अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन: क्या ट्रंप की घटती लोकप्रियता का फ़ायदा उठा पाएंगे डेमोक्रेट्स

मध्यावधि चुनाव से पहले अमेरिकी मतदाताओं के बीच ट्रंप की लोकप्रियता ऐतिहासिक रूप से कम है
इमेज कैप्शन, मध्यावधि चुनाव से पहले अमेरिकी मतदाताओं के बीच ट्रंप की लोकप्रियता ऐतिहासिक रूप से कम है
    • Author, एंथनी ज़र्चर
    • पदनाम, उत्तरी अमेरिका संवाददाता, बीबीसी न्यूज़
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 8 मिनट

डेमोक्रेटिक पार्टी को इन अहम अमेरिकी मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों से काफ़ी उम्मीदें हैं जो तीन नवंबर को होने जा रहे हैं.

एक तरफ़ रिपब्लिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता ऐतिहासिक रूप से काफ़ी कम है. दूसरी तरफ़ खाने-पीने की चीज़ों और रोज़मर्रा के बिलों की बढ़ती क़ीमतों से अमेरिकी जनता नाराज़ है.

पिछले कई महीनों से आ रहे पोल सर्वे भी डेमोक्रेट्स के अनुकूल हैं जो उनके लिए अच्छी ख़बर का संकेत दे रहे हैं.

सर्वे के मुताबिक़, अमेरिकी संसद के निचले सदन या प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स) पर नियंत्रण हासिल करने के लिए ज़रूरी 218 सीटों से कहीं ज़्यादा सीटों पर डेमोक्रेटिक उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए हैं.

वीडियो कैप्शन, यूएस मिडटर्म इलेक्शन: ट्रंप हारे तो भारत को होगा फ़ायदा?

अहम सीनेट मुक़ाबलों में भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवार या तो बराबरी पर हैं या मामूली बढ़त में दिख रहे हैं.

हाल ही में आए न्यूयॉर्क टाइम्स के एक सर्वेक्षण में साउथ कैरोलाइना की सीनेट सीट पर मुक़ाबला बराबरी का दिखाया गया.

यह वही राज्य है जहां डोनाल्ड ट्रंप ने 2024 में 18 प्रतिशत अंकों के अंतर से जीत दर्ज की थी.

सीएनएन के हालिया सर्वेक्षणों में टेक्सस, कंसास और मेन में डेमोक्रेट्स को बढ़त मिलती दिखाई गई है.

लेकिन क्या ये सर्वेक्षण सही साबित होंगे?

राष्ट्रपति चुनाव के दौरान के पोल सर्वे गलत साबित करके जीते थे ट्रंप

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हाल के वर्षों में अमेरिकी राजनीति में कई ऐसे उदाहरण देखने को मिले हैं, जब जनमत सर्वेक्षण (पोल सर्वे) चुनाव नतीजों का सटीक अनुमान नहीं लगा सके. कई बार तो चुनाव से कुछ दिन पहले किए गए सर्वे भी ग़लत साबित हुए हैं.

डोनाल्ड ट्रंप ने 2016 और 2024 में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के दौरान सर्वेक्षणों के अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया था.

2020 में उनकी मामूली हार हुई थी. उस चुनाव से पहले ज़्यादातर सर्वे में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बाइडन को कहीं ज़्यादा आरामदायक जीत मिलती दिखाई गई थी.

इसी साल की शुरुआत में सर्वेक्षणों से संकेत मिला था कि मिशिगन में डेमोक्रेटिक सीनेट प्राइमरी में अब्दुल अल-सैयद दो अंकों के अंतर से जीत सकते हैं.

लेकिन नतीजा सिर्फ़ एक प्रतिशत के अंतर पर सिमट गया.

विस्कॉन्सिन में डेमोक्रेटिक गवर्नर प्राइमरी के दौरान भी एक उम्मीदवार को कई सर्वे में क़रीब 20 अंकों की बढ़त दिखाई गई थी.

हालांकि, वह उम्मीदवार बेहद मामूली अंतर से चुनाव हार गए.

डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले राष्ट्रपति चुनावों में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन क्यों किया, इसकी एक वजह यह मानी जाती है कि उनके समर्थक बड़ी संख्या में मतदान के लिए पहुंचे थे.

इनमें से कई लोग ऐसे थे जो आमतौर पर नियमित रूप से वोट नहीं डालते थे. यही अप्रत्याशित रुझान हाल के वर्षों में सर्वे की कुछ बड़ी चूकों की प्रमुख वजहों में से एक रहा है. हालांकि प्रतिष्ठित सर्वेक्षणों में ज़्यादातर मामलों में अनुमान सिर्फ़ कुछ प्रतिशत अंकों से ही ग़लत साबित हुए थे.

लेकिन कड़े मुक़ाबले वाले चुनाव में यही कुछ प्रतिशत अंक किसी उम्मीदवार की जीत और हार के बीच फ़र्क पैदा कर सकते हैं. और इस साल सीनेट की कई अहम सीटों पर मुक़ाबला इन्हीं बेहद छोटे अंतर के भीतर सिमटा हुआ है.

आख़िर क्यों गलत साबित हो रहे पोल सर्वे

तीन नवंबर को होने जा रहे मिड टर्म इलेक्शन
इमेज कैप्शन, तीन नवंबर को होने जा रहे मिड टर्म इलेक्शन

राजनीतिक और बाज़ार से जुड़े सर्वे करने वाली संस्था इप्सॉस पब्लिक अफ़ेयर्स के अध्यक्ष क्लिफ़र्ड यंग के मुताबिक़, हाल के वर्षों में जनमत सर्वेक्षण करना ज़्यादा मुश्किल हो गया है.

इसकी एक वजह यह है कि अमेरिकी लोग लैंडलाइन फ़ोन का इस्तेमाल छोड़ रहे हैं. वे फ़ोन कॉल्स को भी छांटकर उठाते हैं, जिससे उनसे संपर्क करना कठिन हो गया है.

इसके अलावा, जिन लोगों से सर्वेक्षण करने वाली कंपनियां संपर्क कर पाती हैं, उनमें से भी कई लोग अब सर्वे में हिस्सा लेने के लिए पहले जितने तैयार नहीं रहते.

यंग कहते हैं, "रूढ़िवादी लोग, ख़ास तौर पर दक्षिणपंथ के ज़्यादा कट्टर समर्थक, स्वभाव से ही व्यवस्था-विरोधी होते हैं. वे किसी भी चीज़ में हिस्सा नहीं लेना चाहते. उन्हें पूरी व्यवस्था से नफ़रत है. यही सबसे बड़ी चुनौती है."

अगर रिपब्लिकन मतदाताओं की संख्या का व्यवस्थित रूप से कम आकलन किया जा रहा हो, और सर्वेक्षण करने वाली कंपनियां अपने मतदान मॉडल तैयार करते समय इसे ध्यान में न रखें, तो उनके आंकड़े डेमोक्रेट्स के पक्ष में झुक सकते हैं.

यही उन वजहों में से एक है, जिनके कारण सर्वेक्षण करने वालों के लिए यह अनुमान लगाना मुश्किल होता जा रहा है कि चुनाव में मतदाताओं की वास्तविक तस्वीर कैसी होगी.

मिडटर्म आम चुनाव के पोल सर्वे से क्या उम्मीद

हाल के वर्षों में मिडटर्म आम चुनावों के सर्वे अपेक्षाकृत ज़्यादा सटीक साबित हुए हैं. इसकी एक वजह यह भी थी कि डोनाल्ड ट्रंप चुनावी बैलेट पर नहीं थे. ट्रंप में ऐसे अमेरिकियों को मतदान के लिए प्रेरित करने की ख़ास क्षमता रही है, जो आमतौर पर राजनीति से निराश या अलग-थलग महसूस करते हैं.

2022 के चुनावों में सर्वेक्षणों ने संकेत दिया था कि डेमोक्रेट्स सामान्य राजनीतिक अनुमान को ग़लत साबित कर सकते हैं. इन सर्वे के अनुसार, जो बाइडन की कम लोकप्रियता के बावजूद डेमोक्रेट्स को चुनाव में बड़ी हार का सामना नहीं करना पड़ेगा.

हालांकि पार्टी ने प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स) में अपना नियंत्रण खो दिया था, लेकिन हार का अंतर बहुत कम था.

साथ ही डेमोक्रेट्स ने अमेरिकी सीनेट पर अपना नियंत्रण बनाए रखा था. इस साल हुए प्राइमरी चुनावों के नतीजों में कुछ बड़े उलटफेर ज़रूर देखने को मिले.

लेकिन क्लिफ़र्ड यंग का कहना है कि उम्मीदवारों के चयन के लिए होने वाले ये मुक़ाबले ऐतिहासिक रूप से काफ़ी अस्थिर रहे हैं. ऐसे चुनावों में मतदाता अक्सर आख़िरी समय में अपना फ़ैसला लेते हैं.

उनके मुताबिक़, इसे इस बात का संकेत नहीं माना जाना चाहिए कि मौजूदा आम चुनावों के सर्वेक्षण ग़लत साबित होंगे.

मिडटर्म में विपक्ष का प्रदर्शन

राष्ट्रपति की पार्टी का मिडटर्म चुनावों में ख़राब प्रदर्शन करना आम बात मानी जाती है. हाल के वर्षों में इसका सबसे बड़ा उदाहरण 2010 में देखने को मिला था जब डेमोक्रेट्स की सरकार थी.

उस चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी ने प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स) की 60 से ज़्यादा सीटें अपने नाम कर ली थीं. साथ ही उसने सीनेट में भी अपनी स्थिति मज़बूत की थी.

उस समय अमेरिकी अर्थव्यवस्था वित्तीय संकट से उबरने के लिए संघर्ष कर रही थी. इसके अलावा राष्ट्रपति बराक ओबामा के स्वास्थ्य सेवा सुधारों को लेकर रूढ़िवादी वोटरों में चिंता थी.

तब के सर्वे ने रिपब्लिकन जीत का अनुमान लगाया था, लेकिन इतनी बड़ी जीत की उम्मीद नहीं की गई थी.

इस बार स्थिति उलट है.

डेमोक्रेट्स विपक्ष में हैं और अर्थव्यवस्था मतदाताओं की सबसे बड़ी चिंताओं में शामिल है.

लेकिन कई वजहें हैं जिनके कारण डेमोक्रेट्स का प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं हो सकता, जितना इतिहास के आधार पर माना जा रहा है या जितनी कुछ लोगों को उम्मीद है.

यह स्थिति तब है जब डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता के आंकड़े काफ़ी कम हैं.

पहली वजह यह है कि इस चुनाव में जिन इलाक़ों में मुक़ाबला अहम माना जा रहा है, उनमें से कई जगहों पर ट्रंप ने सिर्फ़ दो साल पहले हुए राष्ट्रपति चुनाव में आसानी से जीत हासिल की थी.

दूसरे शब्दों में कहें तो यह मैदान रिपब्लिकन पार्टी के लिए काफ़ी अनुकूल माना जा सकता है. दूसरी वजह यह है कि पिछले कुछ वर्षों में प्रतिनिधि सभा की चुनावी सीमाओं में बदलाव हुए हैं. इन बदलावों के कारण अब पहले की तुलना में कम सीटें एक पार्टी से दूसरी पार्टी के हाथ में जाती हैं.

तीसरी वजह यह है कि देश में राजनीतिक ध्रुवीकरण पहले से कहीं ज़्यादा बढ़ गया है. इस कारण ऐसे मतदाताओं की संख्या कम हो गई है जो चुनाव के दौरान अपना समर्थन बदल सकते हैं.

कुछ विशेषज्ञ तो मतदाता वर्ग को "जमा हुआ" या "स्थिर" तक बताते हैं. इसके अलावा रिपब्लिकन पार्टी को चंदे और चुनावी फंडिंग के मामले में बढ़त मिली हुई है.

इस बढ़त की वजह से उसके पास अंतिम हफ़्तों में विरोधियों के ख़िलाफ़ विज्ञापनों पर ख़र्च करने के लिए सैकड़ों मिलियन डॉलर उपलब्ध रहे हैं.

Barack Obama is pictured with his eyes closed and lips pursed, looking very glum. He is stood in front of a USA flag in the East Room of the White House.
इमेज कैप्शन, 2010 में मिड टर्म की हार के बाद प्रेस कॉन्फ्रे़स के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति ओबामा

हाल में जीती सीटों पर रैली कर रहे राष्ट्रपति ट्रंप, विपक्षी में उत्साह

जनमत सर्वेक्षणों के मॉडल बदलते राजनीतिक माहौल और मतदाताओं के रुझानों को समझने की कोशिश करते हैं.

एक अच्छी तरह तैयार किया गया सर्वे उन वजहों को भी ध्यान में रखता है, जिनके कारण उसके नतीजे कम भरोसेमंद हो सकते हैं.

हर सर्वे में एक तय त्रुटि-सीमा या मार्जिन ऑफ़ एरर होता है.

यह अनिश्चितता का एक सांख्यिकीय स्तर होता है, जो सर्वे में शामिल लोगों की संख्या और पूरी आबादी के अनुपात पर आधारित होता है.

जब कई सर्वेक्षणों के औसत नतीजों को एक साथ देखा जाता है, तो वे किसी एक सर्वे की तुलना में ज़्यादा सटीक अनुमान दे सकते हैं.

फ़िलहाल, राष्ट्रपति चुनावों में हाल के वर्षों में देखी गई सर्वेक्षणों की ग़लती को ध्यान में रखने के बाद भी यही संकेत मिलता है कि 3 नवंबर को डेमोक्रेट्स का प्रदर्शन अच्छा रह सकता है.

इसके अलावा, सर्वेक्षणों की ग़लती किसी भी दिशा में हो सकती है.

पिछले साल हुए राज्य स्तरीय और विशेष चुनावों में डेमोक्रेट्स ने ज़्यादातर सर्वेक्षणों के अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया था.

उस समय उनके समर्थक उम्मीद से कहीं ज़्यादा संख्या में मतदान करने पहुंचे थे.

अभियान के आख़िरी दिनों में डोनाल्ड ट्रंप को उन राज्यों में रैलियां करते देखना, जहां उन्होंने 2024 में आराम से जीत हासिल की थी, डेमोक्रेट्स के लिए उत्साह बढ़ाने वाला संकेत माना जा रहा है.

इससे डेमोक्रेट्स की यह उम्मीद मज़बूत हुई है कि रिपब्लिकन पार्टी के आंतरिक सर्वेक्षणों में उसके उम्मीदवार मुश्किल स्थिति में दिखाई दे रहे होंगे.

हालांकि, हमेशा यह संभावना बनी रहती है कि मतदाता चुनाव के दिन तक अपना मन बदल लें.

कई बार आख़िरी समय में मतदाताओं का रुझान बदल जाता है. इससे चुनावी मुक़ाबले की पूरी तस्वीर बदल सकती है.

कई बार ऐसा भी होता है कि अब तक निर्णय न लेने वाले मतदाता, जो इन चुनावों में अभी भी एक अहम समूह हैं, बड़ी संख्या में एक ही पक्ष की ओर चले जाते हैं.

जनमत सर्वेक्षणों में कुछ न कुछ अनिश्चितता हमेशा बनी रहती है.

इस अनिश्चितता को समझना और संभालना ही वह कला है, जो सर्वेक्षण के विज्ञान के साथ-साथ चलती है.

क्लिफ़र्ड यंग कहते हैं, "मुझे लगता है कि हम अब पहले से बेहतर काम कर रहे हैं."

"लेकिन हमारी समस्या सिर्फ़ सर्वेक्षण करने वालों से जुड़ी नहीं है. समस्या का एक हिस्सा यह भी है कि हम इंसानों के व्यवहार को समझने की कोशिश कर रहे होते हैं. और इंसानों को समझना आसान नहीं होता."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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