शुभेंदु सरकार ने ममता बनर्जी के कार्यकाल हुए कथित भ्रष्टाचार की जांच के लिए बनाया आयोग, प्रभाकर मणि तिवारी, कोलकाता से बीबीसी हिंदी के लिए

इमेज स्रोत, ANI
पश्चिम बंगाल सरकार ने ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल में हुए कथित भ्रष्टाचार की जांच के लिए एक आयोग का गठन किया है.
इसकी अध्यक्षता कलकत्ता हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज विश्वजीत बसु करेंगे.
राज्य सचिवालय की ओर से बीती 10 जुलाई को जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि आयोग साल 2011 से इस साल मई तक शिक्षा, खाद्य और आपूर्ति, राहत और आपदा प्रबंधन, नगर पालिका और पंचायत के अधिकार वाले क्षेत्र, आवास और मत्स्य पालन के कामकाज में 'भ्रष्टाचार के आरोपों' की जांच करेगा.
गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि आयोग रिश्वखोरी, अंफान तूफ़ान के राहत में भ्रष्टाचार, 100 दिनों के रोजगार योजना में गड़बड़ियों, सत्ता के दुरुपयोग, मिड डे मील में गड़बड़ी और सरकारी नौकरियों में नियुक्तियों में भ्रष्टाचार समेत विभिन्न क्षेत्रों में लगने वालेतमाम आरोपों की जांच करेगा.
इसके अलावा गैरक़ानूनी तरीक़े से की जाने वाली गिरफ़्तारियों, झूठे मामलों और अवैध निर्माण में सरकारी भूमिका की भी जांच की जाएगी.
सहायक पुलिस महानिदेशक स्तर के आईपीएस अधिकारी के के जयरामन आयोग के सदस्य सचिव होंगे.
उनके अलावा आईएएस और राज्य प्रशासनिक सेवा के एक-एक अधिकारी भी आयोग में शामिल रहेंगे.
एक अधिकारी बताते हैं कि आयोग किसी मामले की जांच के दौरान किसी व्यक्ति को बयान के लिए बुला सकता है. वह पुलिस से एफ़आईआर की भी सिफ़ारिश कर सकता है.
लेकिन भ्रष्टाचार के जिन मामलों की जांच केंद्रीय एजेंसियां कर रही हैं, उनकी जांच आयोग नहीं कर सकेगा. आयोग समय-समय पर सरकार को रिपोर्ट सौंपेगा.
विधानसभा चुनाव में जीत के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा था कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति के साथ आगे बढ़ेगी. उन्होंने विधानसभा में भी यह बात दोहराई थी.



























