'ऐसा लग रहा है फिर मेरी माताजी चली गई हैं': आशा भोसले को कैसे याद कर रही है फ़िल्म इंडस्ट्री

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मशहूर गायिका आशा भोसले का मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया है.
शनिवार को कार्डियक अरेस्ट के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
आशा भोसले फेफड़ों की बीमारी और उम्र संबंधी अन्य बीमारियों से जूझ रही थीं.
8 सितंबर 1933 को जन्मीं आशा भोसले ने 1943 में 10 साल की उम्र में गाना शुरू कर दिया था. वह 90 साल की उम्र तक गाती रहीं.
उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर फ़िल्मी जगत ने दुख ज़ाहिर किया है.
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'उनके गीत हमेशा गूंजते रहेंगे'

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक्स अकाउंट पर मराठी और अंग्रेज़ी में आशा भोसले के निधन पर दुख ज़ाहिर किया है.
उन्होंने लिखा, "आशा भोसले जी के निधन से बेहद दुख हुआ. वह भारत की मशहूर और प्रतिभाशाली आवाज़ों में से एक थीं. दशकों तक चले उनके ज़बरदस्त म्यूज़िकल सफ़र ने हमारी सांस्कृतिक विरासत को बेहतर बनाया और दुनिया भर में अनगिनत दिलों को छुआ."
"चाहे उनकी दिल को छू लेने वाली धुनें हों या जानदार कंपोज़िशन, उनकी आवाज़ में हमेशा एक चमक रही. मैं उनके साथ हुई अपनी मुलाकातों को हमेशा संजोकर रखूंगा."
"मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, चाहने वालों और संगीत प्रेमियों के साथ हैं. वह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी और उनके गीत हमेशा लोगों की ज़िंदगी में गूंजते रहेंगे."
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि पूरे भारत और विश्व के संगीत प्रेमियों के लिए यह दुख का समय है, उन्हें सबसे बहुमुखी कलाकार के रूप में जाना गया.
"भारत के इतिहास में उन्होंने और मंगेशकर परिवार ने संगीत की सेवा की है. बाल्य अवस्था से संगीत की सेवा करते-करते 92 साल की उम्र तक लगातार उन्होंने सेवा की. वो अपने 90वें जन्मदिन पर तीन घंटे कॉन्सर्ट करने वालीं एकमात्र गायिका हैं."
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने पत्रकारों से कहा कि संगीत की दुनिया में उनका बड़ा नाम था और उनके निधन के बाद संगीत की दुनिया में बड़ी क्षति हुई है, उनके परिवार के प्रति गहरी संवेदना प्रकट करते हैं.
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पत्रकारों से कहा, "स्वर्गीय आशा ताई और मेरा अनेक सालों से नज़दीकी संबंध रहा है. उन्होंंने अनेक भाषाओं में अनेक गीत गाए और सब तरह के गीतों में उनकी मास्टरी थी."
"जिस तरह से लता दीदी ने अपने गायन कला से हमारे देश का नाम बड़ा किया उसी तरह से आशा ताई ने भी बड़ा किया है. उनकी उम्र होने के बाद मैं कहता था आप मत गाइये लेकिन वह कहती थीं कि जब तक जीवित हूं तब तक गाऊंगी."
फ़िल्म इंडस्ट्री ने क्या कहा?

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सायरा बानो ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बातचीत में कहा है कि आशा भोसले एक ज़िंदादिल शख़्स थीं और वो हमेशा उनका ख़्याल रखती थीं, उनकी पर्सनैलिटी शाही किस्म की थी.
उन्होंने सहयोगी संवाददाता रवि जैन से कहा, "यूं तो मेरे ज़्यादातर गानों को लता जी ने अपनी आवाज़ दी थी मगर चंद गाने आशा जी ने भी मेरे लिए गाए थे. आशाजी बहुत ही मज़ाकिया किस्म की थीं. जब मैंने फ़िल्मों में काम शुरू किया था तो मेरी आवाज़ काफ़ी पतली थी."
"रिकॉर्डिंग रूम में माइक पर गाना गाने से पहले वो मेरी तरफ़ देखकर इशारे से कहा करती थीं कि वो मेरे लिए अपनी आवाज़ पतली कर रही हैं. उनका ये अंदाज़ देखकर मुझे अक्सर बहुत हंसी आ जाया करती थी."
सायरा बानो ने कहा, "फ़िल्म 'नया दौर' के जश्न के लिए एक ख़ास पार्टी रखी गयी थी. दिलीप कुमार, वैजयंती माला जैसे सितारों के साथ मैंने भी उस पार्टी में शिरकत की थी. जिस तरह से माइक पर उन्होंने अपनी बातें रखीं, जिस तरह से उन्होंने 'नया दौर' से संबंधित अपनी यादें साझा कीं, उससे मुझे उनके शाही अंदाज़ की झलक देखने को मिली थी. 'नया दौर' उनके करियर के लिए एक बेहद अहम फ़िल्म साबित हुई जिससे उनकी लोकप्रियता में काफ़ी इज़ाफ़ा हुआ था."
"पिछले महीने रमज़ान के दौरान मैंने उनका एक वीडियो देखा जहां वो सभी को तहेदिल से रमज़ान की मुबारकबाद दे रही थीं. ये देखकर मैं काफ़ी प्रभावित हुई थी और मैंने उन्हें कॉल किया था. मैंने उन्हें कहा कि 'मुझे आपका ये वीडियो देखकर काफ़ी अच्छा लगा'. आपसी भाईचारे के लिहाज़ से उनके द्वारा कही बातें काफ़ी अहम थीं और ज़रूरी भी जिसके चलते मैंने उन्हें फ़ोन लगाया था. आशाजी तो चली गयीं मगर उनकी तमाम यादें हमेशा याद आएंगी."
अभिनेत्री शर्मिला टैगोर ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, "आशा जी की शख़्सियत को कभी भुलाया नहीं जा सकता है. मेरी पहली हिंदी फ़िल्म 'कश्मीर की कली' का पहला गाना 'दीवाना हुआ बादल' आशा भोसले ने गाया था. फ़िल्म का मेरा पहला शॉट डल झील में फ़िल्माया जा रहा था. शॉट देने के बाद जब मैं वापस आई तो आशा जी वहीं मेरा इंतज़ार कर रही थीं. उन्होंने मुझे मेरे करियर के लिए आशीर्वाद दिया. कुछ इस तरह मेरे करियर की शुरुआत आशाजी की मौजूदगी में हुई थी."
"काफ़ी सालों तक हम एक-दूसरे के पड़ोसी भी रहे. वो दक्षिण मुम्बई के पैडर रोड में 'प्रभुकुंज' में रहा करती थीं और मैं पास ही में कारमाइकल रोड की एक इमारत में रहती थी. आशाजी और मैं एक-दूसरे को काफ़ी पसंद किया करते थे. हम दोनों को कई लाइव शोज़ में भी एक-दूसरे के साथ काफ़ी वक्त गुज़ारने का मौका मिला करता था."
"लता जी ने एक वक्त के बाद गीत गाना छोड़ दिया था मगर आशाजी उम्र हो जाने के बाद भी एक लम्बे अरसे तक गाती रहीं. आशाजी जब कभी मेरी कोई फ़िल्म देखती थीं तो वो अक्सर मुझे फ़ोन किया करती थीं. वो काफ़ी खुले दिल की गायिका थीं और ज़िंदादिल तरीके से जिया करती थीं. वहीं लताजी थोड़ी रिज़र्व किस्म की थीं जो चुप रहना ज्य़ादा पसंद करती थीं. आशाजी ख़ूब मस्ती किया करती थीं और उन्हें बातें करना काफ़ी पसंद था."
उदित नारायण ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के सहयोगी संवाददाता रवि जैन से कहा कि वो बचपन से ही आशा भोसले के गाने सुनते आए हैं, वो एक ऐसी प्रतिभाशाली गायिका थीं जो हर लहजे और हर स्टाइल में गीत गाने में महारत रखती थीं.
उन्होंने कहा, "अपनी गायिकी से दुनिया भर में उन्होंने अपनी पहचान बनाई. संगीत की दुनिया में उन्होंने ऐसा इतिहास रचा कि उसे कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है. ये मेरी ख़ुशनसीबी है कि मुझे उनके साथ कई गीत गाने का मौका मिला."
"आशाजी एकमात्र ऐसी सिंगर थीं जो हर तरह गाने को अलहदा अंदाज़ में गाया करती थीं. वो एक ज़िंदादिल किस्म की शख़्स थीं और उन्होंने ज़िंदगी को भरपूर अंदाज़ में जिया. भारतीय सिनेमा और गायिकी की दुनिया में हमेशा उन्हें याद किया जाएगा. भले ही वो अब इस दुनिया में नहीं हैं, मगर वो हमेशा हमारे दिलों में रहेंगी."

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फ़िल्म निर्देशक मधुर भंडारकर ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि उनका एनर्जी लेवल कमाल का था और जब भी स्टेज पर परफ़ॉर्म करती थीं तो उन्हें देखकर सब दंग रह जाते थे. जेन ज़ी समेत हर जेनरेशन उनके गाने पर थिरकते हैं.
संगीतकर शंकर महादेवन ने कहा है कि आज का दिन सबसे दुखद है.
उन्होंने कहा, "यह हम सभी के लिए बहुत दुखद दिन है और भारतीय संगीत के लिए भी बेहद दुखद दिन है. मुझे यकीन ही नहीं हो रहा कि हमारी प्यारी आशा ताई अब हमारे बीच नहीं हैं."
"मैं अपने दुख और इस समय जो महसूस कर रहा हूं, उसे शब्दों में बयां नहीं कर पा रहा हूं. एक संगीतकार के रूप में, दीदी के भक्त के रूप में, एक बहुत करीबी पारिवारिक मित्र के रूप में और उन्हें मां सरस्वती की तरह मानते हुए, मुझे यकीन है कि हर एक भारतीय का दिल टूटा हुआ है."
'जैसे फिर से एक बार मेरी माताजी चली गई हैं'

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आशा भोसले के निधन पर अनु मलिक ने बीबीसी न्यूज़ हिंदी से अपनी यादें साझा की हैं.
उन्होंने सहयोगी संवाददाता रवि जैन से कहा, "1977 में जब मैं महज़ 14 साल का था तब बतौर संगीतकार 'जुल्मों सितम पर इतराने वाले' यह गाना आशा भोसले ने मेरे लिए रिकॉर्ड किया था. मेरे पिताजी सरदार मलिक के साथ उन्होंने काफ़ी काम किया था. मेरे लिए गाना गाने के बाद उन्होंने मुझे आशीर्वाद दिया और कहा कि 'मैं एक दिन बहुत नाम कमाऊंगा.' इसके बाद उन्होंने मेरी कई हिट फ़िल्मों के लिए एक से बढ़कर एक गीत गाए... वह मुझे कभी ना नहीं कहती थीं."
"उनकी मौत की ख़बर सुनकर मैं काफ़ी विचलित हो गया हूं और इस मौके पर कुछ कहने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं. 2021 में मेरी मां की मौत हो गयी थी... अब आशाजी के जाने से लग रहा है जैसे एक बार फिर से मेरी माताजी चली गई हैं."
अनु मलिक ने कहा है कि वह एक ऐसी कलाकार और गायिका थीं जो हर किस्म के गाने गाती थीं चाहे वह रॉक हो, जैज़ हो, पॉप हो, ग़ज़ल हो, कव्वाली हो या फिर क्लासिकल... हर तरह की गायिकी में वह उम्दा थीं, जिसके साथ भी उन्होंने काम किया और जो भी गाने उन्होंने गाये, उन्हें बेहतरीन और लाजवाब अंदाज़ में अपनी आवाज़ दी.
"आशाजी का जाना एक युग का अंत है. मोहम्मद रफ़ी चले गये, किशोर कुमार नहीं रहे, मुकेशजी भी इस दुनिया में नहीं हैं और अब आशाजी का यूं चले जाना... ये सभी उम्दा कलाकार हमारे बीच में अब नहीं हैं. उनके जाने से दुनिया भर में उन्हें चाहने वाले हरेक शख़्स को दुख हुआ है. वह हमेशा हम सबके दिलों में रहेंगीं."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.



































