निर्मल पुर्जा को जानिए, गिलगित-बल्तिस्तान से जिनको लेकर आई है चिंताजनक ख़बर

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वर्ल्ड फ़ेमस पर्वतारोही निर्मल पुर्जा के हिमस्खलन के बाद लापता होने की आशंका है. यह जानकारी अल्पाइन क्लब ऑफ़ पाकिस्तान ने एक बयान में दी है.
गिलगित-बल्तिस्तान पुलिस ने फ़ेसबुक पर एक बयान में बताया है कि शुरुआती रिपोर्ट से पता चला है कि ब्रॉड पीक से अब तक चार शव बरामद हुए हैं, लेकिन उनकी पहचान अभी तक नहीं हो पाई है.
पुलिस ने बताया है कि अधिकारी अभी भी दूसरे पर्वतारोहियों के बारे में जानकारी इकट्ठा कर रहे हैं.
नेपाल के पर्वतारोही निर्मल पुर्जा ने 2019 में दुनिया की 8,000 मीटर (26,300 फ़ुट) से अधिक ऊंचाई वाली सभी 14 चोटियों को महज़ छह महीने से कुछ अधिक समय में फ़तह कर इतिहास रच दिया था.
उनकी इस उपलब्धि पर आधारित नेटफ्लिक्स की चर्चित डॉक्यूमेंट्री "14 पीक्स: नथिंग इज़ इम्पॉसिबल" भी बनी थी.
अल्पाइन क्लब ने कहा कि उसे "ब्रॉड पीक पर पर्वतारोहियों के एक दल पर गुरुवार दोपहर के आसपास आए हिमस्खलन की बेहद चिंताजनक सूचना मिली है." काराकोरम पर्वत श्रृंखला में स्थित ब्रॉड पीक की ऊंचाई 8,047 मीटर है.
बयान के अनुसार, शुरुआती जानकारी के मुताबिक अभियान दल में 10 पर्वतारोही शामिल थे. इनमें निर्मल पुर्जा के नेतृत्व में पांच नेपाली पर्वतारोही, पाकिस्तान के सोहेल साखी, ओमान का एक पर्वतारोही, एक अमेरिकी, मिस्टर वांग नामक एक चीनी नागरिक और एक अन्य विदेशी पर्वतारोही शामिल थे.
ट्रेकिंग कंपनी मूविंग माउंटेन्स ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में बताया कि अमेरिकी पर्वतारोही मैलोरी गीस, सोहेल साखी के साथ ब्रॉड पीक अभियान में शामिल थीं.
अल्पाइन क्लब के बयान में कहा गया, "हिमस्खलन के बाद से पूरे दल का किसी से भी संपर्क नहीं हो पाया है."
27 जुलाई को एक्स पर एक पोस्ट में निर्मल पुर्जा ने लिखा था कि यह उनकी योजना का हिस्सा नहीं था.

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निर्मल पुर्जा ने रचा था इतिहास
निर्मल पुर्जा के नेतृत्व में ही 10 नेपालियों ने 17 जनवरी को सर्दी में पहली बार 28,251 फुट ऊँचे के2 को फ़तह किया था. के2 काराकोरम रेंज का दूसरा सबसे ऊँचा पर्वत है, लेकिन इसे सबसे ख़तरनाक माना जाता है.
सर्दी के मौसम में निर्मल पुर्जा की टीम से पहले कोई नहीं चढ़ पाया था. इस टीम में निर्मल पुर्जा एकमात्र थे, जो नेपाल के चर्चित शेरपा समुदाय से नहीं थे. निर्मल मगर (नेपाल का एक समुदाय) हैं और ब्रिटिश गोरखा ब्रिगेड में सैनिक थे.
निर्मल पुर्जा मुश्किल से पाँच फुट के हैं, लेकिन उन्होंने दुनिया के ऊँचे से ऊँचे पर्वतों को अपने छोटे क़दमों से लांघ दिया है.
उनके नाम जो रिकॉर्ड हैं, वो बेमिसाल हैं. यहाँ तक कि के2 पर बसंत और गर्मी के मौसम में भी चढ़ना आसान नहीं है, लेकिन निर्मल की टीम ने इसे सर्दी के मौसम में लाँघ दिया.
के2 पर चढ़ने की कोशिश करने वालों में से लगभग हर छह में से एक की मौत हो जाती है, जबकि माउंट एवरेस्ट में मौत का औसत लगभग 34 में एक है.
इसी से समझा जा सकता है कि यह कितना ख़तरनाक है. जिस दिन निर्मल की टीम ने के2 समिट पूरा किया, उसी दिन स्पेन के पर्वतारोही सेरजी मिन्गोटे ने के2 पर पहुँचते-पहुँचते दम तोड़ दिया था.
मिंगोटे इससे पहले दुनिया के 10 सबसे ऊँचे पर्वतों पर बिना अतिरिक्त ऑक्सीजन के चढ़ चुके थे. मध्य एशिया में सभी 14 वैसे पर्वत हैं, जिनकी ऊँचाई 8,000 मीटर से ज़्यादा है.
निर्मल का जन्म धौलागिरी के पास हुआ. यह दुनिया का सातवाँ सबसे ऊँचा पर्वत है. लेकिन निर्मल पले-बढ़े नेपाल में चितवन ज़िले के समतल में. निर्मल 18 साल की उम्र में ब्रिटिश आर्मी ब्रिगेड के गोरखा में भर्ती हो गए.
2018 में निर्मल ने फ़ौज की नौकरी छोड़ दी और अगले साल ही कई रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए. निर्मल ने छह महीने छह दिन में 8000 मीटर ऊँचे सभी पर्वतों को लाँघ दिया. इससे पहले का रिकॉर्ड लगभग आठ साल का था. यह रिकॉर्ड दक्षिण कोरिया के किम चांज हो के नाम था.
इसके बाद ही निर्मल ने शेरपाओं की एक टीम तैयार की और के2 की तैयारी शुरू कर दी. जब पूरी दुनिया कोरोना वायरस से जंग लड़ रही थी, तो निर्मल और उनकी टीम का निशाना आसमान की ओर था.
साल 2021 की शुरुआत में ही नेपालियों की इस टीम ने इतिहास रच दिया. निर्मल के पिता भारतीय सेना के गोरखा रेजिमेंट में थे. निर्मल बताते हैं कि उनके पिता 22 सालों तक इंडियन गोरखा में रहे. तभी निर्मल छह साल की उम्र में पहली बार भारत आए थे.
के2 कश्मीर के गिलगित-बल्तिस्तान में है. निर्मल और उनकी टीम ने इस पर्वत पर चढ़ने की शुरुआत पाकिस्तान प्रशासित इलाक़े से ही की थी. पहले निर्मल की टीम में महज़ तीन लोग थे.
नेपाल के ही मिंगमा जी की छह लोगों की टीम अलग थी. सात हज़ार मीटर की चढ़ाई के बाद मिंगमा जी और निर्मल की टीम आपस में मिल गई. इसी दौरान एक और नेपाली को उन्होंने शामिल किया.

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शेरपाओं को तवज्जो नहीं?
1953 में तेनज़िंग नोर्गे और एडमंड हिलरी ने पहली बार माउंट एवरेस्ट को फ़तह किया था. उसके बाद से शेरपाओं ने पर्वतारोहण में विदेशियों को जमकर ट्रेनिंग दी है.
इसके बाद भी शेरपाओं को जो शोहरत मिलनी चाहिए थी वो नहीं मिली. एवरेस्ट पर चढ़ने के बाद एडमंड हिलरी को क्वीन एलिज़ाबेथ ने सम्मानित किया था, लेकिन तेनज़िंग को नहीं किया था, जबकि तेनज़िंग के बिना एडमंड के लिए माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना आसान नहीं था.
क्या शेरपा अब भी इस चीज़ से जूझ रहे हैं? निर्मल की के2 टीम के मिंगमा जी शेरपा ही हैं. मिंगमा जी को लगता है कि अब स्थितियाँ बदल रही हैं. वो कहते हैं, ''अब पहले की तरह हालात नहीं हैं. अब हमें भी वो पहचान और शोहरत मिल रही है. अब दुनिया पहले की तरह नहीं है. हम ऐसे भी इतिहास में उलझना नहीं चाहते. हमें अब भविष्य की ओर देखना है.''
निर्मल कहते हैं कि शेरपा नेपाल की क्लाइंबिन्ग कम्युनिटी (पहाड़ों पर चढ़ने वाला समुदाय) है और इन्होंने पर्वतारोहण में पूरी दुनिया को ट्रेनिंग दी है. निर्मल भी इस बात को मानते हैं कि अब पहले जैसी स्थिति नहीं है.
निर्मल की टीम ने के2 समिट महज़ 21 दिनों में पूरा किया. 37 साल के निर्मल के भीतर इतनी प्रेरणा कहाँ से आती है?
निर्मल ने 2021 में बीबीसी संवाददाता रजनीश कुमार से कहा था, ''परवरिश से इसका सीधा संबंध है. मेरे पिता इंडियन आर्मी के गोरखा रेजिमेंट में थे. दो भाई ब्रिटिश गोरखा में थे. 2002 में नेपाल आया और माउंट एवरेस्ट चढ़ा. उसके बाद से तो हिमालय से मोहब्बत हो गई. उसके बाद से पहाड़ चढ़ने का सिलसिला थमा नहीं.''
मिंगमा जी ने बीबीसी हिन्दी से 2021 में कहा था कि निर्मल पुर्जा का होना बहुत मायने रखता है. उन्होंने कहा था, ''नेपाल से हमलोग चले तो दो टीम थी. निर्मल की अलग टीम थी. हमलोग की मीटिंग सात हज़ार मीटर चढ़ने के बाद हुई. बस एक हज़ार मीटर की चढ़ाई और बची थी. बेस कैंप में हमलोग नहीं मिले थे. हमने आपस में बात की और निम्स दाई (निर्मल पुर्जा) को अपना लीडर बनाया. निम्स दाई ने जितने छोटे वक़्त में नेपालियों को प्राउड दिया है, वैसे में उनके अलावा हमारा नेता कोई और नहीं बन सकता था.''
मिंगमा जी ने कहा था कि वो ऑक्सीजन लेकर गए थे लेकिन निम्स बिना ऑक्सीजन के थे.

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के2 ख़तरनाक क्यों?
माउंट एवरेस्ट दुनिया का सबसे ऊँचा पर्वत शिखर है और के2 दूसरे नंबर पर आता है. लेकिन के2 को ज़्यादा ख़तरनाक क्यों माना जाता है?
निर्मल कहते हैं, ''के2 का मौसम बहुत ही अनिश्चित रहता है. के2 पर सिर्फ़ पेशेवर पर्वतारोही ही जाते हैं. अगर सभी शेरपाओं को हटा दो और एवरेस्ट पर सोलो चढ़ना हो तो यह सबसे मुश्किल है. एवरेस्ट को नेपालियों ने आसान बना दिया है, क्योंकि हम यहाँ काम करते हैं. के2 गिलगित-बल्तिस्तान में है. दोनों अलग-अलग पर्वत हैं. एवरेस्ट 9000 मीटर ऊँचा है.''
मिंगमा जी कहते हैं कि के2 पर एक सीज़न में मुश्किल से 50 लोग चढ़ पाते हैं, जबकि माउंट एवरेस्ट पर 2000 लोग. मिंगमा जी कहते हैं इससे भी अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि के2 कितना मुश्किल है.
निर्मल माउंट एवरेस्ट भी चढ़ गए, के2 भी चढ़ गए. अब कितनी ऊँचाई पर जाएंगे? निर्मल ने बीबीसी से कहा था कि वो पूरी दुनिया को सरप्राइज़ देते रहेंगे.
माउंट एवरेस्ट पर बढ़ती भीड़ को लेकर निर्मल चिंतित नहीं हैं. वो कहते हैं माउंट एवरेस्ट कोई चौक नहीं है, वो बहुत विशाल है इसलिए हर साल 2000 पर्वतारोहियों का आना कोई बड़ी संख्या नहीं है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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