नेपाल की सुरंगों में फंसे 900 से अधिक लोगों को कैसे बचाने की कोशिशें हो रही हैं?

चिलिमे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट

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इमेज कैप्शन, चिलिमे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में एक बचावकर्मी सुरंग के प्रवेश द्वार पर काम करता हुआ
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नेपाल में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है जिसमें 900 से ज़्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और तक़रीबन चार हज़ार लोग लापता हैं.

इस दौरान राहत के साथ-साथ देश में बचाव अभियान भी ज़ोरों पर चल रहा है. ये बचाव अभियान नेपाल के अलग-अलग हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की अलग-अलग सुरंगों में चलाया जा रहा है.

ऐसा अनुमान है कि नेपाल की अलग-अलग हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की सुरंगों में तक़रीबन 933 लोग फंसे हुए हैं.

बचावकर्मी अपर त्रिशूली 1, त्रिशूली 3ए और त्रिशूली 3बी प्रोजेक्ट की सुरंगों से लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिशों में लगे हुए हैं.

ये प्रोजेक्ट देश के लिए बिजली बनाने का एक बड़ा ज़रिया हैं, जिनमें कुछ आपस में जुड़ी हुई सुरंगें हैं.

त्रिशूली 3बी प्रोजेक्ट, 3ए से आने वाले पानी का इस्तेमाल करता है. अपर त्रिशूली 1 नदी पर सबसे ऊँचा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट है. बाढ़ आने के समय इसका कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा था.

रविवार को बचावकर्मियों ने 3ए प्रोजेक्ट की सुरंग में घुसने के लिए एक बड़ा छेद बनाया था.

नेपाली प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने बताया था कि बचावकर्मियों की टीम ने सुरंग में काफ़ी आवाज़ें दी थीं लेकिन अंदर से किसी ने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी.

किस तरह की कोशिशें की जा रही हैं?

बचावकर्मी

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इमेज कैप्शन, उत्तरी हिस्से में अगले कुछ दिनों में और बारिश का अनुमान है

पूरे नेपाल के तक़रीबन 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से जुड़ी सुरंगों में कर्मचारियों के फंसे होने का शक है. नेपाली अधिकारी अब पहाड़ियों में बम धमाके करने की कोशिश कर रहे हैं.

सोमवार की सुबह करीब 2 बजे रसुवा में त्रिशूली 3ए हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का रास्ता खोलने की कोशिश में साइट पर एक कंट्रोल्ड ब्लास्ट किया गया.

देश के उत्तरी हिस्से में अगले कुछ दिनों में और बारिश का अनुमान है. भारी बारिश से बचाव का काम मुश्किल हो रहा है.

बीबीसी नेपाली संवाददाता संजय ढकाल ने बताया है कि कई जवान रसुवागढ़ी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में गए हैं, लेकिन उन्हें वहां कोई नहीं मिला. उन्होंने सुरंग के अंदर खोजने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया था.

अब, भारत, चीन और यहां तक कि दक्षिण कोरिया से भी कई रेस्क्यू टीमें सुरंग के रेस्क्यू ऑपरेशन में मदद के लिए पहुंच गई हैं.

नेपाल की सरकार का कहना है कि उसे टेक्निकल मामलों में, जैसे सुरंग में रेस्क्यू करने में, और लाशों की डीएनए पहचान में भी बहुत मदद की ज़रूरत होगी.

जिनके अपने टनल में हो सकते हैं?

एक चीनी बचावकर्मी

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इमेज कैप्शन, चीनी टनल रेस्क्यू एक्सपर्ट सोमवार को नेपाल में आर्मी ट्रेनिंग सेंटर पहुंचे
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बीबीसी ने प्रिया खरेल से बात की, जो अपने भाई के बारे में जानकारी ढूंढने के लिए संघर्ष कर रही हैं. ऐसी उम्मीद की जा रही है कि वह किसी टनल में फंसे होंगे.

उनके भाई, मिलन खरेल, अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में इंजीनियर हैं.

उन्होंने कहा, "जो लोग वापस आए हैं, उन्होंने कहा है कि टनल में लोग हैं. इसलिए मुझे उम्मीद है कि अगर आर्मी उन्हें जल्द ही ढूंढ लेती है, तो उन्हें बचाया जा सकेगा."

लेकिन, उन्हें अपने भाई की हालत के बारे में कहीं से भी जानकारी नहीं मिल पाई है. उन्होंने कहा, "हमने लापता, बचाए गए और मरे हुए लोगों की लिस्ट देखने की कोशिश की, लेकिन कहीं भी कोई नाम नहीं था."

एक महिला, जिनके पति के बारे में माना जा रहा है कि वो नेपाल के त्रिशूली-3ए साइट पर एक हाइड्रोपावर टनल के अंदर फंसे हो सकते है, उनका कहना है कि उन्हें अब भी उम्मीद है कि उनके पति ज़िंदा हैं.

सीता पांडे ने नेपाली अखबार कांतिपुर को बताया, "मुझे अभी भी 50% उम्मीद है कि वह ज़िंदा हैं क्योंकि अंदर एक ऑक्सीजन सिस्टम है."

"लेकिन हर घंटे के साथ, यह उम्मीद कम होती जा रही है."

नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी और इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अनुसार, पांडे के पति जिबलाल अधिकारी सहित हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से जुड़े कम से कम 897 लोग अभी भी लापता हैं.

रेस्क्यू करने वालों ने वीकेंड में टनल में हवा भरना शुरू कर दिया था, लेकिन कुछ परिवारों का कहना है कि यह पहले किया जाना चाहिए था.

जीबन खड़का के रिश्तेदार भी प्लांट के अंदर फंसे हैं. उन्होंने अखबार कांतिपुर को बताया, "जितना ज़्यादा समय लगेगा, हमारी उम्मीद उतनी ही कम होती जाएगी. यह ऑपरेशन बहुत तेज़ी से आगे बढ़ना चाहिए क्योंकि हर सेकंड हमारे लिए मायने रखता है. यह बहुत ही धीमा ऑपरेशन है."

जो लोग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में बच गए

बचावकर्मी

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इमेज कैप्शन, रविवार को त्रिशूली 3ए हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग के पास रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे बचावकर्मी

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, बाढ़ आने के बाद मैलुंग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे शिवा गिरी और छह अन्य लोगों के पास ऊपर चढ़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं था.

ये लोग घरों, बस्तियों और अन्य ढाँचे पानी में समाते देख रहे थे. ये लोग रसुवा स्थित मैलुंग जलविद्युत परियोजना से पहाड़ी की ओर भाग रहे थे.

गिरी ने नेपाल न्यूज़ वेबसाइट को बताया कि उनके कई सहकर्मी बह गए, जिनमें उनका चचेरा भाई भी शामिल था. शहरों तक जाने वाले सामान्य रास्तों से कट जाने के बाद शिवा और उनके साथी लगभग 12 घंटे तक जंगल के रास्ते चलते रहे और आख़िरकार एक गुफा में रात बिताई.

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के मुताबिक़, 279 लोगों को सुरंगों से बचाया जा चुका है.

मैलुंग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में तकनीकी कर्मचारी गिरी ने बताया कि अगली सुबह उनका समूह परियोजना स्थल की ओर नीचे उतरा, ख़ुद को विस्थापित के रूप में दर्ज कराया और बचाव की अपील की.

नेपाल न्यूज़ के मुताबिक़, आख़िरकार नेपाली सेना के एक हेलीकॉप्टर ने उन्हें काठमांडू पहुँचाया, जहाँ गिरी का इलाज त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में चल रहा था.

नेपाल
इमेज कैप्शन, बुधवार को अचानक आई बाढ़ में तक़रीबन 4000 लोग लापता हैं

अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में सिविल इंजीनियर संदीप राणा ने भी बढ़ते बाढ़ के पानी से बचने के लिए लगभग 100 अन्य कर्मचारियों के साथ एक पहाड़ी पर चढ़कर जान बचाई.

राणा ने सोमवार को द राइज़िंग नेपाल को बताया कि जब वह प्रोजेक्ट कार्यालय में थे, तभी आपातकालीन सायरन बज उठा.

कर्मचारी अपने निर्धारित इकट्ठे होने वाली जगह तक पहुँच भी नहीं पाए थे कि उन्हें बताया गया कि लगभग 12 किलोमीटर ऊपर स्थित बांध स्थल पर भीषण बाढ़ आ गई है.

इसके बाद समूह ने ऊँचाई की ओर चढ़ना शुरू किया और आख़िरकार त्रिशूली नदी से लगभग 30 से 35 मीटर ऊपर एक स्थान तक पहुँच गया. वहाँ से उन्होंने परियोजना कार्यालय, शिविरों और सड़कों को बाढ़ के पानी में समाते हुए देखा।

राणा ने अखबार को बताया, "हमें लगातार ऊपर चढ़ना पड़ रहा था और साथ ही गिरते पत्थरों से भी बचना था. रुककर सोचने का समय ही नहीं था."

समूह सात से आठ घंटे तक चढ़ाई करता रहा और शाम लगभग चार बजे ग्रांग क्षेत्र में एक सड़क तक पहुँचा. जब तक राणा कालिकास्थान पहुँचे, तब तक उनके साथ केवल दो लोग रह गए थे, जबकि बाकी लोग रास्ते में बिछड़ चुके थे.

रामचंद्र नाम के एक अन्य ज़िंदा बचे शख़्स ने त्रिशूली नदी के किनारे स्थित एक सुरंग के भीतर रहकर बाढ़ का सामना किया. रातोपाटी समाचार पोर्टल के मुताबिक़, रामचंद्र और उनके पाँच सहकर्मी सुरंग के निकास द्वार से कई सौ मीटर दूर थे जब पानी सुरंग के भीतर घुसने लगा.

उन्होंने ख़ुद को बहने से बचाने के लिए सुरंग की छत के साथ लगी लोहे की सीढ़ी को पकड़ लिया. रामचंद्र ने बताया कि छह लोगों ने ख़ुद को स्थिर रखने के लिए टिन की एक चादर का सहारा लिया और लगभग छह घंटे तक एक सीढ़ी से दूसरी सीढ़ी की ओर बढ़ते रहे. उन्होंने कहा, "हम छह लोग थे और बाद में सुरंग के दरवाज़े पर हमें एक और शख़्स मिला."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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