लाइव , टीएमसी के बाग़ी विधायकों की अयोग्यता याचिका सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज की

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के बाग़ी विधायकों की अयोग्यता को चुनौती देने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया है.

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संदीप राय

  1. टीएमसी के बाग़ी विधायकों की अयोग्यता याचिका सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज की

    ममता बनर्जी
    इमेज कैप्शन, ममता बनर्जी (फ़ाइल फ़ोटो)

    पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के बाग़ी विधायकों की अयोग्यता को चुनौती देने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया है.

    लाइव लॉ के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष से बागी टीएमसी विधायकों, की अयोग्यता पर फ़ैसला लेने की मांग वाली टीएमसी की याचिका ख़ारिज कर दी.

    इन विधायकों में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी भी शामिल हैं.

    कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कलकत्ता हाई कोर्ट में जाने की सलाह दी है.

    कोर्ट ने कहा, "हम याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट में उचित याचिका दाख़िल करने की छूट देते हुए इस याचिका को ख़ारिज करते हैं. हम मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध करते हैं कि वे इस मामले को खंडपीठ के सामने रखें, जो इस पर जल्द फ़ैसला करे."

  2. कच्चे तेल की वैश्विक क़ीमतों में आई और गिरावट, अमेरिकी मिडटर्म के नतीजों का असर, पीटर हास्किंस, बिज़नेस संवाददाता, सिंगापुर

    पेट्रोल

    वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमतों में गिरावट जारी है. कारोबारियों को उम्मीद है कि अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों के बाद ईरान के साथ युद्ध खत्म हो सकता है या तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं.

    गुरुवार दोपहर एशियाई बाजार में ब्रेंट क्रूड की क़ीमत 0.9 फ़ीसदी गिरकर 93.74 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई.

    वहीं, अमेरिकी बाज़ार में कारोबार करने वाला कच्चा तेल क़रीब 1.5 फ़ीसदी गिरकर 86.83 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया.

    इससे पहले बुधवार को कच्चे तेल की क़ीमतों में 8 फ़ीसदी से ज़्यादा की गिरावट दर्ज की गई थी.

    अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के लिए ईरान युद्ध के कारण ईंधन की क़ीमतों में हुई बढ़ोतरी को ज़िम्मेदार ठहराया था.

    इससे पहले कच्चे तेल की क़ीमतें दो महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई थीं.

  3. दिल्ली के भीड़ भाड़ वाले चावड़ी बाज़ार में तीन मंज़िला इमारत गिरी, दो लोगों की मौत

    चावड़ी बाज़ार
    इमेज कैप्शन, चावड़ी बाज़ार में तीन मंज़िला इमारत गिरी

    पुरानी दिल्ली के चावड़ी बाज़ार में गुरुवार सुबह एक निर्माणाधीन तीन मंज़िला इमारत ढह गई, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, यह घटना सुबह करीब 9:50 बजे चावड़ी बाज़ार मेट्रो स्टेशन के पास गली सितारा में हुई.

    अधिकारियों ने पीटीआई को बताया कि कुछ लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है.

    अधिकारियों ने बताया कि राहत और बचाव कार्य के लिए दमकल की कम से कम छह गाड़ियां मौके पर भेजी गई हैं. इनमें पानी के टैंकर और बचाव वाहन भी शामिल हैं.

    वरिष्ठ अधिकारी मौके पर रहकर बचाव अभियान की निगरानी कर रहे हैं.

    समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, एनडीआरएफ़ की टीम बचाव और राहत के लिए घटनास्थल पर पहुंच गई हैं.

    चावड़ी बाज़ार दिल्ली के प्रमुख बाज़ारों में से एक है जहां त्योहारों, ख़ासकर दिवाली के मौके पर ख़रीदारी के लिए काफ़ी भीड़भाड़ होती है.

  4. शरद पवार अस्पताल में भर्ती, हेल्थ अपडेट में क्या कहा गया है

    शरद पवार
    इमेज कैप्शन, शरद पवार (फ़ाइल फ़ोटो)

    राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार की तबीयत ख़राब होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

    उन्हें सांस और सीने में संक्रमण के बाद मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया.

    अस्पताल के डॉक्टर प्रतीत सामदानी ने बताया कि उनकी हालत स्थिर है और इलाज चल रहा है.

    डॉ. प्रतीत सामदानी ने कहा, "शरद पवार को सांस और सीने में संक्रमण के कारण कल ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उनकी हालत स्थिर है और उनका इलाज चल रहा है."

    शरद पवार की बेटी और पार्टी सांसद सुप्रिया सुले ने बुधवार को भर्ती होने के बारे में जानकारी दी थी.

    शरद पवार को सीने में दर्द की शिकायत के बाद पुणे के रूबी हॉल क्लिनिक में भर्ती कराया गया था. वह दो दिन तक डॉक्टरों की निगरानी में रहे और गुरुवार को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.

    इसके बाद उन्हें आगे की जांच के लिए ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया.

  5. इसराइल में सरकार बनाने को लेकर विपक्ष के नेता आइज़नकोट ने क्या कहा

    गादी आइज़नकोट
    इमेज कैप्शन, इसराइल में विपक्ष के नेता गादी आइज़नकोट ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ मिलकर काम करने का आश्वासन दिया है

    इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के प्रतिद्वंद्वी और विपक्ष के नेता गादी आइज़नकोट ने नई सरकार बनाने को लेकर एक बयान जारी किया है.

    'अमेरिका और दुनिया भर में सभी मित्रों' के नाम दिए एक संदेश में उन्होंने कहा कि इसराइल के लोगों ने 'बदलाव और मौजूदा सरकार को हटाने' के लिए मतदान किया है.

    उन्होंने एक्स पर लिखा, "हमारा लोकतंत्र मजबूत और जीवंत बना हुआ है. हम जल्द से जल्द नई सरकार बनाने के लिए इसराइली जनता की इच्छा पूरी करने की दिशा में काम कर रहे हैं. यह राष्ट्रीय आपातकाल की सरकार होगी."

    "मेरा इरादा इसराइल को नया नेतृत्व देने का है. ऐसा नेतृत्व जो सभी इसराइलियों के हित में काम करे. अपने सहयोगियों के साथ मिलकर हम एक मजबूत इसराइल बनाएंगे. ऐसा इसराइल जो यहूदी और लोकतांत्रिक हो. जो उदारवादी मूल्यों और सभी के लिए समानता के प्रति प्रतिबद्ध हो और जिसे अपने भविष्य पर भरोसा हो."

    आइज़नकोट ने आगे लिखा, "इसराइल और अमेरिका के बीच संबंध सिर्फ दो सरकारों का गठबंधन नहीं है. यह दोनों देशों के लोगों के बीच साझेदारी है, जो कई पीढ़ियों से चली आ रही है. यह साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित है और इस विश्वास से मजबूत हुई है कि जब हमारे देश साथ खड़े होते हैं, तो दोनों ज्यादा सुरक्षित और समृद्ध होते हैं."

    उन्होंने आश्वासन दिया कि उनके नेतृत्व में अमेरिका के साथ साझेदारी और 'मजबूत और गहरी' होगी.

    उन्होंने कहा, "हम अपने सहयोगियों के साथ मिलकर ऐसे मध्य पूर्व के निर्माण के लिए काम करेंगे, जहां सिर्फ संघर्ष न हो, ऐसा ही नहीं, बल्कि अवसरों और सहयोग की भी मौजूदगी हो. इसराइल मध्य पूर्व में अमेरिका के सबसे भरोसेमंद और सक्षम रणनीतिक साझेदारों में से एक बना रहेगा."

    "मैं राष्ट्रपति ट्रंप और उनके प्रशासन के साथ मिलकर रचनात्मक और करीबी तरीके से काम करने को लेकर उत्साहित हूं."

    ग़ौरतलब है कि बीते महीने के अंत में इसराइल में हुए आम चुनावों में नेतन्याहू की पार्टी की अगुवाई वाले गठबंधन को बहुमत नहीं मिल पाया.

    नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिलीं हैं, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी गादी आइज़नकोट के गठबंधन को 48 सीटें मिलीं हैं.

    दो अरब पार्टियों के गठबंधनों, द जॉइंट लिस्ट और राम ने उम्मीदों के उलट प्रदर्शन करते हुए 120 सीटों वाली इसराइली संसद में रिकॉर्ड 19 सीटें जीतीं.

    इसके बाद वहां सरकार बनाने को लेकर विपक्षी दलों में बातचीत जारी है, लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकला है.

  6. मिडटर्म चुनावः रिपब्लिकन पार्टी के गढ़ में कांटे की टक्कर, सिर्फ़ 0.1% का अंतर

    मिसिसिपी
    इमेज कैप्शन, मिसिसिपी रिपब्लिकन पार्टी का गढ़ माना जाता है, लेकिन डेमोक्रेट उम्मीदवार से उसे कड़ी चुनौती मिल रही है

    अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में मिसिसिपी में सीनेट चुनाव का मुकाबला बेहद करीबी बना हुआ है. करीब 96 फीसदी वोटों की गिनती पूरी हो चुकी है.

    ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक़, डेमोक्रेटिक उम्मीदवार स्कॉट कोलोम 1,138 वोटों से आगे चल रहे हैं. यह कुल वोटों का करीब 0.1 फ़ीसदी है.

    करीब एक घंटे पहले रिपब्लिकन उम्मीदवार सिंडी हाइड-स्मिथ पर उनकी बढ़त महज 65 वोटों की थी.

    मिसिसिपी में दोनों उम्मीदवारों के बीच सिर्फ़ कुछ सौ वोटों का अंतर है. परंपरागत रूप से रिपब्लिकन पार्टी के गढ़ माने जाने वाले इस राज्य में सीनेट का मुकाबला अप्रत्याशित रूप से कड़ा हो गया है.

    डेमोक्रेट उम्मीदवार स्कॉट कॉलोम
    इमेज कैप्शन, डेमोक्रेट उम्मीदवार स्कॉट कोलोम

    स्कॉट कोलोम कौन हैं

    स्कॉट कोलोम फ़िलहाल डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी के पद पर काम कर रहे हैं. इससे पहले वह प्रॉसिक्यूटर और जज भी रह चुके हैं.

    पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कोलोम को मिसिसिपी के नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट में संघीय जज बनाने के लिए नामित किया था. हालांकि, अमेरिकी सीनेट में रिपब्लिकन सांसद सिंडी हाइड-स्मिथ ने उनके नामांकन को रोक दिया था.

    मिसिसिपी का सीनेट चुनाव शुरुआत में देशभर के लोगों का ज्यादा ध्यान नहीं खींच पाया था. लेकिन हाल के हफ्तों में कई बड़े डेमोक्रेट नेताओं ने कोलोम की जीत की संभावना को देखते हुए उनके समर्थन में प्रचार किया.

    इनमें पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस और जॉर्जिया के सीनेटर राफेल वॉर्नॉक शामिल हैं.

    हाइड-स्मिथ ने जब मिसिसिपी के लोगों की महंगे बीफ को लेकर नाराजगी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे प्रोटीन के किसी दूसरे विकल्प को चुन सकते हैं, तो कोलोम ने इस बयान को अपने चुनाव प्रचार का मुद्दा बना लिया. उन्होंने एक टीवी विज्ञापन जारी कर लोगों से कहा, "दूसरा सीनेटर चुनिए." इस विज्ञापन की चर्चा देशभर में हुई.

    अगर कोलोम जीतते हैं, तो करीब 40 साल में अमेरिकी सीनेट के लिए चुने जाने वाले मिसिसिपी के पहले डेमोक्रेट होंगे. साथ ही, रिकंस्ट्रक्शन काल के बाद राज्य के पहले अश्वेत सीनेटर भी बनेंगे.

    कोलोम मिसिसिपी में सातवीं पीढ़ी के निवासी हैं और दो बच्चों के पिता हैं.

  7. डेमोक्रेट्स की जीत के बाद कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर से नीचे आए, शेयर बाज़ार में उछाल

    पेट्रोल
    इमेज कैप्शन, अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है

    अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की हार और डेमोक्रेट्स की जीत के बाद तेल की क़ीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे गिर गईं जबकि शेयर बाज़ार में उछाल देखने को मिला.

    बुधवार दोपहर को तेल की क़ीमतों का वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 8 प्रतिशत से अधिक गिरकर लगभग 95 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जो दो महीनों में इसका सबसे निचला स्तर है.

    यह गिरावट तब आई जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा था कि ‘ईरान के साथ युद्ध के कारण रिपब्लिकन चुनाव हार गए.’

    वेंस की टिप्पणियों के कारण निवेशकों ने मध्य पूर्व में संघर्ष बढ़ने के जोखिम का पुनर्मूल्यांकन किया.

    ऐसा लगता है कि बाज़ारों ने वेंस की 'युद्ध ख़त्म करने', 'जीवन यापन की लागत पर ध्यान केंद्रित' करने और इसराइल के साथ 'अमेरिका के संबंधों की समीक्षा' करने की अपील का सकारात्मक संदेश दिया.

    नतीजों को मध्य पूर्व में तनाव कम करने के रूप में देखा जा रहा है.

    बुधवार को प्रमुख अमेरिकी शेयर सूचकांकों में तेज़ी देखी गई. डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 3 प्रतिशत की उछाल आई.

    एसएंडपी 500 में 1.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई और टेक्नोलॉजी शेयरों वाला नैस्डैक कंपोजिट 1.4 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ.

    भारत में भी सेंसेक्स में 1,388.43 अंकों के साथ 1.8 प्रतिशत का उछाल देखा गया. जबकि निफ़्टी में 382.15 अंकों के साथ 1.59 प्रतिशत का उछाल देखा गया.

  8. मिडटर्म चुनाव के नतीजों के बाद इसराइली राजदूत ने कहा- ईरान पर हमले का फ़ैसला अमेरिका का था

    तेल अवीव में लगा एक पोस्टर
    इमेज कैप्शन, इसराइल में प्रधानमंत्री चुनावों के दौरान तेल अवीव में लगा एक पोस्टर

    अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की ऐतिहासिक हार के बाद ईरान जंग को लेकर बहस तेज़ हो गई है.

    नतीजे सप्ष्ट होने के बाद संयुक्त राष्ट्र में इसराइल के राजदूत डैनी डैनन ने ईरान जंग के लिए अमेरिका को ज़िम्मेदार ठहराया है.

    उन्होंने कहा, "ईरान पर हमला करने का फैसला अमेरिका का था. यह हमारा फ़ैसला नहीं था."

    हालांकि, उन्होंने कहा कि इसराइल ने युद्ध का समर्थन किया था और उसे लगा था कि यह सही फ़ैसला है.

    इन चुनावों में सीनेटर के पद पर जीते डेमोक्रेट नेता अब्दुल अल सैयद को लेकर डैनन ने एक चैनल के साथ इंटरव्यू में कहा, "वह ऐसे व्यक्ति हैं जो इसराइल का विरोध करेंगे, चाहे इसराइल में कुछ भी हो रहा हो. यहां तक कि ग़ज़ा में युद्धविराम होने के बावजूद भी उनका रुख़ नहीं बदलेगा. वह यहूदी-विरोधी हैं, इसलिए उनके साथ काम करना काफ़ी मुश्किल होगा."

    उन्होंने आगे कहा, "मेरा मानना है कि डेमोक्रेटिक पार्टी समझती है कि उसे चरमपंथी रुख़ अपनाने के बजाय मध्यमार्ग से नेतृत्व करना होगा."

    बुधवार को आए नतीजों में डेमोक्रेटिक पार्टी का सीनेट और हाउस ऑफ़ रिप्रेजे़ेंटेटिव में बहुमत हो गया है.

  9. मोहसेन रेज़ाई बोले, ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट से लेकर वॉशिंगटन तक ट्रंप को शिकस्त दी

    तेहरान में प्रदर्शन
    इमेज कैप्शन, चार नवंबर को तेहरान में 1979 के ईरान बंधक संकट की बरसी पर पूर्व अमेरिकी दूतावास के बाहर आयोजित रैली के दौरान अमेरिका विरोधी पोस्टर और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह मोजतबा ख़ामेनेई की तस्वीर लिए प्रदर्शनकारी

    ईरान की शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेज़ाई ने अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजों पर पहली प्रतिक्रिया दी है.

    उन्होंने दावा किया कि ईरान ने युद्ध के मैदान, होर्मुज़ स्ट्रेट और वॉशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को शिकस्त दी है.

    बीबीसी पर्शियन के अनुसार, रेज़ाई ने कहा, "ईरानी राष्ट्र युद्ध के मैदान में ट्रंप को नाकाम करने में सफल रहा. होर्मुज़ जलडमरूमध्य में उन्हें रणनीतिक हार का सामना करना पड़ा और वॉशिंगटन में भी उन्हें राजनीतिक शिकस्त मिली. हालांकि, इस युद्ध की कीमत अमेरिकी जनता को चुकानी पड़ रही है."

    अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद ईरान युद्ध को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के पीछे ईरान युद्ध को एक प्रमुख वजह बताया था. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बाद में इस बात को स्वीकार किया था.

    इन बयानों के बाद अमेरिका में राजनीतिक बहस तेज हो गई है. वहीं, ईरान के अधिकारियों ने डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत और कांग्रेस में उसकी बढ़ती राजनीतिक ताकत का स्वागत किया है.

    उधर रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद तेहरान में लोगों ने प्रदर्शन किया.

  10. जेडी वेंस के बयान पर बोले रो खन्ना- सिर्फ़ ईरान जंग नहीं था रिपब्लिकन की हार का कारण

    रो खन्ना और जेडी वेंस
    इमेज कैप्शन, रो खन्ना और जेडी वेंस (फ़ाइल फ़ोटो)

    अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के नतीजे पर डेमोक्रेट नेता रो खन्ना ने अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रिपब्लिकन की हार का कारण केवल ईरान जंग ही नहीं था.

    उन्होंने जेडी वेंस के बयान से सहमति जताते हुए एक्स पर लिखा, “मैं इस बात से सहमत हूं कि रिपब्लिकन पार्टी की हार की वजह ईरान जंग है. मैं इसमें एपस्टीन मामले पर पर्दा डालने से उजागर हुए भ्रष्टाचार को भी एक वजह मानूंगा.”

    इसी पोस्ट में उन्होंने तीन सुझाव दिए, पहला, ऐसे अस्थायी सरकारी फ़ंडिंग प्रस्ताव का समर्थन करें, जिसमें ईरान में अमेरिकी सेना की किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए फंड देने पर रोक हो. वियतनाम युद्ध की तरह ईरान जंग भी ख़त्म करें. दूसरा, इसराइल को दी जाने वाली सभी सहायता पूरी तरह बंद करने का समर्थन करें.”

    उनका तीसरा सुझाव है कि ‘राज्य के अटॉर्नी जनरल को उन लोगों के ख़िलाफ़ मुकदमा चलाने का अधिकार दिया जाए जिन्होंने नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण किया और उनकी तस्करी की.’

    उन्होंने जेडी वेंस के पोस्ट को साझा करते हुए पूछा, “क्या अब आप वास्तव में इन तीनों में से किसी भी प्रस्ताव पर अमल करेंगे?”

    जेडी वेंस ने चुनाव के परिणामों का विश्लेषण करते हुए एक लंबा पोस्ट किया और ट्रंप से दूर हुए वोटरों को वापस लाने के लिए चार सुझाव दिए.

    उन्होंने लिखा, ‘पहला, जंग ख़त्म हो, दूसरा, महंगाई और जीने की लागत पर ध्यान दिया जाए, तीसरा, अमेरिका फ़र्स्ट की नीति अपनाई जाए और चौथा, इसराइल के साथ अपने संबंधों में बदलाव किया जाए.’

  11. मिडटर्म चुनावों के तुरंत बाद अमेरिका ने इन भारतीय कंपनियों और कारोबारियों पर लगाया बैन

    अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और डोनाल्ड ट्रंप
    इमेज कैप्शन, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और डोनाल्ड ट्रंप (फ़ाइल फ़ोटो)

    मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की बड़ी हार के बाद बुधवार को अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने भारत और तुर्की की कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं.

    मंत्रालय ने चेतावनी दी कि वह ईरानी शासन का समर्थन करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था के ख़िलाफ़ कार्रवाई जारी रखेगा.

    ये प्रतिबंध ट्रंप प्रशासन के 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' का हिस्सा हैं. इस अभियान का मक़सद ईरान को तेल बेचकर पैसे जुटाने से रोकना है.

    वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बुधवार को वित्त मंत्रालय के फ़ैसले को साझा करते हुए एक्स पर लिखा, "जैसा कि हमने कई बार कहा है, 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के तहत या तो आप हमारे साथ हैं या हमारे ख़िलाफ़ हैं. हमें पता है कि आप कहां हैं. ईरानी शासन का समर्थन जारी रखने वालों के ख़िलाफ़ हम बैन लगाएंगे, चाहे वे जमीन, समुद्र या हवाई मार्ग से ऐसा कर रहे हों."

    मंत्रालय के फ़ैसले में कहा गया है, “आज 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के तहत अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने भारत स्थित सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद के बड़े आपराधिक नेटवर्क को निशाना बनाया. यह नेटवर्क ईरान के शैडो फ्लीट को मदद पहुंचा रहा था.”

    प्रतिबंधों की लिस्ट में अश्वनी कुमार धीमान (चंडीगढ़) और इश्विंदर सिंह (चंडीगढ़) का नाम है.

    इसके अलावा एलेक्सार्या मीडिया एंड एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड, आर्यावर्त मैरीटाइम एंड एजुकेशनल ट्रस्ट, एलेक्सार्या फिनसर्व प्राइवेट लिमिटेड, आर्यावर्त शिप मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड (चंडीगढ़) इस्वातिनी मैरीटाइम अफेयर्स एंड इंटरनेशनल शिप रजिस्ट्री प्राइवेट लिमिटेड (सिंगापुर), फ्यूगो ग्राउंड सर्विसेज इंक. (तुर्की), ओशेनिक टेक्नोलॉजीज इंडिया (चंडीगढ़), पॉलिनेशिया मैरीटाइम प्राइवेट लिमिटेड (चंडीगढ़), प्रिसेप्ट ट्रेंड्स प्राइवेट लिमिटेड (चंडीगढ़) और विहारा बोटिंग प्राइवेट लिमिटेड (केरल) कंपनियों पर बैन लगाया गया है.

    “इस नेटवर्क की योजनाओं के तहत प्रतिबंधित जहाज़ों को फ़र्ज़ी झंडे और फ़र्ज़ी प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए गए. इन जहाज़ों का इस्तेमाल ईरानी पेट्रोलियम के परिवहन में किया जा रहा था. इनमें वे जहाज़ भी शामिल थे, जो ईरानी सेना और उसके सहयोगी संगठनों की ओर से काम कर रहे थे.”

    ग़ौरतल है कि मंगलवार को हुए मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की ऐतिहासिक हार हुई है और दोनों सदनों में उसका बहुमत नहीं रहा. अबतक आए नतीजों के मुताबिक़, हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव और सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत हो गया है.

  12. अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में मिली बड़ी हार के बाद ट्रंप क्या बोले

    डोनाल्ड ट्रंप
    इमेज कैप्शन, डोनाल्ड ट्रंप

    उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की ओर से अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की करारी हार के लिए ईरान जंग को वजह बताने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रतिक्रिया दी है.

    ईरान जंग को हार की वजह के सवाल पर ट्रंप ने कहा, "मेरा मानना है कि यह बात काफ़ी हद तक सही है, क्योंकि इसकी वजह से कुछ समय के लिए पेट्रोल की क़ीमतें थोड़ी बढ़ गई थीं. लेकिन इसके बावजूद, अगर मुझे दोबारा ऐसा करना पड़े, तो मैं फिर करूंगा. क्योंकि लंबे समय के लिहाज से यही एकमात्र रास्ता है.”

    “आप ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दे सकते. आपके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है. मुझे लगा था कि तेल की क़ीमतें इससे कहीं ज़्यादा बढ़ेंगी और मैंने इसी आधार पर यह फैसला लिया था. आपके पास कोई विकल्प नहीं है. आपको यह करना ही होगा.”

    “आप ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दे सकते. वरना आज आप जो कुछ भी यहां देख रहे हैं, हो सकता है कि एक दिन उसका अस्तित्व ही न रहे."

    नई राजनीतिक स्थिति को लेकर उन्होंने कहा, "मैं डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करूंगा, जब तक वे बाधा डालने की कोशिश नहीं करते. लेकिन हमारे पास वीटो की ताक़त है. हालांकि, उन्होंने पहले ही फ़ोन किया है और वे कुछ मुद्दों पर बात करना चाहते हैं."

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