तृणमूल
कांग्रेस सांसद और पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी की करीबी समझी जाने वाली सांसद
काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफ़ा दे दिया है.
उन्होंने
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को भेजे पत्र में इस्तीफे की जानकारी दी
है. हालांकि उन्होंने पार्टी में बने रहने की बात कही है. तृणमूल कांग्रेस के एक
वरिष्ठ नेता ने इसकी पुष्टि की है.
काकोली
अखिल भारतीय तृणमूल महिला कांग्रेस और बारासात ज़िला तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष रही
हैं. वो साल 2009 से
लगातार चुनाव जीतती रही हैं.
विधानसभा
चुनाव के नतीजों के बाद ममता बनर्जी ने उनको हटा कर सांसद कल्याण बनर्जी को मुख्य
सचेतक नियुक्त किया था. उसके बाद से ही वो नाराज चल रही थीं.
तब सोशल मीडिया पर अपनी एक पोस्ट में काकोली ने
लिखा था कि 'उनको चार दशकों की निष्ठा का पुरस्कार मिला है.'
उन्होंने
सुब्रत बख्शी को भेजे अपने पत्र में किसी का नाम लिए बिना एक पुरुष सांसद के कथित
अभद्र व्यवहार और पूर्व सरकार के कामकाज पर भी सवाल उठाए हैं.
उन्होंने कहा है कि
वो पार्टी के आम सदस्य की तरह लोगों के हित में काम करती रहेंगी.
काकोली के एक करीबी नेता ने बताया, "सांसद ने अपने पत्र में आरजी कर की घटना से लेकर राशन और शिक्षा घोटाले तक का जिक्र करते हुए इनसे निपटने के सरकार के तौर-तरीकों पर सवाल उठाया है. उन्होंने पार्टी के एक सांसद और कुछ नेताओं के आचरण के साथ ही आई-पैक की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं."
उस नेता के मुताबिक, सांसद ने पत्र में लिखा है कि शीर्ष नेताओं की ओर से सहयोग नहीं मिलने के कारण उनके किसी पद पर रहने का कोई मतलब नहीं है.
उत्तर 24-परगना जिले की बारासात सीट से सांसद रही काकोली ने इससे पहले मंगलवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की ओर से बुलाई गई एक प्रशासनिक बैठक में भी हिस्सा लिया था.
उसके बाद उनके राजनीतिक भविष्य पर अटकलें तेज हो गई थी.
हालांकि काकोली ने पत्रकारों से कहा, "यह किसी पार्टी का कार्यक्रम नहीं बल्कि ज़िले के विकास से संबंधित बैठक थी. इलाके की सांसद होने के नाते मैंने इसमें हिस्सा लिया है."
राजनीतिक हलकों में काकोली के इस फैसले को विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में पहली बड़ी बग़ावत माना जा रहा है.