होटल-कैसिनो के रोलरकोस्टर की ओर इशारा करता है.

रैचफ़र्ड कहती हैं, "उसने मुझे जो कुछ भी बताया, मैंने उस पर विश्वास कर लिया. मुझे सचमुच लगता था कि वह वैसा ही इंसान है."

लेकिन बयौमी की यह छवि उन अन्य वीडियो में दिखाई देने वाले व्यक्ति से मेल नहीं खाती.

1999 की गर्मियों में बयौमी ने वॉशिंगटन डीसी स्थित अमेरिकी कैपिटॉल भवन को अलग-अलग कोणों से फ़िल्माया था. वीडियो में वह एक "योजना" का ज़िक्र करता है और फिर कैमरा अपनी ओर घुमाकर किसी रिपोर्टर की तरह टिप्पणी करता है.

9/11 पीड़ित परिवारों के वकीलों का आरोप है कि वह हमलों के संभावित लक्ष्य के रूप में इस इमारत की रेकी कर रहा था. सऊदी अरब का कहना है कि यह एक टुरिस्ट वीडियो था.

अगस्त 2025 में दिए गए अपने फैसले में न्यूयॉर्क के जज ने कहा कि इस वीडियो से "अदालत केवल यही निष्कर्ष निकाल सकती है" कि बयौमी "वॉशिंगटन डीसी गया था और उसने शहर की वीडियो रिकॉर्डिंग की थी.

जब हाईजैकर्स का गारंटर बना बयौमी

बयौमी के वीडियो का एक स्क्रीनशॉट, जिसमें वे बैंगनी शर्ट के साथ सूट पहने हुए कैपिटल के बाहर खड़े हैं.

इमेज स्रोत, SDNY

इमेज कैप्शन, उमर अल-बयौमी ने कैपिटल हिल के बाहर 'फ़िल्मांकन' करते वक्त एक प्लान पर ध्यान दिया

3 फ़रवरी 2000 को बयौमी दो युवाओं को रैचफ़र्ड के सैन डिएगो स्थित किराये के कार्यालय में लेकर आया.

रैचफ़र्ड के अनुसार, वह स्पष्ट रूप से जल्दबाज़ी में था और उनसे बात करते हुए फाइलिंग कैबिनेट पर बैठ गया. उसने बताया कि ये दोनों व्यक्ति उसकी मस्जिद से हैं और किराये पर रहने की जगह तलाशते समय उसके साथ रह रहे हैं.

वह याद करती हैं, "उनमें कुछ भी अजीब नहीं था. वे अच्छे और तमीज़दार थे."

वे दोनों आदमी अंग्रेज़ी नहीं बोलते थे, लेकिन उमर अल-बयौमी ने ज़िम्मेदारी संभाली.

उन्होंने मुझे बताया, "वे इनकम की शर्तों या बैंक अकाउंट वाली शर्तों पर बिल्कुल भी खरे नहीं उतरते थे. उनके पास इनमें से कुछ भी नहीं था."

रैचफ़र्ड के कुछ नियम थे. उन्होंने तुरंत मना कर दिया.

लेकिन उन दोनों आदमियों के पास कई हज़ार डॉलर कैश थे. बैंक रिकॉर्ड बताते हैं कि अगले दिन, बयौमी उन्हें पास के बैंक ले गए और अकाउंट खुलवाने में उनकी मदद की.

तीसरे दिन रैचफ़र्ड के ऑफ़िस में, उन्होंने इनकम की मुश्किल शर्त का एक हल निकाला. वह उनके लीज़ एग्रीमेंट पर को-साइन करने वाले थे, यानी उनके अपार्टमेंट के लिए कानूनी गारंटर बनने वाले थे.

रेंटल एग्रीमेंट पर बयौमी के कई सिग्नेचर हैं. वह उनके गारंटर, उनके दोस्त और इमरजेंसी कॉन्टैक्ट थे, और उनका पार्कवुड वाला घर ही उनका मौजूदा पता बताया गया था.

बिना किसी देरी के, वे दोनों आदमी नंबर 150 में रहने चले गए, जो बयौमी के पूलसाइड टाउनहाउस से कुछ ही दरवाज़े दूर एक बेडरूम वाला अपार्टमेंट था.

जिन दो आदमियों की कानूनी ज़िम्मेदारी बयौमी ले रहे थे, उनके नाम थे - नवाफ़ अल-हज़मी और खालिद अल-मिहदार. ये दोनों आगे चलकर 9/11 के हाईजैकर बनने वाले थे.

नवाफ़ अल-हज़मी और खालिद अल-मिहदार के ड्राइविंग लाइसेंस की तस्वीरें.

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इमेज कैप्शन, नवाफ़ अल-हज़मी और खालिद अल-मिहदार

अगले कुछ महीनों में हॉली ने उन दोनों को कई बार देखा.

वह कहती हैं, "मैं उनके साथ चाय-बिस्कुट लेती थी. वे ऐसे लोग नहीं थे जो बस ऑफिस आए और हमसे जगह किराए पर ले ली."

हज़मी और मिहदार उस साल मई के आखिर तक अपने अपार्टमेंट में रहे और फिर चले गए. रैचफ़र्ड ने इसके बारे में ज़्यादा नहीं सोचा.

जब 9/11 के हमलों के बाद अमेरिका सदमे और दुख में डूबा हुआ था, तो एक महिला ने उन्हें फ़ोन करके उन दोनों के लिए किराए से जुड़ा रेफ़रेंस मांगा. बिना सोचे-समझे, उन्होंने उनकी जानकारी दे दी.

लेकिन वह महिला प्रॉपर्टी एजेंट नहीं थी, वह एक रिपोर्टर थी.

उसके अगले सवाल ने रैचफ़र्ड को हिलाकर रख दिया, "क्या आपको पता था कि वे उन दो आतंकवादियों में से थे जिन्होंने पेंटागन में अपना प्लेन उड़ाया था?"

"और मैंने कहा, 'क्या?'"

9/11 हमले के बाद ए़फ़बीआई की पूछताछ

बीबीसी को इंटरव्यू देते हुए रिचर्ड लैम्बर्ट, जो अब एफ़बीआई से रिटायर हो चुके हैं. रिचर्ड ने सफ़ेद शर्ट और लाल टाई के साथ सूट पहना था.
इमेज कैप्शन, एफ़बीआई से रिटायर हो चुके रिचर्ड लैम्बर्ट का कहना है कि बयौमी एक ऐसे नेटवर्क को चलाता था जिसमें हाइजैकर शामिल थे.

फिर, एफ़बीआई ने हॉली से संपर्क किया.

14 सितंबर 2001 को, दो स्पेशल एजेंट ने पार्कवुड में रैचफ़ोर्ड के ऑफ़िस में उनसे पूछताछ की.

उन्होंने एफ़बीआई को उमर अल-बयौमी का गारंटर फ़ॉर्म दिया, जिससे उस व्यक्ति की जांच शुरू हुई जिसे बाद में सैन डिएगो में दोनों हाईजैकर्स की ज़िंदगी को आसान बनाने वाला मुख्य व्यक्ति माना गया.

रिचर्ड लैम्बर्ट अब एफ़बीआई से रिटायर हो चुके हैं और 9/11 पीड़ितों के परिवारों के मुक़दमे में कंसल्टेंट के तौर पर काम कर रहे हैं.

लैम्बर्ट कहते हैं, "जैसे-जैसे हमने हाईजैकर्स के साथियों की पहचान करनी शुरू की, यह साफ़ हो गया कि उमर अल-बयौमी के नेतृत्व में एक नेटवर्क काम कर रहा था."

एफ़बीआई को पता चला कि बयौमी के संपर्कों ने हज़मी और मिहदार को कैलिफ़ोर्निया का ड्राइविंग लाइसेंस पाने, फ़्लाइट स्कूलों में अप्लाई करने, मिडिल ईस्ट से पैसे पाने और यहां तक कि दांतों के इलाज का इंतज़ाम करने में भी मदद की थी.

एफ़बीआई एजेंट बयौमी से पूछताछ करना चाहते थे. उन्होंने उसे 8,000 किलोमीटर दूर युनाइटेड किंगडम के बर्मिंघम में ढूंढ निकाला, जहां वह 9/11 से ठीक पहले चला गया था.

21 सितंबर 2001 को, मेट्रोपॉलिटन पुलिस की एंटी-टेरर ब्रांच ने बयौमी को गिरफ़्तार कर लिया और उससे पूछताछ शुरू कर दी.

बिना घबराए और कभी-कभी नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए, बयौमी ने शुरू में किसी भी हाईजैकर को जानने से इनकार कर दिया.

उमर अल-बयौमी ने कहा कि उसने अक्सर लोगों को रहने की जगह ढूंढने में मदद की थी, लेकिन जब डिटेक्टिव्स ने उससे सख्ती से पूछा, तो उसने कहा कि उसे किसी का भी नाम याद नहीं है जिसके लिए उसने अपार्टमेंट की गारंटी दी हो.

एक दिन बाद, उसने कहा कि उसे दो लोगों, 'नवाफ़' और 'ख़ालिद' की मदद करना याद आया. ये हज़मी और मिहदार के पहले नाम थे.

उसने माना कि वे सिर्फ़ दो ऐसे लोग थे जिन्हें उसने इस तरह की मदद दी थी.

बयौमी ने दावा किया कि वह उन दोनों से लॉस एंजेलिस में मिला था, जब उसने उन्हें एक रेस्तरां में अरबी बोलते हुए सुना था. उसने कहा कि उसने उनसे कहा था कि अगर वे कभी सैन डिएगो जाएं, तो वह उनकी मदद कर सकता है.

अगले दिन, बयौमी ने ब्रिटिश डिटेक्टिव्स को बताया कि वे लोग सैन डिएगो में उसकी लोकल मस्जिद में आए और कहा कि उन्हें रहने के लिए जगह चाहिए. फिर वह उन्हें पार्कवुड ले गया ताकि वे अपार्टमेंट ढूंढने के बारे में रैचफ़र्ड से बात कर सकें.

हज़मी और मिहदार के वहां रहने के बाद, बयौमी उनसे दूर ही रहा. उसने कहा कि वह शहर से बाहर चला गया था, और जब वह लौटा, तो उसने पाया कि वे वहां से जा चुके थे.

बयौमी के बयान के मुताबिक, भविष्य के हाईजैकर्स के साथ उनका संपर्क बहुत कम समय के लिए था. लेकिन उसकी कहानी घटनाओं के बारे में रैचफ़र्ड के बयान से मेल नहीं खाती.

गुलाबी ब्लाउज़ पहने हॉली रैचफ़ोर्ड अपनी रसोई में दस्तावेज़ देख रही हैं.
इमेज कैप्शन, रैचफ़र्ड, उमर अल-बयौमी के इस दावे को ग़लत बताती हैं कि हाईजैकर्स के साथ उनकी बातचीत बहुत कम समय के लिए हुई थी.

रैचफ़र्ड कहती हैं, "मुझे पता है कि उसने यही कहा था, और मुझे पता है कि यह बकवास है."

रैचफ़र्ड बताती हैं कि हाइजैकर्स को उसके ऑफ़िस लाने से पहले, उमर अल-बयौमी ने उससे कई बार दो लोगों के लिए अपार्टमेंट ढूंढने के बारे में पूछा था.

वह कहती हैं, "मैं उसे बताती थी कि क्या-क्या उपलब्ध है और वह कहता था, 'अरे नहीं, नहीं, मुझे तो वो वाला चाहिए'."

"उसे अपने आस-पास ही कुछ चाहिए था, और वह सबसे सस्ती जगह की तलाश में था."

वह बयौमी के इस दावे को भी गलत बताती हैं कि अपार्टमेंट दिलाने के बाद उसने हाइजैकर्स को शायद ही कभी देखा, वह बताती हैं कि बयौमी ने उन्हें उसके बाद के हफ़्तों में साथ देखा था. एक बार तो वे तीनों चाय और कुकीज़ के लिए उसके ऑफ़िस भी आए थे.

वह कहती हैं, "ऐसा नहीं था कि उसने बस उन्हें अपार्टमेंट दिला दिया और फिर कभी उनसे बात नहीं की," और आगे कहती हैं कि वे तीनों आदमी "पक्के दोस्त" थे.

रैचफ़र्ड ने एफ़बीआई को यह भी बताया कि जब हाइजैकर्स किराया देने में पिछड़ गए थे, तो बयौमी ने किराया चुकाया था.

ब्रिटेन की पुलिस ने बयौमी को सात दिनों तक हिरासत में रखा, जो उस समय की अधिकतम अवधि थी.

अमेरिकी न्याय विभाग ने बयौमी को आरोपों का सामना करने के लिए प्रत्यर्पित न करने का फ़ैसला किया.

28 सितंबर 2001 को बयौमी को रिहा कर दिया गया.

रैचफ़र्ड अभी भी हैरान हैं.

वह कहती हैं, "मुझे यकीन नहीं होता कि वह बच निकला."

उमर अल-बयौमी के पासपोर्ट में उन्हें सऊदी लाल-और-सफ़ेद हेडस्कार्फ़ पहने हुए देखा जा सकता है.

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इमेज कैप्शन, उमर अल-बयौमी पर कभी मुकदमा नहीं चलाया गया, लेकिन 9/11 पीड़ितों के परिवारों ने अदालतों के ज़रिए उसका पीछा किया है.

हालांकि, एफ़बीआई बयौमी के खिलाफ़ मामला बनाती रही.

सैन डिएगो के एजेंटों को पता चला कि सऊदी रक्षा मंत्रालय से जुड़ी दो कंपनियां बयौमी को 90 हज़ार डॉलर की सैलरी दे रही थीं, लेकिन वह कभी काम पर नहीं गया और उसने "बहुत ज़्यादा" खर्च किए.

एजेंटों को पता चला कि सैन डिएगो में दो हाईजैकर्स के आने के ठीक बाद उसकी सैलरी दोगुनी से ज़्यादा हो गई, और उनके अमेरिका के वेस्ट कोस्ट से चले जाने के बाद सैलरी फिर कम हो गई.

इस बीच, बीबीसी को पता चला है कि न्यूयॉर्क के एफ़बीआई दफ़्तर के एजेंटों ने बर्मिंघम में बयौमी की प्रॉपर्टीज़ की तलाशी के बाद ब्रिटेन की पुलिस से मिले बहुत सारे डॉक्युमेंट्स की बारीकी से जांच की.

एफ़बीआई को सऊदी सरकार से जुड़ी एक चैरिटी को लिखे गए ऐसे पत्र मिले जिनके अल-क़ायदा से सीधे संबंध थे. इन पत्रों से "उमर अल-बयौमी की अमेरिका-विरोधी सोच और मान्यताओं का पता चल सकता था."

साथ ही, उन्हें उमर अल-बयौमी के खुद के लिखे कुछ ऐसे दस्तावेज़ भी मिले जिन्हें "जिहादी सोच" वाला माना जा सकता था.

लेकिन इन सब के बावजूद उस पर कोई औपचारिक आरोप नहीं लगाया गया और न ही उस पर मुक़दमा चलाया गया.

अमेरिका के न्याय विभाग ने बीबीसी से कहा कि वह 25 साल पहले के उन मामलों और फैसलों पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकता, जिनमें ऐसे कर्मचारी शामिल थे जो अब वहां काम नहीं करते हैं.

उमर अल-बयौमी, अगस्त 2002 में यूके छोड़कर सऊदी अरब चले गए.

दो साल बाद, उन्हें असल में बरी कर दिया गया जब 9/11 हमलों की स्वतंत्र जांच कर रहे कमीशन ने यह निष्कर्ष निकाला कि वह "मिलनसार और लोगों से घुलने-मिलने वाले" व्यक्ति थे और "इस्लामिक चरमपंथियों के साथ गुप्त रूप से शामिल होने की संभावना वाले व्यक्ति नहीं" थे.

एफ़बीआई ने कमीशन को इकट्ठा किए गए सभी सबूत नहीं दिखाए थे और जब बीबीसी ने इस बारे में पूछा तो टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

इस बीच, 9/11 पीड़ितों के परिवारों ने अदालतों के ज़रिए उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू कर दी थी.

परिवारों ने अल-क़ायदा का कथित तौर पर समर्थन करने के लिए कई लोगों, कंपनियों और सरकारों के खिलाफ एक ट्रिलियन डॉलर का मुकदमा दायर किया था, जिसमें उमर अल-बयौमी को भी प्रतिवादी बनाया गया था.

सालों तक परिवारों ने एफ़बीआई की जांच को सार्वजनिक कराने के लिए अभियान चलाया.

यह इंतज़ार बहुत लंबा और कष्टदायक था, लेकिन 2018 से न्यूयॉर्क कोर्ट में और जो बाइडन के आदेश के ज़रिए हज़ारों पन्नों के दस्तावेज़ जारी किए गए हैं, जिनमें हॉली रैचफ़र्ड के साथ एफ़बीआई की बातचीत भी शामिल है.

पिछले साल अगस्त में, सभी सबूतों पर विचार करने के बाद, 9/11 पीड़ितों के परिवारों के कानूनी मामले में जज ने कहा कि सबूत इस नतीजे का समर्थन नहीं करते कि बयौमी "सिर्फ़ एक निर्दोष भागीदार" थे.

जज जॉर्ज बी डेनियल्स ने बाद में अपने फैसले में यह भी कहा कि "यह उचित अनुमान लगाया जा सकता है कि अपार्टमेट से जुड़ी जो भी मदद बयौमी ने अपहरणकर्ताओं को दी, वह सिर्फ़ एक भले इंसान का काम नहीं था, बल्कि सऊदी सरकार के निर्देशों का पालन कर रहे थे."

सऊदी अरब 9/11 में किसी भी तरह की भागीदारी से इनकार करता है और लगातार यह कहता रहा है कि उमर अल-बयौमी सऊदी एजेंट नहीं थे और हमलों में उनकी कोई भागीदारी या पहले से कोई जानकारी नहीं थी.

यह मामला अब अमेरिका के कोर्ट ऑफ़ अपील के पास है, जो अक्तूबर में मौखिक दलीलें सुनेगा.

हॉली रैचफ़ोर्ड उस रेगिस्तान में टहल रही हैं जहां वह अब रहती हैं.
इमेज कैप्शन, रैचफ़र्ड अब अमेरिका के पश्चिमी हिस्से में एक सुनसान इलाके में रहती हैं.

9/11 एक ऐसी त्रासदी थी जिसने हज़ारों लोगों को गहरा सदमा पहुंचाया, इनमें पीड़ितों के परिवार, हादसे में बचने वाले लोग, मौके पर सबसे पहले मदद के लिए पहुंचने वाले लोग और चश्मदीद गवाह शामिल हैं.

हॉली रैचफ़र्ड के लिए, पार्कवुड में बिताए सालों का सारा भरोसा और सुरक्षा का अहसास अचानक खत्म हो गया.

कुछ भी वैसा नहीं था जैसा दिखता था.

वह कहती हैं, "मुझे पता है कि 9/11 के दौरान बहुत से लोगों की ज़िंदगी तुरंत बदल गई. मेरे लिए, एक या दो हफ़्ते के अंदर ही मेरी ज़िंदगी, मेरे आदर्श, मेरी मान्यताएं, सब कुछ बहुत तेज़ी से बदल गए. यह सब एक स्विच दबाने जैसा था."

"मुझे बहुत बेवकूफ़ी भरा महसूस हुआ. मैंने ऐसे लोगों पर भरोसा किया और उनकी परवाह की जिन्होंने बुरे काम किए. मैं कभी भी उस तरह धोखा नहीं खाना चाहती जैसा उनके कारण खाया, क्योंकि वे वो नहीं थे जो होने का दावा करते थे."

9/11 के कुछ ही समय बाद, रैचफ़र्ड ने पार्कवुड, प्रॉपर्टी मैनेजमेंट और बड़े शहर को छोड़ दिया.

वह पहले समुद्र तट पर गईं, फिर एक रिज़र्वेशन में, और बाद में, एक बिल्कुल सुनसान जगह पर चली गईं, यह सब उस भावना से बचने की कोशिश में था कि उन्हें धोखा दिया जा रहा था.

रैचफ़ोर्ड ने लोगों से दूरी बनाए रखी; वह बताती हैं कि वह सिर्फ़ उन्हीं लोगों से मिलती-जुलती थीं जिन पर उन्हें पूरा भरोसा था.

वह कहती हैं, "9/11 ने मुझे लोगों से डरा दिया."

"अब मैं ऐसे लोगों से दूर रहना पसंद करती हूं जो अपनी असलियत के बारे में झूठ बोल सकते हैं. छोटे शहर में रहने पर आप कोई राज़ छिपा नहीं सकते और इससे मुझे ज़्यादा सुरक्षित महसूस होता है. मुझे ऐसी जगह रहना पसंद है जहां मैं लोगों पर भरोसा कर सकूं."

लेकिन बाहरी दुनिया से दूर भागने की कोशिश करने के बावजूद, पार्कवुड में जो हुआ, उससे जुड़े सवाल उन्हें परेशान करते रहते हैं.

वह कहती हैं, "मेरे मन में कभी-कभी यह सवाल आता है कि अगर मैंने थोड़ी सख़्ती बरती होती, तो क्या मैं कुछ और कर सकती थी."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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