लाइव, नेपाल ने लिपुलेख के रास्ते मानसरोवर यात्रा पर जताई आपत्ति, भारत ने दिया ये जवाब

नेपाल के विदेश मंत्रालय की टिप्पणियों के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत का रुख स्पष्ट किया है.

सारांश

  • पश्चिम बंगाल समेत देश के चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में हुए चुनाव की आज हो रही है मतगणना
  • पश्चिम बंगाल में बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के बीच सीधे मुक़ाबले की उम्मीद
  • असम में ज़्यादातर एग्ज़िट पोल ने बीजेपी की जीत के दिए हैं संकेत
  • तमिलनाडु में स्टालिन के चुनावी प्रदर्शन पर लोगों की नज़र
  • केरल में यूडीएफ़ और एलडीएफ़ के बीच अहम मुक़ाबला
  • पुदुचेरी में एग्ज़िट पोल ने बीजेपी गठबंधन की जीत का लगाया अनुमान

लाइव कवरेज

रौनक भैड़ा

  1. नेपाल ने लिपुलेख के रास्ते मानसरोवर यात्रा पर जताई आपत्ति, भारत ने दिया ये जवाब

    रणधीर जायसवाल

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    इमेज कैप्शन, भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल

    नेपाल के विदेश मंत्रालय की टिप्पणियों के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत का रुख स्पष्ट किया है.

    रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत का रुख इस मामले में हमेशा से साफ़ और एक जैसा रहा है, भारत सभी मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीति के ज़रिए करने के लिए तैयार है.

    दरअसल, नेपाल के विदेश मंत्रालय ने रविवार को बयान जारी कर कहा, "नेपाल सरकार लगातार भारत सरकार से आग्रह करती रही है कि वह इस क्षेत्र में सड़क निर्माण या विस्तार, सीमा व्यापार और यातायात जैसी कोई भी गतिविधि न करे."

    इस पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "इस मामले में भारत का रुख हमेशा साफ़ और स्थिर रहा है. लिपुलेख दर्रा 1954 से कैलाश मानसरोवर यात्रा का पुराना रास्ता रहा है और इस रास्ते से यात्रा कई दशकों से होती आ रही है. यह कोई नया मामला नहीं है."

    "जहां तक सीमा से जुड़े दावों की बात है, भारत ने हमेशा कहा है कि ऐसे दावे सही नहीं हैं और इतिहास या सबूतों पर आधारित नहीं हैं. इस तरह से एकतरफ़ा और कृत्रिम तरीके से सीमा के दावे बढ़ाना स्वीकार्य नहीं है."

    भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा, "भारत नेपाल के साथ सभी मुद्दों पर सकारात्मक बातचीत के लिए तैयार है, जिसमें सीमा से जुड़े सहमति वाले बाकी मुद्दों को बातचीत और कूटनीति से हल करना भी शामिल है."

    कैलाश जा रहे तीर्थयात्री

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    इमेज कैप्शन, कैलाश जा रहे तीर्थयात्री (फ़ाइल फ़ोटो)

    क्या है विवाद

    नेपाल दावा करता रहा है कि महाकाली नदी के पूर्वी हिस्से में लिम्पियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख सहित सभी क्षेत्र 1816 की सुगौली संधि के आधार पर नेपाल के क्षेत्र का हिस्सा हैं.

    लिपुलेख नेपाल के उत्तर-पश्चिम में स्थित है. यह भारत, नेपाल और चीन की सीमा से जुड़ा है. भारत इस इलाक़े को उत्तराखंड का हिस्सा मानता है.

    नवंबर 2019 में भारत ने जम्मू-कश्मीर का विभाजन कर दो केंद्र शासित प्रदेश बनाए और इसके साथ ही नया नक्शा जारी किया. इस नक्शे में ये इलाक़े शामिल थे.

    नेपाल ने इस पर तीखी आपत्ति जताई और कहा कि भारत अपना नक्शा बदले क्योंकि कालापानी उसका इलाक़ा है. इसके पांच महीने बाद, मई 2020 में लिपुलेख को लेकर दोनों देशों के बीच फिर तनाव बढ़ गया.

    इसके बाद 18 जून 2020 को नेपाल ने संविधान में संशोधन कर देश के राजनीतिक नक्शे को अपडेट किया. संशोधन के बाद नेपाल के मानचित्र में तीन रणनीतिक रूप से अहम क्षेत्र- लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा दिखाए गए.

  2. पांच विधानसभा के चुनावी नतीजों के शुरुआती रुझान जल्द, पश्चिम बंगाल में कैसी है तैयारी

    कोलकाता में चुनावी तैयारी में लगीं मतदानकर्मी

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    इमेज कैप्शन, कोलकाता में चुनावी तैयारी में लगीं मतदानकर्मी (फ़ाइल फ़ोटो)

    पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुदुचेरी विधानसभा के चुनावी नतीजों के रुझान अब से कुछ ही देर में आने शुरू हो जाएंगे.

    पश्चिम बंगाल में वोटों की गिनती के लिए किए गए इंतज़ामों के बारे में राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने बताया, "293 सीटों के लिए वोटों की गिनती सोमवार को होगी. कुल 77 जगहों पर वोटों की गिनती होगी. इनमें 35 ज़िला मुख्यालय और 42 सबडिविज़न मुख्यालय शामिल हैं."

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, उन्होंने बताया, ''चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, ज़्यादातर केंद्र ज़िला स्तर पर होने चाहिए. राज्य भर में कुल 459 काउंटिंग हॉल हैं. वोटों की गिनती पर नज़र रखने के लिए 533 पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं.''

    पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर 23 और 29 अप्रैल को वोटिंग समाप्त हुई थी, लेकिन फ़ाल्टा सीट पर 21 मई को दोबारा वोटिंग होगी.

    इस वजह से सोमवार को पश्चिम बंगाल की 293 सीटों के परिणाम आएंगे.

  3. नमस्कार!

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