'अरुणाचल बॉर्डर पर भारत और चीन आमने-सामने बने हुए हैं', आईटीबीपी डीजी के बयान पर सियासत गरमाई

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अरुणाचल प्रदेश सीमा पर तनाव की स्थिति को लेकर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक के बयान को लेकर कांग्रेस और विपक्ष ने केंद्र सरकार को घेरा है.
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक (डीजी) शत्रुजीत कपूर ने गुरुवार को कहा था, "पिछले कुछ दिनों में ऐसी स्थिति बनी, जब अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों पर दोनों पक्ष (भारत और चीन) आमने-सामने आ गए. यह स्थिति अब भी जारी है."
इस साल जुलाई में उत्तर-पूर्वी सीमा पर तनाव शुरू होने के बाद यह पहली बार है, जब आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि हुई है.
जुलाई के अंत से अरुणाचल प्रदेश में ऊपरी सुबनसिरी ज़िले के असाफिला और माजा इलाके में तनाव बना हुआ है.
कांग्रेस ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है, "प्रधानमंत्री और उनका पूरा तंत्र इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधे बैठा है.
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि मोदी सरकार चीन के आगे झुक गई है.
इस मामले पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी प्रतिक्रिया दी है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए भारत और चीन लगातार बातचीत कर रहे हैं.
रणधीर जायसवाल ने कहा, "जैसा कि हमने पहले भी कहा है, भारत-चीन बॉर्डर पर हालात समय-समय पर तब बिगड़ जाते हैं जब चीनी सैनिक अपने तय रास्ते से अलग गश्त (पेट्रोलिंग) करने लगते हैं. वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर बचे हुए मुद्दों को सुलझाने, गलतफ़हमियों को दूर करने और किसी भी गड़बड़ी से बचने के लिए दोनों देश लगातार बातचीत और सैन्य रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं.
मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, "दोनों पक्ष इस बात पर भी राजी हुए हैं कि बॉर्डर के सही मैनेजमेंट के लिए एलएसी की समझ को और बेहतर बनाया जाए. मैं इस बात पर भी जोर देना चाहूँगा कि दोनों देशों के आपसी रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए बॉर्डर पर शांति बनाए रखना बेहद जरूरी है."
शिवसेना यूबीटी नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि 'देश के गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री को जवाब देना चाहिए.'
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) फ़ाउंडर अभिजीत दीपके ने भी शत्रुजीत कपूर के बयान को साझा करते हुए सरकार पर तंज़ किया है.
सोशल मीडिया पर भी आईटीबीपी डीजी के बयान पर लोग प्रतिक्रिया दे रहे हैं और बॉर्डर की स्थिति पर अपनी राय दे रहे हैं.
आईटीबीपी डीजी ने क्या कहा

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आईटीबीपी के जवानों के लिए हर साल आयोजित होने वाले सम्मान समारोह 'हिमवीर सम्मान समारोह' में गुरुवार को आईटीबीपी के डीजी शत्रुजीत कपूर ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश सीमा पर जारी टकराव के दौरान आईटीबीपी के कमांडो सक्रिय रहे हैं.
उन्होंने शौर्य कमांडो टीमों के 'असाधारण काम' की सराहना की.
उन्होंने कहा, "हमारी नई गठित शौर्य कमांडो टीमों ने इसमें शानदार भूमिका निभाई. आईटीबीपी का गठन पहाड़ी इलाकों में गुरिल्ला बल के रूप में हुआ था और 2004 में हमें चीन से लगी सीमा की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी दी गई."
राजस्थान के अलवर स्थित सेंट्रल ट्रेनिंग कॉलेज (सीटीसी) में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि आईटीबीपी परंपरागत हथियारों का इस्तेमाल करती है.
ड्रोन और ड्रोन-रोधी तकनीक में निवेश करने और उसे विकसित करने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए आईटीबीपी प्रमुख ने कहा कि पारंपरिक तरीकों से चीन का मुक़ाबला करना शायद संभव न हो, क्योंकि उसने अपने हथियारों और बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण में काफ़ी निवेश किया है.
उन्होंने कहा, "अब पारंपरिक तरीकों से चीन का मुकाबला करना मुश्किल होगा, क्योंकि चीन ने अपने सुरक्षा बलों के आधुनिकीकरण में भारी निवेश किया है और वह आगे निकल गया है. लेकिन ड्रोन के ज़रिए छोटे देश बड़े देशों से लड़ सकते हैं, जैसा कि हमने रूस-यूक्रेन और ईरान-अमेरिका संघर्षों में देखा है. रूस हर महीने रोज़ाना 10,000 से 15,000 सैनिकों की कुर्बानी दे रहा है."
कपूर 31 अक्तूबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं.
कांग्रेस ने मोदी सरकार पर बोला हमला

कांग्रेस ने आईटीबीपी प्रमुख के बयान के बाद केंद्र की मोदी सरकार पर तीख़ा हमला बोला है और आरोप लगाया है. कांग्रेस ने कहा है, 'इस साल जुलाई से ही चीनी सैनिकों के साथ झड़प की खबरें आ रही हैं, लेकिन मोदी सरकार इन ख़बरों को दबाने में लगी रही.'
कांग्रेस के एक्स हैंडल पर एक पोस्ट में कहा गया है, "यहां तक कि चीन को 'लाल आंख' दिखाने की जगह नरेंद्र मोदी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हंसी ठिठोली करते नज़र आए, ब्रिक्स सम्मेलन में."
"एक तरफ चीन हमारे सैनिकों के साथ झड़प कर रहा था, दूसरी तरफ मोदी चीन के राष्ट्रपति का स्वागत कर रहे थे. ये हमारे सैनिकों के ज़ख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है. मोदी ने हर बार हमारे सैनिकों को अकेला छोड़ दिया है, देश के साथ गद्दारी की है, जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया."
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा, "जहां एक तरफ़ चीन के सामने घुटने टेकने वाले प्रधानमंत्री की ओर से लगातार रियायतें देने का सिलसिला जारी है, इसी बीच आईटीबीपी के महानिदेशक ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी पीएलए के साथ भारतीय सीमा के भीतर हालिया टकरावों में आईटीबीपी के प्रदर्शन की सराहना की है, जो बिल्कुल सही भी है. लेकिन प्रधानमंत्री और उनका पूरा तंत्र इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधे बैठा है."
जयराम ने लिखा, "ताकसिंग में टकराव के बाद पिछले महीने अरुणाचल प्रदेश के वाचा और दमाई में कोर कमांडर स्तर की बातचीत हुई. स्थानीय लोगों ने बताया है कि लद्दाख की तरह एक बार फिर गश्त के कुछ प्वाइंट हमारे हाथ से निकल गए हैं."
"चीन अरुणाचल प्रदेश के हमारे शहरों के नाम बदलता जा रहा है और 60,000 मेगावाट का एक बाँध बना रहा है, जो हमारी पारिस्थितिकी और जल सुरक्षा के लिए बड़ा ख़तरा है."
"भारत आज भी 19 जून 2020 को चीन को दी गई प्रधानमंत्री की उस कुख्यात क्लीन चिट की क़ीमत चुका रहा है. हमारे 20 बहादुर जवानों की शहादत के बाद प्रधानमंत्री ने कहा था- 'ना कोई वहाँ हमारी सीमा में घुस आया है और न ही कोई घुसा हुआ है, न ही हमारी कोई पोस्ट किसी दूसरे के कब्ज़े में है.'"
"पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे ने भी कहा था है कि लद्दाख में चीनी घुसपैठ के दौरान उन्हें केवल यही निर्देश मिला था, "जो उचित समझो वो करो." 4 जुलाई 2025 को उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने सार्वजनिक रूप से बताया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के सैन्य अभियान में चीन की भूमिका कितनी व्यापक और गहराई तक फैली हुई थी."
"लेकिन 25 अगस्त 2026 को पूर्व चीफ़ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ जनरल अनिल चौहान ने सार्वजनिक रूप से लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह के खुलासों का खंडन किया और उसके कुछ ही समय बाद आरएसएस/बीजेपी के इकोसिस्टम के एक प्रमुख थिंक टैंक की कमान संभाल ली."
"देश सवाल पूछ रहा है- सीमा पर जारी तनाव के बावजूद चीन के प्रति यह नरमी और आर्थिक मोर्चे पर बढ़ती निर्भरता आखिर किस तरह का राष्ट्रवाद है? देश को 56 इंच की छाती के खोखले दावे नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा पर स्पष्ट जवाब चाहिए."
अभिजीत दीपके का तंज़

हाल के समय में मोदी सरकार के ख़िलाफ़ आंदोलनों का चेहरा बने सीजेपी फ़ाउंडर अभिजीत दीपके ने आईटीबीपी प्रमुख के ताज़ा बयान को लेकर तंज़ किया है.
दीपके ने एक्स पर लिखा, "हां, क्योंकि जिन सुरक्षा बलों को हमारी सीमाओं की रक्षा करनी चाहिए, उन्हें नागरिकों को विरोध प्रदर्शन करने से रोकने के लिए तैनात किया जा रहा है."
"मोदी अपने ही देश के नागरिकों के ख़िलाफ़ सुरक्षा बलों का इस्तेमाल करके राष्ट्रीय सुरक्षा को जोख़िम में डाल रहे हैं. प्राथमिकता हमारी सीमाओं की सुरक्षा होनी चाहिए, न कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए दिल्ली को किले में तब्दील करना."
एक्टिविस्ट गुरमेहर कौर ने एक्स पर लिखा, "चीन की पीएलए हमसे बहुत आगे है. हम उसका मुकाबला नहीं कर पाएंगे. आईटीबीपी के महानिदेशक के इस बयान के बाद, लाल आंखें दिखाने और 56 इंच के सीने की बातें कहां रह गईं? खोखले दावों और 2020 में चीन को दी गई उस विवादित क्लीन चिट के पीछे की हक़ीक़त साफ है."
द हिंदू की एक रिपोर्ट में कहा गया है है कि जुलाई के आख़िर से भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश में ताक्सिंग के पास असाफिला इलाक़े में गतिरोध जारी है.
अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, "चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने ऊंचाई वाले इलाक़े में तंबू लगाए हैं. ये तंबू ऊपरी सुबनसिरी ज़िले के ताक्सिंग सर्कल में माजा कंपनी के ऑपरेटिंग बेस के पास, वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को लेकर भारत की धारणा के मुताबिक, उससे 6 से 7 किलोमीटर के भीतर हैं."
भारत ने 11 से 13 सितंबर तक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए शी जिनपिंग की मेज़बानी की थी और दोनों पक्षों ने तनाव कम करने की बात की थी.
अरुणाचल प्रदेशः चीन क्या कहता है?

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चीन, अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत बताता है. भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर कई बैठकें हो चुकी हैं लेकिन मुद्दा सुलझ नहीं पाया है.
दोनों देशों के बीच 3,500 किलोमीटर (2,174 मील) लंबी सीमा है. सीमा विवाद के कारण दोनों देश 1962 में युद्ध के मैदान में भी आमने-सामने खड़े हो चुके हैं, लेकिन अभी भी सीमा पर मौजूद कुछ इलाक़ों को लेकर विवाद है जो कभी-कभी तनाव की वजह बनता है.
अरुणाचल प्रदेश को समाहित करते हुए भारत की संप्रभुता को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली हुई है. अंतरराष्ट्रीय मानचित्रों में अरुणाचल को भारत का हिस्सा माना गया है. चीन, तिब्बत के साथ अरुणाचल प्रदेश पर भी दावा करता है और इसे दक्षिणी तिब्बत कहता है.
शुरू में अरुणाचल प्रदेश के उत्तरी हिस्से तवांग को लेकर चीन दावा करता था. यहां भारत का सबसे विशाल बौद्ध मंदिर है.
चीन और भारत के बीच मैकमोहन रेखा को अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा माना जाता है लेकिन चीन इसे ख़ारिज करता है. चीन का कहना है कि तिब्बत का बड़ा हिस्सा भारत के पास है.
हर बार भारत चीन की आपत्ति को ख़ारिज करता रहा है. चीन अरुणाचल प्रदेश में 90 हज़ार वर्ग किलोमीटर ज़मीन पर अपना दावा करता है जबकि भारत कहता है कि चीन ने पश्चिम में अक्साई चिन का बड़े हिस्से पर अवैध रूप से क़ब्ज़ा कर रखा है.
1950 के दशक के आख़िर में तिब्बत को अपने में मिलाने के बाद चीन ने अक्साई चिन के क़रीब 38 हज़ार वर्ग किलोमीटर इलाक़ों को अपने अधिकार में कर लिया था. ये इलाक़े लद्दाख से जुड़े थे. चीन ने यहां नेशनल हाइवे 219 बनाया जो उसके पूर्वी प्रांत शिन्जियांग को जोड़ता है. भारत इसे अवैध क़ब्ज़ा मानता है.
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