ईरान ने कहा- इसराइली हमले में हुई शीर्ष सैन्य कमांडर की मौत, इसराइल को क़ीमत चुकाने की धमकी

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ईरान के मीडिया में ये दावा किया गया है कि सीरिया में एक संदिग्ध इसराइली हमले से ईरान के सीनियर कमांडर की मौत हो गई है.

ईरान की समाचार एजेंसी तसनीम ने कहा है कि सैयद रज़ी मोसावी इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कोर के एक 'अनुभवी सैन्य सलाहकार' थे.

ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने मोसावी की मौत पर दुख जताते हुए कहा कि इसराइल को निश्चित तौर पर इस अपराध के लिए क़ीमत चुकानी पड़ेगी.

रईसी ने कहा, "यह हरकत इस इलाक़े में यहूदी शासन की हताशा और कमज़ोरी बताती है, जिसकी क़ीमत उसे निश्चित रूप से चुकानी पड़ेगी."

एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि उत्तर-पूर्वी दमिश्क के सैयदा ज़ैनब इलाक़े में हुए हमले में मोसावी की मौत हुई.

इसराइली सेना पिछले कई वर्षों से सीरिया में सैन्य हमले करती आ रही है. इसराइल का कहना है कि वह ईरान के ठिकानों पर हमले करता है.

सात अक्टूबर को हमास के आक्रमण के बाद इसराइली सेना ने ये हमले और तेज़ कर दिए हैं.

ईरान की सेना सीरियाई गृह युद्ध के शुरुआती सालों से ही सीरिया में मौजूद हैं. यहां ये राष्ट्रपति बशर-अल-असद की सरकार का समर्थन करते हैं.

ईरान इराक़, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में कई शिया मिलिशिया लड़कों को प्रशिक्षण देने के लिए अपने सैकड़ों सैन्य गार्डों को 'सलाहकार' के तौर पर भेजता रहा है. लेबनान का चरमपंथी संगठन हिज़बुल्लाह भी सीरिया में ईरान के कमांडरों के साथ मिलकर काम करता रहा है.

ऐसा बताया जा रहा है कि मोसावी ईरानी सेना के कमांडर क़ासिम सुलेमानी के सहयोगी थे, जिन्हें अमेरिका ने साल 2020 में मार दिया था.

मोसावी सीरिया में ईरानी सेना के सबसे बड़े अधिकारियों में से एक थे. तसनीम एजेंसी के अनुसार, ईरान और सीरिया के बीच संबंधों को अहम कड़ी मोसावी थे.

ईरान की इसराइल को चेतावनी

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ईरान की सेना ने इस हमले के लिए इसराइल को ज़िम्मेदार ठहराया है और उसे इसकी 'क़ीमत चुकाने' की धमकी दी है.

हालांकि, अभी तक इसराइल की सेना ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है. लेकिन इसराइल यूं भी सीमा-पार हमलों पर सार्वजनिक तौर पर बात करने से बचता है.

इस महीने की शुरुआत में भी ईरान ने सीरिया में अपनी सेना के दो सदस्यों की हत्या का आरोप इसराइल पर लगाया था.

मोसावी की मौत के बाद ईरान की सेना ने सोमवार रात को बयान जारी किया.

ईरान के विदेश मंत्री हुसैन आमिर अब्दुल्लाहियां ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर किए एक ट्वीट में मोसावी को श्रद्धांजलि दी और साथ में ये भी कहा कि इसराइल के लिए अब उल्टी गिनती शुरू हो गई है.

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ऐसा कहा जा रहा है कि मोसावी का सीरिया में लंबा इतिहास रहा है और वह ईरान की कुद्स फोर्स के कमांडर क़ासिम सुलेमानी के भी क़रीबी थे.

ईरान के सरकारी टीवी चैनल ने बताया कि मोसावी पर तीन मिसाइलें दागी गई थीं. दमिश्क के सैयदा ज़ैनब में हुए इस हमले की तस्वीरें भी चैनल ने ब्रॉडकास्ट कीं. तस्वीरों में मिसाइल के टकराने के बाद उठा धुएं का गुबार दिख रहा है.

सीरिया में ईरान के राजदूत हुसैन अकबरी ने कहा कि मोसावी ईरानी दूतावास में अपने दफ़्तर में दोपहर दो बजे तक मौजूद थे. इसके बाद वह अपने घर के लिए निकले.

अकबरी के अनुसार, मोसावी के घर पर दोपहर करीब तीन बजे मिसाइल हमला हुआ और ये इतना ज़ोरदार था कि मोसावी का शव घर के बाहर बागीचे में जाकर गिरा.

इसराइल ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं दी है लेकिन ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नासिर कनानी ने हमले की निंदा करते हुए कहा कि उनके देश को इस हमले के जवाब में सही समय और सही जगह पर क़दम उठाने का हक है.

ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी (इस्लामिक रिपबल्कि न्यूज़ एजेंसी) की ओर से ये बताया गया है कि तेहरान विश्वविद्यालय के बाहर छात्रों का एक गुट आकर प्रदर्शन कर रहा है.

इन प्रदर्शनकारियों की मांग है कि राज़ी मोसावी की मौत का बदला लिया जाए.

हालांकि, ये पहली बार नहीं है, जब सीरिया में ईरान के सशस्त्र बलों का कोई सदस्य मारा गया हो.

अतीत में भी ईरानी बलों के कई सदस्यों की सीरिया में मौत हुई है, जिनमें शीर्ष कमांडर भी शामिल थे.

अमरीका ने 3 जनवरी 2020 को बगद़ाद हवाई अड्डे के पास ड्रोन से एक हवाई हमला कर ईरान के अल-क़ुद्स फ़ोर्स के प्रमुख क़ासिम सुलेमानी को मार डाला था.

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