कर्नाटक: सिद्धारमैया देंगे इस्तीफ़ा, डीके शिवकुमार बनेंगे मुख्यमंत्री

कर्नाटक

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, सिद्धरमैया और डीके शिवकुमार एक दूसरे को गले लगाते हुए
प्रकाशित
पढ़ने का समय: 3 मिनट

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों को पद छोड़ने के फ़ैसले की जानकारी दे दी है.

कर्नाटक में कांग्रेस के मंत्री एच.के. पाटिल ने पुष्टि की है कि डी.के. शिवकुमार कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री होंगे.

उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बताया कि इस मुद्दे पर हाईकमान स्तर पर चर्चा हुई थी और हाईकमान ने उन्हें इस्तीफ़ा देने का सुझाव दिया था, जिसे उन्होंने ख़ुशी-ख़ुशी स्वीकार कर लिया. उन्होंने यह भी कहा कि हाईकमान ने डीके शिवकुमार को अगला मुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव रखा है और उन्होंने इस पर भी सहमति जताई है.''

''उन्होंने हमसे कहा कि यह एक सर्वसम्मत फ़ैसला होगा, इसमें कोई मतभेद, असहमति या विवाद नहीं है. डी.के. शिवकुमार अगले मुख्यमंत्री होंगे. सिद्धारमैया राज्यसभा नहीं जा रहे हैं; वह आज तीन बजे राजभवन जाएंगे."

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया ने 2013 से 2018 तक पूरा पांच साल का कार्यकाल पूरा किया था और 20 मई को अपने दूसरे कार्यकाल के तीन वर्ष भी पूरे किए.

कर्नाटक के मंत्री जी. परमेश्वर ने कहा, "मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को नाश्ते पर बुलाया था. इस्तीफ़ा देने से पहले वह सभी मंत्रियों को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद देना चाहते थे. मुझे जानकारी नहीं है कि सिद्धारमैया जी को दिल्ली में कोई पद देने की पेशकश की गई है या नहीं. यह फ़ैसला हाईकमान पर निर्भर करता है."

कर्नाटक

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, सिद्धारमैया का आशीर्वाद लेते डीके शिवकुमार

सिद्धारमैया का ओबीसी मुस्लिम गठजोड़

कर्नाटक में सिद्धारमैया को ओबीसी-मुस्लिम-दलित गठजोड़ के सामाजिक समीकरण तैयार करने का श्रेय दिया जाता है.

26 मई की शाम से ही उनके भविष्य को लेकर अटकलें तेज थीं.

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
दिनभर: पूरा दिन,पूरी ख़बर (Dinbhar)

वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं.

एपिसोड

समाप्त

बताया जा रहा है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उनसे नए नेतृत्व के लिए रास्ता साफ़ करने को कहा था और सम्मानजनक विदाई के तौर पर राज्यसभा सीट का प्रस्ताव भी दिया था.

हालांकि 77 वर्षीय सिद्धारमैया उस प्रस्ताव को स्वीकार करेंगे या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है.

कर्नाटक से राज्यसभा की चार सीटों के लिए चुनाव 18 जून को होने हैं. इनमें कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है.

कर्नाटक की राजनीति में घटनाक्रम ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब राज्यपाल थावरचंद गहलोत 27 मई की देर रात निजी कारणों से इंदौर रवाना हो गए.

समाजवादी नेता सिद्धारमैया 2006 में कांग्रेस में शामिल हुए थे. उन्हें जनता दल (सेक्युलर) ने उस समय पार्टी से निकाल दिया था, जब उन्होंने ओबीसी-मुस्लिम-दलित गठजोड़ को मज़बूत करने की राजनीतिक रणनीति अपनाई.

कर्नाटक में बीजेपी सरकार बनने के दोनों दौर 2008 से 2013 और 2019 से 2023 में सिद्धारमैया विपक्ष के नेता रहे.

उनके नाम सबसे अधिक राज्य बजट पेश करने का रिकॉर्ड भी है. फ़रवरी 2026 में उन्होंने अपना 17वां बजट पेश किया था.

कर्नाटक

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, आज नाश्ते पर सिद्धारमैया अपने मंत्रियों से मिले थे

सिद्धारमैया का राजनीतिक करियर

तीन अगस्त 1947 को मैसूर के पास स्थित सिद्धारमनहुंडी गांव में जन्मे सिद्धारमैया कर्नाटक के इतिहास में केवल तीसरे ऐसे मुख्यमंत्री बने, जिन्होंने पूरा पाँच वर्ष का कार्यकाल पूरा करने के बाद दोबारा राज्य की सत्ता संभाली. भले ही दूसरा कार्यकाल लगातार नहीं था और अंततः समय से पहले ख़त्म हुआ.

उनसे पहले यह उपलब्धि केवल एस. निजलिंगप्पा और डी. देवराज उर्स को हासिल हुई थी.

सिद्धारमैया का राजनीतिक व्यक्तित्व 1980 के दशक में पूर्व मुख्यमंत्री रामकृष्ण हेगड़े के मार्गदर्शन में आकार लिया.

अपने लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने पांच मुख्यमंत्रियों रामकृष्ण हेगड़े, एस.आर. बोम्मई, एच.डी. देवेगौड़ा, जे.एच. पटेल और धरम सिंह के साथ काम किया.

उन्होंने मंत्री, दो बार उपमुख्यमंत्री, विपक्ष के नेता और जनता दल (सेक्युलर) की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष जैसे कई महत्वपूर्ण पद संभाले.

नौ बार विधायक चुने गए सिद्धारमैया की राजनीतिक यात्रा इसलिए भी अहम मानी जाती है क्योंकि उनके पीछे कोई राजनीतिक विरासत नहीं थी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.