कश्मीर में मारे गए दो प्रवासी मज़दूर कौन थे, एलजी ने कहा- 'क्रूर आतंकी हमला'

कुलगाम हमला

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इमेज कैप्शन, कश्मीर के कुलगाम में संदिग्ध चरमपंथियों की गोलीबारी में दो प्रवासी मज़दूरों की मौत हुई है
    • Author, आलोक पुतुल
    • पदनाम, रायपुर से, बीबीसी हिन्दी के लिए
    • Author, जहांगीर अली
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर से
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 6 मिनट

दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम ज़िले में शुक्रवार शाम संदिग्ध चरमपंथियों की ओर से की गई गोलीबारी में छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मज़दूरों की मौत हो गई.

दोनों मज़दूर केलम इलाक़े में एक ईंट-भट्ठे पर काम करते थे. कुलगाम के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि मृतकों की पहचान दीपक रात्रे और भूपेंद्र भैना के रूप में हुई है.

अधिकारी के अनुसार, दीपक की मौत घटनास्थल पर ही हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल भूपेंद्र को पहले अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया.

वहां से उन्हें श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ रेफ़र किया गया, जहां शनिवार सुबह उनकी मौत हो गई.

घटना के बाद हमलावर अंधेरे का फ़ायदा उठाकर मौके से फ़रार हो गए. सुरक्षाबलों ने पूरे इलाक़े की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है.

हालांकि, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है और न ही किसी चरमपंथी संगठन ने हमले की ज़िम्मेदारी ली है.

गोलीबारी की घटना के बाद जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म 'एक्स' पर जानकारी दी कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नलिन प्रभात और अन्य वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों से बातचीत की है.

उपराज्यपाल ने अपने पोस्ट में कहा, "मैंने हमारे सुरक्षा बलों को अपने ऑपरेशन तेज़ करने और आतंकवादियों को ख़त्म करने का निर्देश दिया है."

परिजनों को आर्थिक मदद की घोषणा

जम्मू कश्मीर

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इमेज कैप्शन, बीते 10 दिनों में जम्मू कश्मीर में हमले की यह दूसरी घटना है

जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने दोनों प्रवासी मज़दूरों के परिजनों के लिए 10-10 लाख रुपये की आर्थिक मदद की घोषणा की है.

जम्मू कश्मीर मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से एक्स पर जारी बयान में कहा गया है कि स्थानीय प्रशासन की ओर से छह-छह लाख रुपये की तत्काल मदद के अलावा मुख्यमंत्री राहत कोष से 10-10 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी.

दीपक रात्रे का अंतिम संस्कार कश्मीर में ही कर दिया गया है

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इमेज कैप्शन, दीपक रात्रे का अंतिम संस्कार कश्मीर में ही कर दिया गया है

बेंगलुरु में मौजूद उमर अब्दुल्लाह ने पत्रकारों से कहा, "यह वाक़ई बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. लोग काम करने के लिए बाहर से कश्मीर आजीविका कमाने आए थे. ऐसे निर्दोष लोगों को निशाना बनाया गया. इस हमले की जितनी भी निंदा की जाए, वह कम है."

"पैसा शोक संतप्त परिवारों के दुख को कम नहीं कर सकता, लेकिन इस कठिन समय में उनकी मदद के लिए हमारी ओर से यह एक छोटा सा प्रयास है."

उधर, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य सरकार की ओर से दोनों दिवंगत मज़दूरों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान करने की घोषणा की.

इसी महीने दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग ज़िले में अज्ञात बंदूकधारियों ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल आशिक़ हुसैन पर गोलीबारी की थी, जिसमें उनकी मौत हो गई थी. यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में क़ैद हुई थी. आशिक़ हुसैन मूल रूप से बडगाम ज़िले के निवासी थे.

कश्मीर में ही हुआ अंतिम संस्कार

21 वर्षीय दीपक रात्रे सक्ती ज़िले के बुंदेली गांव के

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इमेज कैप्शन, छत्तीसगढ़ में सक्ती ज़िले के बुंदेली गांव के रहने वाले 21 साल केदीपक रात्रे के घर मातम पसरा हुआ है

इस हमले में मारे गए दोनों मज़दूरों के शवों का शनिवार को कश्मीर में ही अंतिम संस्कार कर दिया गया. मृतक के परिजनों ने इसकी पुष्टि की है.

इस हमले में मारे गए दोनों मज़दूर 21 वर्षीय दीपक रात्रे सक्ती ज़िले के बुंदेली गांव के जबकि 28 वर्षीय भूपेंद्र भैना सारंगढ़-बिलाईगढ़ ज़िले के छुईहा गांव के रहने वाले थे.

दीपक के परिजनों को शुक्रवार देर रात पुलिस के माध्यम से घटना की जानकारी मिली. इसके बाद से गांव में शोक का माहौल है.

दीपक रात्रे के एक करीबी रिश्तेदार लक्ष्मण रात्रे ने कहा, "हम बेहद ग़रीब लोग हैं. दीपक करीब एक साल पहले अपनी पत्नी और दो साल के बेटे के साथ ईंट भट्ठे में काम करने के लिए कश्मीर गए थे. हम चाहते हैं कि जल्द से जल्द उनका शव गांव पहुंचे."

परिजनों ने बताया कि दीपक के पिता का पहले ही निधन हो चुका है. घर में उनकी मां और एक छोटा भाई है. छोटा भाई शारीरिक रूप से सक्षम नहीं है. इस कारण घर की पूरी ज़िम्मेदारी दीपक के कंधों पर ही थी.

भूपेंद्र भैना

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इमेज कैप्शन, भूपेंद्र भैना अपनी पत्नी के साथ कश्मीर काम करने गए थे

भूपेंद्र भैना के परिजनों को इस घटना की जानकारी गांव के लोगों से मिली. भूपेंद्र तीन महीने पहले ही अपनी पत्नी के साथ काम की तलाश में कश्मीर गए थे.

वो अपने दो साल के बेटे को एक रिश्तेदार के यहां पास गांव में ही छोड़कर गए थे.

गांव के सरपंच धनीराम बंजारे ने कहा, "पूरा घर उन्हीं पर आश्रित था. अब जब वह नहीं हैं, तो यह हम सबके लिए चिंता का विषय है कि उनके छोटे बेटे, छोटी बहन और दादी का क्या होगा."

छत्तीसगढ़ के अलग-अलग ज़िलों से हर साल बड़ी संख्या में मज़दूर रोज़गार की तलाश में जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा और दक्षिण भारत के राज्यों में जाते हैं.

इनमें से बड़ी संख्या ईंट भट्ठों और निर्माण कार्यों में काम करती है. स्थानीय स्तर पर रोज़गार के सीमित अवसरों के कारण कई परिवारों की आजीविका ऐसे मौसमी पलायन पर निर्भर रहती है.

फ़ारूख़ अब्दुल्लाह

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जम्मू कश्मीर में सत्तारूढ़ पार्टी नेशनल कांफ़्रेंस के अध्यक्ष फ़ारूक़ अब्दुल्लाह ने इस हमले की निंदा की है.

पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, "इस मामले की जांच होनी चाहिए और हमलावरों की पहचान की जानी चाहिए. मुझे नहीं पता कि जब भी राज्य के दर्जे की मांग की जाती है तो ऐसी घटना घटती है."

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कुलगाम हमले को पहलगाम की पुनरावृत्ति बताया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई से प्रमोद तिवारी ने कहा, "वहां लोगों से उनका धर्म पूछकर हत्या की गई थी. यहां उनसे पूछा गया कि वे कहां से हैं और उनकी जाति क्या है, इसके बाद उनकी हत्या कर दी गई."

"अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने शांति और सामान्य स्थिति लौटने का जो वादा किया था, वह कहां है? ये मज़दूर वहां इसलिए गए थे क्योंकि उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिया गया था. सरकार को माफी मांगनी चाहिए और प्रत्येक मृतक के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवज़ा देना चाहिए."

जम्मू कश्मीर की प्रमुख पार्टी पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने कहा, "अमरनाथ यात्रा के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच यह घटना कैसे घटी, इसकी जांच होनी चाहिए."

उन्होंने कहा, "इस घटना को आम कश्मीरियों को ओवरग्राउंड वर्कर बताकर निशाना बनाने का बहाना नहीं बनाया जाना चाहिए. सरकार को पता लगाना चाहिए कि सेना, सीआरपीएफ़ और पुलिस की मौजूदगी के बावजूद आतंकवादी दो निहत्थे लोगों की हत्या करने में कैसे सफल हो गए."

महबूबा मुफ़्ती ने कहा, "मुझे लगता है कि सुरक्षा व्यवस्था में चूक हुई है. मुझे लगता है कि सरकार को इस बात की जांच करनी चाहिए कि सुरक्षा चूक कहां हुई."

जम्मू कश्मीर के बीजेपी नेता अल्ताफ़ ठाकुर ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "सिर्फ 10 दिनों में यह दूसरी ऐसी घटना है, जो सुरक्षा बलों की सतर्कता और खुफिया एजेंसियों के कामकाज पर सवाल उठाती है. चाहे ख़ुफ़िया एजेंसियां हों, पुलिस, सीआरपीएफ़ या यहां कोई अन्य बल, सभी को और अधिक सतर्क रहने की ज़रूरत है."

"ऐसी घटनाओं को रोकने और पाकिस्तान को शांति भंग करने या अमरनाथ यात्रा में बाधा डालने के प्रयासों में सफल नहीं होने देने के लिए कड़ी निगरानी बनाए रखनी होगी."

अल्ताफ़ ठाकुर ने कहा, "यह निश्चित रूप से चिंता का विषय है कि यात्रा जारी रहने और भारी सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद कश्मीर जैसे क्षेत्र में दो आतंकी हमले हुए, जिनमें तीन लोगों की जान चली गई. यह किसी भी तरह से सकारात्मक स्थिति नहीं है, ख़ासकर तब जब बड़ी संख्या में पर्यटक आ रहे हैं और पर्यटन क्षेत्र अच्छी स्थिति में है."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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