आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने विजयदशमी के संबोधन में सत्ता परिवर्तन पर क्या कहा?

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन नहीं होगा. उन्होंने व्यवस्था को ख़त्म करने की कोशिश कर रही ताक़तों पर भी निशाना साधा.
फ्रांस, अल्बानिया और बांग्लादेश में अशांति का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आंदोलनों का मक़सद समाधान तलाशना होना चाहिए.
आरएसएस प्रमुख ने कहा, "यह तूफ़ान पश्चिम से उठा है, जो व्यवस्था के हर स्वरूप के ख़िलाफ़ है."
भागवत ने भारत की विविधता और वैश्विक मंच पर देश के बढ़ते कद की सराहना की.
उन्होंने कहा, "भारत, हिंदू और आरएसएस पर लोगों का भरोसा बढ़ रहा है."
संघ के 101वें स्थापना वर्ष के मौक़े पर आरएसएस के सरसंघचालक ने कहा, "हम बँट गए और कमज़ोर हो गए, जिसके कारण हमें ग़ुलामी झेलनी पड़ी. कई महान लोगों के प्रयासों से हमने ग़ुलामी से मुक्ति पाई. हमें एक बार फिर अपने भावनात्मक संबंधों को समझना होगा."
उन्होंने कहा, "हमारा देश प्राकृतिक विविधता, धर्मों, जातियों, खानपान और अन्य कई रूपों में विविधता से भरा है. इसलिए हमें ऐसी विचारधारा की ज़रूरत है, जो इन सभी को स्वीकार करे और उनका सम्मान करे. हमारी परंपरा, हमारी सनातन परंपरा, इस विचार को स्वीकार करती है."
कार्यक्रम की शुरुआत आरएसएस प्रमुख के औपचारिक स्वागत, संगठन के संस्थापक हेडगेवार को पुष्पांजलि और गार्ड ऑफ ऑनर के साथ हुई.
यह कार्यक्रम आरएसएस के 101वें स्थापना वर्ष के अवसर पर आयोजित किया गया.
इससे पहले सोमवार को भागवत ने नागपुर के धंतोली स्थित श्री श्री सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में पूजा-अर्चना की थी.
महाष्टमी के अवसर पर उन्होंने कहा कि श्रद्धालु मां दुर्गा का आशीर्वाद मांगते हैं, क्योंकि संसार की हर गतिविधि उन्हीं की कृपा से संचालित होती है.



