ई20 पेट्रोलः फ़्यूल टैंक पर चींटियां दिखाई देने वाले वायरल वीडियो पर सरकार ने क्या कहा

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केंद्र सरकार ने एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) को लेकर किए जा रहे दावों को ख़ारिज किया है.
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है और इसकी लगातार निगरानी की जाती है.
बयान के अनुसार, एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की शुरुआत साल 2003 में कच्चे तेल के आयात को कम करने, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी.
सरकार का कहना है कि बड़े पैमाने पर की गई तकनीकी जांच और विभिन्न हितधारकों से बातचीत के बाद साल 2023 से 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई20) की शुरुआत की गई.
मंत्रालय ने कहा कि ई20 पेट्रोल लागू होने के बाद से एथेनॉल मिश्रण के कारण इंजन खराब होने या वाहनों में व्यापक स्तर पर तकनीकी खराबी की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है.
सोशल मीडिया पर वायरल उन वीडियो को भी भ्रामक बताया गया, जिनमें दावा किया गया था कि गन्ने का रस सीधे पेट्रोल में मिलाया जाता है.
मंत्रालय के अनुसार, ईंधन में उपयोग होने वाला एथेनॉल औद्योगिक प्रक्रियाओं से तैयार किया जाता है और कड़े गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरता है.
फ़्यूल टैंक के पास चीटियों पर क्या कहा
हाल ही में वाहन के फ़्यूल टैंक के पास चींटियों के दिखाई देने वाले वायरल वीडियो पर भी सरकार ने सफ़ाई दी.
भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने कहा कि ईंधन-ग्रेड एथेनॉल में शर्करा नहीं होती और इसमें ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जो कीड़ों को दूर रखते हैं.
सरकार ने कहा, "ई20 ईंधन को लेकर फैलाए जा रहे ऐसे दावों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से देश को अब तक 1.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और किसानों की आय को भी बढ़ावा मिला है."












