नेपाल के उत्तरी हिस्सों में अचानक आई बाढ़ से भारी जान-माल के नुक़सान की आशंका, क्या हैं ताज़ा हालात

उत्तरी नेपाल में अचानक आई बाढ़ से प्रभावित एक जलविद्युत संयंत्र के सामने कीचड़ और रेत का ढेर लगा हुआ है.

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    • Author, फणींद्र दाहाल
    • पदनाम, बीबीसी नेपाली
    • ........से, काठमांडू
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 5 मिनट

उत्तरी नेपाल के कुछ हिस्सों में आई भीषण बाढ़ के बाद भारी जान-माल के नुक़सान की आशंका जताई जा रही है. बाढ़ में कई गांव बह गए और एक पनबिजली बांध सहित बुनियादी ढांचे को नुक़सान पहुंचा है.

बुधवार तड़के नेपाल की राजधानी काठमांडू के उत्तर में स्थित रसुवा इलाक़े में बाढ़ आ गई. यह इलाक़ा तिब्बत से सटा हुआ है और चीन के साथ नेपाल के मुख्य व्यापार मार्ग पर पड़ता है.

अधिकारियों का मानना है कि यह बाढ़ तिब्बत से नेपाल की ओर बहने वाली भोटे कोशी नदी में गिरी बर्फ़ के पिघलने के कारण आई थी.

नदी के निचले इलाक़ों में स्थित कई ज़िलों में हाई अलर्ट जारी किया गया है. रसुवा के मुख्य ज़िला अधिकारी नरेंद्र परियार ने बीबीसी न्यूज़ नेपाली को बताया कि अधिकारियों को भारी नुक़सान की आशंका है. फ़िलहाल नुक़सान के पैमाने का सटीक आकलन करना जल्दबाज़ी होगी.

कई लोगों को बचाया गया

बाढ़ का एक दृश्य

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राहत और बचाव अभियान में अब तक 12 लोगों को बचाया जा चुका है.

काठमांडू में रहने वाले चीनी व्यवसायी यी लियांग ने बीबीसी को बताया, "हमारी लॉजिस्टिक्स कंपनी के सात कंटेनर ट्रक वहां मौजूद हैं, जिनमें सभी नेपाली कर्मचारी काम करते हैं. हमारा उन सभी से संपर्क टूट गया है. वहां सिग्नल नहीं है, इसलिए हम किसी से भी बात नहीं कर पा रहे हैं."

"जहां तक मुझे पता है, कोई चेतावनी नहीं दी गई थी. कभी-कभार भूस्खलन और मिट्टी खिसकने की घटनाएं होती थीं, ख़ासकर बरसात के मौसम में, लेकिन यह घटना कहीं अधिक गंभीर लगती है."

नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने संवेदनशील क्षेत्रों में नदी के किनारों के पास रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और एहतियात बरतने का आह्वान किया है.

26 अगस्त, 2026 को नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद क्षतिग्रस्त संपत्ति और पानी से भरी सड़कें.

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स्थिति का जायज़ा लेने के लिए आपातकालीन बैठक करने के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "चिकित्सा दल, स्काउट्स और रेड क्रॉस के समन्वय से ज़रूरी क़दम उठाने का काम शुरू हो गया है."

अधिकारियों ने बताया कि रसुवा ज़िले में दो चौकियों से सशस्त्र पुलिस बल के 13 अधिकारी लापता हैं. इसके अलावा दर्जनों अन्य पुलिस अधिकारियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है.

पिछले साल रासुवा में भीषण बाढ़ आई थी जिसमें सीमा के चीनी हिस्से में एक ग्लेशियर के टूटने के बाद 18 लोगों की मौत हो गई थी.

अधिकारियों का मानना है कि बुधवार की आपदा का पैमाना पिछले साल की बाढ़ से कहीं अधिक है.

ऐतिहासिक त्रिशूली बाजार को भारी नुकसान

निरंजन राजबंशी, बीबीसी न्यूज़ नेपाली

बाढ़ की चपेट में कई बाज़ार आए हैं.

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विदुर नगरपालिका के वार्ड नंबर 1 के वार्ड अध्यक्ष लेनिन रंजित ने कहा कि रसुवा और नुवाकोट से होकर बहने वाली भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई बाढ़ के कारण नुवाकोट का ऐतिहासिक त्रिशूली बाजार लगभग पूरी तरह डूब गया है.

लेनिन रंजित ने बीबीसी न्यूज़ नेपाली से कहा, "बाजार का आधे से ज्यादा हिस्सा पूरी तरह डूब गया है. त्रिशूली जलविद्युत संयंत्र, बाजार में बने नए और पुराने दोनों कंक्रीट के पुल, त्रिशूली स्कूल, मंदिर और घर बह गए हैं."

उन्होंने कहा, "दोस्तों ने अपनी आंखों के सामने लोगों को बहते हुए देखा है. बाजार के कुछ निवासियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है."

उन्होंने यह भी बताया कि बचाव के लिए हेलीकॉप्टर मंगाने की प्रक्रिया चल रही है.

फ़िलहाल बाज़ार के लोग विदुर और कॉलोनी इलाकों में शरण ले रहे हैं. उनके मुताबिक, त्रिशूली के लोगों को बाढ़ की सूचना देकर तुरंत वहां से निकलने के लिए कहा गया था. लेकिन उनका कहना है कि कुछ लोगों ने इस चेतावनी पर यक़ीन नहीं किया.

वार्ड अध्यक्ष रंजित ने कहा, "नदी के पास निचले बाजार के लोग तुरंत वहां से निकल गए थे, लेकिन ऊपरी बाजार के स्थानीय लोग अभी वहां से नहीं निकले थे. इससे पहले ऐसी अफवाहें भी फैलती रही थीं, लेकिन बाजार को बहा ले जाने वाली बाढ़ कभी नहीं आई थी. किसी ने नहीं सोचा था कि इतनी भयानक बाढ़ आएगी."

उन्होंने कहा, "जब त्रिशूली का पुराना पुल बाढ़ की चपेट में आया, तब मैं माइक से लोगों को चेतावनी दे रहा था. जब मैं नए पुल तक पहुंचा तो पानी मेरे पैरों तक आ गया था. मैं चट्टानों तक पहुंचकर किसी तरह बच निकला."

विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पहले 1985 में रसुवा के धुन्चे इलाके में भूस्खलन हुआ था, जिससे त्रिशूली नदी का रास्ता अवरुद्ध हो गया था. उस समय बाजार के बह जाने के डर से पूरे बाजार को खाली करा लिया गया था. हालांकि, बाढ़ बाजार तक नहीं पहुंची थी.

अधिकारियों के मुताबिक, नुवाकोट के ऐतिहासिक त्रिशूली बाजार को 'संगुबाजार' के नाम से भी जाना जाता है. यहां करीब 500 घर हैं और आबादी 2,000 से ज्यादा है.

भारत और चीन से मदद के लिए बातचीत जारी

हालात का जायज़ा लेने के लिए नेपाल कैबिनेट की बैठक हुई

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नेपाल सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा है कि रसुवा और नुवाकोट से होकर बहने वाली भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के बाद बचाव और राहत कार्यों के लिए चीन और भारत के साथ बातचीत चल रही है.

सरकारी प्रवक्ता सस्मित पोखरेल ने कहा, "चीनी सरकार और भारतीय सरकार के साथ बातचीत जारी है. विदेश मंत्रालय के माध्यम से समन्वय किया जा रहा है. चीनी सरकार ने आवश्यक सहायता प्रदान करने की जानकारी दी है और भारतीय सरकार ने भी ऐसा ही किया है."

पोखरेल नेपाल के शिक्षा मंत्री भी हैं.

उन्होंने बताया कि आपदा के बाद हुई कैबिनेट बैठक में बचाव और राहत कार्यों के लिए सरकारी और निजी क्षेत्र के हेलीकॉप्टरों को जुटाने का निर्णय लिया गया.

पोखरेल ने कहा कि संबंधित मंत्रालयों को विस्थापित लोगों के लिए भोजन और रहने की जगह का इंतज़ाम करने, सड़कों की मरम्मत करने, पीने के पानी की व्यवस्था करने, बिजली बहाल करने और दूरसंचार व्यवस्था ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं.

नेपाल ने मृतकों के परिवारों को तत्काल वित्तीय सहायता देने और बाढ़ की ज़द में आए इलाकों को आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित करने का भी निर्णय लिया है.

सरकार ने लोगों से आग्रह किया है कि अगर बचाव कार्य के लिए हेलीकॉप्टर की ज़रूरत हो तो आपातकालीन सहायता नंबर 1234 पर संपर्क करें.

हमने इस लेख का अनुवाद करने में एआई की मदद ली है, जिसे मूल रूप से अंग्रेज़ी में लिखा गया था. बीबीसी के एक पत्रकार ने प्रकाशन से पहले इस अनुवाद की जांच की. हम एआई का उपयोग कैसे कर रहे हैं, इसके बारे में और जानें.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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