लाइव, ट्रंप ने कहा, इसराइल और लेबनान के बीच क़रीब 34 साल बाद होगी बातचीत

हालाँकि लेबनान के एक अधिकारी ने बीबीसी से कहा है कि लेबनान को पता नहीं है कि उसकी इसराइल से बातचीत कब होने वाली है.

सारांश

लाइव कवरेज

चंदन कुमार जजवाड़े

  1. ट्रंप ने कहा, इसराइल और लेबनान के बीच क़रीब 34 साल बाद होगी बातचीत

    लेबनान

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    इमेज कैप्शन, 15 अप्रैल को भी दक्षिणी लेबनान में इसराइली हमले जारी रहे

    इसराइल और लेबनान के बीच बातचीत को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राहत का अवसर बनाने की कोशिश बताया है.

    ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने लिखा, ''इसराइल और लेबनान के बीच थोड़ी राहत की गुंजाइश बनाने की कोशिश की जा रही है. दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुए काफी लंबा समय हो गया है- क़रीब 34 साल. यह बातचीत कल होगी.''

    हालाँकि लेबनान के एक अधिकारी ने बीबीसी से ट्रंप के दावों का खंडन किया है. उन्होंने कहा है कि लेबनान को कुछ नहीं पता है कि इसराइल से उसकी संभावित बातचीत कब होने वाली है.

    इससे पहले 14 अप्रैल को लेबनान और इसराइल ने क़रीब 34 साल बाद अपनी पहली कूटनीतिक बातचीत की है. इसका मक़सद इसराइल और ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह गुट के बीच चल रही लड़ाई को ख़त्म करना है.

    अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने इस बातचीत की मध्यस्थता की. उन्होंने कहा था कि हिज़्बुल्लाह के प्रभाव को ख़त्म करने का यह एक "ऐतिहासिक मौक़ा" है.

    अमेरिका ने बताया था कि दोनों पक्ष सीधी बातचीत शुरू करने पर सहमत हो गए हैं, जिसका समय और जगह बाद में तय की जाएगी.

    ट्रंप ने अपनी ताज़ा पोस्ट में इसी के बारे में जानकारी दी है.

    इसराइल और लेबनान के बीच कोई कूटनीतिक संबंध नहीं है. उनके बीच आखिरी उच्च-स्तरीय प्रत्यक्ष बातचीत साल 1993 में हुई थी.

    2 मार्च को लेबनान में इसराइली सेना के ऑपरेशन शुरू होने के बाद से अब तक दो हज़ार से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं. ये ऑपरेशन ईरान में अमेरिका और इसराइल के हमलों के शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद शुरू हुए थे.

  2. ईरान ने कहा, 'कई देशों को अब अंतरराष्ट्रीय कानून याद आ रहा है'

    ईरान

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    इमेज कैप्शन, 28 फ़रवरी को अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे. शुरुआती हमलों में ही देश के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई मारे गए थे (सांकेतिक तस्वीर)

    ईरान ने कहा है कि ईरान पर अमेरिका और इसराइल का हमला संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन था, यह जानते हुए भी कई देशों ने यह अपराध होने दिया.

    जापान में ईरानी दूतावास ने कहा है, ''कुछ देशों ने अमेरिकियों को ईरान के ख़िलाफ़ आक्रामक जंग छेड़ने के लिए अपना इलाक़ा और हवाई क्षेत्र इस्तेमाल करने दिया. यह मानना ​​मुश्किल है कि वे होने वाले हमलों से अनजान थे. वे जानते थे कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून और यूएन चार्टर का घोर उल्लंघन है, फिर भी उन्होंने इसमें मदद की.''

    ईरानी दूतावास ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ''निश्चित रूप से उस इलाक़े के देशों ने देखा कि कैसे अमेरिकी हथियार होर्मुज़ स्ट्रेट से होते हुए ईरान के ख़िलाफ़ जंग को भड़काने के लिए भेजे जा रहे थे. इस दौरान आवागमन से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कानूनों की पूरी तरह अनदेखी की गई. फिर भी वे ख़ामोश रहे.''

    दूतावास ने आगे लिखा, ''अब जब इसके बुरे नतीजे उन्हें ख़ुद भुगतने पड़ रहे हैं, तो उन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून की फिर से याद आ रही है. लेकिन अब भी वे पीड़ित के लिए न्याय नहीं मांग रहे, बल्कि अपने ख़ुद के हितों के बारे में सोच रहे हैं.''

    यह 'भेदभाव' ही असल में अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर की नींव को कमज़ोर करता है, जहाँ सिद्धांतों को तभी लागू किया जाता है, जब वे अपने लिए ठीक हों.

  3. गिरिराज सिंह ने कहा, 'महिला आरक्षण विधेयक पास नहीं करने वालों को घर में भोजन नहीं मिलेगा'

    गिरिराज सिंह

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    इमेज कैप्शन, गिरिराज सिंह ने दावा किया है कि डीलिमिटेशन से किसी राज्य को नुक़सान नहीं होगा

    डीलिमिटेशन और महिला आरक्षण विधेयक को लेकर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने विपक्ष के विरोध पर प्रतिक्रिया दी है.

    गिरिराज सिंह ने कहा, ''मुझे पूरा भरोसा है कि जब वो सदन के अंदर आएंगे, तो उनमें महिलाओं के प्रति संवेदना जगेगी. महिलाएं वर्षों से इसका इंतज़ार कर रही हैं,अब उनके सब्र की सीमा टूट रही है और उसे सब मिलकर पास करेंगे. जो इसे पास नहीं करेंगे, उसे घर में भोजन भी नहीं मिलेगा.''

    गिरिराज सिंह ने दावा किया है कि डीलिमिटेशन से किसी को नुक़सान नहीं होगा और किसी को चिंता करने की ज़रूरत नहीं है.

    मोदी सरकार ने गुरुवार को संसद में डीलिमिटेशन बिल पेश किया है. इसको लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस की संभावना जताई जा रही है.

    इस बिल में लोकसभा में सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है. साथ ही लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का भी प्रस्ताव है.

    हालांकि महिला आरक्षण का ये प्रस्ताव 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर आधारित हैं, जिसमें महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान किया गया था, लेकिन इसके लागू होने को भविष्य में होने वाली जनगणना और डीलिमिटेशन (परिसीमन प्रक्रिया) से जोड़ा गया था.

    कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि जो तीन विधेयक पेश किए जा रहे हैं और ऊपर से इन्हें महिला आरक्षण के रूप में दिखाया और प्रचारित किया जा रहा है, लेकिन इनके मूल में डीलिमिटेशन का मुद्दा है.

    केंद्र सरकार के तीन विधेयकों को कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने 'छल कपट से भरा' बताया है.

    विपक्षी दलों का आरोप है कि डीलिमिटेशन ज़्यादा जनसंख्या वाले उन राज्यों को फायदा पहुंचाने वाली है, जहां फ़िलहाल बीजेपी मजबूत है.

  4. केंद्र सरकार के तीन विधेयकों को कांग्रेस ने 'छल कपट से भरा' बताया

    मोदी खड़गे

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    इमेज कैप्शन, कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी ज़्यादा आबादी वाले राज्यों में अपने फ़ायदे के लिए डीलिमिटेशन का सहारा ले रही है (सांकेतिक तस्वीर)

    कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि लोकसभा में तीन विधेयक पेश किए जा रहे हैं और ऊपर से इन्हें महिला आरक्षण के रूप में दिखाया और प्रचारित किया जा रहा है, लेकिन इनके मूल में डीलिमिटेशन का मुद्दा है.

    जयराम रमेश ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ''डीलिमिटेशन के प्रस्तावों को लेकर देशभर से कई गंभीर चिंताएं सामने आई हैं. यह ज़्यादा जनसंख्या वाले कुछ राज्यों को फायदा पहुंचाने वाली है, जहां फ़िलहाल बीजेपी मजबूत है.''

    उनका कहना है, "इससे लोकसभा में कई राज्यों की तुलनात्मक शक्ति वास्तव में कम हो जाएगी. असम और जम्मू-कश्मीर में जिस तरह से परिसीमन किया गया है, वह दिखाता है कि मोदी-शाह की जोड़ी कितने ख़तरनाक तरीके से काम करती है.''

    जयराम रमेश ने आरोप लगाया, ''इन विधेयकों का असली मक़सद और विषय-वस्तु छल-कपट से भरी है, और इनका प्रभाव बहुत व्यापक और नुक़सान पहुंचाने वाला है. इन्हें वर्तमान स्वरूप में पूरी तरह ख़ारिज किया जाना चाहिए.''

    उन्होंने इस पोस्ट में विपक्ष की मांगों का ज़िक्र किया है, जिनमें, ''लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों में से एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएं, साथ ही अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से आने वाली महिलाओं के लिए भी आरक्षण सुनिश्चित किया जाए.''

    ''साल 2023 में भी विपक्ष का यही रुख़ था और आज भी यही है. यही असली सत्ता में भागीदारी है, जो कहीं अधिक लोकतांत्रिक है और संवैधानिक मूल्यों और सिद्धांतों के मुताबिक़ है.''

  5. ईरान युद्ध के बारे में अमेरिकी वित्त मंत्री के आरोपों पर चीन ने दिया ये जवाब

    स्कॉट बेसेंट

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    इमेज कैप्शन, अमेरिकी वित्त मंत्री ने आरोप लगाया कि ईरान युद्ध में चीन भरोसेमंद साझेदार साबित नहीं हुआ (फ़ाइल फ़ोटो)

    अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के आरोप पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने प्रतिक्रिया दी है.

    चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक़ चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से पूछा गया कि ‘क्या ऐसी ( बेसेंट की) टिप्पणियों से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की प्रस्तावित चीन यात्रा पर असर पड़ सकता है?’

    इस पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा, “चीन ने ईरान के मुद्दे पर अपना रुख़ बार-बार स्पष्ट किया है और दोनों पक्ष राष्ट्रपति ट्र्प की चीन यात्रा के बारे में लगातार बातचीत कर रहे हैं.”

    इससे पहले अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा था कि ईरान युद्ध के दौरान चीन भरोसे के लायक साझेदार नहीं था.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि मध्य-पूर्व युद्ध के दौरान चीन एक अविश्वसनीय वैश्विक साझेदार साबित हुआ है.

    उन्होंने कहा, ''उसने (चीन ने) तेल का भंडारण किया और कुछ वस्तुओं के निर्यात को सीमित कर दिया; यह ठीक वैसा ही है जैसा उसने कोविड-19 महामारी के दौरान चिकित्सा सामग्री के मामले में किया था.''

  6. डीलिमिटेशन के ख़िलाफ़ तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन ने फहराया काला झंडा

    स्टालिन

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    इमेज कैप्शन, प्रस्तावित डीलिमिटेशन विधेयक की कॉपी में आग लगाते हुए एमके स्टालिन

    डीएमके अध्यक्ष और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने काला झंडा फहराकर डीलिमिटेशन के फ़ैसले का विरोध किया है. केंद्र सरकार के इस फ़ैसले का विरोध करने के लिए उन्होंने अपने समर्थकों के साथ काले कपड़े भी पहन रखे थे.

    इस दौरान उन्होंने प्रस्तावित डीलिमिटेशन विधेयक की कॉपी में आग लगाकर भी अपना विरोध जताया.

    केंद्र सरकार ने 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है.

    इससे पहले मंगलवार को सांसदों को तीन ड्राफ़्ट बिल (मसौदा विधेयक) भेजे गए हैं, उनमें दो बड़े ऐतिहासिक बदलाव प्रस्तावित हैं- पहला, लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करना और दूसरा, संसद के निचले सदन यानी लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करना.

    स्टालिन

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    इमेज कैप्शन, स्टालिन के साथ ही उनके सहयोगियों ने भी काले कपड़े पहनकर अपना विरोध जताया

    लोक सभा सीटों की संख्या 850 करने के मामले को दक्षिण भारत के कई राज्य भेदभावपूर्ण बता रहे हैं. डीलिमिटेशन का सबसे मुखर विरोध करने वालों में डीएमके शामिल है.

    डीएमके का आरोप है कि इससे दक्षिण भारतीय राज्यों की केंद्र की राजनीति में ताक़त कम होगी.

    विपक्षी दलों का आरोप है कि इससे उत्तर भारत के राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ेगी, जहाँ बीजेपी तुलनात्मक तौर पर ज़्यादा ताक़तवर है और इससे उसके लिए केंद्र में सरकार बनाना आसान हो जाएगा.

  7. तुर्की में दो दिनों में गोलीबारी की दूसरी घटना, आठ स्टूडेंट्स समेत नौ की मौत, कैथरीन आर्मस्ट्रांग और ईयान केसी

    तुर्की

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    इमेज कैप्शन, तुर्की के एक स्कूल में बुधवार को हुई गोलीबारी में 9 लोगों की मौत हो गई है और कई अन्य घायल हुए हैं

    तुर्की के गृह मंत्री मुस्तफ़ा सिफ़्सी ने बताया है कि दक्षिणी तुर्की के एक स्कूल में हुई गोलीबारी में कम से कम आठ छात्र और एक शिक्षक मारे गए हैं.

    उन्होंने बताया है कि इस गोलीबारी में कई अन्य घायल हुए हैं.

    यह घटना कहरामनमारास इलाके के आयसर कैलिक सेकेंडरी स्कूल में हुई, जहाँ सिफ़्सी के अनुसार 13 लोग घायल भी हुए, जिनमें से छह की हालत गंभीर है.

    अधिकारियों ने बताया कि इस घटना के दौरान 14 साल का एक हमलावर भी मारा गया.

    बुधवार को हुए हमले का मकसद अभी तक पता नहीं चला है और इसकी जांच शुरू कर दी गई है. तुर्की मीडिया ने बताया कि अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि हमलावर एक छात्र था, वह दो क्लासरूम में घुसा. उसके पास पांच बंदूकें और सात मैगज़ीन थीं.

    स्थानीय गवर्नर ने आरोप लगाया कि ये हथियार उस छात्र के पिता के थे, जो पहले पुलिस अधिकारी रह चुके हैं.

    इससे एक दिन पहले ही देश के दक्षिणी हिस्से में ही एक अन्य हाई स्कूल में एक पूर्व छात्र ने गोलीबारी की थी, जिससे 16 लोग घायल हो गए थे, और उसके बाद उसने ख़ुद को भी गोली मार ली थी.

  8. होर्मुज़ स्ट्रेट के बारे में अपने फ़ैसले पर ट्रंप ने कहा 'चीन बहुत खुश है'

    ट्रंप

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    इमेज कैप्शन, ट्रंप ने कहा है कि उनके फ़ैसले से चीन और दुनिया के देश खुश होंगे (फ़ाइल फ़ोटो)

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वो होर्मुज़ स्ट्रेट को हमेशा के लिए खोल रहे हैं.

    ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने लिखा, "चीन इस बात से बहुत खुश है कि मैं होर्मुज़ स्ट्रेट को हमेशा के लिए खोल रहा हूँ. मैं यह उनके लिए भी कर रहा हूँ और दुनिया भर के लिए भी. ऐसी स्थिति फिर कभी नहीं आएगी."

    ट्रंप ने दावा किया, "वे (चीन) ईरान को हथियार न भेजने पर सहमत हो गए हैं."

    डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की जल्द ही मुलाक़ात होने वाली है. ट्रंप ने कहा है कि चीनी राष्ट्रपति उनके इस फ़ैसले की वजह से गले लगाकर उनका धन्यवाद करेंगे.

    इससे पहले चीन ने कहा था कि होर्मुज़ स्ट्रेट दुनिया का बेहद अहम व्यापारिक मार्ग है और उसकी नाकाबंदी करना सही फ़ैसला नहीं है.

    12 अप्रैल को ट्रुथ सोशल पर डोनाल्ड ट्रंप ने एलान किया था कि अमेरिकी नौसेना होर्मुज़ स्ट्रेट में आने-जाने की कोशिश करने वाले हर जहाज़ की नाकाबंदी शुरू करेगी. उन्होंने यह भी जोड़ा था कि इसमें दूसरे देश भी शामिल होंगे.

  9. अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने शांति वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका के बारे में ये कहा

    कैरोलिन लेविट

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    अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई पहले दौर की नाकाम बातचीत पर व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने प्रतिक्रिया दी है.

    उन्होंने कहा, "पाकिस्तानी मध्यस्थों ने ज़बरदस्त भूमिका निभाई है. हम उनकी दोस्ती और इस समझौते को अंतिम रूप देने के उनके प्रयासों की सचमुच सराहना करते हैं."

    लेविट ने कहा, "राष्ट्रपति का मानना ​​है कि पाकिस्तानियों के माध्यम से इस संवाद को सुचारू रूप से जारी रखना महत्वपूर्ण है."

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान में युद्ध खत्म कराने के लिए बातचीत इस हफ़्ते फिर शुरू हो सकती है.

    पिछले शनिवार को इस्लामाबाद में ये बातचीत बिना किसी नतीजे के ख़त्म हो गई थी, जिसके बाद अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी थी.

    खाड़ी क्षेत्र, पाकिस्तान और ईरान के अधिकारियों ने भी कहा है कि अमेरिका और ईरान की टीमें इस हफ़्ते के आख़िर में फिर पाकिस्तान लौट सकती हैं, हालांकि अभी तक कोई तारीख़ तय नहीं हुई है. न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स ने यह जानकारी दी है.