बीबीसी न्यूज़ फ़ारसी के मुताबिक़,
ईरान की न्यायपालिका ने कहा है कि उसने इसराइल के
लिए "ख़ुफ़िया गतिविधियों और जासूसी में सहयोग" करने के आरोप में दो
क़ैदियों को फांसी दे दी है.
जिन लोगों को फांसी दी गई है,
उनके नाम याकूब करीमपुर और नासिर बकरज़ादेह हैं.
ईरान के सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों
की सज़ा को बरकरार रखा.
न्यायपालिका ने कहा है कि याकूब
करीमपुर ने "युद्ध के दौरान मोसाद के साथ प्रभावी ढंग से सहयोग करना जारी रखा
और मोसाद अधिकारी को देश की संवेदनशील जानकारी भेजी."
मोसाद, इसराइल की ख़ुफ़िया एजेंसी है.
ईरानी न्यायपालिका ने यह भी कहा कि नासिर
बकरज़ादेह "संवेदनशील क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों में शामिल थे."
न्यायपालिका ने दावा किया कि
बकरज़ादेह ने "मोसाद के एक अधिकारी के आदेश पर अहम सरकारी, धार्मिक और प्रांतीय हस्तियों के साथ-साथ नतान्ज़
क्षेत्र जैसे अहम केंद्रों की जानकारी इकट्ठा कर मोसाद के एजेंट को भेजा."
बीबीसी इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से
पुष्टि नहीं कर पाया है.
हाल ही में सज़ा-ए-मौत का सामना कर
रहे क़ैदी नासिर बकरज़ादेह की एक ऑडियो फ़ाइल उर्मिया जेल के अंदर से जारी की गई
थी.
उन्होंने कहा कि तीसरी बार उनकी मौत
की सज़ा बरकरार रहने के बाद उन्हें लगता है कि वह "किसी भी पल मर सकते
हैं."
हालिया युद्ध के बाद ईरान में फांसी
की प्रक्रिया तेज़ हो गई है.
मानवाधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं
ने बढ़ती फांसी की सज़ाओं पर चिंता व्यक्त की है और इन सज़ाओं को मानवाधिकारों का
उल्लंघन बताया है.