बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा, ‘अगर हमने समय पर कार्रवाई नहीं की होती तो ईरान के पास परमाणु हथियार होता’
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इमेज कैप्शन, बिन्यामिन नेतन्याहू ने एक वीडियो संदेश जारी किया है
इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने एक वीडियो संदेश जारी किया है. उन्होंने अपना वीडियो सोशल मीडिया एक्स पर शेयर किया है.
नेतन्याहू ने इस वीडियो में दावा किया है कि अगर इसराइल ने समय पर कार्रवाई नहीं की होती तो ईरान आज एक परमाणु हथियारों वाला देश होता.
नेतन्याहू इस वीडियो में एक नक्शे की मदद से इलाक़े की भौगोलिक स्थिति को समझाते हुए दिख रहे हैं.
इसमें ईरान के साथ ही सीरिया, इराक़ और यमन को लाल रंग में दिखाया गया है.
मध्य पूर्व में कई हथियारबंद गुट हैं जिनके तार ईरान से जुड़ते हैं. इनमें ग़ज़ा में हमास, लेबनान में हिज़्बुल्लाह, यमन में हूती विद्रोही शामिल हैं. ईरान इनके अलावा सीरिया, इराक़ और बहरीन में भी कई गुटों का समर्थन करता है.
इसे प्रतिरोध की धुरी (एक्सिस ऑफ़ रेज़िस्टेंस) कहा जाता है. इनमें कई गुटों को पश्चिमी देशों में 'आतंकवादी समूह' करार दिया गया है.
हालाँकि मौजूदा दौर में इनमें से कई हथियारबंद गुट काफ़ी कमज़ोर हो चुके हैं. ख़ासकर ग़ज़ा में हमास और लेबनान में हिज़्बुल्लाह पर लगातार हुए इसराइली हमलों ने इन ताक़तवर संगठनों पर काफ़ी असर डाला है.
माना जाता है कि ईरान 'मध्य पूर्व में अमेरिकी और इसराइली ख़तरों से मुक़ाबले' के लिए इन गुटों का समर्थन करता रहा है.
ओमान ने अमेरिका और ईरान को युद्धविराम समझौते पर दी ये सलाह
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इमेज कैप्शन, ओमान के विदेश मंत्री ने कहा कि सफलता में जो मुश्किलें आ सकती हैं वो हार या युद्ध के दर्द के मुक़ाबले कुछ भी नहीं (फ़ाइल फ़ोटो)
ओमान के विदेश मंत्री ने युद्धविराम बढ़ाने और बातचीत जारी रखने की अपील की है.
ओमान के विदेश मंत्री बदर अल बुसैदी ने ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत जारी रखने और युद्धविराम को बढ़ाने का आह्वान किया.
यह अनुरोध इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद किया गया है.
बदर अल बुसैदी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "सफलता के लिए सभी पक्षों को कठिन समझौते करने पड़ सकते हैं, लेकिन यह हार और युद्ध के दर्द के मुक़ाबले कुछ भी नहीं है."
ईरान-अमेरिका युद्ध शुरू होने से पहले ओमान ने ईरान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता के कई दौरों की मेज़बानी और मध्यस्थता की थी.
ईरान ने वीडियो जारी कर किया दावा, 'अमेरिकी वॉरशिप को खदेड़ कर भगाया'
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इमेज कैप्शन, ईरान ने वीडियो जारी कर दावा किया है कि अमेरिकी वॉरशिप होर्मुज़ स्ट्रेट के क़रीब आ रहा था, जिसे खदेड़ दिया गया
ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट से एक अमेरिकी वॉरशिप को चेतावनी देकर खदेड़ने का दावा किया है. नजफ़ में ईरानी कॉन्सुलेट ने इस दावे से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया एक्स पर शेयर किया है.
ईरानी कॉन्सुलेट ने इस पोस्ट में लिखा, “हम आपको यह वीडियो देखने के लिए आमंत्रित करते हैं. दुश्मन ने 40 दिन पहले दावा किया था कि उसने ईरानी नौसेना को नष्ट कर दिया है, जबकि एक ईरानी युद्धपोत ने एक निर्णायक चेतावनी के साथ दुश्मन के युद्धपोतों को होर्मुज़ स्ट्रेट से खदेड़ दिया है.”
इसमें लिखा है, “एक ईरानी लड़ाकू विमान ने दुश्मन को चेतावनी दी कि अगर आप 10 मील से क़रीब आते हैं तो हम आप पर फ़ायरिंग कर देंगे.”
इस पोस्ट में कहा गया है कि ‘ईरान का क्रोध वास्तव में बहुत भयानक है.’
नजफ़ में ईरानी कॉन्सुलेट ने इस दावे से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया एक्स पर शेयर किया है.
ईरानी कॉन्सुलेट ने इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी शेयर किया है, जो कि ईरान की सरकारी प्रेस टीवी पर प्रसारित हुआ है.
बीबीसी ने इस वीडियो की पुष्टि नहीं की है.
वीडियो में एक वॉरशिप दिख रही है और पीछे से चेतावनी सुनाई दे रही है, “आप यहां से फौरन वापस हिंद महासागर में चले जाएं. अगर आप मेरा आदेश नहीं मानेंगे तो आप पर हमला किया जाएगा.”
वहीं इस चेतावनी के बाद वॉरशिप से संदेश आता है कि वे अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत इलाक़े से गुज़र रहे हैं.
हालाँकि इसके बाद फिर से इस वॉरशिप को संदेश भेजा जाता है कि यह आपके लिए अंतिम चेतावनी है. यह चेतावनी तीन बार दोहराई जाती है और उसके बाद वॉरशिप दूर जाता हुआ दिखता है.
यह घटना किस दिन की है यह स्पष्ट नहीं है. हालाँकि शनिवार को ईरान ने इसी तरह की एक घटना का दावा किया था.
यूएई ने कहा, 'होर्मुज़ स्ट्रेट ईरान का नहीं, जो वो इसे बंद कर सके'
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इमेज कैप्शन, सुल्तान अल जाबेर ने कहा है कि ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज़ में क़रीब 800 कमर्शियल जहाज़ फंसे हुए हैं और कम से कम 10 जहाज़ों को निशाना बनाया गया (फ़ाइल फ़ोटो)
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने ईरान की तरफ़ से होर्मुज़ स्ट्रेट की नाकेबंदी की कोशिश का विरोध किया है.
यूएई का कहना है कि तेल और गैस के लिए यह अहम शिपिंग मार्ग "कभी भी ईरान का नहीं रहा है कि वह इसे बंद कर सके या इस पर रोक लगा सके."
यूएई के उद्योग मंत्री और अबू धाबी की सरकारी तेल कंपनी के प्रमुख सुल्तान अहमद अल जाबेर ने सोशल मीडिया पर कहा, "ऐसा करने की कोई भी कोशिश सिर्फ़ एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है. यह वैश्विक आर्थिक जीवनरेखा में रुकावट है और हर देश की ऊर्जा, भोजन और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए एक सीधा ख़तरा है."
28 फ़रवरी को जब से अमेरिका और इसराइल ने ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई शुरू की है, तब से ईरान ने धमकी दी है कि कोई भी जहाज़ बिना अनुमति के इस समुद्री मार्ग का इस्तेमाल नहीं कर सकता है.
ईरान ने ऐसे जहाज़ों पर हमला करने की चेतावनी दी और कुछ जहाज़ों पर इस इलाक़े में हमला भी किया गया.
ईरान की इस चेतावनी की वजह से होर्मुज़ स्ट्रेट से जहाज़ों की आवाजाही लगभग ठप हो गई और वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतें बढ़ गई हैं.
अल जाबेर ने कहा, "इस तरह की मिसाल कायम करना गैरकानूनी, ख़तरनाक और अस्वीकार्य है. दुनिया इसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर सकती और न ही इसकी इजाज़त दे सकती है.''
ईरान ने कहा, 'हमारा भरोसा जीतना अमेरिका के हाथ में, जिसमें वो नाकाम रहा है'
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इमेज कैप्शन, इस्लामाबाद में बैठक के दौरान ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़र क़ालीबाफ़ और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़
इस्लामाबाद में हुई वार्ता में अपने देश के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने वाले ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़र क़ालीबाफ़ ने कहा है कि अब अमेरिका के लिए "यह तय करने का समय है कि वह हमारा भरोसा जीत सकता है या नहीं."
सोशल मीडिया एक्स पर अपनी पोस्ट में क़ालीबाफ़ ने कहा कि उन्होंने बातचीत से पहले इस बात पर ज़ोर दिया था कि ईरान के पास "अच्छी मंशा और इच्छाशक्ति" थी, लेकिन पिछले दो युद्धों के अपने अनुभवों की वजह से उसे "विरोधी पक्ष पर कोई भरोसा नहीं था."
उनका कहना है कि ईरानी डेलीगेशन ने "आगे की पहल की, लेकिन विरोधी पक्ष आख़िरकार बातचीत के इस दौर में ईरानी डेलीगेशन का भरोसा जीतने में नाकाम रहा."
उन्होंने आगे लिखा, "हम ईरान की सुरक्षा के चालीस दिनों की उपलब्धियों को मज़बूत करने की अपनी कोशिशों को एक पल के लिए भी नहीं रोकेंगे."
क़ालीबाफ़ ने एक्स पर इस मुद्दे पर कई पोस्ट किए हैं.
उन्होंने लिखा, “बातचीत काफ़ी विस्तृत थी और इसे आसान बनाने के लिए हम पाकिस्तान को धन्यवाद देते हैं.”
ईरान के साथ बातचीत बेनतीजा रहने पर रूसी राजनयिक ने अमेरिका से ये कहा
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इमेज कैप्शन, मिखाइल उल्यानोव ने पूछा है कि क्या अमेरिकी उपराष्ट्रपति कुछ ही घंटों में इस जटिल मुद्दे के समाधान की उम्मीद कर रहे थे (फ़ाइल फ़ोटो)
इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता के बेनतीजा रहने पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए में रूस के प्रतिनिधि ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से सवाल किया है.
आईएईए में रूस के प्रतिनिधि मिखाइल उल्यानोव ने ईरान के साथ समझौता न होने के बारे में जेडी वेंस की टिप्पणियों का जवाब देते हुए कहा, "क्या उपराष्ट्रपति को वास्तव में उम्मीद थी कि इतने जटिल और बहुआयामी मुद्दे पर कुछ ही घंटों में समझौता हो जाएगा?"
एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि समझौता तभी संभव है जब एक पक्ष आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार हो (जो इस मामले में नहीं है).
उल्यानोव ने आगे कहा, "अगर अमेरिकी पक्ष समझौता चाहता है, तो उसे विशेषज्ञ स्तर पर कई दौर की बातचीत के लिए तैयार रहना होगा. कूटनीति में यह एक बुनियादी प्रक्रिया है."
इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई बातचीत पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता नहीं हुआ है.
उन्होंने कहा, ''हम यहां से एक बहुत ही आसान प्रस्ताव देकर जा रहे हैं कि यही हमारा अंतिम और बेस्ट ऑफ़र है. हम देखेंगे कि ईरानी इसे स्वीकार करते हैं या नहीं."
इस्लामाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा, "हम 21 घंटे से इस पर हैं लेकिन बुरी ख़बर ये है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके."
हैती के एक टूरिस्ट स्पॉट पर भगदड़ में कम से कम 30 लोगों के मारे जाने की आशंका, माया डेविस
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इमेज कैप्शन, यह हादसा हैती के उत्तर में बने क़िले के पास हुआ है (फ़ाइल फ़ोटो)
हैती के एक मशहूर टूरिस्ट स्पॉट पर शनिवार को हुई भगदड़ में कम से कम 30 लोगों के मारे जाने की आशंका है.
हैती के नॉर्ड डिपार्टमेंट के सिविल प्रोटेक्शन के प्रमुख जीन हेनरी पेटिट ने बताया कि यह घटना शनिवार को लाफेरियर सिटाडेल (जो एक यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट है) में सालाना ईस्टर जमावड़े के दौरान हुई.
उन्होंने चेतावनी दी कि मरने वालों की संख्या अभी और बढ़ सकती है.
प्रधानमंत्री एलिक्स डिडिएर फिल्स-एम ने कहा कि यह घटना उत्तरी शहर मिलोट में "एक टूरिस्ट इवेंट के दौरान हुई, जिसमें कई युवा शामिल थे."
उन्होंने कहा कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और प्रभावित लोगों की मदद के लिए "सभी संबंधित अधिकारियों" को तैनात कर दिया गया है.
स्थानीय मीडिया ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि 19वीं सदी के इस क़िले की स्थापना की याद में आयोजित इस इवेंट का सोशल मीडिया पर प्रचार किए जाने के बाद, यहाँ छात्रों और पर्यटकों की भारी भीड़ जुटी थी.
बताया जा रहा है कि भगदड़ की शुरुआत इसके एन्ट्री गेट के पास हुई थी और भारी बारिश शुरू होने से स्थिति और भी बिगड़ गई.
सिटाडेल लाफेरियर, जिसे सिटाडेल हेनरी के नाम से भी जाना जाता है, का निर्माण क्रांतिकारी हेनरी क्रिस्टोफ ने हैती को फ्रांस से आज़ादी मिलने के कुछ ही समय बाद करवाया था.
इस क़िले को बनाने में एक दशक से भी ज़्यादा का समय लगा था और यह कैरिबियन सागर में स्थित इस नए द्विपीय देश को हमलों से बचाने के लिए बनाए गए कई किलों का एक अहम हिस्सा था. तब से यह जगह हैती की आज़ादी का प्रतीक बन गई है.
भारतीय इलाक़े को चीन की ओर से नया नाम देने पर विदेश मंत्रालय ने जताई कड़ी आपत्ति
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इमेज कैप्शन, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने चीन के क़दम को आपसी रिश्ते को बिगाड़ने वाला बताया है (फ़ाइल फ़ोटो)
भारत ने चीन की ओर से उन जगहों का नया नाम देने पर कड़ी आपत्ति जताई है जो भारत का हिस्सा हैं. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में इस मुद्दे पर भारत का बयान साझा किया है.
इस संबंध में मीडिया के सवालों के जवाब में विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "भारत, चीन की ओर से उन जगहों को मनगढ़ंत नाम देने के किसी भी शरारती प्रयास को पूरी तरह से ख़ारिज करता है, जो भारतीय क्षेत्र का हिस्सा हैं."
विदेश मंत्रालय ने कहा, "झूठे दावे करने और मनगढ़ंत बातों वाले चीन के ऐसे प्रयास इस अटल सच्चाई को नहीं बदल सकते कि अरुणाचल प्रदेश समेत ये जगहें और क्षेत्र हमेशा से भारत का एक अभिन्न और अविभाज्य अंग रहे हैं और हमेशा रहेंगे."
"चीन की ओर से की गई ये हरकतें, भारत-चीन के आपसी संबंधों को स्थिर और सामान्य बनाने के लिए चल रहे प्रयासों को कमज़ोर करने वाली हैं. चीन को ऐसी हरकतों से बचना चाहिए, जो संबंधों को बिगाड़ती हैं और आपसी समझ को बेहतर बनाने के प्रयासों को नुक़सान पहुँचाती हैं."
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ चीन ने अपने शिनजियांग प्रांत में, पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर और अफ़ग़ानिस्तान की सीमा के पास एक नया ज़िला बनाया है.
सेनलिंग नाम का यह ज़िला, काराकोरम पर्वतमाला के पास स्थित है, जो इसके रणनीतिक महत्व को दर्शाता है.
पीटीआई का कहना है, "पिछले साल भारत ने हीन और हेकांग ज़िलों के निर्माण को लेकर चीन के सामने विरोध दर्ज कराया था. भारत ने कहा था कि इन ज़िलों का कुछ इलाक़ा उसके केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के अधिकार क्षेत्र में आता है."
"हीन ज़िले में विवादित अक्साई चिन पठार का एक बड़ा हिस्सा शामिल है. यह लद्दाख का वह हिस्सा है जिस पर चीन ने 1962 के युद्ध में कब्ज़ा कर लिया था, और तब से यह भारत-चीन सीमा विवाद का एक मुख्य मुद्दा बना हुआ है."
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने फ़ारस की खाड़ी को कहा अरब की खाड़ी, ईरान की तीखी प्रतिक्रिया
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इमेज कैप्शन, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने 'अरब की खाड़ी' शब्द का इस्तेमाल किया था
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की ओर से 'फ़ारस की खाड़ी' के लिए 'अरब की खाड़ी' शब्द के प्रयोग पर ईरानी अधिकारियों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.
ईरान के उपराष्ट्रपति अब्दुलकरीम होसैनज़ादेह ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "अलेक्जेंडर और मंगोलों के सेनापति भी फ़ारस की खाड़ी का 2500 साल पुराना नाम नहीं बदल सके, आप एक कप्तान से ज़्यादा कुछ नहीं हैं."
होसैनज़ादेह ने लिखा है, "क्या आप अपनी युद्ध भड़काने वाली परियोजना की नाकामी को लेकर चिंतित हैं? क्या आप अरब देशों का शोषण करना चाहते हैं? आपसे नहीं, लेकिन मैं अपने अरब भाइयों से यह उम्मीद करता हूँ कि वे अपना पैसा ऐसे व्यक्ति के भ्रम पर ख़र्च न करें जो उनकी रक्षा नहीं कर सकता."
दूतावास ने लिखा, "यह कोई संयोग नहीं है कि पीट हेगसेथ को ईरान के विरुद्ध युद्ध में और ख़ासकर होर्मुज़ स्ट्रेट पर नियंत्रण को लेकर, करारी हार का सामना करना पड़ा. उनकी मुख्य समस्या ये थी कि उन्होंने होर्मुज़ स्ट्रेट को ग़लत जगह पर खोजा."
"उन्हें यह नहीं पता था कि वह फ़ारस की खाड़ी में स्थित है. हमारी विनम्र सलाह है कि वे हर सुबह दस बार 'फ़ारस की खाड़ी' दोहराएं. इससे शायद उन्हें अगला युद्ध जीतने में मदद न मिले, लेकिन कम से कम वे सही जगह पर तो पहुंच जाएंगे."
इससे पहले अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने एक्स पर सेंटकॉम (अमेरिकी सेंट्रल कमांड) का एक बयान साझा किया और उसके एक अंश का ज़िक्र करते हुए लिखा, "विध्वंसक पोत यूएसएस फ्रैंक ई पीटरसन और यूएसएस माइकल मर्फी अरब की खाड़ी में एक व्यापक मिशन के हिस्से के रूप में काम कर रहे हैं."
उन्होंने लिखा, "इसका मक़सद यह सुनिश्चित करना है कि यह जलमार्ग इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर की बिछाई गई समुद्री माइन्स को ख़त्म करना है."
हालाँकि ईरान ने अमेरिका के इस दावे से इनकार किया है.
ईरान और अमेरिका की बातचीत बेनतीजा रहने पर ब्रिटेन के पीएम ने की ये अपील
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इमेज कैप्शन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने अमेरिका-ईरान बातचीत के नाकाम रहने के बाद अपनी सलाह दी है (फ़ाइल फ़ोटो)
इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत बेनतीजा रहने के बाद मध्य पूर्व के हालात को लेकर संदेह बना हुआ है.
शांति वार्ता की नाकामी के बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने अमेरिका और ईरान से 'कोई रास्ता निकालने' की अपील की है.
डाउनिंग स्ट्रीट ने जानकारी दी है कि प्रधानमंत्री स्टार्मर ने ईरान और अमेरिका दोनों से अपील की है कि वे "कोई रास्ता निकालें."
ओमान के सुल्तान के साथ बातचीत में स्टार्मर ने कहा कि सीज़फ़ायर जारी रहना "बेहद ज़रूरी" है और "सभी पक्षों ने आगे किसी भी तरह के तनाव से बचने की कोशिश की है."
ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटफ़ोर्ड ने बीबीसी के 'संडे विद लॉरा कुएन्सबर्ग' कार्यक्रम में कहा कि ईरान में युद्ध ख़त्म करने के लिए शुरुआती बातचीत का बिना किसी समझौते के टूट जाना "निराशाजनक" है.
स्ट्रीटफ़ोर्ड ने इस संघर्ष में शामिल न होने के ब्रिटेन के फ़ैसले का बचाव किया.
इससे पहले पाकिस्तानी राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे चली बातचीत बिना किसी नतीजे के ख़त्म हो गई.
इसके बाद दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल अपने-अपने देश रवाना हो चुके हैं.
'होर्मुज़ ईरान के क़ब्ज़े में है और इसका टोल टैक्स तो चुकाना ही होगा'- ईरान
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इमेज कैप्शन, होर्मुज़ स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण उसके लिए एक ताक़त बनकर उभरा है (फ़ाइल फ़ोटो)
अमेरिका और ईरान के बीच लागू सशर्त संघर्षविराम का एक मुख्य हिस्सा, इस समुद्री रास्ते से जहाज़ों का सुरक्षित गुज़रना रहा है. यह दोनों पक्षों के लिए एक अहम मुद्दा है.
इस समुद्री मार्ग से आम दिनों में दुनिया का क़रीब 20% तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) गुज़रता है.
ईरान की संसद के उपाध्यक्ष हाजी बाबाई ने कहा है कि यह स्ट्रेट ईरान के लिए एक 'अति संवेदनशील सीमा' है.
'इस्लामिक प्रोपेगेशन ऑर्गनाइज़ेशन' से जुड़ी 'मेहर न्यूज़ एजेंसी' के मुताबिक़ बाबाई का कहना है कि होर्मुज़ स्ट्रेट पूरी तरह से ईरान के कब्ज़े में है और "इसका शुल्क रियाल में ही चुकाना होगा."
रियाल ईरान की मुद्रा है.
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में ज़ोर देकर कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट "जल्द ही खुल जाएगा."
अमेरिका की 'सेंट्रल कमांड' ने भी शनिवार को बताया कि नौसेना के दो विध्वंसक जहाज़ों ने, जलमार्ग को समुद्री सुरंगों (सी माइन्स) से मुक्त कराने के एक बड़े अभियान के तहत, "होर्मुज़ को पार किया है."
लेकिन ईरान ने इस दावे को ख़ारिज कर दिया है कि ये दोनों जहाज़ उस इलाक़े से गुज़रे थे.
समाचार एजेंसी एएफ़पी ने ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी के हवाले से बताया, "ईरान के 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' ने कहा है कि किसी भी सैन्य जहाज़ के होर्मुज़ से गुज़रने की कोशिश का सख़्ती से जवाब दिया जाएगा."
इधर पाकिस्तान में ईरान के साथ घंटों चली बातचीत के बाद हुई अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने होर्मुज़ स्ट्रेट का ज़िक्र नहीं किया.
अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में बातचीत कैसे आगे बढ़ी थी और अंत में क्या हुआ?, जैकब फ़िलिप्स, रिपोर्टर
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इमेज कैप्शन, पाकिस्तान में शांति वार्ता बेनतीजा रहने के बाद अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल अपने देश के लिए रवाना हो गया है
पाकिस्तानी राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे चली बातचीत बिना किसी नतीजे के ख़त्म हो गई. हालाँकि दोनों देशों के बीच कोई बातचीत हो पाएगी या नहीं, इसे लेकर भी शुरू से संदेह बना हुआ था.
अनिश्चितता का दौर
शुक्रवार को जब पाकिस्तान के इस्लामाबाद में सड़कें साफ़ की गईं और वहाँ सुरक्षा बढ़ाई गई थी, तब भी इस बात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी कि क्या अमेरिका-ईरान शांति वार्ता आगे बढ़ पाएगी या नहीं.
फिर इस मामले में हमें हलचल दिखाई देने लगी. शुक्रवार की आधी रात को ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुँचा. उनका स्वागत पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक़ डार और सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने किया.
इसके बाद शनिवार सुबह अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस 'एयर फ़ोर्स टू' विमान से उतरे तो डार और मुनीर ने उनसे मुलाक़ात की.
अलग-अलग और आमने-सामने की बातचीत
इसके बाद दोनों पक्षों ने पाकिस्तानी प्रतिनिधियों से अलग-अलग मुलाक़ात की. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि वे "रचनात्मक रूप से बातचीत करेंगे."
फिर पाकिस्तान सरकार के सूत्रों ने बीबीसी को बताया और बाद में व्हाइट हाउस ने भी इसकी पुष्टि की कि इस्लामाबाद में आमने-सामने की त्रिपक्षीय बातचीत चल रही थी.
देर रात तक चली बातचीत
इस शांति वार्ता में दोनों पक्ष पूरी रात बातचीत में व्यस्त रहे, और इसके बारे में बहुत कम जानकारी सार्वजनिक की गई.
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इमेज कैप्शन, पाकिस्तान पहुंचे ईरानी प्रतिनिधिमंडल की तस्वीर
नतीजा क्या रहा?
रविवार सुबह पाकिस्तान में ईरानी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने एक बयान जारी किया.
इस बयान में बातचीत को "गहन (इन्टेंसिव)" बताया गया और अमेरिका से "अत्यधिक मांगों और गैरकानूनी अनुरोधों" को छोड़ने का आग्रह किया गया.
इसके कुछ ही देर बाद उपराष्ट्रपति वेंस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि अमेरिका ने अपनी 'सीमाएं' साफ़ कर दी थीं, लेकिन ईरान उसकी शर्तों पर सहमत नहीं हुआ.
रविवार को दोनों प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान से रवाना हो गए हैं.
नमस्कार!
अब तक बीबीसी संवाददाता सुमंत सिंह
आप तक ख़बरें पहुंचा रहे थे. अब से रात 10 बजे तक बीबीसी संवाददाता चंदन कुमार
जजवाड़े आप तक अहम ख़बरें पहुंचाएंगे.
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नेतन्याहू की अर्दोआन पर टिप्पणी के बाद तुर्की के विदेश मंत्रालय ने जारी किया बयान
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इमेज कैप्शन, तुर्की के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर अर्दोआन पर लगाए गए आरोपों को 'बेबुनियाद और झूठा' बताया है (फ़ाइल फ़ोटो)
इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन
नेतन्याहू ने तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन पर टिप्पणी की है. इसके
बाद तुर्की के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर नेतन्याहू पर निशाना साधा है.
नेतन्याहू ने एक्स पर लिखा,
"इसराइल मेरे नेतृत्व में ईरान के
आतंकवादी शासन और उसके सहयोगियों के ख़िलाफ़ लड़ाई जारी रखेगा. जबकि अर्दोआन उनका
समर्थन करते हैं और अपने ही कुर्द नागरिकों का जनसंहार किया."
इस पर तुर्की के विदेश मंत्रालय ने
बयान जारी कर अर्दोआन पर लगाए गए आरोपों को 'बेबुनियाद और झूठा' बताया
है.
तुर्की के विदेश मंत्रालय ने कहा,
"हमारे राष्ट्रपति पर इसराइली
अधिकारियों की ओर से लगाए गए बेबुनियाद और झूठे आरोप उन सच्चाइयों से पैदा हुई
असहजता का नतीजा हैं, जिन्हें हम हर मंच पर लगातार उठाते
रहे हैं."
बयान में आगे कहा गया, "तुर्की निर्दोष नागरिकों के साथ खड़ा रहेगा और यह
सुनिश्चित करने के लिए अपने प्रयास जारी रखेगा कि नेतन्याहू उनके किए गए अपराधों
के लिए जवाबदेह ठहराए जाएं."
इसके अलावा तुर्की के विदेश मंत्रालय
ने नेतन्याहू को 'इस दौर का हिटलर' भी कहा है.
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बोले, 'दो-तीन मुद्दों पर अमेरिका से नहीं बन पाई सहमति'
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इमेज कैप्शन, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह नहीं बताया है कि किन मुद्दों पर अमेरिका के साथ सहमति नहीं बन सकी (फ़ाइल फ़ोटो)
बीबीसी फ़ारसी सेवा के मुताबिक़,
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई
ने कहा है कि अमेरिका के साथ 'दो-तीन
महत्वपूर्ण बिंदुओं पर असहमति' की वजह
से समझौता नहीं हो पाया.
इस्माइल बक़ाई ने ईरान न्यूज़
नेटवर्क को बताया, "पाकिस्तान
की मध्यस्थता से 24 से 25 अप्रत्यक्ष वार्ताएं हुईं और कुछ मामलों में हम अमेरिकी
प्रतिनिधिमंडल के साथ एक समझौते पर पहुंचे, लेकिन दो या तीन मामलों में विचार अलग थे और हम किसी समझौते पर नहीं
पहुंच सके."
हालाँकि, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह नहीं बताया कि किन मुद्दों पर
अमेरिका के साथ सहमति नहीं बन सकी.
उन्होंने सिर्फ़ इतना कहा कि क्षेत्र
और होर्मुज़ स्ट्रेट जैसे नए मुद्दों के जुड़ने से बातचीत और अधिक जटिल हो गई है
और यह उम्मीद नहीं है कि एक दिन में कोई समझौता हो पाएगा.
इससे पहले बीबीसी फ़ारसी सेवा ने
इस्माइल बक़ाई के एक अन्य बयान को रिपोर्ट किया.
बीबीसी फ़ारसी सेवा के मुताबिक़,
इस्माइल बक़ाई ने कहा कि अमेरिका से बातचीत
"अविश्वास के माहौल" में शुरू हुई और एक ही बैठक में समझौते पर पहुँचने
की संभावना बहुत कम थी.
उन्होंने कहा, "ये वार्ताएं 40 दिनों के युद्ध के बाद अविश्वास
और संदेह के माहौल में हुईं. स्वाभाविक रूप से, यह उम्मीद नहीं की जा सकती थी कि केवल एक बैठक में समझौता हो जाएगा.
किसी को भी इसकी उम्मीद नहीं थी."
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने
यह भी कहा कि ईरान, पाकिस्तान और क्षेत्र के "अन्य
मित्रों" के बीच संपर्क और बातचीत जारी रखेगा.
उन्होंने आगे कहा कि "कूटनीति
कभी समाप्त नहीं होती, यह देश के हितों की रक्षा का एक
ज़रिया है."
अमेरिका के बाद ईरान का प्रतिनिधिमंडल भी पाकिस्तान से रवाना हुआ
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इमेज कैप्शन, ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ से भी मुलाक़ात की
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी मेहर
के मुताबिक़, ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद से
रवाना हो गया है.
यह प्रतिनिधिमंडल ईरान की संसद के
स्पीकर मोहम्मद-बग़र ग़ालिबाफ़ के नेतृत्व में इस्लामाबाद आया हुआ था और स्थानीय
समयानुसार सुबह क़रीब 9 बजे के बाद रवाना हुआ.
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भी शांति
वार्ता में समझौता नहीं होने के बाद इस्लामाबाद से लौट चुका है.
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल उपराष्ट्रपति
जेडी वेंस के नेतृत्व में पाकिस्तान आया हुआ था.
डोनाल्ड ट्रंप इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान की वार्ता के दौरान क्या कर रहे थे?
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इमेज कैप्शन, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि ईरान से वार्ता के दौरान उनकी ट्रंप से "लगातार" बात हो रही थी
जब पाकिस्तान के इस्लामाबाद में
अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता चल रही थी, उस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मियामी में एक यूएफ़सी
फ़ाइट का आनंद ले रहे थे.
ट्रंप के साथ उनके परिवार के कई
सदस्य और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी मौजूद थे.
इधर, इस्लामाबाद में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ईरान से बातचीत कर रहा था.
वार्ता के बाद वेंस ने कहा कि
पाकिस्तान में चल रही बातचीत के दौरान उनकी ट्रंप से "लगातार" बात हो
रही थी.
वेंस ने कहा, "पिछले 21 घंटों में हमने उनसे कितनी बार बात की,
यह कहना मुश्किल है, शायद आधा दर्जन या एक दर्जन बार."
उन्होंने कहा, "हम लगातार टीम के संपर्क में थे, क्योंकि हम अच्छी मंशा से बातचीत कर रहे
थे."
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इमेज कैप्शन, ट्रंप को फ़ाइट के दौरान रुबियो और यूएफ़सी के सीईओ डेना व्हाइट के साथ देखा गया
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इमेज कैप्शन, फाइट के दौरान ट्रंप को जंबोट्रॉन पर भी दिखाया गया
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इमेज कैप्शन, ट्रंप अपने परिवार के सदस्यों के साथ फ़ाइट देखने पहुँचे, उनकी बेटी इवांका भी उनके पीछे बैठी नज़र आईं
प्रधानमंत्री मोदी ने आशा भोसले के स्वास्थ्य पर जताई चिंता, क्या कहा?
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इमेज कैप्शन, आशा भोसले मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती हैं (फ़ाइल फ़ोटो)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मशहूर
सिंगर आशा भोसले को अस्पताल में भर्ती कराए जाने पर चिंता जताई है और उनके जल्द
स्वस्थ होने की प्रार्थना की है.
पीएम मोदी ने रविवार को एक्स पर लिखा,
"आशा भोसले जी के अस्पताल में भर्ती
होने की ख़बर सुनकर गहरी चिंता हुई है. उनके अच्छे स्वास्थ्य और जल्द स्वस्थ होने
की प्रार्थना करता हूँ."
आशा भोसले को शनिवार को कार्डियक
अरेस्ट आया था. इसके बाद उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया
था.
92 वर्षीय आशा भोसले का इलाज अस्पताल
के इमरजेंसी मेडिकल सर्विसेज़ यूनिट में चल रहा है.
अमेरिका-ईरान के बीच अगले दौर की बातचीत के बारे में ईरानी सरकारी मीडिया ने क्या बताया
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इमेज कैप्शन, ईरानी समाचार एजेंसी ने दावा किया कि अमेरिका से बातचीत के दौरान ईरान ने बार-बार अपने प्रस्ताव रखे
बीबीसी उर्दू सेवा के मुताबिक़, ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम ने
इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ हुई बातचीत के मुख्य बिंदुओं के बारे में बताया है.
तसनीम समाचार एजेंसी के अनुसार,
इस्लामाबाद पहुँचने के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल
ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख से कम से कम दो बार और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से एक
बार मुलाक़ात की.
ये बैठकें ज़रूरी व्यवस्थाओं और
वार्ता की शुरुआत में अमेरिका की ओर से किए गए वादे के उल्लंघन के ख़िलाफ़ औपचारिक
विरोध दर्ज कराने के लिए हुईं.
ईरानी समाचार एजेंसी ने दावा किया कि
अमेरिका से बातचीत के दौरान ईरान ने बार-बार अपने प्रस्ताव रखे और अमेरिकी पक्ष को
वास्तविकता की ओर लाने की कोशिश की.
ईरानी समाचार एजेंसी ने कहा,
"हालांकि, हर स्तर पर अमेरिका की अत्यधिक मांगों ने एक साझा ढांचे तक पहुंचने
में अड़चन पैदा की. अमेरिकी रुख़ में लचीलेपन की कमी के कारण रविवार, 12 अप्रैल को वार्ता बिना किसी नतीजे के समाप्त
हो गई."
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि अगले
दौर की वार्ता के समय, स्थान और प्रक्रिया के संबंध में अब
तक कोई घोषणा नहीं हुई है.
इससे पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी
वेंस ने अमेरिका रवाना होने से पहले एक संक्षिप्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था,
"हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके.
हमने अपनी सीमाएं स्पष्ट कर दी हैं और ईरान ने हमारी शर्तें मानने से इनकार कर
दिया है."
उन्होंने यह भी कहा, "मुझे लगता है कि हमने काफ़ी लचीलापन दिखाया.
राष्ट्रपति ट्रंप ने हमसे कहा था कि आपको अच्छी मंशा के साथ (बातचीत में) जाना
होगा और समझौते तक पहुंचने के लिए पूरी कोशिश करनी होगी. हमने ऐसा किया, लेकिन दुर्भाग्य से कोई प्रगति नहीं हुई."