You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
ट्रंप ने कहा, ईरान वार्ता आगे नहीं बढ़ी तो 'बमबारी' मुमकिन है
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ईरान के पास बातचीत के लिए टीम भेजने के अलावा कोई चारा नहीं है. साथ ही उन्होंने कहा है कि बातचीत सफल नहीं हुई तो बमबारी हो सकती है.
सीएनबीसी के साथ एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने उम्मीद जताई कि "मुझे लगता है कि हमारे बीच बहुत अच्छी डील होगी."
उन्होंने कहा कि अमेरिका बातचीत के लिए अच्छी स्थिति में है और "हम होर्मुज़ स्ट्रेट को कंट्रोल करते हैं."
वहीं इस्लामाबाद में प्रस्तावित बातचीत में ईरान शामिल होगा या नहीं, यह अभी तक साफ़ नहीं है.
ईरान की संसद के स्पीकर बग़र ग़ालिबाफ़ ने एक्स पर कहा कि बीते दो हफ़्तों से ईरान 'जंग के मैदान में नए पत्ते दिखाने की तैयारी कर रहा है.'
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान "धमकियों के साये में बातचीत स्वीकार नहीं करेंगे."
ट्रंप क्या बोले?
इंटरव्यू के दौरान जब पूछा गया कि क्या सीज़फ़ायर बढ़ाया जाएगा, तो ट्रंप ने कहा, "मैं ऐसा नहीं करना चाहता. हमारे पास इतना समय नहीं है." उन्होंने कहा कि ईरान के पास "वही रास्ता है" और उन्हें "बातचीत करनी होगी."
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान की नौसैनिक नाकाबंदी को "ज़बरदस्त सफलता" बताया है.
जब उनसे पूछा गया कि अगर बातचीत में कुछ प्रगति होती दिखती है, तो क्या वह युद्धविराम को आगे बढ़ाएंगे, तो अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "मैं ऐसा नहीं करना चाहता."
ट्रंप ने बाद में कहा, "मुझे लगता है कि मैं बमबारी करूंगा, क्योंकि यह ज़्यादा बेहतर रवैया होगा."
उन्होंने कहा कि किसी डील तक पहुंचने के लिए "ज़्यादा समय नहीं" बचा है, और अगर ईरान अमेरिका के साथ कोई डील कर लेता है, तो वह ख़ुद को "बहुत अच्छी स्थिति" में पहुंचा सकता है.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अगर ईरान डील करता है, तो वह "फिर से मज़बूत हो सकता है और एक महान देश बन सकता है."
उन्होंने कहा, "लेकिन आप जानते हैं, हम तैयार हैं. मेरा मतलब है, मिलिट्री पूरी तरह से तैयार है."
क्या ईरान बातचीत के लिए पाकिस्तान जाएगा?
ईरान की सरकारी मीडिया ने अपने टेलीग्राम पोस्ट में कहा है कि अब तक ईरान से कोई भी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद नहीं गया है.
टेलीग्राम पोस्ट में उन मीडिया रिपोर्ट्स को 'अफ़वाह' बताया जिनमें ईरानी प्रतिनिधिमंडल के जाने या जाने की तारीख़ को लेकर दावा किया गया है.
साथ ही इसमें ईरानी अधिकारियों का पुराना रुख़ दोहराया गया है. इन अधिकारियों में संसद के स्पीकर मोहम्मद बग़र ग़ालिबाफ़ भी शामिल हैं.
उन्होंने पहले कहा था, "तेहरान किसी भी बातचीत को धमकी के साये में स्वीकार नहीं करता."
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही कह दिया था कि उनका प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान जाएगा.
वहीं पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रज़ा अमीरी मुक़द्दम का बयान आया है.
रज़ा अमीरी मुक़द्दम ने एक्स पर लिखा है, "यह बात सब जानते हैं कि जिस के पास बड़ी सभ्यता है, वह धमकी से डरकर और दबाव में बातचीत नहीं करेगा. यह एक अहम इस्लामी और धार्मिक सिद्धांत है. काश अमेरिका इसे समझ पाता."
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) से जुड़ी फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी ने टेलीग्राम पर ईरान के सबसे बड़े सैन्य मुख्यालय के एक कमांडर का बयान साझा किया है.
फ़ार्स के मुताबिक़, मेजर जनरल अब्दुल्लाही ने फ़ारसी भाषा में लिखा, "आईआरजीसी ने इसराइल और अमेरिका को थका दिया है, जिससे उन्हें मजबूर होकर युद्धविराम की मांग करनी पड़ी है."
उन्होंने कहा, "सशस्त्र बल झूठ बोलने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अनुमति नहीं देंगे कि वह ज़मीनी हालात की झूठी कहानियां बनाएं, ख़ासकर होर्मुज़ स्ट्रेट के मुद्दे पर."
बीबीसी की दक्षिण एशिया संवाददाता अज़ादेह मोशीरी लिखती हैं कि ईरान के अंदर राजनीतिक तनाव है, जहां कट्टरपंथी वार्ताकारों पर दबाव डाल रहे हैं कि वे कूटनीति की बजाय टकराव का रास्ता चुनें.
ईरान और अमेरिका के बीच 8 अप्रैल को दो हफ़्ते का युद्धविराम हुआ था जिसकी मियाद बुधवार को ख़त्म हो रही है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.